dsrdiary

I am a soul writer...a person who pens down the sounds of soul on a blank page and spells it to life..

Grid View
List View
Reposts
  • dsrdiary 10w

    सफ़ऱ

    तक़ाज़ा वक़्त का यूं है
    के मुनासिब नहीं रॉनित,
    हर सांस भी मिल जाए
    और मुआ दर्द भी ना हो !

    तक़ाज़ा = demand
    मुनासिब = suitable
    मुआ = नाकारा

    ©DSRDiary
    #DSRShayari

  • dsrdiary 10w

    My Insta Profile

    Hey guys, you all have been very supportive and motivating towards my written emotions...

    Look forward to your motivation on my Instagram profile as well.

    Profile handle: @DSRDiary

  • dsrdiary 10w

    अरमानों के पन्ने

    पानी के क़तरे सी
    शाम और सहर,
    साहिरों की रातों
    में घूमें बेफ़िक़र,
    ना रंजिशें हों बाकी
    ना ख़ौफ़ हो ज़रा सा,
    ऐ रब मुझे भी
    जी लेने दे ज़रा सा |

    सहर = Morning
    साहिर = Magician

    ©DSRDiary
    #DSRShayari

  • dsrdiary 11w

    चाँद तारे और शबनम

    उसने इक मुलाक़ात से
    फ़लसफ़े बदल दिए,
    ज़िन्दगी ज़िंदादिली में
    फ़ासले कम किये,
    चाँद को तारों से सजा
    शबनम परोस दी,
    न जाने मुझसे दूर
    कितने ग़म किये,
    ज़िन्दगी ज़िंदादिली में
    फ़ासले कम किये |
    ©DSRDiary
    #DSRShayari

  • dsrdiary 13w

    लम्हा

    चांदनी से ये जगी रातें,
    उजालों में यूं खो गयीं |
    रखा था कमरे के कोने में,
    अँधेरे का क़तरा कहीं |
    देखा है क्या तुमने
    पूछता हूँ जुगनुओं से,
    जुगनू ने कहा के ढूंढ़ता है
    वो भी सदियों से वही |
    कुछ ऐसी अगन,
    इस लम्हे में है,
    ये लम्हा कहाँ था मेरा ?

    ©DSRDiary
    #DSRShayari

  • dsrdiary 13w

    एक मुलाक़ात

    मेहरबानी ख़ुदा की
    उनसे मिलाया तो सही,
    वरना हमतो ख़यालों में भी
    सेहराओं में फिरते थे |

    सेहरा = Desert

    ©DSRDiary
    #DSRShayari

  • dsrdiary 14w

    चुभन

    हम ख़्वाब काँटों से भी सीते
    तो ज़रूर मुमकिन था,
    हमें कोई एक भी चुभ जाता
    और तुम्हे तरस आता |
    तमन्नाओं को मेरी और
    मुझे खुद से जुदा करके,
    बंजर हूँ पर हूँ तुम्हारा,
    अगर इख़्तियार हो?

    इख़्तियार = control

    ©Ronit

  • dsrdiary 14w

    पत्ते

    बाद मुद्दत के खुद से दूर,
    हमराह बेग़ानों में खुद से दूर,
    दरख़्तों के पत्ते ये उड़ चले,
    अनजाने ठिकानों पे खुद से दूर,
    अपने खोने की आवाज़ें छुपाते हुए,
    सयानों के दिए ग़म दबाते हुए,
    बाद मुद्दत के खुद से दूर,
    अनजाने ठिकानों पे खुद से दूर |
    ©Ronit

  • dsrdiary 14w

    वहम

    वो...दस्तक हुई है
    दरवाज़े पे मेरे,
    तुम हो क्या?
    हिचकियाँ सी आती हैं,
    ख़यालों में मेरे
    गुम हो क्या?

    ©Ronit

  • dsrdiary 65w

    FLOCUS - शह और मात

    Read More

    शह और मात !

    दर्पण सिंह ' रॉनित '

    हवा के झौंकों से
    तूफानों को निकलते देखा है,
    मैंने एक छोटी सी घाटी को
    सूरज निगलते देखा है,
    कोई वक़्त से बड़ा
    शहंशाह नहीं होता रॉनित,
    मैंने बेवक़्त सिकंदर का
    वक़्त बदलते देखा है |
    ©Ronit