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Reposts
  • drusha 2d

    गिरकर संभलना मुझे आता है,,,,,,,,,,,,
    बिखरकर जुड़ना मुझे आता है,,,,,,,,,,,

    ख़ोफ का माहौल इस क़दर हैं हावी ,,,,,,,,,,,,,,,
    फिर भी बेखौफ जीना मुझे आता है,,,,,,,,,,,,

    समेटती हूं बाजुओं में खुला आसमां,,,,,,,,,,,,,,,,
    कुतरे पंखों से उड़ना मुझे आता है,,,,,,,,,,,,,,

    कोशिश करने में कसर न की हमने,,,,,,,,,,,,,,
    जो मिला उसमे जीना मुझे आता है,,,,,,,,,,,,,,,

    सफ़र मुफलिसी का है मेरे यारों,,,,,,,,,,,,,,,,
    टपकती छत सीना मुझे आता है,,,,,,,,,,,,,,

    शिकायती मिजाज़ नही है मेरा,,,,,,,,,,,,,,
    कमियां है मुझमें नजर मुझे आता है,,,,,,,,,,,,,

    निहारती हूं आईने में शक्ल अपनी,,,,,,,,,,,,,,,,
    खूबसूरत सा अक्स मुझे नज़र आता है,,,,,,,,,,,,

    हर शख़्स खूबसूरत है समझ मुझे आता है,,,,,,,,,,,,,

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    उई

    सभालना

  • drusha 1w

    साजदा कीजिए यादों की मजार पर,,,,,,,,,
    कौन शब कयामत हो तेरे इंतजार पर,,,,,,,

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    शब

  • drusha 3w

    इकरार न कर समझ जाती हूं,,,,,,,,
    तेरी बेकरारियो से तड़प जाती हूं,,,,,,,,,

    तू गुजरता है अंजुमन से मेरी,,,,,,,,,,
    तेरी खुश्बू से सवर जाती हूं,,,,,,,,,,,,,

    तेरी तकलीफ का अहसास है हरसु,,,,,,,,,,,
    यूं ही नहीं बाहों में सिमट जाती हूं,,,,, ,,,,,,,

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    दामन

  • drusha 3w

    मुकम्मल इश्क ने किया,,,,,,,,,,,,
    अधूरी थी तेरे बिना,,,,,,,,,,,,

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    इश्क

  • drusha 3w

    दिल के कई दरवाज़े नहीं होते,,,,,,,
    जो बिखरते है, कमज़र्फ नहीं होते,,,,,,,,,

    तकलीफ़ का समंदर समेटे जिंदा है,,,,,,,,,,,
    चंद आसुओ से दरियाओ में सैलाब नहीं होते,,,,,,,,,,,,

    तेरी मुहब्बत ही ज़िंदगी का सहारा है,,,,,,,,,,,
    वर्ना जीने में खून एं जिगर कम नहीं होते,,,,,,,,,

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    सैलाब

  • drusha 3w

    उम्मीदों की गठरी कांधे धर,,,,,,,,,,,
    ता उम्र फिरता रहा,,,,,,,,,,

    ओ मुसाफ़िर बाबरा बन,,,,,,,,,,
    दर्द तू भरता रहा,,,,,,,,,,

    व्यर्थ है सब रिश्ते नाते,,,,,,,,,,
    मोह तू करता रहा,,,,,,,,,

    ना जपा हरि नाम,,,,,,
    रहमत करता रहा,,,,,,,,,,

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    Gathri

  • drusha 4w

    ग़म की बारिशे हम पे कभी कम नहीं होती,,,,,,,
    तमाशाई है ये दुनिया सरीके ग़म नहीं होती,,,,,,,,,,

    तू दामन गर बचा भी ले निगाहें चुरा भी ले,,,,,,,,,,,
    कसक तेरी कभी दिल में हमदम कम नहीं होती,,,,,,,,,,,,,,

    मुहब्बत है तो है तुमसे इबादत कम नहीं होती,,,,,,,,,,,,,,
    गुजराती हूं मुफलिसी में तेरी ज़रूरत कम नहीं होती,,,,,,,,,,,
    ,

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    बारिश

  • drusha 5w

    कदमों के निशान से कुछ सीख पाती,,,,,,,,,,
    काश मै भी तेरी हमकदम बन पाती,,,,,,,,,

    रोज उठाता है तू मेरे नाज और नखरे,,,,,,,,,,,
    काश मै तेरी तरह समंदर बन पाती,,,,,,,,,,,,,

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    i नखरे

  • drusha 5w

    दिल में तुमको यू छुपाया है,,,,,,,,,,
    अपना क्या तूने जीना सिखाया है,,,,,,,,,,,,

    जब अपना वजूद तलाशती हूं ,,,,,,,,,,,
    हरसू तेरा अक्स नज़र आया है,,,,,,,,,,,,

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    शक्श

  • drusha 5w

    इक कसक मेरे दिल में कहीं रह गई,,,,,,,,,,,,
    जिंदगी में तुम्हारी कमी रह गई,,,,,,,,,,,,

    उम्र गुजरी ख़ुमारी उतरती नहीं,,,,,,,,,,,,,
    तेरी तस्वीर दिल में दबी रह गई,,,,,,,,,,,,,

    है खुला आसमां चांद तारे सभी,,,,,,,,
    मेरे दिल की अधेरी गली रह गई,,,,,,,,,,,,,

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    कसक