#2348

73319 posts
  • aayush_joshi 1h

    #बारिश #मौसम #हिंदी_रचना #mirkee #own_words

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    वर्षा

    कुछ तो है वर्षा के मौसम की अलग बात
    भर देती है हर चेहरों पर मुस्कान
    पहले बादलों को काला कर के
    आसमां और धरती का भेद मिटाता है ।
    फिर बिजली और बादलों की आवाजो से
    मानो चीख चीख कुछ कहना चाहता है ।
    पानी की बूंदे पड़ते ही व्यक्ति मानो
    अपना हर दुख दर्द भूल जाता है ।
    फिर धरती को सीच सीच कर
    पुनः प्रकृति को हरा भरा बनाता है ।
    जब एक छोटा सा बच्चा वर्षा के जल
    में उछल - उछल कर नहाता है ।
    वो मोटी - मोटी बूंदों की टप टप आवाज़
    मानो हृदय में वीणा वाद्य बजाता है
    इसीलिए बारिश का मौसम
    हम सबको इतना ज्यादा लुभाता है ।
    ©aayush_joshi

  • jassi17217 1h

    अपने अंदर के इंसान को पहचानो,

    उसके साथ एक दिन रहो,

    आप खुद से प्यार करने लगेंगे

    और

    इस पल के बाद आपको कभी भी अकेलापन नहीं लगेगा l

    29/09/2019 10.40 P.M.

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    प्यार

    ©jassi17217

  • happy_rupana 2h

    "ना नफरत कर इन पन्नों से
    तुमसे ज्यादा इन पर ऐतबार है
    तुम तो हर बार ठुकरा कर मुझे चले जाते हो
    तुम्हारे बाद इन्होंने ही मुझे संभाल कर रखा बरकरार है...!
    ना नफरत कर इन पन्नों से......."

    #kuch_bhi #random
    @sprinklet @_aradhana @dadiesprincess @rani_shri @khalishhhh

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    बिखरे पन्ने,बिखरे अल्फाज,
    या कुछ अनकहे से जज्बात,

    और क्या मिलेगा तुझे..?
    मेरी दुनिया में आकर...!

    बस यही कुछ है मेरे पास......
    ©happy_rupana

  • yuvrajnayak 2h

    छोटी छोटी खुशीयां
    हमे जिने का सलीका सिखाती है
    जिंदगी के हर मोड़ पर घर परिवार दोस्तों मे
    बस इसे सार्थक करना जरूरी है
    फिर पता नही इन्सान कयुं इतना मगरुरी है

    किसी दोस्त ने कहा आ यार बैठ
    अगर हम नही बैठे तो समझो
    हम ने एक छोटी सी खुशी को नजरअंदाज कर दिया

    इतनी भी कया जलदी है
    जो हमारे पास कोई आया
    तो हम ने कम वक्त का हवाला देकर टाल दिया
    अरे यार कुछ तो सोचो शायद
    उसकी मुलाकात मे कोई हमारी ही खुशी छुपी हो

    माहौल संगत हालात चाहे कैसे भी हो
    पर उसमे कही ना कहीं एक खुशी छुपी होती है
    जिसे हमे सिखने की जरुरत है

    हम ने अगर दो शब्द मुसकुरा कर बोल दिये तो
    समझो हम ने किसी को छोटी सी खुशी भेंट कर दी

    दोस्तों जब मै ये पंक्तियां टाइप कर रहा था
    तो मेरा एक दोस्त मेरे पास
    कोल्ड ड्रिंक लेकर आया खोलकर मुझे दी

    उस वक्त मै भी यह कह सकता था
    की मेरे पास वक्त नही
    पर नही हमे ऐसा नही करना है

    यही होती है वो छोटी छोटी खुशीयां

    तो मैने मुस्कुराहट के साथ उसका अभिनंदन किया

    उसके चहरे पर एक छोटी सी खुशी थी
    जिसने मुझे भी खुश किया . Next.... रिश्ता
    ������ ����������

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    #.umeed 53

    छोटी छोटी खुशीयां

  • _suprabhat_ 2h

    मजदूर भूका सोता है इस देश का या फिर कर्ज केकारण अपनी जिंदगी खतम कर लेता है इस देश में हर वर्ग तरक्की करेगा आगे बढ़ेगा पर मजदूर बेचारा हर बार पिसेगा।

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    @

  • saurabhy 3h

    आज इस सुहावने बारिश के मौसम को देखकर सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता याद आ गई ।
    ❤❤❤

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    मेघा आऐ

    || सर्वेश्वरदयाल सक्सेना ||

    मेघ आए बड़े बन-ठन के, सँवर के ।
    आगे-आगे नाचती-गाती बयार चली
    दरवाजे-खिड़कियाँ खुलने लगीं गली-गली
    पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के ।

    पेड़ झुक झाँकने लगे गरदन उचकाए
    आँधी चली, धूल भागी घाघरा उठाए
    बाँकी चितवन उठा नदी, ठिठकी, घूँघट सरके ।

    बूढ़े़ पीपल ने आगे बढ़ कर जुहार की
    ‘बरस बाद सुधि लीन्ही’
    बोली अकुलाई लता ओट हो किवार की
    हरसाया ताल लाया पानी परात भर के ।

  • shiv__ 3h

    मामलात बड़े ही ग़मगीन नज़र आ रहे हैं।
    जाहिर सी बात है तफ़्तीश की जरुरत है।।

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    आँखों में नमी और मोहब्बत बेतहाशा।

    हजरत ने कहा था -
    तकदीर बदलती नही, बदली जाती है!
    ©shiv__

  • syaahi_22 3h

    वह मुझसे अक्सर उसके कौरे सफहों पर रंग बिखेरने को कहता है फिर जब मैं उससे पूछती हूं क्यों तो वह मुझे स्याही के रंगों में मोहब्बत बताता है !
    फिर,
    मैं उसमें प्यार लिखती हूं
    उससे किया गया इजहार लिखती हूं
    मेरी स्याही से शब्दों का आकार लिखती हूं
    उसमें मेरा इरादा लिखती हूं
    उस से किया हुआ वादा लिखती हूं
    मेरी स्याही से इश्क का कायदा लिखती हूं
    मैं उसमे कुछ राज लिखती हूं
    उसी के कुछ अल्फाज लिखती हूं
    मेरी स्याही से मैं शफक की परवाज लिखती हूं
    मैं उसमें कुछ ख्वाहिशात लिखती हूं
    उससे बनी है जो मेरी कायनात लिखती हूं
    मेरी सही से अपने कुछ जज्बात लिखती हूं
    मैं उसमें हमको गुमनाम लिखती हूं
    उसे मेरी दुनिया का मुकाम लिखती हूं
    मेरी स्याही से मैं सदियों के इश्क का इंतजाम लिखती हूं
    मैं उसमें उस पर यकीन लिखती हूं
    उसे आकाश मैं अपने आप को जमीन लिखती हूं
    मेरी स्याही से मैं हमारी जिंदगी बेहतरीन लिखती हूं
    वह मेरे रंगों से मोहब्बत करता है
    मैं उसके कौरेपन से मिले सुकून से
    वह मेरे अश्कों से मोहब्बत करता है
    मैं उसकी जिंदगी की सादगी से
    वह अपनी स्याही से मोहब्बत करता है
    मैं जो मेरी किताब है उससे !!
    © स्याही_22

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    मैं उसकी स्याही , वह मेरी किताब सा!

  • kd15aug 4h

    कुछ इस कदर...
    बदनाम हुए हम इस ज़माने में...
    तुमको सदियां लग जाएंगी...
    हमें भुलाने में..

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    बदनाम

    ©kd15aug

  • kd15aug 4h

    महज एक चांद गवाह था
    मेरी बेगुनाही का...
    और अदालत ने पेशी
    अमावस की रात मुकर्रर की...

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    बेगुनाही

    ©kd15aug

  • shaill 6h

    #jindgi #जिंदगी #जज्बात #रिश्ते

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    इमारते बड़ी और दिल छोटे होने लगे हैं,
    जज्बातों के सौदे बड़े सस्ते में होने लगे हैं।
    ©shaill

  • flame_ 6h

    वही आँगन काँटों से भरा,
    वही बंजर बगीचा था,
    वही सूखे पत्ते जो मेरे शिथिल मन और
    मंद गति के बहाव में
    चलते जीवन को दर्शाते,
    वही टूटा हुआ दरीचा था,
    इसके इलावा कुछ ना नज़र आता था,
    ये कैसा शंकाओं और निराशाओं ने घेरा था?!
    हर इक पल जो स्नेह से सींचा था,
    नफरतों का अंश कैसे उसने खींचा था?
    शोर था कुछ अंजाना सा,
    जानती थी उसे,
    नाजानें क्यों लगता था पहचाना सा,
    एकांत पसंद था इसके बावजूद भी
    अकारण ही,
    सब कुछ दूर जाने का लगता महज़ बहाना सा,
    हम्मम...पास में दरीचा था,
    पर वो प्रसन्नता का संसार ना अबतक रचा था,
    दुःखों से पीड़ित फ़कत सज़ा था।
    ©flame_

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    दरीचा

    ©flame_

  • varun1143 8h

    चलते हुए वक्त को हम यूं ही नहीं रखते।
    जलते हैं हम के हम;
    अपने आप से के हम अपने आप को बदल नहीं सकता ;
    हम अच्छे पतों में जी ते हैं हम;
    मगर हम बुरे वक्त नहीं चाहते।

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    वक्त के पल

  • varun1143 8h

    जिंदगी के वक्त में हम अपनी सोच को हर वक्त बदलते हैं।
    हर जिंदगी के पहलुओं में हम अपने करवटें बदलते हैं।
    चाहते हैं हम हर एक लम्हे हो;
    उस को पाने के लिए हम ;
    अपने आप को बदलते हैं।

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    हमेशा हमें बदलते रहना चाहिए।
    जिंदगी में हमें हमेशा दूसरों की समस्या को समझना चाहिए।

  • sabdokbanse 9h

    सत्य के बाण पर असत्य नही टिकता।
    लाख तुम जोड़ लगाओ,सत्य नही बिकता।
    घनघोर घटा भले सोचे अंधियारा करने की
    किन्तु सूरज निकलने पर धुन्ध नही टिकता।।

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    सत्य

    ©sabdokbanse

  • kuchunkahibaatein10 12h

    सबसे खतरनाक होता है मुर्दा शांति से भर जाना -पाश

    पाश द्वारा लिखी गई यह कविता काफी है मन में लाखों सवाल पैदा करने के लिए।क्या चुप रहना इतना खतरनाक और बुरा है?
    जब बच्चा जन्म लेता है,वो रोकर खुद को अभिव्यक्त करता है।जब उसे भूख लगती है,असहज महसूस होता है,वह रोता है। अपनी पूरी शक्ति लगाकर,अपनी आवाज़ पहुंचाता है।फिर वो बड़ा होने लगता है,बोलना सीखने लगता है।पर इसी के साथ एक चीज और सीखता है,चुप रहना।घर से लेकर विद्यायल तक,वो चुप्पी की संस्कृति का शिकार बनता जाता है।'finger on your lips','keep silence',' मुंह बंद कान खुले','चुप रहो बड़े बात कर रहे है','ध्यान से सुनो',
    पर इसके आगे क्या?ध्यान से देखने और सुनने के बाद क्या करना चाहिए,शायद ही कोई बताता है।
    क्या हमने बोलना सिर्फ इसीलिए सीखा कि जरुरत आने पर चुप रह सके?
    सवाल करने और बोलने वालो के लिए समाज ने कुछ उपनाम बना रखे है,मूर्ख,बिगड़ैल,बदतमीज और ना जाने क्या क्या।इन उपनाम को पाने का 'डर ' चुप्पी तोड़ने नहीं देता।हम डर से हार जाते है और अंत में मर जाते है।यही चाहता है समाज,हम डरे रहे और घुटने टेक दे उन प्रथाओं के सामने जो गलत है,उन
    चीज़ों के सामने जो गलत है।हां,हम डर से हार जाते है और मृत्यु से पहले ही मर जाते है।अगर ज़िन्दगी को असल में जीना है,तो बोलना सीखना होगा।
    जबतक चुप्पी है,अत्याचार होते रहेंगे।जो जैसा चल रहा है वैसा चलता रहेगा।सच ख़ामोश रहेगा और अन्याय दिनोदिन बढ़ता जाएगा।इसलिए जरूरी है इस चुप्पी को तोड़ना।
    चुप्पी हमें तोड़े इससे पहले हमें चुप्पी को तोड़ना होगा।
    अंत में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ साहब की कुछ पंक्तियां ही कहना चाहूंगी
    बोल कि लब आज़ाद है तेरे
    बोल कि सच ज़िंदा है अब तक
    बोल जो कुछ कहने है कह ले
    बोल कि लब आजाद है तेरे

    कुछ गलत लिखा गया हो मुझसे,तो उसके लिए माफ़ी।
    आशा है,आप मेरी गलती मुझे बताएंगे,चुप नहीं रहेंगे।
    गलती सुधारने से ही इंसान सीखता है,मै भी सीखूंगी।

    #hindiurduwriters #humdekhenge #bolkelabaazad haitere #hindiwriters #aawazuthao #du #breakthesilence
    @naman_khandelwal @jayraj_singh_jhala @shiv__ @vandna

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    चुप्पी

    चुप्पी बढ़ा देती है शोषणकर्ता की हिम्मत और शोषित की विवशता
    चुप्पी खत्म कर देती है मनुष्य के सोचने - समझने की शक्ति
    एक चुप्पी खत्म कर देती है उन तमाम विचारों को
    जो ले सकते है एक जन आंदोलन का रूप
    जो ला सकते है समाज में बदलाव
    जो आवाज़ दे सकते है अत्याचार को सहती ख़ामोशी को
    जो बदल सकते है तुम्हारी,मेरी और हम सबकी ज़िन्दगी को।

    इसलिए जरूरी है इस चुप्पी को तोड़ना।
    चुप्पी हमें तोड़े इससे पहले हमें चुप्पी को तोड़ना होगा।
    ©kuchunkahibaatein10

  • barbad 12h

    अकेले-अकेले बदल! रहे है
    यहीं! पर, मैं! और सराऊंडिंग!


    ��

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    किसी लश़्कर का तीर निकला था
    पर ये क्या
    के जख़्म के जगह, इश़्क हो गया..!

  • tamas93 12h

    #डर #खौफ़
    #बचपन

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    खौफ़ की चिंगारी
    बचपन से है
    जेहन में,
    बस कुछ मौकों पर
    आग दहक
    उठती है...
    ©तमस

  • mrpushpendrayadav 13h

    जो सूख जाते है लेकिन छलक नहीं पाते..
    उन आसुओं को मोहब्बत सलाम करती है....

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    छलक

    जो सूख जाते है लेकिन छलक नहीं पाते..
    उन आसुओं को मोहब्बत सलाम करती है....
    ©mrpushpendrayadav

  • philosophic_firefly 14h

    यहां बारिश अभी भी हो रही है। धीरे धीरे। मगर बहुत शान से। मैंने देखा तो मैं उदास हो गई,क्यूंकि बारिश कितनी प्यारी लग रही है और रात के समय मैं उसे निहार नहीं सकती। काश! कोई एक ऐसा कमरा होता जहां एक खिड़की होती और मैं बारिश को रात भर जाग कर देख सकती। मैं उदास महसूस कर रही हूं अब!

    मुझे बारिश बहुत पसंद है! अंधेरे में टपकती हुई, मोतियों की तरह। भला कौन रात बारह बजे ऐसे देखता होगा बारिश? भला ऐसे कौन लिखता होगा बारिश के बारे में, इतनी रात को?

    कोई तो होगा, मेरी ही तरह।

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    बारिश

    बर्फ़ के नन्हे छोटे कतरे
    गिरते रहे बारिश बनकर
    और हमें दिखते रहे बूंदों की तरह
    पिघले हुए
    ठंडे ठंडे।

    अभी जब मैं सो कर उठी
    मैंने देखा
    मेरा आंगन भीगा हुआ है
    इसी बारिश की बूंदों से।

    मैंने सिर को दुपट टे से ढका
    और बढ़ चली आंगन से आगे
    घर के दरवाज़े की तरफ
    बारिश ने मुझे हल्का सा
    छू लिया था, मगर भिगोया नहीं।

    पागल बारिश!
    प्यारी बारिश!
    उसे क्या पता मैं उसे देखने के लिए
    रात बारह बजे
    उठी हूं और घर के दरवाज़े के पास खड़ी
    हो गई हूं।

    ये देखने के लिए की बारिश
    कैसी लग रही है।

    नीम के पेड़ से सटा हुआ
    बिजली का खंभा
    और फिर उसमे जलती स्ट्रीट लाइट
    की सफेद रोशनी
    आह! सचमुच बारिश की बूंदें
    साफ दिखाई पड़ रही थीं।

    मैं दो मिनट तक देखती रही
    खंभे के पास
    सफेद रोशनी में चमकती
    बारिश की बूंदों को
    कितनी सुंदर थी वो!
    मैंने चाहा कि रात भर निहारती रहूं
    खड़े होकर वो स्ट्रीट लाइट के पास
    गिरती हुई चमकती बूंदें।

    पर ऐसा हो न सका।

    भला रात बारह बजे
    कौन निहारता है ऐसे बारिश को
    और उनकी बूंदों को
    इस सुनसान अंधेरे में
    और खामोशी के सन्नाटे में!
    भला कौन?

    मैं लौट पड़ी
    कमरे की तरफ!

    दिल में एक बार सोचा
    की काश
    मेरा एक ऐसा घर होता
    जहां मेरे कमरे में बड़ी सी खिड़की होती
    और उस खिड़की के सामने
    एक बड़ा सा पेड़
    जो स्ट्रीट लाइट के पास ही होता
    तब मैं रात भर जग कर
    देखती चमकती हुई रोशनी में
    बारिश की प्यारी बूंदे।

    ©philosophic_firefly