#2319

42184 posts
  • jassi17217 28m

    अपने अंदर के इंसान को पहचानो,

    उसके साथ एक दिन रहो,

    आप खुद से प्यार करने लगेंगे

    और

    इस पल के बाद आपको कभी भी अकेलापन नहीं लगेगा l

    29/09/2019 10.40 P.M.

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    प्यार

    ©jassi17217

  • yuvrajnayak 56m

    छोटी छोटी खुशीयां
    हमे जिने का सलीका सिखाती है
    जिंदगी के हर मोड़ पर घर परिवार दोस्तों मे
    बस इसे सार्थक करना जरूरी है
    फिर पता नही इन्सान कयुं इतना मगरुरी है

    किसी दोस्त ने कहा आ यार बैठ
    अगर हम नही बैठे तो समझो
    हम ने एक छोटी सी खुशी को नजरअंदाज कर दिया

    इतनी भी कया जलदी है
    जो हमारे पास कोई आया
    तो हम ने कम वक्त का हवाला देकर टाल दिया
    अरे यार कुछ तो सोचो शायद
    उसकी मुलाकात मे कोई हमारी ही खुशी छुपी हो

    माहौल संगत हालात चाहे कैसे भी हो
    पर उसमे कही ना कहीं एक खुशी छुपी होती है
    जिसे हमे सिखने की जरुरत है

    हम ने अगर दो शब्द मुसकुरा कर बोल दिये तो
    समझो हम ने किसी को छोटी सी खुशी भेंट कर दी

    दोस्तों जब मै ये पंक्तियां टाइप कर रहा था
    तो मेरा एक दोस्त मेरे पास
    कोल्ड ड्रिंक लेकर आया खोलकर मुझे दी

    उस वक्त मै भी यह कह सकता था
    की मेरे पास वक्त नही
    पर नही हमे ऐसा नही करना है

    यही होती है वो छोटी छोटी खुशीयां

    तो मैने मुस्कुराहट के साथ उसका अभिनंदन किया

    उसके चहरे पर एक छोटी सी खुशी थी
    जिसने मुझे भी खुश किया . Next.... रिश्ता
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    #.umeed 53

    छोटी छोटी खुशीयां

  • saurabhy 2h

    आज सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की पुण्यतिथि पर उनकी एक विशेष रचना
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    प्यार

     सर्वेश्वरदयाल सक्सेना »

    इस पेड में
    कल जहाँ पत्तियाँ थीं
    आज वहाँ फूल हैं
    जहाँ फूल थे
    वहाँ फल हैं
    जहाँ फल थे
    वहाँ संगीत के
    तमाम निर्झर झर रहे हैं
    उन निर्झरों में
    जहाँ शिला खंड थे
    वहाँ चाँद तारे हैं
    उन चाँद तारों में
    जहाँ तुम थीं
    वहाँ आज मैं हूँ

  • love_unlimited 2h

    प्रार्थना की मनोदशा आपको रिसेप्टिव और क्रिएटिव रखती है। कार्य (पुरुषार्थ) से पहले हृदय की भावपूर्ण अवस्था होनी चाहिए।

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    प्रार्थना

    "पुरुषार्थ की पृष्ठभूमि में प्रार्थना"

    *प्रार्थना का ज्ञानयुक्त अर्थ याचना करना नहीं है। प्रार्थना हृदय में उठी हुई भावपूर्ण अवस्था का नाम है। प्रार्थना आप किससे करते हैं, आपके प्रार्थना का निमित्त केंद्र बिन्दु कौन कैसा है यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि आपकी प्रार्थना की गुणवत्ता उत्तम हो। आपकी प्रार्थना में हृदय की सारी भावनाएं उड़ेल दी गई हों। जब भी आप हृदय की ऐसी अवस्था हो तब यूं समझें कि आप प्रार्थना पूर्ण अवस्था में हैं। यह अवस्था मेडिटेशन के दौरान भी हो सकती है। इसे आप लवलीन या कुछ भी नाम दें इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता। आपकी हृदय की ऐसी अवस्था से केवल इतना ही होता है कि एक कृतज्ञता का भाव उपजता है और आपकी क्रिएटिविटी और receptivity (ग्राहकता) की गुणवत्ता और क्षमता बढ़ जाती है। इससे ही पुरुषार्थ और इन्द्रिय जगत के अनुभव की गुणवत्ता भी बदल जाती है ।*
    ©love_unlimited

  • kd15aug 2h

    कुछ इस कदर...
    बदनाम हुए हम इस ज़माने में...
    तुमको सदियां लग जाएंगी...
    हमें भुलाने में..

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    बदनाम

    ©kd15aug

  • kd15aug 3h

    महज एक चांद गवाह था
    मेरी बेगुनाही का...
    और अदालत ने पेशी
    अमावस की रात मुकर्रर की...

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    बेगुनाही

    ©kd15aug

  • flame_ 4h

    वही आँगन काँटों से भरा,
    वही बंजर बगीचा था,
    वही सूखे पत्ते जो मेरे शिथिल मन और
    मंद गति के बहाव में
    चलते जीवन को दर्शाते,
    वही टूटा हुआ दरीचा था,
    इसके इलावा कुछ ना नज़र आता था,
    ये कैसा शंकाओं और निराशाओं ने घेरा था?!
    हर इक पल जो स्नेह से सींचा था,
    नफरतों का अंश कैसे उसने खींचा था?
    शोर था कुछ अंजाना सा,
    जानती थी उसे,
    नाजानें क्यों लगता था पहचाना सा,
    एकांत पसंद था इसके बावजूद भी
    अकारण ही,
    सब कुछ दूर जाने का लगता महज़ बहाना सा,
    हम्मम...पास में दरीचा था,
    पर वो प्रसन्नता का संसार ना अबतक रचा था,
    दुःखों से पीड़ित फ़कत सज़ा था।
    ©flame_

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    दरीचा

    ©flame_

  • jazbaat_30 5h

    दुनिया की इस भीड़ में
    न तू अपने अरमान रख
    भीड़ से हटकर छोटी ही सही
    पर अपनी एक पहचान रख ।
    अनीता

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    पहचान

    ©jazbaat_30

  • varun1143 6h

    चलते हुए वक्त को हम यूं ही नहीं रखते।
    जलते हैं हम के हम;
    अपने आप से के हम अपने आप को बदल नहीं सकता ;
    हम अच्छे पतों में जी ते हैं हम;
    मगर हम बुरे वक्त नहीं चाहते।

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    वक्त के पल

  • varun1143 7h

    जिंदगी के वक्त में हम अपनी सोच को हर वक्त बदलते हैं।
    हर जिंदगी के पहलुओं में हम अपने करवटें बदलते हैं।
    चाहते हैं हम हर एक लम्हे हो;
    उस को पाने के लिए हम ;
    अपने आप को बदलते हैं।

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    हमेशा हमें बदलते रहना चाहिए।
    जिंदगी में हमें हमेशा दूसरों की समस्या को समझना चाहिए।

  • kuchunkahibaatein10 11h

    सबसे खतरनाक होता है मुर्दा शांति से भर जाना -पाश

    पाश द्वारा लिखी गई यह कविता काफी है मन में लाखों सवाल पैदा करने के लिए।क्या चुप रहना इतना खतरनाक और बुरा है?
    जब बच्चा जन्म लेता है,वो रोकर खुद को अभिव्यक्त करता है।जब उसे भूख लगती है,असहज महसूस होता है,वह रोता है। अपनी पूरी शक्ति लगाकर,अपनी आवाज़ पहुंचाता है।फिर वो बड़ा होने लगता है,बोलना सीखने लगता है।पर इसी के साथ एक चीज और सीखता है,चुप रहना।घर से लेकर विद्यायल तक,वो चुप्पी की संस्कृति का शिकार बनता जाता है।'finger on your lips','keep silence',' मुंह बंद कान खुले','चुप रहो बड़े बात कर रहे है','ध्यान से सुनो',
    पर इसके आगे क्या?ध्यान से देखने और सुनने के बाद क्या करना चाहिए,शायद ही कोई बताता है।
    क्या हमने बोलना सिर्फ इसीलिए सीखा कि जरुरत आने पर चुप रह सके?
    सवाल करने और बोलने वालो के लिए समाज ने कुछ उपनाम बना रखे है,मूर्ख,बिगड़ैल,बदतमीज और ना जाने क्या क्या।इन उपनाम को पाने का 'डर ' चुप्पी तोड़ने नहीं देता।हम डर से हार जाते है और अंत में मर जाते है।यही चाहता है समाज,हम डरे रहे और घुटने टेक दे उन प्रथाओं के सामने जो गलत है,उन
    चीज़ों के सामने जो गलत है।हां,हम डर से हार जाते है और मृत्यु से पहले ही मर जाते है।अगर ज़िन्दगी को असल में जीना है,तो बोलना सीखना होगा।
    जबतक चुप्पी है,अत्याचार होते रहेंगे।जो जैसा चल रहा है वैसा चलता रहेगा।सच ख़ामोश रहेगा और अन्याय दिनोदिन बढ़ता जाएगा।इसलिए जरूरी है इस चुप्पी को तोड़ना।
    चुप्पी हमें तोड़े इससे पहले हमें चुप्पी को तोड़ना होगा।
    अंत में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ साहब की कुछ पंक्तियां ही कहना चाहूंगी
    बोल कि लब आज़ाद है तेरे
    बोल कि सच ज़िंदा है अब तक
    बोल जो कुछ कहने है कह ले
    बोल कि लब आजाद है तेरे

    कुछ गलत लिखा गया हो मुझसे,तो उसके लिए माफ़ी।
    आशा है,आप मेरी गलती मुझे बताएंगे,चुप नहीं रहेंगे।
    गलती सुधारने से ही इंसान सीखता है,मै भी सीखूंगी।

    #hindiurduwriters #humdekhenge #bolkelabaazad haitere #hindiwriters #aawazuthao #du #breakthesilence
    @naman_khandelwal @jayraj_singh_jhala @shiv__ @vandna

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    चुप्पी

    चुप्पी बढ़ा देती है शोषणकर्ता की हिम्मत और शोषित की विवशता
    चुप्पी खत्म कर देती है मनुष्य के सोचने - समझने की शक्ति
    एक चुप्पी खत्म कर देती है उन तमाम विचारों को
    जो ले सकते है एक जन आंदोलन का रूप
    जो ला सकते है समाज में बदलाव
    जो आवाज़ दे सकते है अत्याचार को सहती ख़ामोशी को
    जो बदल सकते है तुम्हारी,मेरी और हम सबकी ज़िन्दगी को।

    इसलिए जरूरी है इस चुप्पी को तोड़ना।
    चुप्पी हमें तोड़े इससे पहले हमें चुप्पी को तोड़ना होगा।
    ©kuchunkahibaatein10

  • philosophic_firefly 12h

    यहां बारिश अभी भी हो रही है। धीरे धीरे। मगर बहुत शान से। मैंने देखा तो मैं उदास हो गई,क्यूंकि बारिश कितनी प्यारी लग रही है और रात के समय मैं उसे निहार नहीं सकती। काश! कोई एक ऐसा कमरा होता जहां एक खिड़की होती और मैं बारिश को रात भर जाग कर देख सकती। मैं उदास महसूस कर रही हूं अब!

    मुझे बारिश बहुत पसंद है! अंधेरे में टपकती हुई, मोतियों की तरह। भला कौन रात बारह बजे ऐसे देखता होगा बारिश? भला ऐसे कौन लिखता होगा बारिश के बारे में, इतनी रात को?

    कोई तो होगा, मेरी ही तरह।

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    बारिश

    बर्फ़ के नन्हे छोटे कतरे
    गिरते रहे बारिश बनकर
    और हमें दिखते रहे बूंदों की तरह
    पिघले हुए
    ठंडे ठंडे।

    अभी जब मैं सो कर उठी
    मैंने देखा
    मेरा आंगन भीगा हुआ है
    इसी बारिश की बूंदों से।

    मैंने सिर को दुपट टे से ढका
    और बढ़ चली आंगन से आगे
    घर के दरवाज़े की तरफ
    बारिश ने मुझे हल्का सा
    छू लिया था, मगर भिगोया नहीं।

    पागल बारिश!
    प्यारी बारिश!
    उसे क्या पता मैं उसे देखने के लिए
    रात बारह बजे
    उठी हूं और घर के दरवाज़े के पास खड़ी
    हो गई हूं।

    ये देखने के लिए की बारिश
    कैसी लग रही है।

    नीम के पेड़ से सटा हुआ
    बिजली का खंभा
    और फिर उसमे जलती स्ट्रीट लाइट
    की सफेद रोशनी
    आह! सचमुच बारिश की बूंदें
    साफ दिखाई पड़ रही थीं।

    मैं दो मिनट तक देखती रही
    खंभे के पास
    सफेद रोशनी में चमकती
    बारिश की बूंदों को
    कितनी सुंदर थी वो!
    मैंने चाहा कि रात भर निहारती रहूं
    खड़े होकर वो स्ट्रीट लाइट के पास
    गिरती हुई चमकती बूंदें।

    पर ऐसा हो न सका।

    भला रात बारह बजे
    कौन निहारता है ऐसे बारिश को
    और उनकी बूंदों को
    इस सुनसान अंधेरे में
    और खामोशी के सन्नाटे में!
    भला कौन?

    मैं लौट पड़ी
    कमरे की तरफ!

    दिल में एक बार सोचा
    की काश
    मेरा एक ऐसा घर होता
    जहां मेरे कमरे में बड़ी सी खिड़की होती
    और उस खिड़की के सामने
    एक बड़ा सा पेड़
    जो स्ट्रीट लाइट के पास ही होता
    तब मैं रात भर जग कर
    देखती चमकती हुई रोशनी में
    बारिश की प्यारी बूंदे।

    ©philosophic_firefly

  • sramverma 13h

    Date 24/09/2020 Time 12:00 AM #SRV

    ज्यादा पढ़ी लिखी
    कहाँ होती है आज भी माँ,

    पर अपनी संतान
    की भृकुटि पर उभर आए,

    आलेखों को अच्छी तरह
    पढ़ लिया करती है माँ,

    लड़ना नहीं आता उसे
    पर अपनी संतान के लिए,

    पुरे समाज से
    लोहा ले लेती है माँ !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

    Image's taken from Google/Facebook/pinterest credit goes to It's rightful owner.

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    ,

  • singhpratibha 14h

    जिंदगी अपनी रफ्तार से चलती रही
    और हम हम तुमसे दूर निकल आए
    दूर तुमसे बहुत दूर

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    वक़्त

    अजनबी थे अजनबी ही रह गए
    ना वक़्त रुका ना हम रुके और ना हालत रुके

  • n1dh1yadav 14h

    अपनी शायरी में हम अपने बिखरे हुए अल्फ़ाज़ लिखते है...
    कही आंसुओ की बात तो कही दर्द की सौगात लिखते है..!!

    #dardshayri...✍️

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    बेइंतहा दर्द को बहुत छुपाया है, हमनें...
    कुछ अश्क भी ना बहाया है, हमनें..

    इन हाथों में अपनी कलम थाम कर इन पन्नो को ही अपना
    हमदर्द समझकर बेशुमार दर्द इनको ही सुनाया हैं,हमने..!!
    ©n1dh1yadav

  • drishtantyadav 14h

    कि वो मुझे कुछ ऐसे सताता है 
    पहले सिग्रेट जलाता है
    फिर मेरे जिस्म पे बुझाता है
    उसके बनाये निशान मैं सबसे छुपाती हूँ
    वो अच्छा है मैं सबसे यही बताती हूँ
    कि एक रिश्ता है जो मुझे निभाना है
    अर्धांगिनी हूँ उसकी तो उसे छोड़ के कहा जाना है
    हर दिन इस उम्मीद से मैं जीने लगती हूँ कि वो बदल जाएगा 
    वक़्त ही तो है थोड़ा ओर सही वो सवर जाएगा 
    मैं नही अकेली इस दौर में मेरी ओर भी सहेली है
    मैं तो एक हूँ उनमे ना जाने कितनी और पहेली है
    तुम्हे लगेगा मैं कमजोर हूँ जो ये जुल्म सहती हूँ
    मैं हरगिज़ नही हूँ ये बात सबसे कहती हूँ
    जब ब्याहा था बाबा ने बस इतना कहा था मुझसे 
    कि एक वादा कर मुझसे
    घड़ी कैसी भी क्यों न हो तुझे रिश्ता निभाना है
    गम कितने भी क्यों न हो तुझे सबसे गुज़र जाना है 
    बात मान कर उनकी बस रुक ही जाती हूँ .
    कभी कभी माँ को भी अपना हाल बताती हूँ
    ख़ौफ आता है कभी कभी ज़िन्दगी क्या नया लाएगी 
    माँ कहती है अक्सर ज़िन्दगी ही तो है गुज़र जाएगी 
    अब जो तू आई तो परिवार बिखरेगा 
    तू ही ना होगी तो वो कैसे संवरेगा...।।

    ©*Drishtant Yadav Amethi
    (Arpit)

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    अनकहे दर्द....

    ©drishtantyadav

  • oracular_ 16h

    फिर सिहर कर ज़िस्मों ने ओढ़ लिया है,
    ठंडे पड़े एहसासों को;
    फिर ठहर कर चल पड़ी हैं,
    ख्वाबों की महफ़िले उन्हीं बदनाम वीरानों को। 

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    फिर आ बैठी है बेचैन घटा
    रात के सिराहने पर
    अपनी बारिशें लेकर;
    फिर एक शिकायत सी
    हो गयी है मुसाफ़िरो को।

    कुछ अधजले ख़्याल
    फफक कर जल उठे हैं वापस,
    भर जो गयी हैं उनकी कब्रें
    मटमैले काजल से;
    काम बढ़ गया है
    फिर बूूढ़ी साँसों का।

    एक काफ़िला आवारा सय्यारों का
    ठहर कर गुनगुनाने लगा है,
    सितम सर्द हवाओं का;
    सुनकर उनके खाक़ हुए अफसाने
    पास बैठी ख़ामोश आग
    इतरा कर हो चली है
    थोड़ा और लाल;
    चीखता अंधेरा सहम कर हो गया है
    थोड़ा और काला।

    दब गयी हैं
    शहर की सारी आवाज़ें,
    ज़मीं और आसमां की उस राज़-ए-गुफ्तगू में।
    कहीं चुपके से सुनता हुआ चाँद
    भी हो गया है थोड़ा सा गीला।
    धुल गयी हैं कुछ आँखे
    और उनकी कई कहानियां;
    बस धुलने को बैठे थे जो कच्चे घाव
    वो बन गए हैं पक्के जख़्म,
    अब थोड़ा और दफ़न होकर।

    ©oracular_

  • sanjay_writes 16h

    जुदा वो हुये पर हम क्यों नही हो पायें ।
    खफ़ा वो हुये पर हम क्यों नही हों पायें ।
    एक हंम ही थे जो उनसे प्यार करते रहे ।
    बेवफ़ा वो थे पर हम क्यों नही हों पाये ।

    दिल के करीब आके जब वो दूर हो गये ।
    सारे हसीन्ं खाब मेरे क्यों चूर-चूर हो गये ।
    हमने वफ़ा निभायी तो बदनामिया मिली ।
    जो लोग बेवफ़ा थे वो मशूर क्यों हो गये ।

    गुजरे दिनों की धुधली हुयी बात की तरहा ।
    इन आंखों मैं जागता है कोई सपनों की तरहा ।
    उस से ही उम्मीद थी के निभाएगी साथ वो मेरा।
    लेकिन वो भी बदल गयी मेरे हुस्न-ऐ-नूर की तरहा ।

    एक फरेबी से एक मुलाकत बहुत है ।
    जितना भी दिया हमने तेरा साथ बहुत है ।

    दूनियाँ को दिल के दाग़ों को दिखाये किस तरहा ।
    ऐ ज़िन्दगि ये राज छुपाउ तों छुपाउ किस तरहा ।
    अपनी तबाहियों में मेरा हाथ बहुत है ।
    जितना भी दिया हमने तेरा साथ बहुत है ।

    टूटा मेरे दिल का आईना जब टूटे सब ही भ्रम मेरे ।
    होती है उमर प्यार की जीने के लिये कंम।
    मरने के लिये दर्द की एक रात बहुत है ।
    एक फरेबी से एक मुलाकात बहुत है ।
    जितना भी दिया हमने तेरा साथ बहुत है ।

    जुदा होने का अन्धेसा हमें जुदा होने से पहले था ।
    वो मुझ से थे इतने खुश खफ़ा होने से पहले था ।
    जुनुन्ं का दौर गुजरा तो मुझे भी भुला बैठे वो ।
    नमाज ऐ इश्क़ था लेकिन वफा होने से पहले था ।

    फरेबियत उसकी मिटाकर आया हूँ ।
    सारे खतो उसके पानी मैं बहाकर आया हूँ ।
    कोई पढ ना ले उस फरेबी के वादो को ।
    इसलिये पानी में भी आज आग लगाकर आया हुँ।

    मेरा ताजुब अजब नही है ।
    वो शक्स पहले सा अब नही है ।
    वफ़ा का क्या गिला करु में उस से यारो ।
    वो मेरा था कब जो अब नही है ।

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    बदले हुए लोग

  • dr_rustom 16h

    लिखता हूँ एहसास दिल के आज कुछ यूँ,
    खुदा का भेजा फरिश्ता है तू।
    मेरे ऊपर हुई उसकी रहमतों की पहली बारिश है तू।
    जैसे कभी देखे थे ख्व़ाब,
    उनका ही आइना है तू ।

    होता हूँ जब भी मैं उदास,
    अपनी मुस्कुराहट से मुझे खुशी देता है तू ।
    कैसे कह दूं फिर बता कि पराया है तू।

    सुबह उठने पर पहली सोच और रात होने पर आखरी ख्वाब है तू।
    भरोसा, रिश्ते, प्यार, दोस्ती जैसे शब्दों के मायने,
    बिन बोले समझाने वाला है तू ।
    बता फिर कैसे कह दूं मेरा अपना नहीं है तू।

    रूठ जाता है मुझसे बार-बार न जाने क्यूँ,
    मनाता हूँ तुझे हर बार जाने मैं इतना क्यूँ।
    एहसास है दोनों तरफ सच्चाई, परवाह, भरोसे और दोस्ती के,
    क्या नहीं जानता है ये तू।

    थी मेरी जिंदगी वीरान मरुस्थल-सी,
    फिर उसमें तूने चाहत के फूल खिलाए यूँ, सावन आने पर मन-मयूर झूमता है ज्यूँ।

    दुनिया की भीड़ में न जाने मुझे ही क्यूँ मिला है तू,
    कितना खुश हूँ तेरे आने से मैं,
    क्या ये नहीँ जानता था तू।
    आना चाहिए था तुझे बहुत पहले,
    झल्ला-सा मेरा दोस्त इतनी देर से क्यों आया बता फिर तू।
    अब आ ही गया है तो कह दे अकेला छोड़ मुझे कभी नहीं जायेगा तू।

    तू खुश रहे हमेशा, सोचता हूँ आज भी पल-पल मैं यूं, न जाने क्यू।
    था क्या कोई रिश्ता पुराना या खुदा ने मेरे लिए ही बनाया है तू।

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    फरिश्ता

    ©dr_rustom

  • uttamky 17h

    पता नहीं ये क्या लिखा मैंने..?
    आज के लिए बस इतना ही,, ����

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    प्यार के नाम से अक्सर डर जाते हैं वो लोग
    जिनके दिल पर लगी होती है चोट..
    ©uttamky