diptianupam

शब्दों से ही भाव हैं

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  • diptianupam 2w

    आप सभी चाहें तो इसे " मेरे प्यार की उमर हो इतनी सनम.." गाने की धुन पर गुनगुना भी सकते हैं ��


    कुछ दिनों के लिए मिराकी परिवार से अनुमति चाहूँगी
    कुछ निजी कारणों से मैं कुछ दिनों के लिए मिराकी परिवार से अनुपस्थित रहूँगी
    आप सभी की रचनाएँ वापस आने पर अवश्य ही पढूंगी
    आप सभी को मेरी शुभकामनाएं ����

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    तेरे प्यार की बदरा बरसे ज़रा
    मन भीगे थोड़ा.... तरसे ज़रा
    जज़्बातों की बिजुरी चमके ज़रा
    कभी ज्यादा और कभी थम के ज़रा

    आज मौसम की नीयत बेईमान है
    दिल के अंदर ये कैसा तूफान है
    यूँ मुहब्बत की खुशबू महके ज़रा
    मन झूमे और तन बहके ज़रा

    अबके सावन यूँ ही बीते ना
    कोई कोना मन का रीते ना
    आज भीगे तो अरमाँ निकले ज़रा
    तेरी बाँहों में आके पिघले ज़रा

    तेरी चाहत में है डूब जाना मुझे
    चाहे दुनियाँ बोले दीवाना मुझे
    तेरे अरमाँ का बादल गरजे ज़रा
    मेरी ख्वाहिश का दामन भर दे ज़रा
    ©diptianupam

  • diptianupam 3w

    कहते हैं इंसान का ज़मीर उसका आईना होता है


    आप सभी चाहें तो इसे " जाने क्यूँ देखता है इंसान आईना " गाने की धुन पर गुनगुना भी सकते हैं ��

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    कहते हैं झूठ नहीं कहता है आईना
    हर किसी के अंदर रहता है आईना

    कितने जज़्बात हैं कितने एहसास हैं
    हमनवां बनके इनका रहता है आईना

    ज़ख्म सह लेता है दर्द पी जाता है
    साथ हम सबके कितना सहता है आईना

    सख्त पत्थर सा ठहरा और हवा से भी चंचल
    आबे ज़म ज़म सा अंदर बहता है आईना

    सब का ईमान है रब का फरमान है
    ख्वाहिशें रब की सबसे कहता है आईना

    आइना साफ रहे उसमें इंसाफ रहे
    मिन्नतें ये ही करता रहता है आईना
    ©diptianupam

  • diptianupam 3w

    @laughing_soul के द्वारा दी गई पंक्ति
    कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है

    आप सभी चाहें तो इसी गाने की धुन पर गुनगुना भी सकते हैं ��

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    कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है
    कि हमें तुमसे इस कदर मुहब्बत क्यूँ है

    मैं जानती हूँ तू मेरा नहीं मगर फिर भी
    आज भी दिल को तुम्हारी ही चाहत क्यूँ है

    कितनी उलझन है कशमकश है कितनी
    चैन इस दिल का यूँ रुखसत क्यूँ है

    क्या मेरी याद में तू भी तड़पता होगा
    हर घड़ी दिल में सवालों की ये हुज्जत क्यूँ है

    मैं ज़मीं तेरी तू फलक है मेरा
    फिर तुम्हें पाने की हसरत क्यूँ है

    तेरा एहसास है सुकूँ दिल का
    अब खुदा जाने मेरे दिल को ये राहत क्यूँ है
    ©diptianupam

  • diptianupam 4w

    इस भजन की प्रथम पंक्ति मेरी दादी गाया करती थीं
    ये उनको ही समर्पित है ����������������

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    भजमन नारायण नारायण हरी हरी
    श्री मन नारायण नारायण हरी हरी
    हे नारायण तेरे द्वारे सृष्टि कर जोड़े खड़ी खड़ी
    श्री मन नारायण नारायण हरी हरी

    लक्ष्मीपति हाथ सुदर्शन है नयनों में करुणा भरी भरी
    श्री मन नारायण नारायण हरी हरी

    पालनकर्ता सब जीवों का सबकी झोली है भरी भरी
    श्री मन नारायण नारायण हरी हरी

    प्रभु प्रेम भाव अभिलाषी हैं करते नहीं आशा बड़ी बड़ी
    श्री मन नारायण नारायण हरी हरी

    प्रभु का सुमिरन फलदायक है सुमिरन से दुनिया तरी तरी
    श्री मन नारायण नारायण हरी हरी

    करुणानिधि की करुणा बरसे हो जाए धरती हरी भरी
    श्री मन नारायण नारायण हरी हरी
    ©diptianupam

  • diptianupam 5w

    ये मुहब्बत अगर एक तरफ़ा भी हो
    बड़ी ख़ूबसूरत बीमारी सी है
    ये उल्फ़त अगर दोनों जानिब से हो
    बड़ी जानलेवा ख़ुमारी सी है

    सुकूँ है न शब को ना राहत सहर में
    ये दिल ढूंढता है उन्हें हर पहर में
    ज़ुबाँ फिर भी ख़ामोश रहकर छुपा लें
    नज़र बोलती हैं कि यारी सी है

    मुहब्बत मिले तो है जन्नत सी दुनिया
    जो मांगा खुदा से वो मन्नत सी दुनिया
    कभी तो फलक पे कभी तो ज़मीं पे
    ये जज़्बात की शहसवारी सी है

    मुहब्बत अगर मिल के भी ना मिले तो
    ये दिल गुमशुदा होने लगता है सबसे
    मिज़ाजी फ़कीरी ज़ेहन शायराना
    यूँ लगता है दिल में गुबारी सी है

    मुहब्बत को यूँ दायरों में ना बाँधो
    ये नेमत खुदा की सभी के लिए है
    ये ममता भी है दोस्ताना भी है ये
    सभी सूरतों में ये प्यारी सी है
    ©diptianupam

  • diptianupam 5w

    बड़ी बेचैनियाँ सी हैं दिल बेकरार सा है
    हर लम्हा दिल को बस तुम्हारा इंतज़ार सा है

    अब कैफियत न पूछो हमसे हमारे दिल की
    इसके ज़ेहन में बैठा कोई ख़ुमार सा है

    कुछ धड़कनें हैं मध्यम कुछ होश की कमी है
    लगता है इश्क में दिल गिरफ़्तार सा है

    छोटी से छोटी रग की अब गाँठ खुल गई है
    फिर भी दिलों में उलझन कुछ बरकरार सा है

    हमको ख़बर नहीं है उल्फ़त ये हो गई है
    मालूम है सभी को दिल बेइख़्तियार सा है
    ©diptianupam

  • diptianupam 6w

    आज की मेरी रचना देश की सुरक्षा में लगे सभी जवानों को समर्पित है ����

    इसे आप लता मंगेशकर जी द्वारा गाये गाने " ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आँख में भर लो पानी " की धुन पर गुनगुना भी सकते हैं ����



    #mirakee #mirakeeworld #writersnetwork #hindiwrite @madhur_vanii @deepajoshidhawan @roothi_kalam @_meera____ @jayraj_singh_jhala @sanjeevshukla_ @atulmehpa @_mann_j @satyarya_ @rajnisingh

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    ये रचना उनको अर्पित है जो देश के लिए समर्पित हैं
    सम्मान में वीर जवानों के कुछ श्रद्धा सुमन ये अर्पित है

    हमको जो नींद मयस्सर है कितनी नींदों का सदका है
    भारत माँ की रक्षा हेतु वो देश का बेटा जगता है
    है धन्य हमारी धरती जो ऐसे बेटों से पुष्पित है
    सम्मान में वीर जवानों के कुछ श्रद्धा सुमन ये अर्पित है

    कर्तव्यों के निर्वाहन में कितने चौकन्ने रहते हैं
    दुश्मन की आहट भी सुन लें इतने चौकन्ने रहते हैं
    ये ही दिनचर्या है इनकी ये जीवन शैली नियमित है
    सम्मान में वीर जवानों के कुछ श्रद्धा सुमन ये अर्पित है

    सेवा में सबकी तत्पर हैं सहयोग सभी का करते हैं
    भाईचारा मज़हब इनका समभाव सभी से रखते हैं
    इंसानियत की पूंजी है जो इनके दिलों में अर्जित है
    सम्मान में वीर जवानों के कुछ श्रद्धा सुमन ये अर्पित है

    है अभिनंदन रणधीरों का करते हैं वंदन वीरों का
    भारत माता के वीर सपूत ये रणबांकुर रणवीरों का
    करते हैं शत-शत नमन सभी हम सब यूँ हृदय से गर्वित हैं
    सम्मान में वीर जवानों के कुछ श्रद्धा सुमन ये अर्पित है
    ©diptianupam

  • diptianupam 6w

    आप सभी को विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं ��


    मेरी ये रचना सभी मुहब्बत करने वालों के लिए है ����
    आप सभी को ईद मुबारक ������������������

    आप सब चाहें तो इसे फिल्म: जहर के गाने " अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम " की धुन पर गुनगुना भी सकते हैं ��



    #mirakee #mirakeeworld #writersnetwork #hindiwrite @madhur_vanii @deepajoshidhawan @roothi_kalam @_meera____ @jayraj_singh_jhala @sanjeevshukla_ @satyarya_ @atulmehpa @_mann_j @rajnisingh

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    मेरी तन्हाई में तुम हो मेरी महफ़िल में शामिल हो
    ख़ुदा से मांगा था मैंने दुआओं का वो हासिल हो

    तुम्हें ही ढूंढता फिरता रहा हूँ मुद्दतों से मैं
    मैं राहों का मुसाफ़िर हूँ तुम मेरी पाक मंजिल हो

    कहीं मझधार में ही गुमशुदा सी थी मेरी कश्ती
    मिले जो तुम तो यूँ लगता है जैसे मेरा साहिल हो

    हमारी रूह का कोना यूँ ही वीरान था कबसे
    सजाया है तुमने ऐसे कि जैसे कोई महफ़िल हो

    हमारी जुस्तजू तुम हो हमारी आरज़ू तुम हो
    मुहब्बत है तो ये कम है इबादत के भी काबिल हो

    ©diptianupam

  • diptianupam 7w

    हमनें पढ़ा था सबसे सुना था
    अल्फ़ाज़ों में बड़ी जान होती है

    बोलो ज़ुबाँ से या लिख दो कलम से
    हर शख्सियत की पहचान होती है

    पल में बिगाड़े पल में बना दे
    जिस पर भी ये मेहरबान होती है

    जज़्बात दिल के ला दे ज़ुबाँ पे
    जिनके दिलों में मेहमान होती है

    जैसा भी चाहो वैसा बना दो
    ख़ुद से ही ख़ुद अंजान होती है

    जिसने भी इनको दिल में जगह दी
    उनकी बहुत कदरदान होती है

    चाहे दवा दे चाहे दुआ दे
    दोनों सूरतों में वरदान होती है

    मज़हब न कोई है लफ़्ज़ों का
    हर मज़हब का ईमान होती है
    ©diptianupam

  • diptianupam 7w

    मैं शीतल हूँ मैं निर्मल हूँ मैं कल-कल बहता पानी हूँ
    जीवन का राग बसा मुझमें मैं पल-पल बहता पानी हूँ

    मैं नदिया हूँ मैं सागर हूँ मैं झील हूँ मैं ही झरना हूँ
    हर बूंद में हूँ हर धार में हूँ मैं जल-थल बहता पानी हूँ

    सृष्टि का कारण भी मैं हूँ सृष्टि में जीवन भी मैं हूँ
    मेरे बिन सबकुछ सूना है मैं अविरल बहता पानी हूँ

    मेरी सुन्दरता धूमिल है मेरी निर्मलता मैली है
    हर श्रोत मेरा अब सूख रहा मैं दल-दल बनता पानी हूँ

    इंसानों कुछ तो होश करो कुछ संभलो कुछ तो जोश करो
    छोटे छोटे से जतन करो ये हर-पल कहता पानी हूँ ..

    ©diptianupam