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  • dwivediprakhar 11h

    गिरा हूँ , अभी हारा थोड़ी हूँ
    ज़ख़्मी हुआ हूँ, मैं अभी मरा थोड़ी हूँ
    कुछ पन्ने बेकार जरूर हुए है
    पूरी किताब ही बेकार हो ऐसा थोड़ी है

    तुम्हारी कामयाबी में पैरों के छाले कौन देखता है
    जीत से पहले कित्ती बार हारे हो कौन पूछता है
    ये दुनिया खुशियां देखती है आँखे नम क्यों है कौन पूछता है

    गिरा हूँ अभी, हारा थोड़ी हूँ
    थोड़ी चोट लगी है, पर इरादे कमजोर थोड़ी है
    ©dwivediprakhar

  • dwivediprakhar 8w

    वो खिलौने वाली उमर कहाँ चली गई

    ये अनचाही जिम्मेदारियां कहाँ से आ गई

    बिना भूख़ के भी सब कुछ खा लेते थे

    मम्मी का प्यार पापा की डाँट भी तो सेह लेते थे

    शाम हमारी खेलों से रंग जाती थी

    कोई लाख बुलाए किसी की कहाँ सुनी जाती थी

    वो खिलौने वाली उमर कहाँ चली गई

    बचपना जवानी में क्यों बदल गई
    ©dwivediprakhar

  • dwivediprakhar 9w

    छोड़ ना यार ये बीते लम्हे वापिस कहाँ आते हैं

    बेहद हसीन पल भी तस्वीरों में सिमट जाते हैं
    ©dwivediprakhar

  • dwivediprakhar 9w

    your mere presence and my heart skips a beat
    Spending time with you is my favorite treat
    Let me be your pen and you be my beautiful sheet
    Let me doodle a heart on your sizzling feet

    Your eyes glitter just like a star
    In front of my eyes yet very far
    Your presence is the everything i want
    Your name is only name i can chant
    You voice seems like a melodious song
    I know without being bored i can hear all day long

    I want to feel every bit of you
    Your eyes your hair to name some few
    I keep on thinking of you in my free time
    And to be honest I am free almost all the time
    Your presence is everything i demand
    Just your presence just your presence
    ©dwivediprakhar

  • dwivediprakhar 9w

    जब दर्द उसकी आँखों में छलकता रहा
    तब जमाना अपनी मस्तियों में झूमता रहा
    किधर थे उसके चाहने वाले
    जब वो जिंदगी से जिंदगी हारता रहा
    ©dwivediprakhar

  • dwivediprakhar 9w

    बेरंग हो गई हैं ये शाम अब
    कुछ रंग भरने आ जाना
    बिखरी ही यादें सारी
    समेटने आ जाना
    आगे कठिन हैं रास्ते तुम बिन
    हाथ थामने आ जाना
    ©dwivediprakhar

  • dwivediprakhar 9w

    दर्द तुम्हे होता हैं तो रोता मैं भी हूँ

    जब नींदे तुम्हारी उड़ती हैं तो मैं भी कहाँ सोता हूँ

    मेरी ज़िद को तुम भी तो अपनी ज़िद मान लेती हो

    मैं कहूँ ना कहूँ तुम सब जान लेती हो

    अक्सर आँखे तुम्हे देखने के लिए बंद कर लेता हूँ

    बस वही मैं तुमसे दिल की बातें चंद कह लेता हूँ

    जी करता हैं मैं तुम्हारी आँखों में ही बस जाऊ

    तुम जो ना कहो मुझसे मैं वो बात भी पढ़ पाऊँ

    रखलो ये पल संभाल के आगे मिल के याद करेंगे

    तुम एक एक पन्ने पलटना और हम तुम्हारा दीदार करेंगे
    ©dwivediprakhar

  • dwivediprakhar 10w

    टूटा हूँ मैं तो तुमसे जुड़ा हूँ क्यों
    जुदा हूँ मैं तो तेरी ओर मुड़ा हूँ क्यों
    बंद हैं रास्ते तो रूका हूँ क्यों
    हैं पता की वजूद नहीं फिर भी मैं खड़ा हूँ क्यों
    ©dwivediprakhar

  • dwivediprakhar 10w

    Suppose if were with you
    Holding your hand,listening to nature
    And expressing my feelings to you

    That sound of water falling on a rock
    Requesting the watches to put their hands on lock
    That gentle winds touching our hair and face
    Lets paint this moment so it becomes very hard to erase
    Just be there and live every moment of it
    As these precious times are not going to repeat

    You are just scenic beauty to my eyes
    My dear you are the one
    Where all my happiness lies
    ©dwivediprakhar

  • dwivediprakhar 10w

    Your eyes glitter just like a star
    In front of my eyes yet very far
    Your voice seems like melodious song
    Which i can hear all day long
    ©dwivediprakhar