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  • devesh_upadhyay 13w

    .
    ©devesh_upadhyay

  • devesh_upadhyay 13w

    जो कभी आबो-हवा थे मेरी,
    अब उनकी हवा भी पास नहीं।

    कृपया अपनी रचनाओं में #du का उपयोग करें,
    मैं हर एक रचना को पढ़ने का प्रयास करूँगा ।
    #du #hind #hindiwriters #mirakee

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    .
    ©devesh_upadhyay

  • devesh_upadhyay 62w

    मेरे अनुभव बड़े बड़े हैं
    पर अनुभव से पेट भरता नहीं,

    सितम सहे,आँसू पिये, बर्बादी झेली,
    कंधे झुके नहीं, मेरे
    हौसले पस्त हुये नहीं, मेरे ।

    यह रचना मैं उन सभी वृद्ध जनों को समर्पित करता हूँ जो अपने स्वाभिमान और मेहनत के दम पर अपनी रोजी रोटी स्वयं कमा रहे हैं।
    #hind_pic2
    #hind
    #du

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    जिंदगी

    जिंदगी तू जीती
    पर मैं हारा नहीं।

    जिंदगी तू हँसी मुझ पर
    पर
    मैं कभी दुःख में रोया नहीं।

    ©देवेश "पगलू"

  • devesh_upadhyay 66w

    समय-रात के 3 बजे के आसपास ।
    जगह-अस्पताल की कार पार्किंग में ।
    मैं और चाचा जी कार में सो रहे हैं, छोटा चाचा ऊपर ICU के बाहर सो रहा है,पर मुझे पूरी रात नींद ही नहीं आयी ।

    मैं लगभग पिछले तीन महीनों से आप लोगों के साथ नहीं था, मेरे पिताजी को कैंसर (कर्क रोग) ने जकड़ रखा था ।
    कुछ दिन पहले उनका ऑपेरशन हुआ है और अब वो ईश्वर की कृपा से फिर सब ठीक हो जायेंगे।
    इस बीच मैंने अपने इस परिवार को अत्यंत याद किया, आशा है आप सब लोगों को मैं याद होऊँगा, आइये फिर से एक बार नई शुरुआत करते हैं �� ।
    आप सब मुझे टैग करें या #du का उपयोग करें, अब मैं अवश्य ही आप सब की रचनायें पढूंगा व अन्य पाठकों तक भी पहुँचाऊँगा।
    #du
    #hind
    @monikakapur @shriradhey_apt @feelingsbywords @laughing_soul @monika_kakodia @hindiwriters @panchdoot @asmakhan @loving_reverie @pamela_bhowmick

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    अस्पताल की रात

    मेरी निगाहें पूरे अस्पताल परिसर में *जिंदगी* को खोज रहीं थीं, कहाँ है तू ओ जिंदगी ? कहाँ !!
    क्या तू पेड़ की सर सर करती पत्तियों के बीच गुम है ?
    क्या तू मेरे आंखों के सामने तैरती हजारों यादों में समाई है?
    क्या तू किसी बोतल में बंद होके मरीज की नसों में बहेगी?
    क्या तू मेरी माँ की आँखों की चमक में चमक रही है ?
    क्या तू मेरी जिम्मेदारियों की परीक्षा बनकर आयी है ?
    जिंदगी तू जहाँ भी है,
    जल्दी से आजा और पापा की रगों में बह जा ।

    ©devesh_upadhyay

  • devesh_upadhyay 79w

    Casteism
    Looks and Colors
    Religion and iniquity,
    Rich and Poor
    These all things are the poison stores,
    But Only From the nectar of humanity
    Love will spread in the hearts of everyone.

    अब आप सब यह पूछेंगे की आखिर "इंसानियत" है क्या ?
    1. किसी भिखारी या गरीब को खाना खिलाना ?
    2. किसी आत्महत्या करते हुये इंसान को बचाना ?
    3. किसी वृद्ध या अंध को सड़क पार करवाना ?
    4. किसी मुस्लिम मजदूर का बप्पा की मूर्ति बनाना ?
    5. कभी कभार पुराने कपड़े या किताब जरूरतमंदों को दे देना ?
    6. सड़क किनारे सब्जियाँ बेचते बच्चे से सब्जियाँ खरीद लेना ?
    7. खचाखच भरी बस में खड़ी गर्भवती या जरूरतमंद को सीट देना ?
    8. आवारा पशुओं और पंछियों की सहायता करना ??
    9. किसी लड़की की आबरू को तार तार करते असामाजिक तत्वों के विरुध्द आवाज उठाना ?
    10. सीरिया के हमलों में एक बचावकर्मी का एक बच्ची को बचाने के बाद बिलख बिलख के रोना ?
    11. अपनी संतान पर अपने सपनों को नहीं थोपना ?

    क्या यही सब उदाहरण इंसानियत के प्रतीक हैं ?
    क्या इनमें से कोई भी एक उदाहरण को अंजाम देना हम सब के लिये अत्यंत कठिन है ? नहीं जी, बिल्कुल भी कठिन नहीं है,
    अब सवाल ये है कि हम सभी ऐसे उदाहरण पेश क्यूँ नहीं कर पा रहे ?

    पिछले कुछ दिन से आप सभी की "भूख" शब्द पर लिखी अद्भुत रचनायें पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, आप सब ने भिन्न भिन्न प्रकार की भूख का वर्णन किया ।

    परंतु एक तरह की भूख जो रह गयी वो है "इंसानियत की भूख" ।
    मेरी दृष्टि में यह सबसे महत्वपूर्ण और आवश्यक "भूख" है ।

    अगर हर इंसान को सबसे पहले यह सिखाया और पढ़ाया जाये की सबसे ज्यादा भूख इंसानीयत की होनी चाहिये, तो अवश्य ही यह मानव जाति सृष्टिकार की सबसे उत्तम रचना कहलाने के योग्य होगी।

    #hind_S7 #hind #du #wds #pod @monikakapur @pamela_bhowmick @loving_reverie @monika_kakodia @feelingsbywords @laughing_soul @hindiwriters @shriradhey_apt @lovenotes_from_carolyn @asmakhan

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    इंसानियत की भूख

    जात-पात,
    रंग-रूप,
    धर्म-अधर्म,
    राजा-रंक,
    ये सब हैं विष का भंडार,
    इंसानियत के अमृत से ही
    फैलेगा सब के दिलों में प्यार ।

    ©devesh_upadhyay
    कृपया अनुशीर्षक अवश्य पढें

  • devesh_upadhyay 81w

    This slow death
    Wrapped in small pieces of
    White coffin,
    It makes you dance
    While living freely
    Between your fingers .

    This cigarette is as costly as bread and butter of a poor. Please Stop Smoking and Tell people about the dangerous effects of it. Plant More Trees.

    ये धुंआ उगलने वाली जहरीली भट्टी है जनाब
    समाज और परिवार की हरियाली को तबाह करने वाली ।

    यह रचना मैं @hindii द्वारा दिये गये चित्र पर लिख रहा हूँ ।

    #du #wds #hind #hind_pic1
    @monikakapur @laughing_soul @pamela_bhowmick @panchdoot @lovenotes_from_carolyn @hindilekhan @monika_kakodia @hindiwriters @carolyns_lovenotes_and_reposts

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    मौत
    Death


    सफेद कफन के छोटे टुकड़ों
    में लिपटी ये मौत,
    तेरी उंगलियों के बीच
    बेख़ौफ़ रहकर
    तुझे ही नचाती है ।

    यह सिगरेट है साहब
    उतने की ही आती है
    जितने की गरीब की रोटी ।
    #du
    ©devesh_upadhyay

  • devesh_upadhyay 82w

    यह मेरी 100वीं रचना है,अब तक का यह सफर बहुत शानदार रहा,
    आशा है भविष्य में भी आप सब का स्नेह बना रहेगा ।
    साथ ही मुझे यह बताते हुये अत्यंत हर्ष है कि #du अब 8100+ रचनाओं के साथ "d" से शुरू होने वाला शीर्ष हैशटैग बन गया है ।

    इस रचना के माध्यम से
    १. एक सैनिक भारत माँ से
    २. एक आशिक़ अपनी दिलरूबा से
    ३. एक बेटा अपनी जननी से
    यह बतलाना चाह रहें हैं कि उनसे बिछड़ने के बाद वो सुखी नहीं रह सकते, यह विरह अब जान ले के ही मानेगा ।

    यह रचना मैं @hindii द्वारा दिये गये शब्द " गुलाम " व @writedilse द्वारा दिये गये चित्र को समाहित करके, आप सब तक पहुंचाना चाहता हूँ।

    #hind #hind_s5 #wds #wds_pic1 #du . @monikakapur @feelingsbywords @hindiwriters @pamela_bhowmick @monika_kakodia @tangerine @panchdoot @prashantlm

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    गुलाम (Slave)

    जब तलक हम साथ थे,
    मेरी परछाईं तेरे आँचल में दुबकी रहती थी ।
    अब जब नहीं हो तुम,
    बस चंद ख्वाईश दिल में लिये फिरता हूँ,

    १. क्या मेरे मरने पर तेरा आँचल
    दो पल के लिये कफन बन सकेगा ???

    २. क्या अब भी गुलाम कर के रखोगी
    मेरी रूह को अपने मिथ्या मोह की जेल में ??

    ३. क्या तेरी भूख,
    मेरे मुंह के निवाले से भर जायेगी ??

    ©devesh_upadhyay

  • devesh_upadhyay 83w

    I wish I could be like
    The freedom of fields of my village !!
    But
    I fear that what if your arms
    could only be like a closed window of a house in your city.

    These few lines are dedicated to the beauty of rural areas.We all need to understand that in the race of development, we have to include villages at first priority otherwise results will be worse.

    #du #hind #wds #hindilekhan #writersnetwork
    @monikakapur @feelingsbywords @asmakhan @monika_kakodia @pamela_bhowmick @laughing_soul @carolyns_lovenotes_and_reposts

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    आजादी Freedom

    मैं बन तो जाऊं गांव के
    खेतों की खुली आज़ादी सा !!
    पर
    डर है तेरी ये बाँहें,
    शहर के घर की बंद खिड़की न बन जायें ।

    ©devesh_upadhyay
    You can collaborate with this.

  • devesh_upadhyay 84w

    यह रचना मैंने स्त्री के चार स्वरूपों को समर्पित की है ।
    इस रचना के माध्यम से
    १. एक सैनिक भारत मां से
    २. एक पुत्र अपनी मां से
    ३. एक पति अपनी पत्नी से
    ४. एक भाई अपनी बहन से
    अपने दिल की भावनाएं व्यक्त करना चाहता है ।

    इस रचना में मैंने श्रृंगार, करुण, वात्सल्य, शांत, और वीर रस को समाहित करने की कोशिश की है,यह कोशिश कितनी सार्थक रही, कृपया अवश्य ही बताएं ।
    #du #hind #wds #hks #hindiwriters

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    तुम You

  • devesh_upadhyay 86w

    *You people who sleep on Luxurious Beds
    Please don't blabber about my helplessness

    My Body has become Like a begger's saucer,
    The Soul Is lost from it like New Shining Notes,
    And only wounds are left like few old coins*

    I have tried to write in a simple way.
    The FORCED PROSTITUTION is highly related to social welfare and growth of society.
    Please give your opinion about how we can stop this.

    #hind #du

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    वैश्या Prostitute

    तुम क्या मजबूरियों की बातें करते हो
    मखमली शय्याओं पर सोने वालो

    भिखारी के कटोरे जैसा हो गया है
    जिस्म मेरा,
    रूह नदारद है इसमें से नए नोटों की तरह
    अब बचे हैं तो बस कुछ ज़ख्म इन गिने चुने सिक्कों के जैसे.