#2357

59262 posts
  • vinaypandey84 16m

    #कवि
    #शायर
    #दर्द
    #अल्फ़ाज़

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    ©

  • yuvrajnayak 1h

    छोटी छोटी खुशीयां
    हमे जिने का सलीका सिखाती है
    जिंदगी के हर मोड़ पर घर परिवार दोस्तों मे
    बस इसे सार्थक करना जरूरी है
    फिर पता नही इन्सान कयुं इतना मगरुरी है

    किसी दोस्त ने कहा आ यार बैठ
    अगर हम नही बैठे तो समझो
    हम ने एक छोटी सी खुशी को नजरअंदाज कर दिया

    इतनी भी कया जलदी है
    जो हमारे पास कोई आया
    तो हम ने कम वक्त का हवाला देकर टाल दिया
    अरे यार कुछ तो सोचो शायद
    उसकी मुलाकात मे कोई हमारी ही खुशी छुपी हो

    माहौल संगत हालात चाहे कैसे भी हो
    पर उसमे कही ना कहीं एक खुशी छुपी होती है
    जिसे हमे सिखने की जरुरत है

    हम ने अगर दो शब्द मुसकुरा कर बोल दिये तो
    समझो हम ने किसी को छोटी सी खुशी भेंट कर दी

    दोस्तों जब मै ये पंक्तियां टाइप कर रहा था
    तो मेरा एक दोस्त मेरे पास
    कोल्ड ड्रिंक लेकर आया खोलकर मुझे दी

    उस वक्त मै भी यह कह सकता था
    की मेरे पास वक्त नही
    पर नही हमे ऐसा नही करना है

    यही होती है वो छोटी छोटी खुशीयां

    तो मैने मुस्कुराहट के साथ उसका अभिनंदन किया

    उसके चहरे पर एक छोटी सी खुशी थी
    जिसने मुझे भी खुश किया . Next.... रिश्ता
    ������ ����������

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    #.umeed 53

    छोटी छोटी खुशीयां

  • _suprabhat_ 1h

    मजदूर भूका सोता है इस देश का या फिर कर्ज केकारण अपनी जिंदगी खतम कर लेता है इस देश में हर वर्ग तरक्की करेगा आगे बढ़ेगा पर मजदूर बेचारा हर बार पिसेगा।

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    @

  • saurabhy 2h

    आज इस सुहावने बारिश के मौसम को देखकर सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता याद आ गई ।
    ❤❤❤

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    मेघा आऐ

    || सर्वेश्वरदयाल सक्सेना ||

    मेघ आए बड़े बन-ठन के, सँवर के ।
    आगे-आगे नाचती-गाती बयार चली
    दरवाजे-खिड़कियाँ खुलने लगीं गली-गली
    पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के ।

    पेड़ झुक झाँकने लगे गरदन उचकाए
    आँधी चली, धूल भागी घाघरा उठाए
    बाँकी चितवन उठा नदी, ठिठकी, घूँघट सरके ।

    बूढ़े़ पीपल ने आगे बढ़ कर जुहार की
    ‘बरस बाद सुधि लीन्ही’
    बोली अकुलाई लता ओट हो किवार की
    हरसाया ताल लाया पानी परात भर के ।

  • saurabhy 2h

    आज सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की पुण्यतिथि पर उनकी एक विशेष रचना
    ������

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    प्यार

     सर्वेश्वरदयाल सक्सेना »

    इस पेड में
    कल जहाँ पत्तियाँ थीं
    आज वहाँ फूल हैं
    जहाँ फूल थे
    वहाँ फल हैं
    जहाँ फल थे
    वहाँ संगीत के
    तमाम निर्झर झर रहे हैं
    उन निर्झरों में
    जहाँ शिला खंड थे
    वहाँ चाँद तारे हैं
    उन चाँद तारों में
    जहाँ तुम थीं
    वहाँ आज मैं हूँ

  • love_unlimited 3h

    प्रार्थना की मनोदशा आपको रिसेप्टिव और क्रिएटिव रखती है। कार्य (पुरुषार्थ) से पहले हृदय की भावपूर्ण अवस्था होनी चाहिए।

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    प्रार्थना

    "पुरुषार्थ की पृष्ठभूमि में प्रार्थना"

    *प्रार्थना का ज्ञानयुक्त अर्थ याचना करना नहीं है। प्रार्थना हृदय में उठी हुई भावपूर्ण अवस्था का नाम है। प्रार्थना आप किससे करते हैं, आपके प्रार्थना का निमित्त केंद्र बिन्दु कौन कैसा है यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि आपकी प्रार्थना की गुणवत्ता उत्तम हो। आपकी प्रार्थना में हृदय की सारी भावनाएं उड़ेल दी गई हों। जब भी आप हृदय की ऐसी अवस्था हो तब यूं समझें कि आप प्रार्थना पूर्ण अवस्था में हैं। यह अवस्था मेडिटेशन के दौरान भी हो सकती है। इसे आप लवलीन या कुछ भी नाम दें इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता। आपकी हृदय की ऐसी अवस्था से केवल इतना ही होता है कि एक कृतज्ञता का भाव उपजता है और आपकी क्रिएटिविटी और receptivity (ग्राहकता) की गुणवत्ता और क्षमता बढ़ जाती है। इससे ही पुरुषार्थ और इन्द्रिय जगत के अनुभव की गुणवत्ता भी बदल जाती है ।*
    ©love_unlimited

  • syaahi_22 3h

    वह मुझसे अक्सर उसके कौरे सफहों पर रंग बिखेरने को कहता है फिर जब मैं उससे पूछती हूं क्यों तो वह मुझे स्याही के रंगों में मोहब्बत बताता है !
    फिर,
    मैं उसमें प्यार लिखती हूं
    उससे किया गया इजहार लिखती हूं
    मेरी स्याही से शब्दों का आकार लिखती हूं
    उसमें मेरा इरादा लिखती हूं
    उस से किया हुआ वादा लिखती हूं
    मेरी स्याही से इश्क का कायदा लिखती हूं
    मैं उसमे कुछ राज लिखती हूं
    उसी के कुछ अल्फाज लिखती हूं
    मेरी स्याही से मैं शफक की परवाज लिखती हूं
    मैं उसमें कुछ ख्वाहिशात लिखती हूं
    उससे बनी है जो मेरी कायनात लिखती हूं
    मेरी सही से अपने कुछ जज्बात लिखती हूं
    मैं उसमें हमको गुमनाम लिखती हूं
    उसे मेरी दुनिया का मुकाम लिखती हूं
    मेरी स्याही से मैं सदियों के इश्क का इंतजाम लिखती हूं
    मैं उसमें उस पर यकीन लिखती हूं
    उसे आकाश मैं अपने आप को जमीन लिखती हूं
    मेरी स्याही से मैं हमारी जिंदगी बेहतरीन लिखती हूं
    वह मेरे रंगों से मोहब्बत करता है
    मैं उसके कौरेपन से मिले सुकून से
    वह मेरे अश्कों से मोहब्बत करता है
    मैं उसकी जिंदगी की सादगी से
    वह अपनी स्याही से मोहब्बत करता है
    मैं जो मेरी किताब है उससे !!
    © स्याही_22

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    मैं उसकी स्याही , वह मेरी किताब सा!

  • kd15aug 3h

    महज एक चांद गवाह था
    मेरी बेगुनाही का...
    और अदालत ने पेशी
    अमावस की रात मुकर्रर की...

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    बेगुनाही

    ©kd15aug

  • flame_ 5h

    वही आँगन काँटों से भरा,
    वही बंजर बगीचा था,
    वही सूखे पत्ते जो मेरे शिथिल मन और
    मंद गति के बहाव में
    चलते जीवन को दर्शाते,
    वही टूटा हुआ दरीचा था,
    इसके इलावा कुछ ना नज़र आता था,
    ये कैसा शंकाओं और निराशाओं ने घेरा था?!
    हर इक पल जो स्नेह से सींचा था,
    नफरतों का अंश कैसे उसने खींचा था?
    शोर था कुछ अंजाना सा,
    जानती थी उसे,
    नाजानें क्यों लगता था पहचाना सा,
    एकांत पसंद था इसके बावजूद भी
    अकारण ही,
    सब कुछ दूर जाने का लगता महज़ बहाना सा,
    हम्मम...पास में दरीचा था,
    पर वो प्रसन्नता का संसार ना अबतक रचा था,
    दुःखों से पीड़ित फ़कत सज़ा था।
    ©flame_

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    दरीचा

    ©flame_

  • varun1143 7h

    चलते हुए वक्त को हम यूं ही नहीं रखते।
    जलते हैं हम के हम;
    अपने आप से के हम अपने आप को बदल नहीं सकता ;
    हम अच्छे पतों में जी ते हैं हम;
    मगर हम बुरे वक्त नहीं चाहते।

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    वक्त के पल

  • varun1143 8h

    जिंदगी के वक्त में हम अपनी सोच को हर वक्त बदलते हैं।
    हर जिंदगी के पहलुओं में हम अपने करवटें बदलते हैं।
    चाहते हैं हम हर एक लम्हे हो;
    उस को पाने के लिए हम ;
    अपने आप को बदलते हैं।

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    हमेशा हमें बदलते रहना चाहिए।
    जिंदगी में हमें हमेशा दूसरों की समस्या को समझना चाहिए।

  • barbad 11h

    तुम्हारा सर से पाँव तक
    मेरे कलम के
    नोक पर है



    #धमकी
    ��
    ��

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    लिखते-लिखते कुछ शब्दों पर स्याह नहीं उभरा
    ज़िन्दगी एक झटका ले और फिर से चल

  • kuchunkahibaatein10 12h

    सबसे खतरनाक होता है मुर्दा शांति से भर जाना -पाश

    पाश द्वारा लिखी गई यह कविता काफी है मन में लाखों सवाल पैदा करने के लिए।क्या चुप रहना इतना खतरनाक और बुरा है?
    जब बच्चा जन्म लेता है,वो रोकर खुद को अभिव्यक्त करता है।जब उसे भूख लगती है,असहज महसूस होता है,वह रोता है। अपनी पूरी शक्ति लगाकर,अपनी आवाज़ पहुंचाता है।फिर वो बड़ा होने लगता है,बोलना सीखने लगता है।पर इसी के साथ एक चीज और सीखता है,चुप रहना।घर से लेकर विद्यायल तक,वो चुप्पी की संस्कृति का शिकार बनता जाता है।'finger on your lips','keep silence',' मुंह बंद कान खुले','चुप रहो बड़े बात कर रहे है','ध्यान से सुनो',
    पर इसके आगे क्या?ध्यान से देखने और सुनने के बाद क्या करना चाहिए,शायद ही कोई बताता है।
    क्या हमने बोलना सिर्फ इसीलिए सीखा कि जरुरत आने पर चुप रह सके?
    सवाल करने और बोलने वालो के लिए समाज ने कुछ उपनाम बना रखे है,मूर्ख,बिगड़ैल,बदतमीज और ना जाने क्या क्या।इन उपनाम को पाने का 'डर ' चुप्पी तोड़ने नहीं देता।हम डर से हार जाते है और अंत में मर जाते है।यही चाहता है समाज,हम डरे रहे और घुटने टेक दे उन प्रथाओं के सामने जो गलत है,उन
    चीज़ों के सामने जो गलत है।हां,हम डर से हार जाते है और मृत्यु से पहले ही मर जाते है।अगर ज़िन्दगी को असल में जीना है,तो बोलना सीखना होगा।
    जबतक चुप्पी है,अत्याचार होते रहेंगे।जो जैसा चल रहा है वैसा चलता रहेगा।सच ख़ामोश रहेगा और अन्याय दिनोदिन बढ़ता जाएगा।इसलिए जरूरी है इस चुप्पी को तोड़ना।
    चुप्पी हमें तोड़े इससे पहले हमें चुप्पी को तोड़ना होगा।
    अंत में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ साहब की कुछ पंक्तियां ही कहना चाहूंगी
    बोल कि लब आज़ाद है तेरे
    बोल कि सच ज़िंदा है अब तक
    बोल जो कुछ कहने है कह ले
    बोल कि लब आजाद है तेरे

    कुछ गलत लिखा गया हो मुझसे,तो उसके लिए माफ़ी।
    आशा है,आप मेरी गलती मुझे बताएंगे,चुप नहीं रहेंगे।
    गलती सुधारने से ही इंसान सीखता है,मै भी सीखूंगी।

    #hindiurduwriters #humdekhenge #bolkelabaazad haitere #hindiwriters #aawazuthao #du #breakthesilence
    @naman_khandelwal @jayraj_singh_jhala @shiv__ @vandna

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    चुप्पी

    चुप्पी बढ़ा देती है शोषणकर्ता की हिम्मत और शोषित की विवशता
    चुप्पी खत्म कर देती है मनुष्य के सोचने - समझने की शक्ति
    एक चुप्पी खत्म कर देती है उन तमाम विचारों को
    जो ले सकते है एक जन आंदोलन का रूप
    जो ला सकते है समाज में बदलाव
    जो आवाज़ दे सकते है अत्याचार को सहती ख़ामोशी को
    जो बदल सकते है तुम्हारी,मेरी और हम सबकी ज़िन्दगी को।

    इसलिए जरूरी है इस चुप्पी को तोड़ना।
    चुप्पी हमें तोड़े इससे पहले हमें चुप्पी को तोड़ना होगा।
    ©kuchunkahibaatein10

  • _nargis_firdous 14h

    धर्म- dharam
    مذھب-mazhab
    आतंकवाद- atankwaad

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    Vo jo do alfaaz the kaafi the,

    Kehte sunna hai humne bhi k,
    Aatankwad ka "धर्म" nhi hota,
    Par "مزھب" hr aatankwadi ka hota hai,

    Jo baat dilo m thi pr Zubaan katraa rhi thi,
    Dillo m baithe chor ko jo chupaa rhi thi,

    Ho gaya benaqaab aaj vo bhi आतंकवाद ka धर्म nahi "مذھب" btaate btaate,

    Vo jo do alfaaz the uske kaafi the..
    ©_nargis_firdous

  • sramverma 14h

    Date 24/09/2020 Time 12:00 AM #SRV

    ज्यादा पढ़ी लिखी
    कहाँ होती है आज भी माँ,

    पर अपनी संतान
    की भृकुटि पर उभर आए,

    आलेखों को अच्छी तरह
    पढ़ लिया करती है माँ,

    लड़ना नहीं आता उसे
    पर अपनी संतान के लिए,

    पुरे समाज से
    लोहा ले लेती है माँ !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

    Image's taken from Google/Facebook/pinterest credit goes to It's rightful owner.

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    ,

  • rashmi_sinha 15h

    मुझे शराब से महोब्बत नही है
    महोब्बत तो उन पलो से है
    जो शराब के बहाने मैं
    दोस्तो के साथ बिताता हूँ.

    ����
    शराब तो ख्वामखाह ही बदनाम है.
    नज़र घुमा कर देख लो इस दुनिया में
    शक्कर से मरने वालों की तादाद बेशुमार हैं!

    ����
    तौहीन ना कर शराब को कड़वा कह कर,
    जिंदगी के तजुर्बे, शराब से भी कड़वे होते है.

    ����
    कर दो तब्दील अदालतों को मयखानों में साहब;
    सुना है नशे में कोई झूठ नहीं बोलता!
    l����
    बर्फ का वो शरीफ टुकड़ा जाम में क्या गिरा
    बदनाम हो गया".
    "देता जब तक अपनी सफाई वो खुद शराब हो गया".

    ����
    ताल्लुकात बढ़ाने हैं तो
    कुछ आदतें बुरी भी सीख ले गालिब,
    ऐब न हों तो
    लोग महफ़िलों में नहीं बुलाते.


    ����
    अभी तो सेनेटाइजर का जमाना है
    वो भी शराब का ही भाई है.
    फर्क बस इतना है
    शराब अंदर से साफ करती है.
    और सेनेटाइजर बाहर से.

    ����
    सभी बेवड़े मित्रों को समर्पित
    ������������

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    एक ही विषय पर 6 शायरों का अलग नजरिया...

    1- Mirza Ghalib: 1797-1869

    "शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर,
    या वो जगह बता जहाँ ख़ुदा नहीं।"

    - इसका जवाब लगभग 100 साल बाद
    मोहम्मद इकबाल ने दिया......

    2- Iqbal: 1877-1938

    "मस्जिद ख़ुदा का घर है, पीने की जगह नहीं ,
    काफिर के दिल में जा, वहाँ ख़ुदा नहीं।"

    - इसका जवाब फिर लगभग 70 साल बाद
    अहमद फराज़ ने दिया......

    3- Ahmad Faraz: 1931-2008

    "काफिर के दिल से आया हूँ मैं ये देख कर,
    खुदा मौजूद है वहाँ, पर उसे पता नहीं।"

    - इसका जवाब सालों बाद वसी ने दिया......

    4- Wasi:1976-present

    "खुदा तो मौजूद दुनिया में हर जगह है,
    तू जन्नत में जा वहाँ पीना मना नहीं।"

    - वसी साहब की शायरी का जवाब साकी ने दिया

    5- Saqi: 1986-present

    "पीता हूँ ग़म-ए-दुनिया भुलाने के लिए,
    जन्नत में कौन सा ग़म है
    इसलिए वहाँ पीने में मजा नही।"

    - 2020 में हमारे एक शराबी मित्र के हिसाब से -

    "ला भाई दारू पिला, बकवास न यूँ बांचो,
    जहाँ मर्ज़ी वही पिएंगे, भाड़ में जाएँ ये पांचों"
    ©rashmi_sinha

  • drishtantyadav 15h

    कि वो मुझे कुछ ऐसे सताता है 
    पहले सिग्रेट जलाता है
    फिर मेरे जिस्म पे बुझाता है
    उसके बनाये निशान मैं सबसे छुपाती हूँ
    वो अच्छा है मैं सबसे यही बताती हूँ
    कि एक रिश्ता है जो मुझे निभाना है
    अर्धांगिनी हूँ उसकी तो उसे छोड़ के कहा जाना है
    हर दिन इस उम्मीद से मैं जीने लगती हूँ कि वो बदल जाएगा 
    वक़्त ही तो है थोड़ा ओर सही वो सवर जाएगा 
    मैं नही अकेली इस दौर में मेरी ओर भी सहेली है
    मैं तो एक हूँ उनमे ना जाने कितनी और पहेली है
    तुम्हे लगेगा मैं कमजोर हूँ जो ये जुल्म सहती हूँ
    मैं हरगिज़ नही हूँ ये बात सबसे कहती हूँ
    जब ब्याहा था बाबा ने बस इतना कहा था मुझसे 
    कि एक वादा कर मुझसे
    घड़ी कैसी भी क्यों न हो तुझे रिश्ता निभाना है
    गम कितने भी क्यों न हो तुझे सबसे गुज़र जाना है 
    बात मान कर उनकी बस रुक ही जाती हूँ .
    कभी कभी माँ को भी अपना हाल बताती हूँ
    ख़ौफ आता है कभी कभी ज़िन्दगी क्या नया लाएगी 
    माँ कहती है अक्सर ज़िन्दगी ही तो है गुज़र जाएगी 
    अब जो तू आई तो परिवार बिखरेगा 
    तू ही ना होगी तो वो कैसे संवरेगा...।।

    ©*Drishtant Yadav Amethi
    (Arpit)

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    अनकहे दर्द....

    ©drishtantyadav

  • badluckboy 16h

    याद रखना मित्रों

    जिनकी सबसे बनती है
    वो भरोसे लायक नहीं होते ।

    Good night #fake_peoples ������
    मेरी पीठ पीछे बुराई करने वालो की #मा_का_भरोसा कोलगेट ��

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    Fake_relation

    घर से लड़ , दो पल शुकून के बिताने बाहर निकला तो पता
    चला, आजकल लोग दिलों में भी दिमाग लिए फिरते है
    ©badluckboy

  • sabarmati_thakur 16h

    #mirakee #hindiwriters

    किसी ने छुआ ना था ऐसे मेरे बदन को,
    ये हवा जो जुल्फों से खेलने लगी आज
    तो हमसफ़र की कमी महसूस हुयी.

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    शरारती हवाएं

    ©sabarmati_thakur

  • shivam_raj 83w

    अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

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    जब कोई मातृभाषा में

    बोले तो गर्व से कहो ये हमारी भाषा है।

    Shivu