#Bazar

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  • vishnuuu_x 6w

    【बाज़ार】

    चाहिए क्या तुम्हें तोहफ़े में बता दो वर्ना,

    हम तो बाज़ार के बाज़ार उठा लाएँगे।

    ©vishnuuu_x

  • preranarathi 15w

    मौत का धंधा

    जब मौत को गले लगाया,
    तब दुनिया का एक और सच सामने आया।
    सुना था, मरने के बाद सारी परेशानियाँ खत्म हो जाती हैं,
    सुकून होता है और रुह को जन्नत मिल जाती हैं।
    मैं भी चढ़ा था उस खुदा के घर की सीढ़ियाँ,
    पर न आया वो बाहर, न खोली उसने खिडकियाँ।
    फिर कही से एक आवाज़ आई-
    तु तो मर कर भी नहीं मर पाया,
    इस दुनिया ने तुझ पर मुकदमा हैं चलाया।
    जा पहले उन से अर्जी लेकर आ,
    इस दुनिया से मुक्ती लेकर आ।

    तुझे अपने घर में पनाह नहीं देनी तो मत दे, नाटक क्यों करता है,
    जिन्होंने मेरी मौत का षड़यंत्र रचा, उन्हीं से भीख माँगने को कहता है।
    क्या फर्क पडता हैं, मैने खुदखुशी कि या उन्होनें मुझे मार डाला,
    दोनों ही तस्वीरो में, कीचड़ मुझ पर ही तो उछाला।
    मेरे शरीर को कभी नहीं अपनाया,
    और आज मेरी रूह पर भी है दाग लगाया।
    और तु कहता है कि इन फर्जी लोगों कि अर्जी लेकर आऊ,
    मुकदमा जो चलाया इन्होनें मुझ पर, उसमें बेकसूर साबित होकर आऊ।
    ओ मेरे खुदा, तु कितना भोला है, जाकर नीचे तो देख,
    नरक से भी बत्तर सर्वग, इंसान ने खोला हैं।
    पर तुझसे क्या शिकायत करू, तु तो अपना काम कर रहा है,
    जन्नत मिले उसी को, जो बेगुनाह है।
    बर्बाद तो मुझे तेरी बनाई दुनिया ने कर दिया,
    छीन ली मेरे पैरों से जमींन, अब आसमान भी ले लिया।
    पर अगर तु चहाता हैं, तो थोड़ा और भटक लूगाँ, थोड़ा और तड़प लूगाँ,
    जब तक बेगुनाह साबित नहीं हो जाता, बर्बादी का दर्द थोड़ा और सह लूगाँ।
    पर तुझसे एक वादा मैं लेना चहाता हुँ,
    होगा इस मुकदमे का अंत, बस इतना यकीन दिला दे तू।
    क्योंकि मुझे इस दुनिया पर पूरा भरोसा है, ये मुझे कभी रिहा नहीं होने देगें,
    मेरी मौत को धंधा बनाकर हर रोज बाजार में बेंचेगे।

    - प्रेरणा राठी
    ©preranarathi

  • preranarathi 16w

    बेटियाँ

    तुमने बचपन छीन लिया मेरा,
    बन गई खिलौना मैं तेरा।
    पडा मुझ पे तेरा साया जब से,
    भूल गई मैं मुस्कुराना तब से।
    मेरे सपनो का महल तोड़ दिया तुमने,
    मेरी रूह तक को झनझोड दिया तुमने।
    मेरी पायल को तुमने बेडियो में बदल दिया,
    मेरी महंदी को तुमने लाल रंग से रंग दिया।
    मेरे आसू देख मेरे माँ-बाप भी रोते है,
    और शायद इसीलिए,
    लोग बेटी को पैदा करने से पहले हजार बार सोचते हैं।
    ऐ इंसान, खुदा भी जब तुझे देखता होगा,
    बन गया तु हैवान कैसे, वो भी सोचता होगा।
    लेकिन एक वक्त ऐसा भी आएँगा,
    जब तु अपनी ही परछाई से मुँह छिपाएँगा।
    जब आएँगी वो तेरे घर,
    तब शायद तुझे समझ आएँगा।
    जब पुकारेगी वो तुझे बाबा कहकर,
    तब तु अपनी गलती पर पछता भी न पाएँगा।
    लेकिन अब तो ये भी पता नहीं,
    बाबा शब्द का अर्थ, क्या तु समझ भी पाएँगा।
    तु इंसान हैं, न जाने कब हैवान बन जाएँगा,
    और उसकी रूह तक को भरे बाजार में नीलाम कर आएँगा।


    - प्रेरणा राठी
    ©preranarathi

  • anshikasinha_ 21w

    तेरी याद

    तेरे इंतज़ार में हम पलके बिछाए बैठे है,
    इस बाज़ार-ए-इश्क़ में खुद को लुटाए बैठे है,
    इस ज़ालिम ज़माने की फ़िक्र किसको है,
    अरे हम तो तेरी याद में खुद को भुलाए बैठे है।।।
    ©anshikasinha_

  • anshikasinha_ 21w

    बाज़ार-ए-मोहब्बत

    तू इशारा तो कर मैं तेरी बन जाऊंगी,
    अपने हर ख्वाबों को तेरा रास्ता बताऊंगी,
    तेरे हर सपने में भी निशान मेरा ही होगा,
    और बाज़ार-ए-मोहब्बत में तेरे नाम पे खुद को लूटा आऊंगी।।।
    ©anshikasinha_

  • kr_gaurav 33w

    रूह

    इतने सस्ते नही हम की हार जाए सबकुछ बस एक जिस्म के खातिर,
    सौदा अगर रूह का करना हो तो बिकने हम भी आएंगे
    ©kr_gaurav

  • vswrites97 36w

    तवायफ(वैश्या)

    शब्द मात्र से ही लोग आचरण भापने लगते है ,
    भूख जिस्म की फिर भी जाकर वही मिटाते है ,
    एक औरत को लोग कहा समझ पाते है ?
    इश्क़ करे किसी से तो कौनसा अपना पाते है ?
    धर्म जात पात सबके नारे लगाते है ।
    आशिक़ी में मगन औरत को कोई ना समझ पाया ,
    प्यार में भागी थी औरत क्यूंकि समाज अपना नहीं पाया,
    औलाद होने पर एक आदमी ने भी ठुकराया ,
    बिन पति के बच्चें के साथ कोई मोहल्ला ना अपना पाया,
    औलाद भूखी ना सोए इसलिए
    अनजान शहर में खुद की इज्जत को
    दाव पर लगाया ,
    औलाद के लिए उसने हर पैंतरा अपनाया,
    तुमने लांछन लगाए काफी फिर भी अकेली रातों को उसको ही अपने साथ पाया,
    तुमने भी दया दिखाकर हाल पूछा ,
    उसने भी अपना हाल तुम्हे सुनाया,
    तवायफ है; इसलिए कोई उसे दिल में
    जगह ना दे पाया,
    औरत थी औरों की तरह पर प्यार में उसने भी धोखा खाया,
    अकेली होकर अनजान शहर में काफी से दिमाग लगाया,
    लड़ाई लंबी और मुश्किल थी फिर भी किसी के आगे हाथ ना फैलाया,
    अनपढ़ गांव की लड़की ने सब जगह अपनों का दरवाजा बंद पाया,
    भटकती औरत का काफी लोगों ने
    फायदा उठाया,
    रास्ते से उठा ले गए थे औरत को
    तब भी कोई रोकने ना आया,
    जिस्मफरोशी का धंधा एक तवायफ ने
    उसे थमाया,
    हालात की हारी वो औरत भी
    कुछ कर ना पाई,
    ज़िंदा रहना था,
    अटकी थी बच्चे की भी पढ़ाई,
    घर का कोई ना ठिकाना था,
    एक मर्द के धोखे ने उसको ये बात सिखाई,
    समाज ने भी प्यार की सज़ा क्या ख़ूब दिलाई ,
    जीते जी ज़िंदा लाश थी,
    फिर भी उसने हिम्मत जुटाई,
    औरत को तवायफ का दर्जा दिया ,
    फिर भी खुशी से ये बात अपनाई,
    खुद आए और ना जाने कितनो को
    उसका पता दिया ,
    तवायफ है आखिर कहा उसका मान हसकर सब दुख सहन किया,
    तुमने अपनी औरत को कौनसा तवज्जो दिया?
    जो तवायफ को दे पाओगे ,
    बेगैरत हो भूख मिटाकर भी कहा
    किसी को अपना पाओगे ,
    दुनिया में चेहरे इतने है ,
    कभी धोखा खाओगे तो पहचान जाओगे
    © Shyaddhiwrites

  • vishwa_ravi 40w



    सब कुछ तो है मेरे पास इक मुहब्बत के सिवा

    ऐ सौदागर ज़रा कीमत तो बयां कर

    सुना है के बिकती है मुहब्बत भी यहाँ

    ©vishwa_ravi

  • confesstalks 41w

    Laga kar Ishk ka bazar wo hume khub lut gye..
    Or huwa mukmal n unka bhi Ishk ,
    Na jane kis halat se tut gye ..
    ©confesstalks

  • nawazish_nilesh 44w

    ग़ज़ल (2)

    मुझे मेरी पहचान बताने को कहा
    आज फिर दिल जलाने को कहा।

    मुठ्ठी भर झूट बोलने वाले लोगों ने
    आज सच का मकां बनाने को कहा।

    मै गुम हूं कहीं अंधेरों के सराबो में
    मुझे उजालों का सामान लाने को कहा।

    मर्ज पता भी नहीं मुझे इश्क़ में
    आज मर्ज को अर्ज से मिटाने को कहा।

    प्यार से जो दीये जलायें थे प्यार में
    उस दिये से आज जिंदा लाश जलाने को कहा।

    प्यास बुझती नहीं समंदर के पानी में
    साकी तेरी आंखो से प्यास बुझाने को कहा।

    डूब जाने का मन करे जब मोहित के बांहों में
    निलेश के ग़ज़ल की बाज़ार में जाने को कहा।

    ©nawazish_nilesh

  • usamashaikh 50w

    Some girls dont need rose
    ©usamashaikh

  • himanshuchaturvedi 52w

    जाड़े के इस मौसम की
    गुनगुनी सी घाम में...
    अक्सर मां बैठे यादें बुना करती थीं..
    आज कल के बाजा़री ज़माने
    उन यादों का मोल क्या जाने
    .
    ©himanshuchaturvedi

  • usamashaikh 53w

    Duniya ek bazar hai

    Ye Duniya ek baazar hai,
    Khreedar aur Bechne wale hazaar hain.
    Masoomiyat Bechdi,
    Khareedi kisne pata nahi.
    Magrooriyat Khareedli,
    Bechi kisne pata nahi.
    Kuch yuhi bikk aaye,
    Dil ka Sauda muft mein karr diya.
    Kuch Girvi ho aaye,
    Karz ke bojh ka safar kiya.
    Kuch Gareeb hain yahan,
    Ameeron ki qaid mein,
    Kuch Ameer hain yahan,
    kaali daulat ki qaid mein.
    Sauda iss baazar mein,
    Asaan hargiz nahi.
    Aksar yaha woh hota hai,
    Jo hota jayaz nahi.
    Sab hi yahan daulat ki,
    Bebas Zindagi pe sawar hain.
    Ye Duniya ek baazar hai.
    Ye Duniya ek baazar hai.
    ©usamashaikh

  • vaishnavi_09 58w

    First hindi poem!
    P.s- It really took me 10-15 min to type ths.��
    #hindimirakee #chamak #bazar
    @mirakee @mirakeeworld @readwriteunite @writersnetwork

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    इस बाज़ार के रंगमंच पर
    खेल अनेक है
    कोई महंगाई, तो कोई बेकार क्वालिटी से
    परेशान है
    जितनी चमक यहाँ हर एक दुकान में है
    उतनी यहाँ चलते लोगों की जिंदगी में अंधकार है
    और इन ठहाकों और आवाज़ो में
    खामोश, कई सितारे हैं
    उनकी चमकती मुस्कान में
    कुछ सूनेपन के दाग है
    काली धुंध की रात मे
    बस कुछ दो कागज़ आग है
    पर एक एतबार, एक आशा है
    अगली सूरज की किरण में
    उन्हें अब चमकना है
    ©vaishnavi_09

  • bejubaanshayar 60w

    #dharm#bazar#hindu#musalman#hindustan#betiyan#hawas#waqt#gita#quran#mrak

    ᴰʰᵃʳᵐ ᵏᵃ ʸᵉ ᵏᵃⁱˢᵃ ᵇᵃᶻᵃʳ ˢᵃʲᵃ ʳᵃᵏʰᵃ ʰᵃⁱ
    ᴴᵃʳ ᵗᵃʳᵃᶠ ᴴⁱⁿᵈᵘ ᵐᵘˢᵃˡᵐᵃⁿ ᴸᵃᵍᵃ ᴿᵃᵏʰᵃ ʰᵃⁱ

    ᴷʸᵃ ⁱˢ ˡⁱʸᵉ ᵛⁱʳᵒ ⁿᵉ ˢʰᵃʰᵃᵈᵃᵗ ᵈⁱ ᵗʰⁱ
    ʸᵉ ᵏᵃⁱˢᵃ ᴴⁱⁿᵈᵘˢᵗᵃⁿ ᴮᵃⁿᵃ ᴿᵃᵏʰᵃ ʰᵃⁱ
    ˢᵃᶠ ʰᵃʷᵃ ᴾᵃⁿⁱ ᵇʰⁱ ᵐᵘʸᵃˢˢᵃʳ ⁿᵃʰⁱ ᵃᵇ ᵗᵒ
    ˢʰᵃʰᵃʳ ᴷᵒ ᵐᵒᵘᵗ ᵏᵃ ᵇᵃᶻᵃʳ ᴮᵃⁿᵃ ᴿᵃᵏʰᵃ ʰᵃⁱ

    ᵀᵒᵈᵗᵉ ʰᵃⁱ ᵇʰᵘᵏ ˢᵉ ᵈᵃᵐ ʸᵃʰᵃ ᵃᵇ ᵇʰⁱ ᵇᵃᶜʰʰᵉ
    ᴴᵘᵠᵘᵐᵃᵗ ⁿᵉ ʸᵉ ᵏᵃⁱˢᵃ ᴺⁱᶻᵃᵐ ᴮᵃⁿᵃ ᴿᵃᵏʰᵃ ʰᵃⁱ
    ᴸᵘᵗ ᴿᵃʰⁱ ᵇᵉᵗⁱʸᵃ ʰᵃʳ ʳᵒʲ ᵉᵏ ⁿᵃʸᵉ ˢʰᵃʰʳᵒ ᵐᵉ
    ᴮᵉᵗⁱʸᵒ ᴷᵒ ᴴᵃʷᵃˢ ᵏᵃ ˢᵃᵐᵃⁿ ᴮᵃⁿᵃ ᴿᵃᵏʰᵃ ʰᵃⁱ

    ᴶⁱˢᵉ ᶜʰᵘⁿᵃ ᵗʰᵃ ʰᵃᵐⁿᵉ ᵃᵖⁿⁱ ᵇʰᵃˡᵃⁱ ᵏᵉ ˡⁱʸᵉ
    ᵁˢⁱ ⁿᵉ ʰᵃᵃˡ ᴮᵘʳᵃ ᴮᵃⁿᵃ ᴿᵃᵏʰᵃ ʰᵃⁱ
    ᴬᵇ ᵗᵒ ᵈᵃʳ ˡᵃᵍᵗᵃ ʰᵃⁱ ᵐᵘʲʰᵉ ᴬᵖⁿᵉ ᵐᵘʰᵃᶠⁱᶻ ˢᵉ
    ᴰᵘˢᵐᵃⁿᵒ ⁿᵉ ᵘˢᵉ ᵃᵖⁿᵃ ʸᵃᵃʳ ᴮᵃⁿᵃ ᴿᵃᵏʰᵃ ʰᵃⁱ

    ᴶⁱⁿᵉ ᵏᵃ ᴺᵃʸᵃ ᵗᵃʳⁱᵏᵃ ᵈʰᵘⁿᵈᵒ ʸᵃᵃʳᵒ
    ᴹᵃᵒᵘᵗ ᵏᵃ ᵏʸᵒ ʰᵃᵗʰⁱʸᵃʳ ᴮᵃⁿᵃ ᴿᵃᵏʰᵃ ʰᵃⁱ
    ʸᵉ ᵍᵃˡᵃᵗ ʰᵃⁱ ʷᵒ ˢᵃʰⁱ ᴹᵃⁱ ˢᵃʰⁱ ᴴᵘⁿ ʷᵒ ᵍᵃˡᵃᵗ ʸᵉ ˢᵃᵇ ᵏʸᵃ ᴸᵃᵍᵃ ᴿᵃᵏʰᵃ ʰᵃⁱ
    ᴬᵃᵒ ʷᵃᵗᵃⁿ ᴷᵒ ʷᵃⁱˢᵃ ᵇᵃⁿᵃʸᵃ ʲᵃʸᵉ
    ᴳᵃⁿᵈʰⁱ ⁿᵉ ʲᵃⁱˢᵃ ᵃᵃⁿᵏʰᵒ ᵐᵉ ᵇᵃˢᵃ ᴿᵃᵏʰᵃ ʰᵃⁱ

    ʸᵉ ʷᵃᵠᵗ ᵍʸᵃ ᵗᵒ ᶠⁱʳ ˡᵒᵘᵗ ᵏᵉ ⁿᵃ ᵃᵃʸᵉᵍᵃ
    ᴸᵃᵈ ᵖᵃᵈᵉ ᵃᵃᵖᵃˢ ᵐᵉ ᵗᵒ ᵐᵘˡᵏ ⁿᵃʰⁱ ᶜʰᵃˡ ᵖᵃʸᵉᵍᵃ
    ᶠᵒᵒˡ ᵗᵒ ᵈᵘʳ ʰᵃⁱ ᵏʰᵘˢᵇᵘ ᵇʰⁱ ⁿᵃ ᵐⁱˡ ᵖᵃʸᵉᵍᵃ
    ᴿᵃᵐ ᵖᵃʰᶜʰᵃⁿ ᵗᵒ ᴿᵃʰⁱᵐ ᵍᵘʳᵘʳ ʰᵃⁱ ᵐᵘˡᵏ ᵏⁱ
    ᴸᵃᵇᵒ ᵖᵉ ᴳⁱᵗᵃ ᵗᵒ ᴰⁱˡ ᵐᵉ ᵠᵘʳᵃⁿ ᵇᵃˢᵃ ᴿᵃᵏʰᵃ ʰᵃⁱ
    ©ᵇᵉʲᵘᵇᵃᵃⁿˢʰᵃʸᵃʳ

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    Dharm ka ye kaisa bazar Saja rakha hai
    Har taraf Hindu musalman Laga Rakha hai

    Kya is liye viro ne shahadat di thi
    Ye kaisa Hindustan Bana Rakha hai
    Saf hawa Pani bhi muyassar nahi ab to
    Shahar Ko mout ka bazar Bana Rakha hai

    Todte hai bhuk se dam yaha ab bhi bachhe
    Huqumat ne ye kaisa Nizam Bana Rakha hai
    Lut Rahi betiya har roj ek naye shahro me
    Betiyo Ko Hawas ka saman Bana Rakha hai

    Jise chuna tha hamne apni bhalai ke liye
    Usi ne haal Bura Bana Rakha hai
    Ab to dar lagta hai mujhe Apne muhafiz se
    Dusmano ne use apna yaar Bana Rakha hai

    Jine ka Naya tarika dhundo yaaro
    Maout ka kyo hathiyar Bana Rakha hai
    Ye galat hai wo sahi Mai sahi Hun wo galat ye sab kya Laga Rakha hai
    Aao watan Ko waisa banaya jaye
    Gandhi ne jaisa aankho me basa Rakha hai

    Ye waqt gya to fir lout ke na aayega
    Lad pade aapas me to mulk nahi chal payega
    Fool to dur hai khusbu bhi na mil payega
    Ram pahchan to Rahim gurur hai mulk ki
    Labo pe Gita to Dil me Quran basa Rakha hai
    ©bejubaanshayar

  • viprii 61w

    #Bazar e mohabbat

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    बाजार-ए-मुहब्बत

    ये कहता कौन है साहब,मुहब्बत नहीं बिकती बाजारों में
    मुहब्बत को तो नीलामी में बोली लगते देखा है
    था आशिक एक मुहब्बत का
    लेने को मुहब्बत वो बाजार-ए-मुहब्बत में आया था
    मगर थी जेब उसकी खाली
    पर सौदा बनाने को दिल वो साफ लाया था
    ढूँढ़ता अपनी मुहब्बत को, वो फिर रहा था गलियारों में
    ये कहता कौन है साहब,मुहब्बत नहीं बिकती बाजारों में।
    मुहब्बत मिल गई उसको,कुछ वक्त साथ भी बैठा
    सौदा मुहब्बत का मुहब्बत से ही कर बैठा
    कीमत दिल की लगाई थी
    धीरे-धीरे बात फिर जज्बातों की आई थी
    हाथों में हाथ लेकर के फिर धीरे से वह बोला
    देना तू साथ बस मेरा,लुटा दूं मैं तो जान भी यारों में
    ये कहता कौन है साहब,मुहब्बत नहीं बिकती बाजारों में।
    मुहब्बत ने वक्त मांगा
    बोली में खुद चलकर आऊंगी
    तेरी दुनिया तेरे सपने
    अपने हाथों से सजाउंगी
    बीता कुछ वक्त और यूँ ही स्वप्नों के सज्जा संवारों में
    ये कहता कौन है साहब,मुहब्बत नहीं बिकती बाजारों में।
    कुछ वक्त और बीता तो वो फिर लौट कर आया
    अपनी मुहब्बत को खङे नीलामी में वो पाया
    खरीदने उसकी मुहब्बत को सेठ परदेशी था कोई आया
    उसकी मुहब्बत का दाम अच्छा ही लगाया
    खोकर के मुहब्बत बैठा था वो मायूस जीवन की राहों में
    ये कहता कौन है साहब,मुहब्बत नहीं बिकती बाजारों में।।
    ©Vishal Chaudhary

  • dinosaur_abh 64w

    नफरतों के बाज़ार में
    मोहब्बत बेचती वो,
    आंखों में आंसू
    चेहरे पे मुस्कुराहट लिए
    मुझे देख दुबक जाती
    वो फ़रिश्ते सी नन्ही परी।

    ©a_man_with_goldenink

  • madhuraj4you 74w

    खुशियाँ बिक रही थीं सरेराह,उन्हें खरीदने चला था मैं
    पर ग़म के बाज़ार ने मुझे अपना सौदाग़र बना लिया!!
    ©मधुराज भारद्वाज
    ©madhuraj4you

  • kandykddixit 76w

    What you speak is what you think!
    #laafz #boli
    #bazar #khariddar
    @mirakee @mirakeeworld

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    मेरे लफ़्ज़ों ने मुझे खरीददार नहीं मिलने दिए,
    गया तो मैं भी था अपनी बोली लगवाने.

    ~✍Kandykddixit

  • aarushhh 76w



    सुबह से लेकर शाम तक,मैं किताबों के बाजारों में बिकता हूँ,
    क्योंकि,
    मैं शब्द नहीं,दर्द लिखता हूँ...!!!
    ©aarushhh