drraghvendrasingh

शून्य के पार

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  • drraghvendrasingh 16h

    इतना क्यों सोचते हो
    जो पल अभी हैं
    जी भरकर जी लो
    भविष्य किसने देखा
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  • drraghvendrasingh 16h

    हद से गुज़र जाने को जी चाहता है
    जब आपसे मिलुँगा
    तब खुद को कैसे रोक पाउँगा
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  • drraghvendrasingh 1d

    हाथों में हाथ हो
    प्यार की बात हो
    हल्की सी फुहार हो
    सुनसान टापू पर
    चिपटकर घंटो बैठें दोनों
    समुन्दर की लहरें
    संगीत सुनाती जायें
    और हम दोनों प्यार की
    दुनियां में डूब जायें
    ©drraghvendrasingh

  • drraghvendrasingh 1d

    सम्बन्ध बनाना अगर असंवैधानिक है
    तो शादी क्या संवैधानिक प्रमाण पत्र है
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  • drraghvendrasingh 2d

    शरीर पर ना इतना
    गुमान कर
    ये तो इक दिन
    जल जायेगा
    खाक में
    मिल ही जायेगा
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  • drraghvendrasingh 3d

    सब कुछ छोड़ छाड़ कर शांति की गोद में सो जाने को जी करता है
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  • drraghvendrasingh 3d

    काश ये दिल भी रफू जो जाता
    दिल को रफूगर के पास ले जाता
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  • drraghvendrasingh 3d

    तनहाई को

    तनहाई को ओढ़ते हैं
    तनहाई को बिछाते हैं
    तनहा जीते हैं वर्षों से
    इसी उम्मीद में कभी तो
    किसी का दिल पसीजेगा
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  • drraghvendrasingh 3d

    तेरे प्यार की छाँव काश मुझे भी मिल जाती
    कुछ पल तो गुज़र जाते ज़िन्दगी के शुकूंन से
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  • drraghvendrasingh 3d

    हम तो आदी हो गये
    नफ़रतो को झेलने के
    पर तुम्हें क्या हो गया
    जमाने भर का प्यार
    पाकर भी तनहा हो
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