#100urav_indori

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  • 100urav 4w

    यहाँ तक की अगर , कोरोना वायरस की दवाई बनाने में या उसका परीक्षण करने में किसी शरीर की आवश्यकता हो तो बिना डरे मानवता को बचाने के लिए मैं अपने शरीर को हँसते हुए समर्पित कर देने को भी बिल्कुल तैयार हूँ । यहाँ मैं देश और दुनिया के उन सभी वीरों को श्रद्धांजलि भी अर्पित करता हूँ । जिन्होंने अपने प्राण , अपने कर्तव्यों पर न्यौछावर कर दिए ।


    मित्रों इस महामारी से हमें सीख लेने की बहुत आवश्यक्ता है । यहाँ इस बीमारी ने फैलने के पहले न तो धर्म देखा न जात , न शोहरत देखी न औकात । तो फिर इंसानों में हमें इतनी असमानता क्यों नजर आती है ? इससे हमें क्या सीख मिलती है ?


    #100rb #100urav_indori #khat ☘️

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    इन्दोरी टू इंदौर

    हमारी सनातन संस्कृति में भी हमें दूर से ही प्रणाम (नमस्ते) करने , तथा घर में प्रवेश से पहले हाथ-पैर धुलवाए जाने तथा बहुत सी ऐसी प्रक्रियाएं जो हमें जाने अनजाने बहुत सी बीमारियों से बचाये रखती थी । आज समय के साथ तथा पश्चिमी संस्कृति को अपनाने के साथ , हमने हमारी उन सब प्रकियाओं को जैसे बिल्कुल भुला ही दिया है । 

    इससे सबक लेते हुए आगे से हमें घर से (मास्क) पहन कर या गमछा डाल कर ही घरों से निकलना चाहिए । अपने आस-पास स्वच्छता का पूरा ध्यान रखना चाहिए । सड़कों पर थूकने आदि जैसी आदतों का पूरी तरह से त्याग कर देना चाहिए तथा इसके प्रति कानून व्यवस्था को भी उचित आदत न बन जाने तक सजग एवं कठोरता का रुख अपनाना चाहिए । 

    मित्रों इन सब के बीच भी मुझे विश्वास है के जल्द ही हम सराफा पर फिर भुक्कड़ों की तरह खाने पर डटे रहेंगे । अपने 56 में 56 भोगों का स्वाद फिर से चखेंगे । पलासिया की गति फिर से लौट आएगी । विजय नगर की चकाचौंध से फिर हमारी आँखें चमक जाएगी । फिर अपने दोस्तों को हम गले लगाएंगे भगवा ध्वज लेकर हम जगह- जगह जय श्रीराम के गुण गाएंगे ।  तिरंगा ध्वज लेकर राजवाड़े पर फिर हम खुल कर जश्न मनाएंगे । हाँ इस बार लंगर हो या भण्डारा , हम साथ-साथ करवाएंगे ।

    अपने मुस्लिम भाइयों के हाथों से हम जलपान करेंगे । गरीब रहेगा ही नहीं कोई जब मानवता का हम दान करेंगे । अहिल्या माई हमारे शहर की नजरें फिर उतारेगी । मुस्कुराएगी अपने बच्चों के साथ , शिव शम्भू की आरती उतारेगी । उद्यानों में फिर खिलखिलाएंगे बच्चे , फिर से हँस पड़ेगा अपना इंदौर , फिर मुस्कुराएगा इण्डिया । 

     "  जय हिंद  " " जय मल्हार "

    आपका साथी , आपका पुत्र

    #100rb_dev_indori

  • 100urav 4w

    प्यारे मित्रों  सड़कों पर कई जानवर , श्वान आदि इंसानों पर ही निर्भर करते हैं । यहाँ यह हमारा दायित्व है कि यदि हम सक्षम हैं तो उनके लिए भी कुछ भोजन बना कर उन्हें समर्पित करें । 


    शायद राज्य में सत्ता की डांवांडोल स्थिति के कारण समय रहते हमने महामारी की गंभीरता को भाँपने में देरी की । हमें यह मानना ही होगा की कहीं न कहीं हमसे चूक तो हुई है । यदि स्थिति को समय रहते भांप लिया जाता तथा उस पर तुरंत कार्यवाही की जाती तो कम्युनिटी स्प्रैड का खतरा इंदौरियों पर शायद नहीं मंडराता ।


    तो यह क्यों हुआ ? कैसे हुआ ?  इसकी पुख्ता जाँच जरूर होनी चाहिए जिससे भविष्य में हम इस तरह की गलतियों से स्वयं को , अपने शहर को , अपने राज्य को तथा , अपने देश को बचा सकें । 


    दोस्तों परिस्थितियाँ चाहे कितना ही विपरीत क्यों न हो, हमने मिलकर उसका सामना किया है और इसी तरह हम आगे भी करते रहेंगे । अरे हमारी , इच्छा मात्र से हमने इंदौर को देश में , स्वच्छता में एक बार नहीं अपितु 3 बार प्रथम वरीयता का स्थान दिया है । अंगदान करने में भी यह शहर सबसे आगे रहा है । एक से बढ़ कर एक सूरमाओं की यह धरती निश्चित ही इस युद्ध में अपनी विजय का संखनाद करेगी । 


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    इन्दोरी टू इंदौर

    तालाबंदी का यह समय , विपरीत जरूर है लेकिन इसने प्रकृति को स्वास्थ्य होने का मौका जरूर दिया है । ओज़ोन छिद्र की क्षति पूर्ति बहुत तेज़ी से हो रही है । हमारी नदियों में मानों जैसे "जान" लौट आई है ।

    यमुना के पानी से फिर घर का खाना बनाया जा सकता है । गंगा में फिर डॉल्फिन ठिठोलियाँ करती नजर आ रही है । सदैव वाहनों की ध्वनि सुनने वाले ये कर्ण , जब चिड़ियों की चहचहाहट सुनतें हैं तो प्रकृति का ये सौंदर्य कुछ ही पल में हमें सारे दिन की ऊर्जा से सराबोर कर देता है । सड़कों पर सदैव धूल से लदे रहने वे वृक्ष इस तरह हरिया गए हैं, जैसे उन्हें किसी ने चटक हरे रंग से रंग दिया है । बड़े शहरों में वायु प्रदूषण में भी बहुत कमी देखने को मिल रही है । 

    दोस्तों क्या यह हमें सोचने पर विवश नहीं करता की हमनें कुछ तो गलत किया है ? अपनी प्रकृति व अपने पर्यावरण के साथ ? अपने-अपने जीवन में व्यस्त रह कर हमने , अपने आस-पास के माहौल को , तो जैसे जीना ही छोड़ दिया है ।

    प्यारे मित्रों यही वो समय भी है जब हम हमारी गलतियों का पश्चताप , माँ प्रकृति के समक्ष कर सकते हैं । कुछ ऐसा सोच सकते हैं , जिससे आने वाले समय में हम पुनः उसे दूषित होने से बचा सकें । 

    और अंत में यही कहना चाहूंगा कि मैं अभी लोक सेवा आयोग के लिए अध्ययनरत एक छात्र हूँ । रुपये या पैसों से आपकी मदद शायद न कर सकूँ । लेकिन मैं अपनी ओर से अपने जिस भी इन्दोरी भाई-बंधुओं को शारीरिक श्रम दे सकूँ , उनके काम आ सकूँ , उनकी मदद कर सकूँ ।


    क्रमशः ....3

  • 100urav 4w

    मेरे अत्यतं आत्मीय इंदौरी भाइयों , बहनों , मेरे मित्रों को मेरा यानि सौरभ दीक्षित (इन्दोरी) का सादर प्रणाम , प्रिय बंधुओं आज ये खत 21 अप्रैल 2020 को मैं अपने शहर के नाम समर्पित कर रहा हूँ ।


    इस समय मैं अपने शहर में अपने निवास पर एकदम स्वस्थ हूँ , और यही आशा तथा प्रार्थना करता हूँ की आप भी स्वस्थ होंगे ।


    प्रियजनों आज हमारा इंदौर जिस संकट की स्थिति से गुजर रहा है । जिस आपार पीड़ा का सामना कर रहा है । इससे तो यही लगता है मानों निश्चित ही हमारे हँसते खेलते शहर पर जाने कैसी कुदृष्टि सी पड़ गई है । 


    ऐसा लगता है कि हम एक गहरी नींद में हों और एक बुरा सपना देख रहें हो । पर काश के ये सच में एक बुरा सपना ही होता, क्योंकि असलियत तो आज उस बुरे सपने से भी बुरी नजर आ रही है ।


    कभी लोगों से सतत भरी रहने वाली सड़कों पर आज मातम सा सन्नाटा पसरा हुआ नज़र आ रहा है । युद्ध काल में भी कभी बंद न होने वाली भारतीय रेलवे के पहियें इस महामारी के प्रकोप से थम गए हैं । गलियों में घातक एकांत छाया रहता है ।


    #100rb #100urav_indori #indore #khat☘️

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    इन्दोरी टू इंदौर

    शहर के मुख्य स्थलों में दबदबा रखने वाले विजय नगर की चकाचौंध आज फीकी सी नजर आ रही है , पलासिया की नियमित गति रुक सी गई है , रीगल पर अब जैसे गांधी प्रतिमा ने भी मानों मास्क पहन लिया है । जाने कब से अपने राजवाड़े में कोई भी रैलियों का आयोजन नहीं हुआ है ।


    यहाँ तक की बीते लगभग 70 - 80 वर्षों से चलने वाली रंगपंचमी की गैर तक यहाँ नहीं खेली गई है । रामनवमी और हनुमान जयंती के भंडारे नहीं हुए । रमजान के बाजार भी शायद ही सज सकेंगे । इस कमबख्त बीमारी ने मुझे मेरे दोस्तों से मिलने वाली जादू की झप्पी भी मुझसे दूर कर दी । और तो और किसी अपने की मृत्यु हो जाने पर , उसका अंतिम संस्कार भी देख पाना जैसे अब भाग्य में नहीं रह गया है ।

    सराफा और '56' जैसी जगहों पर हमेशा जमा रहने वाले भुक्खड़ इन्दोरी आज घर की चार दिवारी में अपने साथ अपने कितने ही लोगों की जान को बचाए हुए हैं । हमारे

    जोशी जी के दही बड़े , सराफा की शिकंजी और रात में मिलने वाले अदभुत भोज्य पदार्थ , जेल रोड़ के पानी पताशे , विजय चाट के चटपटी चाट , इन्दोरी पोहे-जलेबियाँ  , और तो और इंदोरियों के भोजन में अनिवार्य भोज्य पदार्थ " सेव " की , अल्पता सच में बहुत खल रही है । 


    दोस्तों किसी विपदा आने पर अपने शहर को छोड़ जाने वालों लोगों पर मुझे गुस्सा तो आता है । लेकिन जब मैं उनकी विवशता देखता हूँ तो कुछ भी कहना शायद उचित नहीं समझता ।

    आज हम अपने वीर योद्धाओं के पराक्रम पर उनका बहुत आभार व्यक्त करते हैं , हम अपने सफाई दूतों के , अपने पुलिस बल के और हर उस इंसान के जो हमें इस भीषण बाहरी माहौल से किसी ढाल की तरह हमारी रक्षा कर रहे हैं । 


    इसके प्रतिकार में हमें क्या कहा गया है ? यही कि हम अपने घरों में रहें , सुरक्षित रहें । बहुत ही जरूरी कार्य से घर से बाहर निकले और निकले भी तो लोगों से 6 हाथ की दूरी बनाए रखें । किसी की मदद करना चाहते हैं तो बिना तस्वीर खीचें उनको भोजन दें ।




    क्रमशः ...... 2

  • 100urav 9w

    अपने वाचनालय की दीवाल पर लगी एक तस्वीर में मैंने कभी पढ़ा था की....

    एक बार एक जंगल में आग लगी थी ,

    सभी लोग पानी ले-ले कर उस आग को बुझाने की कोशिश कर रहे थे।

    आग बुझाने वाले उन लोगों में , एक चिड़िया भी थी , जोकि अपनी चोंच में बूँद-बूँद भर पानी ले कर आग पर डालने की कोशिश कर रही थी ।

    वहां मौजूद लोगों में से किसी ने उस चिड़िया से पूछा के तुम्हारे इस बूँद भर पानी डालने से इस जंगल की आग पर भला क्या ही असर पड़ जाएगा ?

    तो इस पर चिड़िया ने जवाब दिया की , मैं स्पष्ट हूँ , अगर इस दौर का इतिहास लिखा जायेगा तो मेरा नाम भी "आग बुझाने वालों की श्रेणी में होगा ना की निष्क्रिय रहने में और आग को बढ़ावा देने में " ।

    #hindi #100rb #100urav_indori

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    डरो ना ☘️

    दोस्तों समझदारों को इशारा ही काफी होता है । ये वक़्त है एक दूसरे को सहयोग देने का । ये वक़्त है , असल में मानवता दिखाने का , जोकि हमारा सबसे बड़ा धर्म है । मैं उन तमाम लोगों का हृदय से धन्यवाद देता हूँ जोकि , हमें घरों में सुरक्षित रख खुद ढाल बनकर एक भीषण महामारी से हमें बचाये हुए हैं ।

    जिसमें हमारे चिकित्सक , हमारी पुलिस , हमारी फ़ौज , हमारे सफाई दूत से लेकर घर में दवाइयां और सामान पहुंचने वाले व्यक्ति और उन हर एक व्यक्तियों का जो हमारे लिए , आज घर से बाहर हैं और अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं ।

    उस नन्हीं चिड़िया की तरह ही हमें इस भयानक इतिहास का लेख एक मिसाल बन कर देना होगा । समस्या जाहिर है , हमें सरकार द्वारा जारी किए गए दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन करना है ।

    घर में जरूरत का सामान रखना तो उचित है , लेकिन अगर आप उन सामानों की भरमार इखट्टा रख लेंगे तो इससे बाजार में मूलभूत सामान की कमी हो जायेगी और बहुत से जरूरतमंद लोगों को वो सामान उपलब्ध नहीं होगा । तो घबराने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं , हमें मिलकर इस समस्या का विनाश करना है ।

    तो स्वस्थ्य रहें , आबाद रहें , अपने लोगों के साथ-साथ अपने देश का भी ख्याल करें , खास कर बुजुर्गों का और बच्चों का। अगर आपको कोरोना वायरस के लक्षण दिखाई पड़ते हैं , तो इसे छुपाने की या इससे घबराने की जरूरत नहीं है । लक्षणों का पता लगते ही उसकी जाँच कराना बहुत ही ज्यादा जरूरी है , तो इसका मुफ्त इलाज लें और अपने साथ-साथ हज़ारों लोगों की जान बचाने में एक फ़रिश्ते की तरह सभी की मदद करें ।

    जय हिंद
    जय भारत
    जय मानवता


    ©100urav_indori

  • 100urav 13w

    ☘️

    इज्तिराब-ए-हाल बेहाल है ,जानिब ।

    तू खामखां अफ़सुर्दा होता क्यों है ?

    शौख महफ़िल का 'महताब' को कहां !

    ये दिन-ब-दिन घटता और बढ़ता क्यों है ?


    #100रब

  • 100urav 18w

    नाम भूरू , जाति श्वान, काम अपनी ब्लॉक की सुरक्षा में मुस्तैदी । तो भूरू नामक श्वान के लिए मैं इसे लिखने पर विवश क्यों हुआ तो यह सुनिए ।

    हो सकता है मेरी इस सोच से पर्यावरण को न चाहने वाले लोगों को या धर्म में भद्दी कुरीतियों को दिल से चाहने वालों को तकलीफ हो सकती है । यह भी प्रश्न उठ सकता है कि आप केवल हिन्दू त्यौहारों को ही निशाने पर क्यों रख रहे हैं ।

    पर मैं यहाँ यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ की मैं किसी भी तरह के त्यौहारों के विरुद्ध नहीं हूँ । चाहे वह किसी भी धर्म से क्यों न जोड़े हों । मैं केवल उनमें व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध हूँ । मैं समझता हूँ के जिसे भविष्य की बेहतरी के लिए समाप्त कर देना चाहिए ।

    मैं हर उस त्यौहार और कुरीतियों के विरूद्ध हूँ । जो बिना मतलब ही अपना घर , हम सबके घर में बना चुकी है । जो प्रकृति और उसके बच्चों को भारी नुकसान पहुंचा रही है । इस कविता में , लिखी गई घटना सत्य है लेकिन इसका कैवल्वित भाग मैंने लोगों तक बेहतर पहुँचने के लिए लिखा है , जो की आप अगले भाग में चौपाई द्वारा पढ़ सकेंगे ।


    भूरू जिसकी मृत्यु 2 साल पहले दीपावली पर्व के अगले दिन हुई थी। ईमारत वासियों का यही कहना था कि वह फटाखों के डर से सारी रात चिल्लाता रहा और अंततः सुबह उसका शव सीढ़ियों के नीचे वहीं पाया गया , जहाँ उसका डेरा था । इस घटना ने मुझे प्रभावित किया ।

    अपने लेखों के माध्यम से अपने ही लोगों को समझाना , उनके बहरे कानों से कुरीतियों का शोर खत्म कर मूल रीतियों की शांति स्थापित करना । यह है तो एक टेढ़ी खीर के समान है ।

    मैं नहीं जानता इसमें कामयाब हो सकता हूँ या नहीं , लेकिन मेरी इस रचना से यदि कोई एक व्यक्ति भी अपने भीतर बदलाओ लाता है तो मेरा इसे लिखना सफल हो जायेगा । मैं यही चाहता हूँ की मैंने जहाँ तक पहुँच कर इसे लिखने का प्रयत्न किया है आप को भी वहाँ तक ले जा सकूँ वही माहौल और वही अर्थ स्पष्ट कर सकूँ ।


    परिछिन्न --- सटीक ।
    कैवल्य --- आध्यात्मिक स्वतंत्रता ।
    कविं --- जो सब कुछ जानता है ।
    कापुरुष --- घृणित साथी ।
    ताप --- मुसीबत
    तुमुलः --- उपद्रवी
    दग्ध --- जला

    #100rb #100urav_indori

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    भूरू एक श्वान

    ~~~~~~~~
    "

    यूँ तो मैं जानता हूँ की परिछिन्न सी ,
    इस कविता में मैं कैवल्य तो नहीं हूँ ।
    मैं कविं तो नहीं हूँ ,

    फिर भी भावुक मैं ही हूँ ,
    मैं कापुरुष तो नहीं हूँ ,
    फिर भी दोषी मैं ही हूँ ।

    ऐसा भला क्यों तो सुनिए : ~

    72 क्वार्टर की (बी) ईमारत में ,
    भूरू नाम का एक श्वान था ।
    चित्रग्राहिणी जैसा कुछ न था वहां ,
    तो इमारतरक्षा ही उसका काम था ।

    खान - पान तो ठीक था उसका ,
    वहां सीढ़ियों के नीचे उसका डेरा था ।
    तनिक आवाज भर से चौकन्ना हो जाता था ,
    वहां भूरू का ऐसा फुर्तीला फेरा था।

    अरे चित्रग्राहिणी भी क्या काम करती उसके सामने ?
    जब  उसका  डर  ही  , चोरों  को  ताप दे जाता था ।
    तुमुलः ,  तुमुलः   न   रह   जाता  था  वहाँ  ।
    वो अपनी आवाज के असर से सबको घाप दे जाता था ।

    वार हो त्यौहार हो , हमें भूरू का साथ सदा मिल जाता था।
    हम कितना भी करलें दूर उसे , वो सहसा लौट-लौट कर आता था ।

    लेकिन इंसानों की सबसे रोशन रात ही ,अक्सर उसके लिए काली होती थी ।
    हर त्यौहार तो मना लिया करता था साथ ,परंतु उन त्यौहारों में सबसे कठिन उसकी दीवाली होती थी ।

    मानवता के इस त्यौहार को जाने क्यों वो दानवता समझ जाता था ।
    हम तो मजे से फटाखे जलाया करते थे वहां , और वो बस चीख-चीख कर घबराये जाता था ।

    आखिर दग्ध हो गया शोर भूरू का ,
    सौरभ वो सच में काली रात थी ।
    चीख-चीख कर शांत हो गया ,
    इंसानी कर्णों में अब कुरीतियों की आवाज थी ।

    प्रभु राम ना पहुंचाते हानि कभी ,
    यहाँ इंसानी कर्मों ने वो काम किया।
    मैं दोषी नहीं था मौत का उसकी ,
    कथित ये जुर्म भी मेरे नाम किया ।

    गया है राम दरबार में भूरू ,
    लगाई दरबार में प्रभु से एक अर्जी है ।
    तेरे लोगों ने छीनी जान मेरी , हे राम ।
    अब धरती पर त्यौहार-व्यवहार सब फर्जी है ।


    "

    To be continued ....

    ©100रब

  • 100urav 19w

    बेरंग

    मेरा एक फ़र्ज़ है के मैं इंसान हूँ । मेरा एक फ़र्ज़ है के मैं शायर हूँ । लेकिन मैं प्यार पर शायरी कैसे करूँ जब मेरा देश सुलग रहा है । मैं इश्क़ कैसे लिख दूँ , के मेरा देश सुलग रहा है ।
    क्या यही है दर्पण साहित्य का ? मैं उर्दू , मैं हिंदी हूँ , मैं सिंध हूँ, मैं ही पंजाब हूँ , अरे मैं इन्दोरी कैसा , मैं भारतीय कैसा , और तो और मैं हिंदुस्तानी कैसा । जो समाज को दर्पण न दिखा सकूँ के मेरा देश सुलग रहा है । किस अर्ज से कहूँ ? क्या बोलकर दिखाऊं , के साहित्यकारों को मैं यहाँ कैसे समझाऊं , मुश्किलात हैं यहाँ , नहीं बहार कहीं कलियों में , जाग के दिखाओ अब जरा साहित्य की गलियों में । ये नहीं फ़र्ज़ है हमारा , के जंगलों में आग लगी है और मैं यहाँ , रुसियाये की मनौती करूँ । ये महशर के दिनों में मैं ये जफ़ा कैसे सह जाऊँ , कैसे ख़ियाबां खिलाऊँ के मेरा देश सुलग रहा है।

    ©100urav_indori

  • 100urav 19w

    हिम्मत से कह दो जरा अदब सीख ले ।
    मैंने हिम्मत को हिम्मत देने की परिभाषा , मुफलिसी से सीखी है ।

    जो मौजूद है तेरे पास , तू उसमें दुनिया तो देख ।
    सकूँ तेरे पास ही तो है , तू बेवजह ही धरती टटोल रहा है।


    Pc by #100rb
    #100urav_indori

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    .

  • 100urav 33w

    मैं नहीं जानता की रावण को बनाने और फिर दहन करने की प्रथा कौन से युग से चली आ रही है । हम हर साल दशहरे के अवसर पर रावण का पुतला बनाते हैं और फिर दहन करते हैं । इसे ही बुराई पर अच्छाई का प्रतीक माना जाता है। लेकिन क्या हमने कभी अपनी वास्तविक गंदगी और वास्तविक भद्दे आचरण को मिटाने का प्रयत्न किया है ? बिल्कुल भी नहीं हमने इस सुन्दर पर्व को धीरे धीरे महत्त्व हीन कर दिया है लेकिन अब मैं हरि भजन का गुणगान तब ही करूँगा जब वास्तविकता के पाप और गंदगी को मिटाने के लिए लोग अपने जहन में छुपे राक्षस का पुतला फूंकेंगे ।

    संस्कृत शब्द ।

    यत् --- करने के लिए प्रयास करते ।
    यतता --- जबकि प्रयास ।

    #100rb #100urav_indori

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  • 100urav 33w

    मैं जब-जब सोचता हूँ की लेखनी से थोड़े दिन दूरी बना सकूँ। तभी कुछ न कुछ ऐसा हो जाता है जो मुझे लिखने पर विवश कर देता है । या यूँ कहूँ की अपना दर्द बयां करने पर आमादा कर देता है । हाँ मैं यह जानता हूँ भला मेरे लिखने से क्या होगा । लेकिन मैं यह भी जानता हूँ की बूँद-बूँद से मिलकर ही सागर बनता है ।

    मुंबई में महाराष्ट्र सरकार को पेड़ों के काटने पर अपना फैसला बदलना ही चाहिए । क्या इसका कोई दूसरा विकल्प हो ही नही सकता ? आरे व मुंबई के लोगों ने एक बहुत अच्छा उदाहरण सबके सामने रखा है । इस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मैं स्वागत करता हूँ । और मै अपना पक्ष आरे में पर्यावरण और वृक्षों के रक्षक बनने वाले लोगों के पक्ष में रखता हूँ ।

    लेकिन सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान लेने में हुई देरी या , जब तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला वहां आया तब-तक लगभग 2500 (वहां के लोगों के अनुसार "बीबीसी" ) पेड़ों को धूल कर दिया गया । इसके पहले हाइकोर्ट उस प्रोजेक्ट के खिलाफ दायर सभी की याचिका को खारिज कर चुका था ।

    #100rb #100urav_indori

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    विकास या वृक्ष

    यह कितना दुखद है । जिस प्रकृति ने हमें सबकुछ दिया हम उसी से उसका सबकुछ छीन लेना चाहते हैं। विकास के लिए हम जीवंत वृक्षों को मृत्यु के घाट उतारे दे रहे हैं । अरे भाई यह विकास है या विनाश ? यह तो मेरी समझ से परे है । एक वृक्ष का अपने आप में ही पारिस्थितिकी तंत्र होता । हजारों छोटे कीट-पतंग, पंक्षी , जंतुओं का वो घर अपने मरने के साथ ही मर जाता है । स्वर्थी मनुष्य को वो कितना ही लाभान्वित कर ले लेकिन उसकी सोच और लालच कभी खत्म नहीं होगी।

    हाल के कुछ महीनों में मैंने इंदौर एयरपोर्ट के पास में वन विभाग की जमीन पर कम से कम , एक सौ पौधे रोपित किये। लेकिन इस बार जब मै गांधी जयंती पर उसी जमीन पर फिर एक बार पौधा रोपित करने पहुंचा तो , पता चला वन विभाग् की वो जमीन , मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को आवंटित कर दी गई है । जमीन आवंटित करने का अर्थ स्पष्ट है ।

    वे इस जमीन पर इतना खर्चा कर के वृक्षों को स्थानांतरित तो करने से रहे । आखिर क्या होगा उनका यह सोच कर आत्मा दुखती है । इंदौर-भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट में वे जाने कितने ही पारिस्थितिकी तंत्र का उन्मूलन करने वाले हैं , इसका तो खाका निकाल पाना भी बहुत मुश्किल है । खैर मैं इसके लिए निगम कमिश्नर और अपनी महापौर महोदया को खत लिखने जा रहा हूँ । मुझे विश्वास है कि वो इस पर उचित कार्यवाही करेंगे ।

    दोस्तों , न मैं कोई अभियंता हूँ , न ही कोई वैज्ञानिक । पर मुझे यह साफ़ नज़र आ रहा है कि यह उन मूक जीव जंतुओं पर बिल्कुल ज्यादती है । आप तो इतने समझदार हैं । हमसे बेहतर उनका मूल्य समझते हैं । तो क्यों ऐसे प्रोजेक्ट पास कर दिया जातें है । जिन्हें विनाश की कब्र के ऊपर तैयार किया जाता है । मैं निवेदन करता हूँ , आपसे की इसके ज्यादा से ज्यादा विकल्प खोजा जाए , जिनमें पर्यावरण और उसके मूक बच्चों को न कुचला जाए । क्योंकि विकास के रथ का मार्ग अगर विनाश की गलियों से ही हो कर गुजरता है तो हमें भविष्य की बेहतरी के लिए समय रहते ही उस मार्ग को बदल देना चाहिए ।

  • raaj_kalam_ka 42w

    tagg#osr means
    Om Sai Ram���������� 3.8.19

    @piaa_choudhary Pari I'm nothing without you �� u r my true friend soul Siso #succhiii
    @sanjeevshukla_ Sir @yenksingh Sir @odysseus Sir mera Parichay ����
    @riyabansal @meenuagg @loveneetm #4_ank #ayush_tanharaahi #100urav_indori @rashi100108 @disha_choudhary and all sweeeeeet bro and sis������������������ जन्मदिन को विशेष बनाने के लिए आप सभी का आभार ����

    ������������������������������������
    आज न जाने क्यों आपसे एक बात सांझा करने का मन कर आया कि आप में से बहुत लोगों को मेरा नाम शायद नहीं पता आज मैं अपना नाम परिचय आप से करवाना चाहती हूंँ।
    आपको यह लघु कथा कुछ दकियानूसी ख्यालों को उजागर करते हुए मेरा परिचय दे पाएगी। क्या समाज में बेटी का कोई महत्व नहीं ?लड़कों में ऐसा क्या जो लड़कियों में नहीं ?माफी चाहूंँगी मेरे जन्म की ही सच्चाई है। वैसे मैं अब अपने परिवार की लाडली बेटी हूंँ।

    आप सभी का स्नेह मेरे लिए सबसे कीमती तोहफा है।जाने अनजाने की गई त्रुटियों के लिए क्षमा चाहते हैं। हृदय तल से आप सभी को आभार।��������

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    Muskaan

    माँ !! भाभीं को दर्द होने लगा। अस्पताल जाना पड़ेगा। अरे !!इसे भी आज ही दर्द होना था ।एक दिन और रुक जाती दोपहर के 1:00 बजे हैं।आज रक्षाबंधन का त्यौहार है और राखी बांधनी थी। त्योहार खराब कर दिया।

    छोटी बुआ बोली....माँं सही कहा।तभी बड़ी बुआ बोली भतीजा होना चाहिए।भाभी से अंगुठी लूंँगी छोटी भी बोली हांँ मैं पायल लूंँगी। दोनों खुशी में चहकने लगी।

    तभी बाबाजी आ गए ।सभी को ज़ोर से डांँटा... तुम यहांँ बातें बना रही हो और बहू की हालत बिगड़ रही है? सामान इकट्ठा कर ,अस्पताल चलो।

    अस्पताल पहुंँचते ही भाभी को डॉक्टर ले गए और हम बेटे की किलकारी का इंतजार कर रहे। दोनों चाचा ख़ुशी से उछल रहा थे कि मैं चाचा बनूँगा। भैया से सूट लेंगे।छोटी बुआ बोली...दीदी मैं राखी ले आई हूंँ ।भतीजे को हम राखी बाँंधेंगे ।मुस्कुराते हुए बड़ी बुआ बोली ..बहुत अच्छा किया भैया से खूब नेग लेंगे।

    डॉक्टर आई और बोली...मुबारक हो बेटी हुई है ।सभी के मुँह उतर गए मानो उनका सब कुछ छिन गया। थोड़ी देर बाद नर्स मुझे पिताजी की गोद में दे गई। प्यार भरी निगाह से मुझे देख बोले ..आज रक्षाबंधन और पूर्णिमा भी। घर में चांँद आया है,लक्ष्मी आई है।मेरा माथा चूम लिया।उनका यह प्यार देखा सबकी आंँखों में आँंसू आ गए। दोनों बुआ और चाचा मुझे उनसे छीनने लगे। दादी ने नज़र उतारी कहा बिल्कुल चांँद है।

    छठी के दिन पंडित जी ने नामकरण संस्कार में "ख"अक्षर निकाला। कोई ख़ुशबू कोई कहता ख़ुशी परँंतु पंडित जी ने एक अजब सा नाम बताया।शायद आपको भी सुन हंँसी आए " खिलेंद्री "।

    जब उसका अर्थ पूछा ,तब उन्होंने बताया कि जो सब के चेहरे पर मुस्कान लाये। यह सुन सबके चेहरे पर मुस्कान आ गई। ननिहाल के तोहफे खुलने लगे जिन पर लिखा था "राखी" के दादा-दादी ,"राखी" के बुआ-चाचा, "राखी" के पापा-मम्मी । फिर सभी ने "राखी " नाम रख दिया।

    तभी से साल में दो बार अपना जन्मदिन मनाती।दो बार तोहफ़े लेती हूँ और पूरी कोशिश रहती है कि अपने नाम को सार्थक कर सकूंँ सभी की मुस्कान बन सकूंँ।©raaj_kalam_ka

  • 100urav 42w

    @raaj_kalam_ka जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं बड़ी बहन ईश्वर आपको हमेशा खुश रखे। लोगों से घुलने मिलने का गुण हमनें यहाँ आपसे ही सीखा है। आपकी पोस्ट पढ़ने में मुझे कभी-कभी देरी हो जाती है, मैं उसके लिए क्षमा चाहता हूँ। हाँ लेकिन ये नही होता की कोई भी रचना पढ़ना छूट जाये। वैसे भी आपकी पोस्ट पढ़ना किसी से छूट जाये ये हो नही सकता और ये आप होने भी नहीं देते ��, क्योंकि कभी छूट जाती है तो डाँट-डाँट पढ़वाते हैं। और सच में ये मुझे बहुत अच्छा लगता है, इससे अपनेपन का बोध होता है। दी बहुत सीखा है आपसे और बहुत सीखना बाकि है। ऐसे ही हमें प्रेरित करते रहें। जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें। ��������������������������������������❣️❣️❣️❣️❣️����������

    #osr
    #100rb
    #100urav_indori @kshatrani_kalam

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    एक राज़ की बात है।
    उसका राज है यहाँ ,ये
    उसके काज की बात है।


    एक साथ की बात है।
    सब प्यार करते उसे ,
    ये तो जज़्बात की बात है।


    एक साख की बात है।
    मैं कैसे मिल गया यहाँ,
    ये इत्तेफ़ाक की बात है।


    दिल के साफ़ की बात है।
    इंदौरी लिख रहा कलमा,
    ये एक मुराद की बात है।


    @100रब

  • 100urav 43w

    अब-तक 5 जून ,10 जुलाई , 17 जुलाई , 21 जुलाई और मेरे जितने भी करीबी मित्रों का जन्मदिन आया हमनें उसमें फ़िज़ूल खर्च से बचते हुए, वृक्षारोपण का निर्णय लिया। यहाँ मैं आप सभी से हाथ जोड़ कर यह आग्रह करता हूँ। वृक्षों को काटने से रोकें और अगर कहीं उन्हें कटते देखें तो उसका विरोध करें।

    अख़बार दैनिक भास्कर की एक खबर के अनुसार एक वृक्ष एक साल में लगभग 30 लाख रूपए की ऑक्सीजन प्रदान करता है और हम हर वर्ष दुनिया भर में लगभग 15 करोड़ पेड़ काट दिया करते हैं। अखबार में आगे किसी स्विस अध्ययन का जिक्र करते हुए लिखा गया है कि ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं से बचने के लिए दुनिया भर में एक लाख करोड़ पेड़ लगाने की जरूरत है लेकिन इनके लगाये जाने का औसत 521 करोड़ है, यानि उसके एक तिहाई के बराबर।

    बात करते हैं उन कारणों की जो हमे दिखाई ही नहीं दे रहे हैं इन निम्नलिखित कारणों से वृक्ष दुनिया भर में सबसे ज्यादा काटे जा रहे हैं।

    1)-: जंगल की आग। (यह एक प्राकृतिक आपदा है।)
    2)-: लकड़ी से बनने वाले उत्पाद।
    3)-: निरंतर बढ़ता शहरी करण।
    4)-: स्थानांतरित कृषि।
    5)-: खनन।
    6)-: सड़क मार्ग बनने में।
    7)-: किसी ईमारत के बनने में।

    विडम्बना तो यह है कि हम सौ साल पुरानी ईमारत को संरक्षित रखने का पूरा प्रयास कर रहे हैं और करते हैं। उसे विश्वधरोहर बनाते हैं, लेकिन जब बात वृक्षों पर आती है। हम यह सब भूल जाते हैं। जबकि जितना पुराना वृक्ष होता है वह उतनी ही ज्यादा ऑक्सीजन देता है।

    #100rb #100urav_indori ��☘️☘️☘️��☘️��☘️��☘️

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    क्यों सौ साल से अधिक उम्र वाले वृक्षों को भी हम विश्वधरोहर घोषित नहीं करते ? हम जानते है कि वो जीव हैं, उन्हें काटने पर दर्द होता है, तो क्यों हम उन्हें जीवंत व्यक्ति का दर्जा नहीं देते?

    वृक्षों के फायदे बताना तो मुझे लगता है यहाँ औपचारिक ही होगा। फिर भी कुछ बिंदुओं को आपसे साझा करना उचित समझता हूँ।

    ~ तापमान का नियंत्रित करने हेतु
    ~ वृक्ष एक साल में एक सौ किलो ऑक्सीजन देता है।
    ~ बारिश कराने में उत्तरदायी व् सहायक।
    ~ बाढ़ नियंत्रण में उपयोगी,जल को जमीन तक पहुचने का कार्य।
    ~ मृदा से जहरीले पदार्थ को सोखने का कार्य।
    ~ आस-पास की वायु को शुद्ध करने हेतु बहुत उपयोगी।
    ~ जड़ी-बूटी तथा औसाधिक गुण।

    शब्द सीमा के कारण मैं यहाँ ज्यादा न लिख सकने पर मजबूर हूँ। इनकी उपयोगिता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि हमारे धार्मिक ग्रंथ इन्हें पूजने और इनसे सम्माननीय व्यवहार करने का उल्लेख करते हैं। "भुर्जज्ञ उत्तान पदो" ऋग्वेद में उल्लेखित यह वाक्य कहता है कि पृथ्वी की उत्पत्ति ही वृक्षों से हुई है।

    दोस्तों मैं कइयों बार अपने आलेखों में इसका ज़िक्र कर चुका हूँ, और जब-तक सांस है मैं यह करता रहूँगा। लेकिन अब मैं अपनी इस ज़िद में अपने सभी आदरणीय मित्रों का और इस वसुधैव कुटुंब का साथ चाहता हूँ।

    आज विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के मौके पर मैं आपसे आपकी संवेदना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ की आप उत्तरदायी बने अपने सामने हो रहे अन्याय के प्रति। हाँ हमें फर्क पड़ना चाहिए बढ़ते अत्याचार से, हमें फर्क पड़ना चाहिए लिंचिंग की तकरार से, हमें फर्क पड़ना चाहिए हर एक बलात्कार से, "हमें फर्क पड़ना चाहिए दोस्तों , हमें फर्क पड़ना चाहिए"।

    अंत में बस इतना ही कहना चाहूंगा, जल को व्यर्थ न करें उसे व्यर्थ बहनें से रोकें। हर सांस्कृतिक समारोह में वृक्षारोपण करें। फ़िज़ूल खर्च या दिखावे की जगह अपने जीवन में सार्थकता लाने की कोशिश करें। एक ही बार उपयोग में लाया जाने वाला प्लास्टिक को न लेना यह बहुत ही अच्छा होगा।

    ©100रब

  • 100urav 43w

    वैसे तो उसके प्रेम को शब्दों में उतारने के काबिल नहीं हूँ मैं, यह बस
    उसके सम्मान में और वात्सल्य प्रेम का चित्रण करते हुए लिखने की कोशिश की है।


    अर्थात खाना परोसते समय हमारी माँ न चाहते हुए भी अधिक भोजन दे देती है। यानि 2 रोटी को एक ही गिनती है, जाने उस समय उसकी गिनती को क्या हो जाता है।

    हाँ तो दो रोटी को एक गिनने वाली वो अनपढ़ महतारी से ज्यादा प्रेम पा सकना शायद संभव नहीं है।


    #100rb
    #100urav_indori
    जुंड़ी -: अनाज,
    यहाँ रोटी के लिए प्रयोग किया गया।
    महतारी - माँ , अम्मा

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    दुई जुंड़ी को एकही गिने वो,

    कैसी अनपढ़ "महतारी"।

    ©100रब

  • 100urav 44w

    फर्ज हो, तुझे देखने का एक अर्ज हो।
    मर्ज हो, तुझे चाहने का मुझे मर्ज हो।

    ©100रब

  • kshatrani_words 46w

    यूँ तो क़ैद करके रखना तेरी फ़ितरत सी हो गयी है, ये-बेदिल
    बेजुबाँ जानवर हो या हो अक्लमंद इंसां
    बंद ताले हो या हो चार दीवार
    उम्रक़ैद की सज़ा दे ख़ुद को क्या समझते हो ?
    बेख़ौफ़ मिसाल! या ताकतवर, बेअक्ल महान!

    यूँ जो आज़ाद परिंदा बना फ़िरता है तू आजकल
    ये जो ख़ुशी का स्वाद चख रहा है तू हर रोज़
    क्यों ये सोचता नही है तू
    के इसके हक़दार है सभी?
    के परों में जान है उनके भी कहीं?

    यूँ जो अपनी बेवकूफियों पर कर रहा गुमाँ तू इतना
    मत कर, चल खोल दे उनके बेड़ियों को अब
    हाँ! डर नही तुझे किसी का अब
    पर कर तू 'कर्म' पर दृढ़ विश्वास
    आज नही तो कल तू भी होगा इसका शिकार।
    ©kshatrani_words


    #Picturechallenge
    #100rb #100urav_indori
    @100urav_indori bhaiya ❤️

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  • kshatrani_words 51w

    #5june5ppl_challenge completed ✌️�� .. #100rb #100urav_indori @100urav_indori bhaiya.
    आप सभी का आभार अगर आपने पौधरोपण किया है आज
    और उन सभी से विनती जिन्होंने पौधरोपण नही किया है, जाइए अभी करिये नही तो बस वही लोकोक्ति को याद करेंगे कुछ दिनों बाद - 'अब पछताए होत का जब चिड़िया चुग गयी खेत' ।
    मुझे यहाँ ये बिल्कुल भी याद दिलाने की जरूरत नही है कि हममें से न जाने कितने अभी से ही परेशानियों से जूझ रहे है और वो दिन दूर नही जब हम सब जूझेंगे क्योंकि खुद को तो आप समझदार समझते ही होंगे । माना की आपका समय आपके लिए बेशकीमती है, अमूल्य है लेकिन ज़रा आने वाले कल के बारे में भी सोच लीजिये।

    धन्यवाद।

    P.s. - आपके ही हित मे ज़ारी��.

    #hindiwrites

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    ©kshatrani_words

  • 100urav 51w

    #5june5ppl_challenge सबसे पहले आप सभी को ईद के इस महान पर्व की हार्दिक शुभकामनाये (सभी को ईद मुबारक), अल्लाह, ईश्वर,जीसस, गुरु साहेब, मैं इन सभी दिव्य शक्तियों से आपके जीवन में भी ईद सी मिठास बनाये रखने की मंगल कामना करता हूँ।

    #gogreen #greenuniverse #5june5ppl_challenge #100rb #100urav_indori #vtt #jhala #osr #NRK #jal_abhiyaan #managewater_savewater
    ��☘️��☘️��☘️☘️��☘️��☘️����☘️☘️��☘️��☘️

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    खैर आज ईद के साथ-साथ मेरे लिए विश्व पर्यावरण दिवस का भी पर्व है। आप सभी को विश्व पर्यावरण दिवस की भी हार्दिक शुभकामनाएं।
    मैं यह आशा करता हूँ के आपको दिया हुआ चैलेंज आप सभी को याद होगा और याद नहीं है तो मैं फिर याद दिलाता हूँ के आज हमें माँ पृथ्वी को भेंट स्वरुप एक पौधे का रोपण जरूर करना है।

    भारत में बहुत से राज्यों में मानसून जून-जुलाई से अगस्त-सितंबर तक खूब वर्षा कराता है, अगर आप जून के माह में कोई पौधा रोपित करते हैं तो वर्षा का जल जो उन पौधों पर पड़ेगा, वह उन पौधों के लिए अमृत समान सिद्ध होगा और वह दुगनी तेजी से बढ़ेगा भी।

    इसलिए मेरा आप सभी से विनम्र निवेदन है कि आप आज एक पौधा जरूर रोपित करें किसी कारणवश आपको अभी समय नहीं मिल पाता है तो फिर आपके लिए समय की कोई पाबन्दी नहीं है, पर ऐसा भी न करना के टालते ही जाएं, माँ पृथ्वी को यह भेंट संकल्पित होकर करें।

    पौधा रोपित करते हुए आप जितने भी व्यक्ति फोटो क्लिक करेंगे तो मैं उन्हें संकलित कर अपने इंस्टा अकाउंट पर पोस्ट करूँगा जिससे लोगों को पौधा रोपण करने की प्रेरणा मिल सके लेकिन यह जरूरी भी नहीं के आप फोटो क्लिक करें। "वृक्षारोपण का यह उद्देश्य बिल्कुल साफ है"।

    एक बार फिर आप सभी को ईद मुबारक और विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

    @100रब

  • 100urav 51w

    हुज्जतें तो तुझे समझने की है , ए-इंदौरी।
    यूँ पढ़ लेना तो आज-कल सब जान गए हैं।

    @100रब

  • 100urav 51w

    इस ट्वीट में मैंने जिन 5 लोगों को चुना है वे इस देश के बड़े चेहरे हैं अतः वे अलग-अलग क्षेत्र की जिम्मेदारी अपने कन्धों पर सम्हाले हैं या सम्हाल चुके हैं।

    नरेन्द्रमोदी जी , अमिताभ बच्चन जी , जावेद अख्तर जी, सचिन तेंदुलकर जी, और कैलाश सत्यार्थी जी। जोकि राजनेता , अभिनेता , साहित्यक , खेल तथा समाज सेवक हैं और हम सभी लगभग इन चेहरों को जानते भी हैं।

    असलियत को समझे तो इनकी प्रतिक्रिया मिलने की मुझे उतनी उम्मीद शायद नही है पर फिर भी मैं हर परिस्थिति में अपने पर्यावरण का भला ही चाहता हूँ और उसमें आप सबका सहयोग चाहता हूँ। #5june5ppl_challenge समझें और आगे बढ़ाएं। आप भी यहाँ 5 लोगों को टैग कर सकते हैं जिन्हें आप यह चैलेंज देना चाहते हों।

    #greenuniverse #gogreen #100rb #100urav_indori

    "English translation of this tweet"

    Dear celebrities,
    I humbly challenge you to plant at least
    one sapling on the occasion of World
    Environment Day. I also request your
    cooperation to extend this challenge to
    5 individuals and spread this drive by
    creating a chain across the country.

    The objective of this mission is to promote
    tree plantation in the country and outside.
    Please give it a thought if my tweet
    reaches you.
    We shall be grateful to you all.

    Read More

    @100रब