#2396

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  • flame_ 5h

    वही आँगन काँटों से भरा,
    वही बंजर बगीचा था,
    वही सूखे पत्ते जो मेरे शिथिल मन और
    मंद गति के बहाव में
    चलते जीवन को दर्शाते,
    वही टूटा हुआ दरीचा था,
    इसके इलावा कुछ ना नज़र आता था,
    ये कैसा शंकाओं और निराशाओं ने घेरा था?!
    हर इक पल जो स्नेह से सींचा था,
    नफरतों का अंश कैसे उसने खींचा था?
    शोर था कुछ अंजाना सा,
    जानती थी उसे,
    नाजानें क्यों लगता था पहचाना सा,
    एकांत पसंद था इसके बावजूद भी
    अकारण ही,
    सब कुछ दूर जाने का लगता महज़ बहाना सा,
    हम्मम...पास में दरीचा था,
    पर वो प्रसन्नता का संसार ना अबतक रचा था,
    दुःखों से पीड़ित फ़कत सज़ा था।
    ©flame_

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    दरीचा

    ©flame_

  • sabdokbanse 8h

    सत्य के बाण पर असत्य नही टिकता।
    लाख तुम जोड़ लगाओ,सत्य नही बिकता।
    घनघोर घटा भले सोचे अंधियारा करने की
    किन्तु सूरज निकलने पर धुन्ध नही टिकता।।

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    सत्य

    ©sabdokbanse

  • sramverma 13h

    Date 24/09/2020 Time 12:00 AM #SRV

    ज्यादा पढ़ी लिखी
    कहाँ होती है आज भी माँ,

    पर अपनी संतान
    की भृकुटि पर उभर आए,

    आलेखों को अच्छी तरह
    पढ़ लिया करती है माँ,

    लड़ना नहीं आता उसे
    पर अपनी संतान के लिए,

    पुरे समाज से
    लोहा ले लेती है माँ !

    शब्दांकन © एस आर वर्मा

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    ,

  • rashmi_sinha 14h

    मुझे शराब से महोब्बत नही है
    महोब्बत तो उन पलो से है
    जो शराब के बहाने मैं
    दोस्तो के साथ बिताता हूँ.

    ����
    शराब तो ख्वामखाह ही बदनाम है.
    नज़र घुमा कर देख लो इस दुनिया में
    शक्कर से मरने वालों की तादाद बेशुमार हैं!

    ����
    तौहीन ना कर शराब को कड़वा कह कर,
    जिंदगी के तजुर्बे, शराब से भी कड़वे होते है.

    ����
    कर दो तब्दील अदालतों को मयखानों में साहब;
    सुना है नशे में कोई झूठ नहीं बोलता!
    l����
    बर्फ का वो शरीफ टुकड़ा जाम में क्या गिरा
    बदनाम हो गया".
    "देता जब तक अपनी सफाई वो खुद शराब हो गया".

    ����
    ताल्लुकात बढ़ाने हैं तो
    कुछ आदतें बुरी भी सीख ले गालिब,
    ऐब न हों तो
    लोग महफ़िलों में नहीं बुलाते.


    ����
    अभी तो सेनेटाइजर का जमाना है
    वो भी शराब का ही भाई है.
    फर्क बस इतना है
    शराब अंदर से साफ करती है.
    और सेनेटाइजर बाहर से.

    ����
    सभी बेवड़े मित्रों को समर्पित
    ������������

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    एक ही विषय पर 6 शायरों का अलग नजरिया...

    1- Mirza Ghalib: 1797-1869

    "शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर,
    या वो जगह बता जहाँ ख़ुदा नहीं।"

    - इसका जवाब लगभग 100 साल बाद
    मोहम्मद इकबाल ने दिया......

    2- Iqbal: 1877-1938

    "मस्जिद ख़ुदा का घर है, पीने की जगह नहीं ,
    काफिर के दिल में जा, वहाँ ख़ुदा नहीं।"

    - इसका जवाब फिर लगभग 70 साल बाद
    अहमद फराज़ ने दिया......

    3- Ahmad Faraz: 1931-2008

    "काफिर के दिल से आया हूँ मैं ये देख कर,
    खुदा मौजूद है वहाँ, पर उसे पता नहीं।"

    - इसका जवाब सालों बाद वसी ने दिया......

    4- Wasi:1976-present

    "खुदा तो मौजूद दुनिया में हर जगह है,
    तू जन्नत में जा वहाँ पीना मना नहीं।"

    - वसी साहब की शायरी का जवाब साकी ने दिया

    5- Saqi: 1986-present

    "पीता हूँ ग़म-ए-दुनिया भुलाने के लिए,
    जन्नत में कौन सा ग़म है
    इसलिए वहाँ पीने में मजा नही।"

    - 2020 में हमारे एक शराबी मित्र के हिसाब से -

    "ला भाई दारू पिला, बकवास न यूँ बांचो,
    जहाँ मर्ज़ी वही पिएंगे, भाड़ में जाएँ ये पांचों"
    ©rashmi_sinha

  • drishtantyadav 15h

    कि वो मुझे कुछ ऐसे सताता है 
    पहले सिग्रेट जलाता है
    फिर मेरे जिस्म पे बुझाता है
    उसके बनाये निशान मैं सबसे छुपाती हूँ
    वो अच्छा है मैं सबसे यही बताती हूँ
    कि एक रिश्ता है जो मुझे निभाना है
    अर्धांगिनी हूँ उसकी तो उसे छोड़ के कहा जाना है
    हर दिन इस उम्मीद से मैं जीने लगती हूँ कि वो बदल जाएगा 
    वक़्त ही तो है थोड़ा ओर सही वो सवर जाएगा 
    मैं नही अकेली इस दौर में मेरी ओर भी सहेली है
    मैं तो एक हूँ उनमे ना जाने कितनी और पहेली है
    तुम्हे लगेगा मैं कमजोर हूँ जो ये जुल्म सहती हूँ
    मैं हरगिज़ नही हूँ ये बात सबसे कहती हूँ
    जब ब्याहा था बाबा ने बस इतना कहा था मुझसे 
    कि एक वादा कर मुझसे
    घड़ी कैसी भी क्यों न हो तुझे रिश्ता निभाना है
    गम कितने भी क्यों न हो तुझे सबसे गुज़र जाना है 
    बात मान कर उनकी बस रुक ही जाती हूँ .
    कभी कभी माँ को भी अपना हाल बताती हूँ
    ख़ौफ आता है कभी कभी ज़िन्दगी क्या नया लाएगी 
    माँ कहती है अक्सर ज़िन्दगी ही तो है गुज़र जाएगी 
    अब जो तू आई तो परिवार बिखरेगा 
    तू ही ना होगी तो वो कैसे संवरेगा...।।

    ©*Drishtant Yadav Amethi
    (Arpit)

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    अनकहे दर्द....

    ©drishtantyadav

  • sabdokbanse 18h

    फिर से नारी का अपमान।
    युद्ध होगा अब घमासान।।
    देख दुर्योधन तूने कर
    दिया कैसा दुर्व्यवहार।
    अब विनाश का तांडव होगा,
    नष्ट होगा तेरा कुल परिवार।।
    पँचाली के पाँच पाण्डव
    देखते रहे होकर मौन।
    द्रौपदी बोली पाँचो है
    एक से बढ़कर एक
    फिर भी जवाब देगा कौन।।
    फिर पँचाली बोली अरे
    जागों भीष्म पितामह।
    तुम्हारी लाज लूट रही
    ,हँसी उड़ाता स्वयं जहाँ।।
    दुस्साहस करता फिर
    दुःसाशन चिर बदन खिंचने लगा।
    तभी क्या अग्नि क्या वायु
    सबका मन तमतमाने लगा।
    अरे कोई तो मेरी लाज बचाओ।
    अरे कोई आवाज उठाओ।
    भरी सभा में अपनी माँ के
    दूध का कोई तो शौर्य दिखाओ।
    देखते रहे मौन होकर सारे
    के सारे ज्ञानी यौद्धा पण्डित।
    किन्तु अत्याचारी खेलता रहा
    बनकर सबके समक्ष ढीठ।
    तभी विदुर ने रोकने को आवाज उठाया।
    किन्तु कर्म का अँधा उसको तुरन्त धमकाया।।
    ये सुनते ही विदुर बोला इससे पहले की
    कायर की सभा में स्वयं के नजर मर जाऊं।
    इससे बेहतर होगा कुछ ना करू तो कम
    से कम इस दागी सभा से चला जाउ।।
    अब द्रोपदी के सामने केवल
    कृष्ण ही एक आस बचा।
    कृष्ण ही पालनहार आयेंगे जरूर
    ये ही आखिरी मन में विस्वास जगा।
    कृष्ण ही है सबके रक्षक
    बुलाने पर आना उनका तय रहा।
    कृष्ण को मन ही मन उन्होंने फिर याद किया।
    आओ गिरधर लाज बचाओ
    ये मन से फरियाद किया।
    फिर क्या था चिर खींचते
    खींचते दुःसाशन हुआ परेशान।
    आखिर हार गया टूट गया
    मन से झूठा अभिमान।।
    अब तो मानो सभी हो गए पानी पानी।
    सभी लगे बोलने पक्ष में
    क्या ज्ञानी क्या अज्ञानी।।
    फिर सभी लोग सहित दुर्योधन
    दुःसाशन का विनाश हुआ।
    और देर सही सम्पूर्ण सत्य
    नीति का विकास हुआ।।

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    नारी का अपमान

  • prakriti_iipsaa 1d

    ★कुछ अधूरे से★
    भाग-2 पृष्ठ-4

    बड़ी बहन जो कभीं छोटी छोटी कह के चिढ़ाया करती थी अब वो भी अपशब्दों के बौछार कर चली जाती थी। एक तरफ माँ के डांट में माँ का प्रेम दिख रहा था तो दूसरी तरफ अपने प्रति अविश्वास उसे कष्ट दे रहा था। ना सबूत ना गवाह मुजरिम करार कर दिया गया, ना आग लगी ना धुआं उठा कुछ जला सा कुछ राख सा हुआ, वो अब गुमसुम सा रहने लगा।

    इस समय वो नौवीं में था, सबकुछ अनसुना कर वो अपने पढाई पर ध्यान देना चाहता था क्योंकि ऐसे में वो बोर्ड की परीक्षा में अच्छे अंक कैसे ला पाता। उसे अंग्रेजी और गणित में अनुशिक्षण (tuition)
    की आवश्यकता महसूस हुई। वह अनुशिक्षण हेतु गया, नियमतः पहले महीने का शुल्क अनुशिक्षक पहले ही ले लेते हैं तो अनुशिक्षक के पिता उससे रोज शुल्क मांगते थे जबकि उसने 15 दिन बाद देने को कहा था। एक महीने बीत गये अध्यापक महोदय त्रिकोणमिति भी
    नहीं पढ़ा पाये, उसने एक महीने का शुल्क देकर छोड़ दिया।

    उसने सोचा कि वो खुद ही पढ़ के अच्छे अंक लायेगा, पर वो पढ़ नहीं पा रहा था कोई ना कोई विघ्न पड़ जाता था। नौवीं तो उत्तीर्ण हो गया, दशवीं का परीक्षा नहीं देना चाह रहा था लेकिन उसे परीक्षा छोड़ने की इजाजत नहीं थी, किसी भी हाल में उसे परीक्षा तो देना ही था।
    अब अच्छे अंक लाने का उसका लक्ष्य पूरा नहीं होने वाला था, उसने जानबूझकर दो विषय की परीक्षा को गड़बड़ कर दिया क्योंकि उसे कम अंक से उत्तीर्ण होना मंजूर नहीं था। उसने सोचा चलो इसी बहाने देख लेंगे कि अनुत्तीर्ण होने वाले बच्चों के साथ लोग कैसा व्यवहार करते हैं....

    #shyam_jee_mirzapuri
    23/09/2020

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    कुछ अधूरे से

    भाग-2
    पृष्ठ-4
    (अनुशीर्षक पढें)
    ©prakriti_iipsaa

  • delta 1d

    क्यों थी ये उलझन
    आखिर जानती क्या थी मैं उसके बारे में?
    बस उसका नाम और कूछ भी तो नहीं
    कैसे दिखता है कैसे बोलता है
    रहता कैसे है
    कुछ भी नहीं पता था
    बस पता था तो सिर्फ उसकी बातों का
    जो वो मुझसे किया करता था
    भीनि भीनि खुशबुओ में

    शायद उसे लिए ये महेज एक आम बात रही होगी
    पर मेरे लिए नहीं थी
    उसके लिए उसका सांसें लेना बेहद नोर्मल रहा होगा
    पर मेरे लिए अब अजाब बनता जा रहा था
    जाने क्या उलझन थी उस दिन
    उससे बात नहीं हो पा रही थी और मैं अंदर ही अंदर कुढ़ती जा रही थी

    मैंने भी सोच ही लिया
    उसे फ़िक्र नहीं जब कोई तो मैं क्यों दिखाऊं की मेरे मन में क्या है?
    दिन जैसे तैसे बीत ही गया
    तो अब रात ने तंज कसना शुरू कर दिया
    आंख लगी जब तो पहली बार उसे ख्वाबों में देखा
    आचानक से आँख खुली तो
    लगा सीने से दिल निकल लिया हो किसी ने
    वो मुझे छोड़ने वाला था
    ख्वाँब में
    इतना असर कैसे हो सकता है किसी गैर शक़्स का
    मिली नहीं कभी देखा तक नहीं सामने से
    और हक़्क़् इतना गहरा की शादीशुदा जोड़ा भी सुन के शर्मा जाए मेरे दिल की बेवकूफी पर
    नम आँखें लिए मैं बिस्तर से उठी
    पानी पिया और फिर यादों की गहराई में डूबती चली गई
    कहीं सच में यही वो शक़्स् नहीं जिसके बारे में लोग कहते हैं की उसके आने पर सब कुछ बादल जाता है
    यहाँ तक की खुद को आईने में देखने का अंदाज़ भी
    दिल को थोड़ी तसल्ली देकर मनाया
    और फिर खुद सो गई

    और ये कम्बखत रेडिओ वालोंं को गाने की लिस्ट कौन देता है?

    ��।।दो नैनो में आंसू भरे हैं।।
    ।।निन्दिया कैसे समाये।।��


    #adhoori_mohabbat_p3

    @eunoia__ this is thr leftover ������
    body limitation isn't allow me to post it whole

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    अधूरी मोहब्बत

    सुबह वहीं ख्याल
    कल सारा दिन बात नहीं हुई
    उसे याद तक नहीं आई मरी?
    हुह्
    किसी और से बात कर ली होगी उसने
    और भी फ्रैंड्स होंगे उसके
    बातें ही इतनी अच्छी करता है
    कैसे न हो कोई
    फोन वापस रख के मैं स्कूल के लिए निकली
    पिछली रात वाली थकान साफ चेहरे पर झलक रही थी
    मन बहुत उदास था
    और नज़र बार बार मोबाइल फोन पर जाकर रुक जाती

    तभी एक दोस्त ने पीछे से कहा
    कहाँ गुम हो?
    मैंने नहीं में सर हिला दिया

    ऐसे ही होता है क्या?
    जब कोई खामोश होता है तो बोलने का सारा सबब कहीं पुरानी पोटली में बंद कर के दूर तालाब में फेक देता है?
    ये ख़ामोशी पहली बार महसूस की थी मैंने

    बदरंगी समेटे शाम की रौशनी कमरे में दस्तक दे चुकी थी
    फिर से एक पूरा दिन ढलने को था और रात आने को बेबाक
    मायूसी संजोये उँगली पर मैंने उसे मेसज कर ही दिया
    और फोन रख के किचन में आगई

    रात को मेसज देखा उसका
    पर मैंने आज अपने पुराने प्रेमी से मिलने का मन बना
    रखा था
    वो भी नाराज़ सा था थोड़ा मुझसे
    मैंने भी सोचा क्यों ना उसे आज जलाया जाए

    उससे उसी के रक़ीब की बातें की जाए
    पर आज वो थोड़ी देर से आया
    मानो जैसे तापा हुआ बैठा हो
    मेरे प्यार की खबर हो चुकी थी उसे
    तभी बादलों की आड़ में छुपा छुपा फिर रहा था
    नजरें मिली तो ठहेर सा गया वहीं
    लुका छीपी देर तक नहीं चल पाइ उसकी

    कितना सुकून है ना इन खामोश हवाओ में?
    मैंने बातें शुरू की और अंत तक सब कह दिया
    एक आंसू पलके भीगाने को तैयार जाने कब से बेचैन था

    दोनों हाथों से चेहरा छुपाये मैं रोने लग गई
    आखिर गलती है क्या मेरी?
    मैंने नहीं मांगी थी कोई ऐसी दुआ जिसकी आजमाइश में मेरी जान निकले...

  • clustered_shots 1d

    It seems शौक बड़ी चीज़ है��✨

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    चुना,मक्खन और ताऊ से सब की ज़िन्दगी अच्छी चल रही थी
    फिर न जाने कम्बख्त दिल का आना जरुरी क्यों था
    ©clustered_shots

  • smart_word_ 1d

    हवा ए रुख के अंचल मे कभी,
    हम खुद को उड़ाना सिख लेंगे,
    माना की बच्चे है अभी इस दौर मे,
    हम दौड़ने का बहाना ढूंढ लेंगे,


    खैर इस बात से आ जाती है खुशी,
    कल के लिए अपना नया ज़माना ढूंढ लेंगे,
    लब सुर्ख, ऑंखें नशीली, बस कुछ अंदाज़,
    ए वक्त लबों पर वह प्यारी सी मुस्कान सिख लेंगे,


    चलते चलते वह बचपना वाला अंदाज़ ए हवा,
    उसी पल का नज़राना ढूंढ लेंगे,
    मालूमात है तूफ़ान से टकराना खतरा है,
    हम उसी तूफ़ान मे जीने का बहाना ढूंढ लेंगे,


    हर्फ़ कच्चे है अभी अपने थोड़ा सब्र कीजिये,
    धार करने वाले अल्फ़ाज़ों का वह इशारा ढूंढ लेंगे,
    माना की ज़िन्दगी आज़माती है बहुत,
    ज़िन्दगी छोड़ कर अपना ज़माना ढूंढ लेंगे,

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    सिख -लेंगे

    अदब ए आईना सिख लेंगे ,
    बुरे हालातों पर भी मुस्कुराना सिख लेंगे,

  • rangkarmi_anuj 1d

    "आओ नशे करें"

    आओ नशे करें
    सब कुछ बेच कर
    खुद को नीलाम करके,
    शर्म हया को
    मसल कर रख दें
    अंगूठे से हाथ की
    हथेली में दबा के
    ज़र्दे खैनी के साथ।

    चरस के लिए
    खून बेच देते हैं,
    और खून कर दें
    चिलम की उस
    कश के लिए जो
    ज़िंदगी में पछतावे का
    अक्स बार बार दिखायेगा
    किसी गंदे पानी में।

    उबलती हुई जवानी
    मय में डुबकी लगाएगी,
    फिर चढ़ेगा मांस में
    ऐसा बेहूदा जोश जो
    तलब कम करने के लिए
    जिस्म ढूंढेगा उस घर में,
    जहां पर सो रही होगी
    अनेक रिश्तों के चादर
    को लपेटे हुए
    नाज़ुक सी लड़की।

    एक नशा वहां करें
    जहां पर जल रहे हैं
    वक़्त से पहले मरे
    लोग जो नशे में चूर थे,
    उनकी धधकती आग से
    बीड़ी सिगरेट जलाकर
    अपनी बारी का इंतजार
    करते हैं, बिना इंतेज़ाम के
    बिना कंधे सहारे के
    आओ नशे करें।
    ©rangkarmi_anuj
    PC- Google/RightfulOwner

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    "आओ नशे करें"

    ©rangkarmi_anuj

  • wearyearl 1d

    Read All Parts Of उलझन ( ULJAHN ) = #weary_s5

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    -----/// PART- 2 ///-----

    महज 10 साल की उम्र में मुझे चार दिवारी में बंद कर दिया गया था ,मेरे साथ बेरहमी हई थी, मेरे साथ छेड़खानी हुई थी।
    दुनियादारी, अच्छा बुरा इस सबसे दूर मै अपने ही ख्वाब देखने वाली ,अब एक कमरे में बंद रहने लगी थी। मेरे साथ क्या हुआ था किसने क्या किया क्या था मुझे इस बात का थोड़ा भी एहसास नहीं था। पर ना जाने क्यों मेरे मोहल्ले के दोस्त, अब मुझसे मिलने नहीं आते थे।
    मेरी मोहल्ले की वो औरतें जो मुझे देख कर मुस्कुराती हैं वो अब मुझे देखती भी नही थी। वो अब मेरे करीब भी नहीं आती थी। मेरी माँ भी अब मुझसे घर के कामो में व्यस्त रखने लगी थी।
    मैंने अपनी मां और दोस्तो को तो परेशान भी नहीं किया था। फिर भी ना जाने क्यों सब मुझसे दूर रहने लगे थे। मेरी मां मुझे अब मुझे कम बात करना सिखाने लगी थी , पर इस सबके बीच मेरे पापा ने मेरी मा और समाज से लड़ कर मेरा दाखिला एक बार फिर स्कूल में करा दिया था।
    नहीं ऐसा नहीं था कि मेरी माँ मुझसे प्यार नहीं करती हैं, पर वो थोड़ा डरती थी समाज से,ना जाने किस बात का डर था उन्हें।

    मै अब 12 साल की हो गई थी। मै अब कक्षा 7 में पढ़ रही थी। थोड़ी थोड़ी समझ भी मुझे आने लगी थी। मै चीज़ों को समझने लगी थी। लेकिन मेरे साथ जो पिछ्ले 2 सालो से चला आ रहा था, उसे मै अब तब नहीं समझ पाई थी। क्योंकि शायद किसी ने मुझे उस बारे में बताने, उस बारे में मेरी समझ खोलने से जायदा मुझे नज़रबंद करना सही समझा था।
    खैर, एक बार फिर मै अपने सपने बुनने लगी थी। अब वो पिछड़ा साल अब मेरी लिए कोई कहानी सी बनने लगा था। मुझे डाक्टर बनना था। और मै उसी सपने को बुना करती थी। लेकिन मेरी माँ ये सब समझाती ही नहीं थी। उन्हें बस मुझसे रोटियां बनवानी थी। अब सब कुछ ठीक हो गया था। लेकिन शायद मेरी किस्मत को मेरी खुशी मंजूर नहीं थीं।

    क्यों रुकना हैं, क्यों झुकना हैं,
    बेड़ियों को पार कर मुझे तो अपना आसमां भी खुद बनाना हैं,
    ज्वाला बन मुझे तो खुद में आग भी लगानी हैं और शीतल जल बन मुझे जिंदगी में ढहराव भी खुद ही लाना हैं।

    To Be Continued....������

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    PART- 2

    // I will keep updating all the information related to the story in my bio. //

  • meenuagg 1d

    आँखें बंद करूँ तो पाती हूँ अथाह गहराई... और उसमें विचरण करते सैंकड़ों पंछी.... जो चाहते हैं मैं अपनी आँखों को खोलूँ ताकि उड़ सकें वो पंछी खुले आसमान की ओर... अपने पंख पसार कर...

    और मेरा ये दिल, इसकी परिधि में आती है एक ऐसी दुनिया... जो सिर्फ मेरी है...
    चाहे कितने ही गम हो, अपनों के स्नेह से घट जाती है इनकी गति, दूर हो जाती है समस्त व्याधि और मैं ओढ़ लेती हूँ, फिर से मुस्कान का दामन...

    मेरे पग... पार करना चाहते हैं सातों समुंदर...
    मैं नाप जाना चाहती हूं, वो सारे रास्ते, जिनमें मैं कभी चलना चाहती थी... चाहे कितने ही मील चलना पड़े, मैं अनुभव करना चाहती हूं, वो सब... जो मैं उस उम्र में ना कर सकी...

    जी... मैं वो नारी हूँ, जो 45 साल गुज़ार चुकी, दूसरों के हिसाब से ढलते हुए... अब मैं जीना चाहती हूँ... अपने सपनों को एक एक कर जोड़ कर पूरा करना चाहती हूं।

    हाँ! मैं भी उड़ना चाहती हूं... इन असंख्य बंधनों को तोड़ कर... एक उन्मुक्त ज़िन्दगी की ओर...!!

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    गणित

    Read full in caption
    ©meenuagg

  • its_gss 1d

    ज़िन्दगी की दौड में इतना मदहोश हो बैठा ।
    किसी गैर का साथ तो छोड़ो ,
    मैं खुद ही को खो बैठा ।।

    और खुद का वजूद ढूंढने जब मैं ,
    जात धर्म की गलियों में जा बैठा ।

    तो खुद का मिलना तो छोड़ो ,
    मैं उपर वाले के अहसास तक को खो बैठा ।।

    #hindi #hindishayari #hindiwriters #life #lost #sad #soul #indian #indianwriters #newpost #latestpost #writers #cosines @junaidwrites @__dipps__ @jiya_khan @lazybongness @rnsharma65

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    ज़िंदगी की दौड़

    ज़िन्दगी की दौड में इतना मदहोश हो बैठा ।
    किसी गैर का साथ तो छोड़ो ,
    मैं खुद ही को खो बैठा ।।

    Read caption..

    ©its_gss

  • mittal_saab 1d

    जॉन एक ख़ूबसूरत जंगल हैं, जिसमें झरबेरियां हैं, कांटे हैं, उगती हुई बेतरतीब झाड़ियाँ हैं, खिलते हुए बनफूल हैं, बड़े-बड़े देवदारू हैं, शीशम हैं, चारों तरफ कूदते हुए हिरन हैं, कहीं शेर भी हैं, मगरमच्छ भी है -
    "मैं जो हूँ जॉन एलिया हूँ जनाब
    मेरा बेहद लिहाज कीजिएगा"

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    गुज़रती उम्र के साथ न तो जॉन की शायरी में कोई बल आया, न तो उनके अक्खड़पन में -

    "साल-हा-साल और एक लम्हा, कोई भी तो न इनमें बल आया
    खुद ही एक दर पे मैंने दस्तक दी, खुद ही लड़का सा मैं निकल आया"
    - जॉन एलिया साहब

  • an_unconventional_person 1d

    ख़फ़ा से हो गए थे सबसे
    सबने हाथ मिलाकर छोड़ दिया था
    हमारे दिल के टुकड़े टुकड़े भी नहीं मिल रहे हैं
    अब तो हमें टुकड़ा टुकड़ा करके इस कदर लोगों ने तोड़ दिया था
    मालूम न था इस दुनिया के लोग इतने जालिम होंगे
    की सबसे धोखा खाने के बाद हम इतना रोएंगे
    ©an_unconventional_person

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    "ए ख़ुदा ऐसा होता हैं
    मालूम न था"

  • akanksha44 1d

    मैं और मेरी चाय आज दो पल निकाल कर जो साथ बैठे है
    तो पिछली बीती कई यादें समेट लाए हे
    यादें जो तुम बनकर हर पहर मेरे साथ रहती है,

    यादे जो मुझे तेरे पास होने का एहसास देती है,

    यादे जो कभी चिढ़ाती है
    यादे जो कभी रुलाती है ,
    मुझे ये रुलाती है क्योंकि दिखाती है वो मुस्कुराहट मेरे लबों की जो कभी तेरे साथ होने पर थी पर अभ नही है,

    कराती है उस सुकूँ से रूबरू जो तेरे करीब होने पर था और अब नही है।
    वैसे तो अभी कुछ महीने ही हुए हैं तुमसे दूर हुए और ये आँखे है
    कि कभी थमती ही नही।
    दूर.... दूर कहा तो मैने ऐसे है मानों हम फिर मिल सकेंगे कभी, तेरी गोद में सर रख कर फिर रो सकेंगे कभी,
    दो शिकायतें तुझसे फिर कर सकेंगे
    कभी,
    हाथ से तेरे निवाला फिर खा सकेंगे
    कभी
    अपना हर पल तेरे साथ फिर बाट सकेंगे
    कभी
    पर माँ तुझे अपने साथ क्या फिर देख सकेंगे कभी??

    तुझे पता है हॉस्पिटल में जब तुझे हारते देखा था उस दिन मैं हार गया था।
    तेरा हर डर मेरा ख़ौफ़ बन गया था।
    तेरी आँखों की नमी ने मेरे दिल को थाम लिया था ।
    और मैं बस यही सोच रहा था क्या यहीं?
    क्या यहीं तक? क्या बस यहीं तक??
    क्या बस यहीं तक तेरा साथ है? नहीं...प्लीज.. इतनी जल्दी तो नहीं....
    इस सोच में कब मेरा डर मेरी आँखों से उतर आया
    मुझे एहसास ही नहीं हुआ और मन बस यही केहता रहा
    "माँ प्लीज नहीं अभी तो नही,
    अभी तो मैंने तुझसे दूर रहना सीखा भी नहीं है, तेरे बिना मैं रहूँगा कैसे?
    तेरे बिना मुझे नींद नही आती मैं सोऊंगा कैसे?"
    ये डर..., ये ख़ौफ़.... हर उस शाम की तरह जब तेरी तबीयत बिगड़ती थी, आज भी मेरे जहन में आरहा था।
    पर नहीं आज कुछ अलग था आज तेरी भरी आँखों ने वो सब कह दिया था जो मैं कभी सुनना भी नही चाहता था....
    देखते देखते ये ख़ौफ़ मेरा हकीकत होगया कहते है माँ जिसे वो सख्श मुझसे दूर होगया..

    तेरी कमी तेरे ना होने का एहसास मुझे हर दरख्त दिखता है ,
    पर तेरी मीठी यादों का सिलसिला मेरे करीब हर घड़ी पिघलता है...

    तू कहीं दूर से कही से..
    कहीं से तो देखती होगी मुझको...
    प्यार तेरा मेरे करीब वहीं से आज भी बरसता है
    प्यार तेरा मेरे करीब वहीं से आज भी बरसता है।।।।

    शुक्रिया
    @mirakeeworld

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    मैं और मेरी चाय

    मैं और मेरी चाय आज दो पल निकाल कर जो साथ बैठे है
    तो पिछली बीती कई यादें समेट लाए हे
    यादें जो तुम बनकर हर पहर मेरे साथ रहती है,

    यादे जो मुझे तेरे पास होने का एहसास देती है,

    यादे जो कभी चिढ़ाती है
    यादे जो कभी रुलाती है ,
    मुझे ये रुलाती है क्योंकि दिखाती है वो मुस्कुराहट मेरे लबों की जो कभी तेरे साथ होने पर थी पर अभ नही है,

    कराती है उस सुकूँ से रूबरू जो तेरे करीब होने पर था और अब नही है।
    वैसे तो अभी कुछ महीने ही हुए हैं तुमसे दूर हुए और ये आँखे है
    कि कभी थमती ही नही।
    दूर.... दूर कहा तो मैने ऐसे है मानों हम फिर मिल सकेंगे कभी, तेरी गोद में सर रख कर फिर रो सकेंगे कभी,
    दो शिकायतें तुझसे फिर कर सकेंगे
    कभी,
    हाथ से तेरे निवाला फिर खा सकेंगे
    कभी
    अपना हर पल तेरे साथ फिर बाट सकेंगे
    कभी
    पर माँ तुझे अपने साथ क्या फिर देख सकेंगे कभी??

    तुझे पता है हॉस्पिटल में जब तुझे हारते देखा था उस दिन मैं हार गया था।
    तेरा हर डर मेरा ख़ौफ़ बन गया था।
    तेरी आँखों की नमी ने मेरे दिल को थाम लिया था ।
    और मैं बस यही सोच रहा था क्या यहीं?
    क्या यहीं तक? क्या बस यहीं तक??
    क्या बस यहीं तक तेरा साथ है? नहीं...प्लीज.. इतनी जल्दी तो नहीं....
    इस सोच में कब मेरा डर मेरी आँखों से उतर आया
    मुझे एहसास ही नहीं हुआ और मन बस यही केहता रहा
    "माँ प्लीज नहीं अभी तो नही,
    अभी तो मैंने तुझसे दूर रहना सीखा भी नहीं है, तेरे बिना मैं रहूँगा कैसे?
    तेरे बिना मुझे नींद नही आती मैं सोऊंगा कैसे?"
    ये डर..., ये ख़ौफ़.... हर उस शाम की तरह जब तेरी तबीयत बिगड़ती थी, आज भी मेरे जहन में आरहा था।
    पर नहीं आज कुछ अलग था आज तेरी भरी आँखों ने वो सब कह दिया था जो मैं कभी सुनना भी नही चाहता था....
    देखते देखते ये ख़ौफ़ मेरा हकीकत होगया कहते है माँ जिसे वो सख्श मुझसे दूर होगया..

    तेरी कमी तेरे ना होने का एहसास मुझे हर दरख्त दिखता है ,
    पर तेरी मीठी यादों का सिलसिला मेरे करीब हर घड़ी पिघलता है...

    तू कहीं दूर से कही से..
    कहीं से तो देखती होगी मुझको...
    प्यार तेरा मेरे करीब वहीं से आज भी बरसता है
    प्यार तेरा मेरे करीब वहीं से आज भी बरसता है।।।

  • imuseless 2d

    कैसा ये लोकतंत्र है ,,
    भरष्ट नीतियां ही जिसमे मंत्र है ,,,
    इंसानियत नाम की पर एक भी इंसान नही
    धर्म जाति के नाम पर बँटे है , यहाँ कोई भी समान नही
    ठेकेदारो के हाथों करवाता है पहाड़ो का खनन
    सरकार भी कर लेती है मानवीय अधिकारो का हनन
    कैसा ये लोकतंत्र है ,,,
    ठंड से ठिठुर कर मर गया कोई ,,
    कोई मर गया भूख के एक निवाले बसे ,,
    देश की जनता आंनद मे है ,,,
    ऐसी आवाज आ रही है सरकारी हवाले से ,,
    बडे लूट कर भाग जाते ,,
    ये रिश्वत खाता ठेले वाले से ,,,
    लोकतंत्र के नाम पर नेता ,,
    तांत्रिक बन कर रहे है तंत्र ,,,
    कैसा है ये लोकतंत्र ,,
    कभी अफ़ज़ल निकालने की बात करता है
    तिरंगा जला कर भारत माँ का अपमान करता है
    खालिद और कुमार को नायक बना दिया ,,,
    असली लड़ने वालों को खलनायक बना दिया ,,,
    संसद में बैठकर देश विनाश का रचता है षडयंत्र ,,
    कैसा है ये लोकतंत्र ,,,

    Read More

    लोकतंत्र

    कभी अफ़ज़ल निकालने की बात करता है
    तिरंगा जला कर भारत माँ का अपमान करता है
    खालिद और कुमार को नायक बना दिया ,,,
    असली लड़ने वालों को खलनायक बना दिया ,,,
    संसद में बैठकर देश विनाश का रचता है षडयंत्र ,,
    कैसा है ये लोकतंत्र ,,,


    ©imuseless

  • sabdokbanse 2d

    बापू तुम आते जो इस 2020 में।
    सच में उदास होते अजब टिस में।।

    देखते देखते आँखों में टप तप आँशु होता।
    जब तुम्हारे समक्ष भूख से कोई रोता।।

    चारो और मचा हुआ है हाहाकार।
    सर पे हाथ धरे देख रही है सरकार।।

    बेरोजगारी ने बापू सभी को रुलाया।
    महगाई ने भी है खूब तबाही मचाया।।

    क्या होता बापू तुम्हारे समक्ष
    जो कोई रोटी के लिए यू रोता।

    सच में फिर सोचने को मजबूर हूँ
    उस हालात में आखिर क्या होता।।

    बापू फिर तो होता हर दिन धरना प्रदर्शन।
    सायद उस घड़ी में कर पाते हम सत्य के दर्शन।।

    मजदूरों को बापू मजदूरी नही मिलती।
    कोई तरसते है तन ढकने को अब बापू
    किसी पे होते हुए भी शराफत दिखती।।

    संस्कार संस्कृति से बापू दूर
    दूर तक नही किसी का नाता है।

    गरीबों में तो अब भी शालीनता है
    किन्तु अमीर तो देश बेच आता है।।

    लाठी बम वालों में अब बापू
    सबसे ज्यादा ताकत है।

    जो सत्य के राह चलने की सोचे
    उसके लिए जीवन में आफत है।

    नेताओं का क्या कहे बापू
    लगे है झोली अपने अपने भरने में।

    ठगी धुर्त अलग ही व्यस्त है
    लूटपाट चोरी चकोरी करने में।।

    कमज़ोरों लाचारों पर होता है
    अब अत्याचारियों का ताण्डव।

    द्रौपदी का चिर हरण आम बात है
    फिर भी मौन खड़े है सभी पांडव।।

    अजीब सा माहौल बन गया इस देश में।
    बापू कोई नही बोलता अब गरीबों केश में।।

    जो लड़ना चाहते है न्याय के खातिर।
    मुँह बन्द करने के लिए जान तक ले लेते है ये शातिर।

    बापू फिर कैसे कह दु कैसे आजाद हो गए।
    सच सच कहूँ तो बापू और बर्बाद हो गए।।

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    गाँधी 2020 में

    ©sabdokbanse

  • backbench 1d

    बड़ी मुद्दत्तों बाद आये हो मेरा हाल पूछने
    ठीक हूँ!कहे तो दिया यही सुन्ना था ना !!!!
    दहलीज़ कभी हाल नहीं बताती मकां की
    दरो दीवार से वाकिफ होना जरुरी होता है!!!
    #life #friendship #poetry

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    बड़ी मुद्दत्तों बाद आये हो मेरा हाल पूछने
    ठीक हूँ!कहे तो दिया यही सुन्ना था ना !!!!
    दहलीज़ कभी हाल नहीं बताती मकां की
    दरो दीवार से वाकिफ होना जरुरी होता है
    ©backbench