#2380

15624 posts
  • aayush_joshi 1h

    #बारिश #मौसम #हिंदी_रचना #mirkee #own_words

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    वर्षा

    कुछ तो है वर्षा के मौसम की अलग बात
    भर देती है हर चेहरों पर मुस्कान
    पहले बादलों को काला कर के
    आसमां और धरती का भेद मिटाता है ।
    फिर बिजली और बादलों की आवाजो से
    मानो चीख चीख कुछ कहना चाहता है ।
    पानी की बूंदे पड़ते ही व्यक्ति मानो
    अपना हर दुख दर्द भूल जाता है ।
    फिर धरती को सीच सीच कर
    पुनः प्रकृति को हरा भरा बनाता है ।
    जब एक छोटा सा बच्चा वर्षा के जल
    में उछल - उछल कर नहाता है ।
    वो मोटी - मोटी बूंदों की टप टप आवाज़
    मानो हृदय में वीणा वाद्य बजाता है
    इसीलिए बारिश का मौसम
    हम सबको इतना ज्यादा लुभाता है ।
    ©aayush_joshi

  • yuvrajnayak 2h

    छोटी छोटी खुशीयां
    हमे जिने का सलीका सिखाती है
    जिंदगी के हर मोड़ पर घर परिवार दोस्तों मे
    बस इसे सार्थक करना जरूरी है
    फिर पता नही इन्सान कयुं इतना मगरुरी है

    किसी दोस्त ने कहा आ यार बैठ
    अगर हम नही बैठे तो समझो
    हम ने एक छोटी सी खुशी को नजरअंदाज कर दिया

    इतनी भी कया जलदी है
    जो हमारे पास कोई आया
    तो हम ने कम वक्त का हवाला देकर टाल दिया
    अरे यार कुछ तो सोचो शायद
    उसकी मुलाकात मे कोई हमारी ही खुशी छुपी हो

    माहौल संगत हालात चाहे कैसे भी हो
    पर उसमे कही ना कहीं एक खुशी छुपी होती है
    जिसे हमे सिखने की जरुरत है

    हम ने अगर दो शब्द मुसकुरा कर बोल दिये तो
    समझो हम ने किसी को छोटी सी खुशी भेंट कर दी

    दोस्तों जब मै ये पंक्तियां टाइप कर रहा था
    तो मेरा एक दोस्त मेरे पास
    कोल्ड ड्रिंक लेकर आया खोलकर मुझे दी

    उस वक्त मै भी यह कह सकता था
    की मेरे पास वक्त नही
    पर नही हमे ऐसा नही करना है

    यही होती है वो छोटी छोटी खुशीयां

    तो मैने मुस्कुराहट के साथ उसका अभिनंदन किया

    उसके चहरे पर एक छोटी सी खुशी थी
    जिसने मुझे भी खुश किया . Next.... रिश्ता
    ������ ����������

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    #.umeed 53

    छोटी छोटी खुशीयां

  • saurabhy 3h

    आज इस सुहावने बारिश के मौसम को देखकर सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता याद आ गई ।
    ❤❤❤

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    मेघा आऐ

    || सर्वेश्वरदयाल सक्सेना ||

    मेघ आए बड़े बन-ठन के, सँवर के ।
    आगे-आगे नाचती-गाती बयार चली
    दरवाजे-खिड़कियाँ खुलने लगीं गली-गली
    पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के ।

    पेड़ झुक झाँकने लगे गरदन उचकाए
    आँधी चली, धूल भागी घाघरा उठाए
    बाँकी चितवन उठा नदी, ठिठकी, घूँघट सरके ।

    बूढ़े़ पीपल ने आगे बढ़ कर जुहार की
    ‘बरस बाद सुधि लीन्ही’
    बोली अकुलाई लता ओट हो किवार की
    हरसाया ताल लाया पानी परात भर के ।

  • syaahi_22 3h

    वह मुझसे अक्सर उसके कौरे सफहों पर रंग बिखेरने को कहता है फिर जब मैं उससे पूछती हूं क्यों तो वह मुझे स्याही के रंगों में मोहब्बत बताता है !
    फिर,
    मैं उसमें प्यार लिखती हूं
    उससे किया गया इजहार लिखती हूं
    मेरी स्याही से शब्दों का आकार लिखती हूं
    उसमें मेरा इरादा लिखती हूं
    उस से किया हुआ वादा लिखती हूं
    मेरी स्याही से इश्क का कायदा लिखती हूं
    मैं उसमे कुछ राज लिखती हूं
    उसी के कुछ अल्फाज लिखती हूं
    मेरी स्याही से मैं शफक की परवाज लिखती हूं
    मैं उसमें कुछ ख्वाहिशात लिखती हूं
    उससे बनी है जो मेरी कायनात लिखती हूं
    मेरी सही से अपने कुछ जज्बात लिखती हूं
    मैं उसमें हमको गुमनाम लिखती हूं
    उसे मेरी दुनिया का मुकाम लिखती हूं
    मेरी स्याही से मैं सदियों के इश्क का इंतजाम लिखती हूं
    मैं उसमें उस पर यकीन लिखती हूं
    उसे आकाश मैं अपने आप को जमीन लिखती हूं
    मेरी स्याही से मैं हमारी जिंदगी बेहतरीन लिखती हूं
    वह मेरे रंगों से मोहब्बत करता है
    मैं उसके कौरेपन से मिले सुकून से
    वह मेरे अश्कों से मोहब्बत करता है
    मैं उसकी जिंदगी की सादगी से
    वह अपनी स्याही से मोहब्बत करता है
    मैं जो मेरी किताब है उससे !!
    © स्याही_22

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    मैं उसकी स्याही , वह मेरी किताब सा!

  • tamas93 12h

    #डर #खौफ़
    #बचपन

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    खौफ़ की चिंगारी
    बचपन से है
    जेहन में,
    बस कुछ मौकों पर
    आग दहक
    उठती है...
    ©तमस

  • philosophic_firefly 13h

    यहां बारिश अभी भी हो रही है। धीरे धीरे। मगर बहुत शान से। मैंने देखा तो मैं उदास हो गई,क्यूंकि बारिश कितनी प्यारी लग रही है और रात के समय मैं उसे निहार नहीं सकती। काश! कोई एक ऐसा कमरा होता जहां एक खिड़की होती और मैं बारिश को रात भर जाग कर देख सकती। मैं उदास महसूस कर रही हूं अब!

    मुझे बारिश बहुत पसंद है! अंधेरे में टपकती हुई, मोतियों की तरह। भला कौन रात बारह बजे ऐसे देखता होगा बारिश? भला ऐसे कौन लिखता होगा बारिश के बारे में, इतनी रात को?

    कोई तो होगा, मेरी ही तरह।

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    बारिश

    बर्फ़ के नन्हे छोटे कतरे
    गिरते रहे बारिश बनकर
    और हमें दिखते रहे बूंदों की तरह
    पिघले हुए
    ठंडे ठंडे।

    अभी जब मैं सो कर उठी
    मैंने देखा
    मेरा आंगन भीगा हुआ है
    इसी बारिश की बूंदों से।

    मैंने सिर को दुपट टे से ढका
    और बढ़ चली आंगन से आगे
    घर के दरवाज़े की तरफ
    बारिश ने मुझे हल्का सा
    छू लिया था, मगर भिगोया नहीं।

    पागल बारिश!
    प्यारी बारिश!
    उसे क्या पता मैं उसे देखने के लिए
    रात बारह बजे
    उठी हूं और घर के दरवाज़े के पास खड़ी
    हो गई हूं।

    ये देखने के लिए की बारिश
    कैसी लग रही है।

    नीम के पेड़ से सटा हुआ
    बिजली का खंभा
    और फिर उसमे जलती स्ट्रीट लाइट
    की सफेद रोशनी
    आह! सचमुच बारिश की बूंदें
    साफ दिखाई पड़ रही थीं।

    मैं दो मिनट तक देखती रही
    खंभे के पास
    सफेद रोशनी में चमकती
    बारिश की बूंदों को
    कितनी सुंदर थी वो!
    मैंने चाहा कि रात भर निहारती रहूं
    खड़े होकर वो स्ट्रीट लाइट के पास
    गिरती हुई चमकती बूंदें।

    पर ऐसा हो न सका।

    भला रात बारह बजे
    कौन निहारता है ऐसे बारिश को
    और उनकी बूंदों को
    इस सुनसान अंधेरे में
    और खामोशी के सन्नाटे में!
    भला कौन?

    मैं लौट पड़ी
    कमरे की तरफ!

    दिल में एक बार सोचा
    की काश
    मेरा एक ऐसा घर होता
    जहां मेरे कमरे में बड़ी सी खिड़की होती
    और उस खिड़की के सामने
    एक बड़ा सा पेड़
    जो स्ट्रीट लाइट के पास ही होता
    तब मैं रात भर जग कर
    देखती चमकती हुई रोशनी में
    बारिश की प्यारी बूंदे।

    ©philosophic_firefly

  • n1dh1yadav 15h

    अपनी शायरी में हम अपने बिखरे हुए अल्फ़ाज़ लिखते है...
    कही आंसुओ की बात तो कही दर्द की सौगात लिखते है..!!

    #dardshayri...✍️

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    बेइंतहा दर्द को बहुत छुपाया है, हमनें...
    कुछ अश्क भी ना बहाया है, हमनें..

    इन हाथों में अपनी कलम थाम कर इन पन्नो को ही अपना
    हमदर्द समझकर बेशुमार दर्द इनको ही सुनाया हैं,हमने..!!
    ©n1dh1yadav

  • rashmi_sinha 15h

    मुझे शराब से महोब्बत नही है
    महोब्बत तो उन पलो से है
    जो शराब के बहाने मैं
    दोस्तो के साथ बिताता हूँ.

    ����
    शराब तो ख्वामखाह ही बदनाम है.
    नज़र घुमा कर देख लो इस दुनिया में
    शक्कर से मरने वालों की तादाद बेशुमार हैं!

    ����
    तौहीन ना कर शराब को कड़वा कह कर,
    जिंदगी के तजुर्बे, शराब से भी कड़वे होते है.

    ����
    कर दो तब्दील अदालतों को मयखानों में साहब;
    सुना है नशे में कोई झूठ नहीं बोलता!
    l����
    बर्फ का वो शरीफ टुकड़ा जाम में क्या गिरा
    बदनाम हो गया".
    "देता जब तक अपनी सफाई वो खुद शराब हो गया".

    ����
    ताल्लुकात बढ़ाने हैं तो
    कुछ आदतें बुरी भी सीख ले गालिब,
    ऐब न हों तो
    लोग महफ़िलों में नहीं बुलाते.


    ����
    अभी तो सेनेटाइजर का जमाना है
    वो भी शराब का ही भाई है.
    फर्क बस इतना है
    शराब अंदर से साफ करती है.
    और सेनेटाइजर बाहर से.

    ����
    सभी बेवड़े मित्रों को समर्पित
    ������������

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    एक ही विषय पर 6 शायरों का अलग नजरिया...

    1- Mirza Ghalib: 1797-1869

    "शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर,
    या वो जगह बता जहाँ ख़ुदा नहीं।"

    - इसका जवाब लगभग 100 साल बाद
    मोहम्मद इकबाल ने दिया......

    2- Iqbal: 1877-1938

    "मस्जिद ख़ुदा का घर है, पीने की जगह नहीं ,
    काफिर के दिल में जा, वहाँ ख़ुदा नहीं।"

    - इसका जवाब फिर लगभग 70 साल बाद
    अहमद फराज़ ने दिया......

    3- Ahmad Faraz: 1931-2008

    "काफिर के दिल से आया हूँ मैं ये देख कर,
    खुदा मौजूद है वहाँ, पर उसे पता नहीं।"

    - इसका जवाब सालों बाद वसी ने दिया......

    4- Wasi:1976-present

    "खुदा तो मौजूद दुनिया में हर जगह है,
    तू जन्नत में जा वहाँ पीना मना नहीं।"

    - वसी साहब की शायरी का जवाब साकी ने दिया

    5- Saqi: 1986-present

    "पीता हूँ ग़म-ए-दुनिया भुलाने के लिए,
    जन्नत में कौन सा ग़म है
    इसलिए वहाँ पीने में मजा नही।"

    - 2020 में हमारे एक शराबी मित्र के हिसाब से -

    "ला भाई दारू पिला, बकवास न यूँ बांचो,
    जहाँ मर्ज़ी वही पिएंगे, भाड़ में जाएँ ये पांचों"
    ©rashmi_sinha

  • drishtantyadav 16h

    कि वो मुझे कुछ ऐसे सताता है 
    पहले सिग्रेट जलाता है
    फिर मेरे जिस्म पे बुझाता है
    उसके बनाये निशान मैं सबसे छुपाती हूँ
    वो अच्छा है मैं सबसे यही बताती हूँ
    कि एक रिश्ता है जो मुझे निभाना है
    अर्धांगिनी हूँ उसकी तो उसे छोड़ के कहा जाना है
    हर दिन इस उम्मीद से मैं जीने लगती हूँ कि वो बदल जाएगा 
    वक़्त ही तो है थोड़ा ओर सही वो सवर जाएगा 
    मैं नही अकेली इस दौर में मेरी ओर भी सहेली है
    मैं तो एक हूँ उनमे ना जाने कितनी और पहेली है
    तुम्हे लगेगा मैं कमजोर हूँ जो ये जुल्म सहती हूँ
    मैं हरगिज़ नही हूँ ये बात सबसे कहती हूँ
    जब ब्याहा था बाबा ने बस इतना कहा था मुझसे 
    कि एक वादा कर मुझसे
    घड़ी कैसी भी क्यों न हो तुझे रिश्ता निभाना है
    गम कितने भी क्यों न हो तुझे सबसे गुज़र जाना है 
    बात मान कर उनकी बस रुक ही जाती हूँ .
    कभी कभी माँ को भी अपना हाल बताती हूँ
    ख़ौफ आता है कभी कभी ज़िन्दगी क्या नया लाएगी 
    माँ कहती है अक्सर ज़िन्दगी ही तो है गुज़र जाएगी 
    अब जो तू आई तो परिवार बिखरेगा 
    तू ही ना होगी तो वो कैसे संवरेगा...।।

    ©*Drishtant Yadav Amethi
    (Arpit)

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    अनकहे दर्द....

    ©drishtantyadav

  • sanjay_writes 17h

    जुदा वो हुये पर हम क्यों नही हो पायें ।
    खफ़ा वो हुये पर हम क्यों नही हों पायें ।
    एक हंम ही थे जो उनसे प्यार करते रहे ।
    बेवफ़ा वो थे पर हम क्यों नही हों पाये ।

    दिल के करीब आके जब वो दूर हो गये ।
    सारे हसीन्ं खाब मेरे क्यों चूर-चूर हो गये ।
    हमने वफ़ा निभायी तो बदनामिया मिली ।
    जो लोग बेवफ़ा थे वो मशूर क्यों हो गये ।

    गुजरे दिनों की धुधली हुयी बात की तरहा ।
    इन आंखों मैं जागता है कोई सपनों की तरहा ।
    उस से ही उम्मीद थी के निभाएगी साथ वो मेरा।
    लेकिन वो भी बदल गयी मेरे हुस्न-ऐ-नूर की तरहा ।

    एक फरेबी से एक मुलाकत बहुत है ।
    जितना भी दिया हमने तेरा साथ बहुत है ।

    दूनियाँ को दिल के दाग़ों को दिखाये किस तरहा ।
    ऐ ज़िन्दगि ये राज छुपाउ तों छुपाउ किस तरहा ।
    अपनी तबाहियों में मेरा हाथ बहुत है ।
    जितना भी दिया हमने तेरा साथ बहुत है ।

    टूटा मेरे दिल का आईना जब टूटे सब ही भ्रम मेरे ।
    होती है उमर प्यार की जीने के लिये कंम।
    मरने के लिये दर्द की एक रात बहुत है ।
    एक फरेबी से एक मुलाकात बहुत है ।
    जितना भी दिया हमने तेरा साथ बहुत है ।

    जुदा होने का अन्धेसा हमें जुदा होने से पहले था ।
    वो मुझ से थे इतने खुश खफ़ा होने से पहले था ।
    जुनुन्ं का दौर गुजरा तो मुझे भी भुला बैठे वो ।
    नमाज ऐ इश्क़ था लेकिन वफा होने से पहले था ।

    फरेबियत उसकी मिटाकर आया हूँ ।
    सारे खतो उसके पानी मैं बहाकर आया हूँ ।
    कोई पढ ना ले उस फरेबी के वादो को ।
    इसलिये पानी में भी आज आग लगाकर आया हुँ।

    मेरा ताजुब अजब नही है ।
    वो शक्स पहले सा अब नही है ।
    वफ़ा का क्या गिला करु में उस से यारो ।
    वो मेरा था कब जो अब नही है ।

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    बदले हुए लोग

  • tamas93 18h

    #मौत
    #यादें
    #तमस

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    भूलना जरूरी था, जिंदा रहने के लिए,
    पर उसने मौत चुनी
    ©tamas93

  • sabdokbanse 19h

    फिर से नारी का अपमान।
    युद्ध होगा अब घमासान।।
    देख दुर्योधन तूने कर
    दिया कैसा दुर्व्यवहार।
    अब विनाश का तांडव होगा,
    नष्ट होगा तेरा कुल परिवार।।
    पँचाली के पाँच पाण्डव
    देखते रहे होकर मौन।
    द्रौपदी बोली पाँचो है
    एक से बढ़कर एक
    फिर भी जवाब देगा कौन।।
    फिर पँचाली बोली अरे
    जागों भीष्म पितामह।
    तुम्हारी लाज लूट रही
    ,हँसी उड़ाता स्वयं जहाँ।।
    दुस्साहस करता फिर
    दुःसाशन चिर बदन खिंचने लगा।
    तभी क्या अग्नि क्या वायु
    सबका मन तमतमाने लगा।
    अरे कोई तो मेरी लाज बचाओ।
    अरे कोई आवाज उठाओ।
    भरी सभा में अपनी माँ के
    दूध का कोई तो शौर्य दिखाओ।
    देखते रहे मौन होकर सारे
    के सारे ज्ञानी यौद्धा पण्डित।
    किन्तु अत्याचारी खेलता रहा
    बनकर सबके समक्ष ढीठ।
    तभी विदुर ने रोकने को आवाज उठाया।
    किन्तु कर्म का अँधा उसको तुरन्त धमकाया।।
    ये सुनते ही विदुर बोला इससे पहले की
    कायर की सभा में स्वयं के नजर मर जाऊं।
    इससे बेहतर होगा कुछ ना करू तो कम
    से कम इस दागी सभा से चला जाउ।।
    अब द्रोपदी के सामने केवल
    कृष्ण ही एक आस बचा।
    कृष्ण ही पालनहार आयेंगे जरूर
    ये ही आखिरी मन में विस्वास जगा।
    कृष्ण ही है सबके रक्षक
    बुलाने पर आना उनका तय रहा।
    कृष्ण को मन ही मन उन्होंने फिर याद किया।
    आओ गिरधर लाज बचाओ
    ये मन से फरियाद किया।
    फिर क्या था चिर खींचते
    खींचते दुःसाशन हुआ परेशान।
    आखिर हार गया टूट गया
    मन से झूठा अभिमान।।
    अब तो मानो सभी हो गए पानी पानी।
    सभी लगे बोलने पक्ष में
    क्या ज्ञानी क्या अज्ञानी।।
    फिर सभी लोग सहित दुर्योधन
    दुःसाशन का विनाश हुआ।
    और देर सही सम्पूर्ण सत्य
    नीति का विकास हुआ।।

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    नारी का अपमान

  • badluckboy 22h

    आज की ये कहानी सच्ची घटना पर आधारित है।
    कैसे एक लड़की न अपने जीवन की परेशानियों का सामना किया आपको इस कहानी में पढ़ने को मिलेगा ।।

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    लड़के ने लड़की से पुछा

    कोर्ट मैरीज करनी है या माता पिता से पूछ कर अरैंज मैरीज
    करनी है



    लड़की ने कहा हम गरीब हैं और मेरे पिताजी अभी शादी का खर्चा नहीं उठा सकते



    और



    मैं अपने माता पिता का बहुत सम्मान करती हूँ मैं भागने की बजाय मर जाना पसंद करूँगी



    लेकिन आप मेरे माता पिता से बात कर सकते हैं बाकी वे जैसा कहेंगे वैसा ही होगा




    लड़के ने कहा “मुझे क्या परेशानी होगी मैने कौन सी दहेज की मांग रखनी है




    तुम कह रही हो तो मैं तुम्हारे माता पिता से बात कर लूंगा



    लड़का उसके घर जाता हा और लड़की के माता पिता से बात करता है



    लड़की के पिता ने कहा मेरे पास तो केवल 1000 रूपये ही पड़े हैं





    मैं शादी कैसे करूं लड़के ने कहा शादी तो हजार रूपये में भी हो जाती है





    लड़की के पापा ने कहा वो कैसे लड़के ने कहा आप कल मेरे साथ चलना





    अगले दिन लड़का आता है और कहता कि अपने परिवार के खास खास सदस्यों को लेकर मेरे साथ चलिये






    वो सब उसकी गाड़ी में बैठ जाते हैं थोड़ी दूर जाकर एक मिठाई की दूकान के सामने लड़का गाड़ी रोकता है़






    और कहता है पापाजी आप दो किलो बढ़ीया सी मिठाई ले आईये






    वो मिठाई ले आते हैं उसके बाद लड़का कोर्ट के साम गाड़ी रोकता हैे और कोर्ट में लड़की के साथ शादी का रजिर्स्टेशन करवाता है







    लड़का कहता है पिताजी हो गयी शादी अब आप मिठाई बांट दीजिए और हो गयी एक हजार की मिठाई में शादी




    आपको और कोई खर्चा नहीं करना है लड़की के पिता की आंखों में आंसू आ जाते हैं




    लेकिन एक महिने बाद ही लड़के की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है



    लड़की दुर्घटना वाली जगहा पर पहूँचती है लेकिन मृत शरीर डेड बॉडी को देखकर बेहोश हो जाती है





    लड़के का पोस्टमार्टम होता है और मृत शरीर डेड बॉडी और खून से लथपत कपड़े घर आ जाते हैं




    लड़के का अंतिम संस्कार कर दिया जाता है������

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    Caption से पढ़ना शुरू करे,,


    लड़की ने वो खून से सने कपड़े धोबी को धोने के लियें दिये




    धोबी ने कहामैडम ये कपड़े फैंक दीजिए





    ये बेकार हो गये है







    लेकिन लड़की ने कहा तुम रहने दो









    मेरे पास ये कपड़े उनकी याद के तौर पर रहेंगे मैं इन कपड़ों को किसी को नहीं दूंगी







    लड़की ने कपड़े खुद धोये लेकिन खून के दाग नहीं गये








    लड़की सो गई सपने में लड़की को एक बुढ़़ीया नजर आयी





    लड़की डर कर उठ जाती है अगले दिन लड़की ने कपड़े फिर धोये







    लेकिन दाग नहीं गयेरात को लड़की को फिर वही भयानक चेहरे वाली बुढ़़ीया नजर आई








    उसने कहा ये दाग ऐसे ही नहीं जाने वाले








    ऐसा कुछ हफ्तों तक चलता रहा



    लड़की के लियें सोना मुश्किल हो गयाएक दिन लड़की के घर की घंटी बजी


    लड़की ने दरवाजा खोला


    तो




    तो






    लड़की डर के मारे चीख पड़ी






    वही सपने में नजर आने वाली बुढ़ीया उसके सामने खड़ी थी


    उसने कहा डरो नहीं बेटी मैं जानती हूँ कि तुम कपड़ों के दाग से परेशान हो लेकिन वो दाग ऐसे नहीं जाने वाले क्योंकि

    असल में तुम वाशिंग पाउडर ही गलत प्रयोग कर रही हो यह लो
    पतंजलि वाशिंग पाउडर
    इससे दाग जरूर चले जाऐगे

    और


    वो बुढ़ीया विना पैसे लिये ही चली जाती है


    लड़की ने उन कपड़ो को पतंजलि वाशिंग पाउडर से धोया तो दाग एक दम से चले गये

    तो दाग निकालने के लियें

    पतंजलि वाशिंग पाउडर

    प्रयोग कीजिए






    खून तो मेरा भी बहुत खौला था .... पर क्या कर सकते है।



    ©badluckboy

  • prakriti_iipsaa 1d

    ★कुछ अधूरे से★
    भाग-2 पृष्ठ-4

    बड़ी बहन जो कभीं छोटी छोटी कह के चिढ़ाया करती थी अब वो भी अपशब्दों के बौछार कर चली जाती थी। एक तरफ माँ के डांट में माँ का प्रेम दिख रहा था तो दूसरी तरफ अपने प्रति अविश्वास उसे कष्ट दे रहा था। ना सबूत ना गवाह मुजरिम करार कर दिया गया, ना आग लगी ना धुआं उठा कुछ जला सा कुछ राख सा हुआ, वो अब गुमसुम सा रहने लगा।

    इस समय वो नौवीं में था, सबकुछ अनसुना कर वो अपने पढाई पर ध्यान देना चाहता था क्योंकि ऐसे में वो बोर्ड की परीक्षा में अच्छे अंक कैसे ला पाता। उसे अंग्रेजी और गणित में अनुशिक्षण (tuition)
    की आवश्यकता महसूस हुई। वह अनुशिक्षण हेतु गया, नियमतः पहले महीने का शुल्क अनुशिक्षक पहले ही ले लेते हैं तो अनुशिक्षक के पिता उससे रोज शुल्क मांगते थे जबकि उसने 15 दिन बाद देने को कहा था। एक महीने बीत गये अध्यापक महोदय त्रिकोणमिति भी
    नहीं पढ़ा पाये, उसने एक महीने का शुल्क देकर छोड़ दिया।

    उसने सोचा कि वो खुद ही पढ़ के अच्छे अंक लायेगा, पर वो पढ़ नहीं पा रहा था कोई ना कोई विघ्न पड़ जाता था। नौवीं तो उत्तीर्ण हो गया, दशवीं का परीक्षा नहीं देना चाह रहा था लेकिन उसे परीक्षा छोड़ने की इजाजत नहीं थी, किसी भी हाल में उसे परीक्षा तो देना ही था।
    अब अच्छे अंक लाने का उसका लक्ष्य पूरा नहीं होने वाला था, उसने जानबूझकर दो विषय की परीक्षा को गड़बड़ कर दिया क्योंकि उसे कम अंक से उत्तीर्ण होना मंजूर नहीं था। उसने सोचा चलो इसी बहाने देख लेंगे कि अनुत्तीर्ण होने वाले बच्चों के साथ लोग कैसा व्यवहार करते हैं....

    #shyam_jee_mirzapuri
    23/09/2020

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    कुछ अधूरे से

    भाग-2
    पृष्ठ-4
    (अनुशीर्षक पढें)
    ©prakriti_iipsaa

  • love_unlimited 1d

    जितना मौन रहोगे उतने ही शक्तिशाली बनोगे। उतना ही लोग आपको ज्यादा बुद्धिमान समझेंगे और आपकी वचनों को सुनने को उत्सुक होंगे।

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    "मौन की कीमत"

    *शान्त रहना सबसे अच्छा गुण है। जितना ज्यादा समय हो सके मन और वाणी के मौन पर अटैंशन होना चाहिए। आपकी सुखद सहज नींद के आठ घंटे तो मौन के ही गिने जाएंगे। इसके इलावा सुबह और शाम के कम से कम चार घंटे और ऐसे हों जब आपका मन और वाणी के मौन पर अटेंशन होना चाहिए। जितना आपका मन और वाणी का व्यर्थ कम होगा उतना आप शक्ति इकट्ठा करते जाते हैं। यह शक्ति किसी भी क्षेत्र में आपकी प्रखरता को बढ़ाएगी। अंतर्मुखी होना सहज हो जाएगा। अंतर्मुखी होने से बीज रूप परमात्मा के साथ तारतम्यता सहज होती है। जितना मौन रहोगे उतने ही शक्तिशाली बनोगे। उतना ही लोग आपको ज्यादा बुद्धिमान समझेंगे और आपकी वचनों को सुनने को उत्सुक होंगे। इसलिए ही तो "शान्त रहना" को सबसे अच्छा गुण कहा जाता है।*
    ©love_unlimited

  • _khusi 1d

    शुकर करो, तुम्हारे हर इल्जाम सहते हैं..
    वरना,
    अच्छी बात भी लोग सौ-बार सोचकर करते हैं!!

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    ©_khusi

  • ___shweta 1d

    #98th


    मौत के मुंह सी लगने लगेगी ज़िन्दगी,
    पर मौत को तुम गले से ना लगा लेना
    सोचना तुम खुद औरो के बारे में
    और ज़िन्दगी जीने की एक नई कोशिश को गले लगा लेना
    संभाल लेना खुद को तुम उस दुख में भी
    और थोड़ा सा मुस्करा देना,
    लगेगा कोई आस्तित्व नहीं मेरा,
    वहीं एक नए आस्तित्व की तुम छाप बना देना,
    खुद को इतना बड़ा बना लेना,
    कि छोड़ने वाले को भी खुद से मिलने के लिए तरसा देना...��


    #SHWETA ✍️






    #Mirakee #nature #love #travel #life #inspiration #friendship #poetry #thoughts #diary


    #Mirakee

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    यहां मोहब्बत कम और टूटे दिल हजार है
    ये मोहब्बत का बाज़ार है मेरी जान
    और इसमें इश्क़ करके दिल तोड़ने वाले तमाम है,
    कोई आएगा तुम्हारे इस दिल से खेलने
    और कुछ दिन अपना मन तुमसे बहलाए गा,
    ना आना उसकी बातो में कभी तुम ,
    वो मोहब्बत को खिलौना बनाएगा
    और तुम होगे उसके लिए एक मात्र खिलवाड़ ,
    और वो तुम्हारे दिल से खेल चला जाएगा
    होश तुम्हे तब आएगा जब उसका खिलौना
    तुम पुराना हो जाओगे ,
    और खेल रहे इंसान को भुलाना
    तुम्हारे लिए ना मुमकिन लगने लगेगा...

    श्वेता✍️
    ©___shweta

  • delta 1d

    क्यों थी ये उलझन
    आखिर जानती क्या थी मैं उसके बारे में?
    बस उसका नाम और कूछ भी तो नहीं
    कैसे दिखता है कैसे बोलता है
    रहता कैसे है
    कुछ भी नहीं पता था
    बस पता था तो सिर्फ उसकी बातों का
    जो वो मुझसे किया करता था
    भीनि भीनि खुशबुओ में

    शायद उसे लिए ये महेज एक आम बात रही होगी
    पर मेरे लिए नहीं थी
    उसके लिए उसका सांसें लेना बेहद नोर्मल रहा होगा
    पर मेरे लिए अब अजाब बनता जा रहा था
    जाने क्या उलझन थी उस दिन
    उससे बात नहीं हो पा रही थी और मैं अंदर ही अंदर कुढ़ती जा रही थी

    मैंने भी सोच ही लिया
    उसे फ़िक्र नहीं जब कोई तो मैं क्यों दिखाऊं की मेरे मन में क्या है?
    दिन जैसे तैसे बीत ही गया
    तो अब रात ने तंज कसना शुरू कर दिया
    आंख लगी जब तो पहली बार उसे ख्वाबों में देखा
    आचानक से आँख खुली तो
    लगा सीने से दिल निकल लिया हो किसी ने
    वो मुझे छोड़ने वाला था
    ख्वाँब में
    इतना असर कैसे हो सकता है किसी गैर शक़्स का
    मिली नहीं कभी देखा तक नहीं सामने से
    और हक़्क़् इतना गहरा की शादीशुदा जोड़ा भी सुन के शर्मा जाए मेरे दिल की बेवकूफी पर
    नम आँखें लिए मैं बिस्तर से उठी
    पानी पिया और फिर यादों की गहराई में डूबती चली गई
    कहीं सच में यही वो शक़्स् नहीं जिसके बारे में लोग कहते हैं की उसके आने पर सब कुछ बादल जाता है
    यहाँ तक की खुद को आईने में देखने का अंदाज़ भी
    दिल को थोड़ी तसल्ली देकर मनाया
    और फिर खुद सो गई

    और ये कम्बखत रेडिओ वालोंं को गाने की लिस्ट कौन देता है?

    ��।।दो नैनो में आंसू भरे हैं।।
    ।।निन्दिया कैसे समाये।।��


    #adhoori_mohabbat_p3

    @eunoia__ this is thr leftover ������
    body limitation isn't allow me to post it whole

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    अधूरी मोहब्बत

    सुबह वहीं ख्याल
    कल सारा दिन बात नहीं हुई
    उसे याद तक नहीं आई मरी?
    हुह्
    किसी और से बात कर ली होगी उसने
    और भी फ्रैंड्स होंगे उसके
    बातें ही इतनी अच्छी करता है
    कैसे न हो कोई
    फोन वापस रख के मैं स्कूल के लिए निकली
    पिछली रात वाली थकान साफ चेहरे पर झलक रही थी
    मन बहुत उदास था
    और नज़र बार बार मोबाइल फोन पर जाकर रुक जाती

    तभी एक दोस्त ने पीछे से कहा
    कहाँ गुम हो?
    मैंने नहीं में सर हिला दिया

    ऐसे ही होता है क्या?
    जब कोई खामोश होता है तो बोलने का सारा सबब कहीं पुरानी पोटली में बंद कर के दूर तालाब में फेक देता है?
    ये ख़ामोशी पहली बार महसूस की थी मैंने

    बदरंगी समेटे शाम की रौशनी कमरे में दस्तक दे चुकी थी
    फिर से एक पूरा दिन ढलने को था और रात आने को बेबाक
    मायूसी संजोये उँगली पर मैंने उसे मेसज कर ही दिया
    और फोन रख के किचन में आगई

    रात को मेसज देखा उसका
    पर मैंने आज अपने पुराने प्रेमी से मिलने का मन बना
    रखा था
    वो भी नाराज़ सा था थोड़ा मुझसे
    मैंने भी सोचा क्यों ना उसे आज जलाया जाए

    उससे उसी के रक़ीब की बातें की जाए
    पर आज वो थोड़ी देर से आया
    मानो जैसे तापा हुआ बैठा हो
    मेरे प्यार की खबर हो चुकी थी उसे
    तभी बादलों की आड़ में छुपा छुपा फिर रहा था
    नजरें मिली तो ठहेर सा गया वहीं
    लुका छीपी देर तक नहीं चल पाइ उसकी

    कितना सुकून है ना इन खामोश हवाओ में?
    मैंने बातें शुरू की और अंत तक सब कह दिया
    एक आंसू पलके भीगाने को तैयार जाने कब से बेचैन था

    दोनों हाथों से चेहरा छुपाये मैं रोने लग गई
    आखिर गलती है क्या मेरी?
    मैंने नहीं मांगी थी कोई ऐसी दुआ जिसकी आजमाइश में मेरी जान निकले...

  • clustered_shots 1d

    It seems शौक बड़ी चीज़ है��✨

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    चुना,मक्खन और ताऊ से सब की ज़िन्दगी अच्छी चल रही थी
    फिर न जाने कम्बख्त दिल का आना जरुरी क्यों था
    ©clustered_shots

  • niddzz 1d

    जाग जाग ओ भोर के प्यासे तुझसे मिलने सुबह आयी
    नव किरणों की सजल सन्नहरी लटें , चूम कपोलों से टकराई।
    गई जगमगा जैसे कुछ क्षण को, अंजुलि में सागर भरलाई।
    तपते मेरे पांव के छाले, उनपर कोई रूई फिराई।
    भोर मेरे जीवन में आयि।
    क्या यह मेरा स्वप्न सृजन है, या है कोई मृग तृष्णा सा।
    ऐसी रचना क्यों बन आयी?
    है विधाता तेरे मन में भी था संशय ऐसा ही कुछ?
    जो तूने रचदिया हिमालय,सागर की लहरें फैलाई
    मैदानों में लिपटी हरियाली और कहीं बस रेत बिछाई?
    ये संसार भरा नदानो से,जिनके बात ये समझ ना आयी।
    ऐसे में एक बिरला कला का प्रेमी, जिसे ये लीला समझ में अाई,
    भोर के क्षढ है भरे रंगों से,पर सबको ये नजर ना आयी।
    उठा अचानक कला का प्रेमी, कलम कुची में आग लगाई।
    बैठा पल भर मौन भवन में, मिली सांस जब याद भुलाई।

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    भोर की कथा

    ©niddzz