#Soch

592 posts
  • sirfsadharan 1d

    Samjhkar

    Soch samjhkar bolte hai isiliye
    kewal apne hi shabdo ko ache se tolte hai.
    ©sirfsadharan

  • vicky_soni 4d

    Aaj bade ghup chup se ho
    Naata tanhai se jod liya hai
    Ya khud se naraaz ho?
    Khamooshi bata rahi hai
    Dimaag Kuch aur Soch Raha hai
    Dil Kuch aur keh Raha hai

  • anandita_1812 1w

    सोचती हूँ

    सोचती हूँ आज चुप्पी तोड़ ही दूँ,
    आज जी खोल के बोल ही दूँ,
    कब से दफन कुछ राज़ हैं,
    सोचती हूँ आज बिना डरे राज़ खोल ही दूँ,
    तरस गयी एक मुस्कुराहट के लिए,
    सोचती हूँ आज जी खोल के हँस ही दूँ।
    ©anandita_1812

  • aseel__ 2w

    Sach

    Wo kehte hai ki dost hai mere
    Jhoot bolte sharam bhi nahi aati
    ©aseel__

  • kritikakiran 5w

    अन्याय के विरुद्ध
    जो कलम
    स्वयं ईश्वर की ख़िलाफ़त
    करने की क्षमता रखती है...
    उसके साहस के आगे..
    तुम..
    तुम्हारे शब्द..
    तुम्हारा क़द...
    तुम्हारा पूरा अस्तित्व...
    क्या है?

    अपने आस पास
    ऊँची दीवारें बना लेने से,
    उन पर चटक रंग पुतवा लेने से,
    या खुशफ़हम तस्वीरें टाँग लेने से,
    क्या तुम बहते पानी को रोक सकोगे?

    तुम चाहे जो कर लो
    इन दीवारों पर पानी उभर ही आएगा..
    जहाँ तहाँ...सीलन की तरह..
    या फिर भर जाएगा ...
    दरारों में..
    संभावना तो यह भी है कि
    वह धराशायी कर दे..
    तुम्हारा...समूचा...किला..

    तुम
    अपने ढकोसलों की ये दीवारें
    चाहे तो और ऊँची कर लो
    या फिर अपने झूठ की.. अनेकानेक..
    गगनचुम्बी.. मीनारें बनवा लो..
    लेकिन ठहरो... ज़रा सोचो..
    एक क्रांतिकारी कलम के आगे
    तुम क्या ही रहोगे?

    बौने थे, बौने रहोगे!

    - कृतिका किरण




    #soch #kalam #krantikari #hindi #sach #kriti #kritikakiran #hindikavita

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    अन्याय के विरुद्ध
    जो कलम
    स्वयं ईश्वर की ख़िलाफ़त
    करने की क्षमता रखती है...
    उसके साहस के आगे..
    तुम..
    तुम्हारे शब्द..
    तुम्हारा क़द...
    तुम्हारा पूरा अस्तित्व...
    क्या है?

    ( in caption )

    ©kritikakiran

  • xykon_noir 6w

    ज़माना ख़राब है

    देख कर मुझे दर्द में, तुम जो हंस पड़े हो xykon...
    "क्यों समझूं इंसान इसे, जब अपना नहीं तो है कौन?"
    यही सोचते हो अगर, तो सोच यह लाजवाब है...
    और तुम कहा करते हो, कि ज़माना ख़राब है!

    •••••••••••••••••••••••••••

    देख समृद्धि को जिसकी, हो तपन में गुम...
    हुए उसके संग बड़े हो खेल-पढ़ कर तुम...
    क्यों दुखी हो तुम, जो साथी क़ामयाब है!
    और तुम कहा करते हो, कि ज़माना ख़राब है!

    •••••••••••••••••••••••••••

    वो लड़की जिसके साथ, कल हो गई बदसलूकी,
    सब से कहा तुमने, "उसे न हिस थी आबरू की...
    बद्चलन है हर वो औरत, जो बेनक़ाब है!"
    और तुम कहा करते हो, कि ज़माना ख़राब है!

    •••••••••••••••••••••••••••

    कह "हरिजन" चल दिये थे, जिसकी तुम चौखट से,
    वो दिलाता मुक्ति सब को, काशी के पनघट पे...
    जाति, रंग, धर्मों का तुमने, अच्छा किया हिसाब है!
    और तुम कहा करते हो, कि ज़माना ख़राब है!

    •••••••••••••••••••••••••••

    घर जला कर आये हो, तुम जिस मुहाजिर का...
    रब तुम्हारा भी वही है, जो था काफ़िर का!
    माथे पर, न इक शिकन, न नयन में आब है!
    और तुम कहा करते हो, कि ज़माना ख़राब है!

    •••••••••••••••••••••••••••

    क्या कहोगे चित्रगुप्त से, न रहोगे जब?
    हैं फ़रिश्तों के ज़हन, करतब तुम्हारे सब...
    तुम को पर मालूम बेशक़, यह भी जवाब है!
    कह देना, "क्या करें, ज़माना ख़राब है!"

    ©xykon_noir

  • _sky_blue_ 6w

    सोच

    सोच गिरी हुई हो, तो बुरी लगती है,
    सोच मुँह पर कही हुई हो, तो तीख़ी लगती है,
    सोच सच्ची हो, तो कड़वी लगती है,
    सोच गंदी हो, तो दुखद लगती है।

    सोच गिरी हुई हो, तो कहने वाले के लिए वो सही होती है,
    सोच मुँह पे कही हुई हो, तो कहने वाले के लिए मीठी होती है,
    सोच सच्ची हो, तो कहने वाले के लिए इमरती होती है,
    सोच गंदी हो, तो सोचने वाले के लिए खुशनुमा होती है,

    सोच अच्छी, बुरी, तीख़ी, मीठी, गन्दी और ना जाने क्या क्या रूप की हो सकती, --------
    कभी उलझन तो कभी उपवन-सी हो सकती।

    सोच पानी-सी, ना जाने कितने रूप ले सकती,
    जो ढांचा जैसा मिले; सोच उस ढ़ाचे के अनुसार रूप ले सकती।

    सोच हर इंसान की,
    उनके नज़रिए का आईना है,
    और इस आईने को साफ रखना,
    हमारी प्राथमिकता है।
    ©_sky_blue_

  • ava123 6w

    Soch

    Hum sochte hai zindagi mein sab hasil kare magar yeh nhi sochte ki kya pata kal rahe na rahe
    ©ava123

  • _sky_blue_ 6w

    इल्ज़ाम

    इल्ज़ामों से ना डरो,
    इल्ज़ामों से ना थको,
    ये तो बेहतर बनाते हैं हम इंसानों को।
    कमियों में भी सुधार लाने में सहायक बनते हैं ये इल्ज़ाम तो !

    इल्ज़ामों से ना चिढ़ो,
    इल्ज़ामों से ना हारो,
    ये तो बताते हैं, हमारे पीठ पीछे छिपे इंसान को।

    इल्ज़ामों को ना कोसो,
    इल्ज़ामों को ना बदनाम करो,
    ये तो बताते हैं, हमें ले के दूसरों के मन की उम्मीदों, खोट या विचार को।

    ©_sky_blue_

  • _aakanksha_ 8w

    #soch thi hun kaise itna mai badal gayi hun

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    Soch thi hun kaise itna mai badal gayi hun
    Phele andere say darti thi ab kisi pe bharosa karne say darti hun
    Soch thi hun kaise itna mai badal gayi hun
    Phele khamoshi say rehana nahi ata tha ab khamosh hogayi hun
    Soch thi hun kaise itna mai badal gayi hun
    Phele kisi ke saath chalthi thi ab akeli chal rahi hun
    Soch thi hun kaise itna mai badal gayi hun
    ©_aakanksha_

  • wanderers_thought 10w

    यूँही स्वयं की समीक्षा ,करते हुए ये खयाल आया,
    कलाकार जिसने जीते जी ,सबका प्यार पाया ,
    असल में तो वो क्रांतिकारी विचारधाराक था ही नही,
    किसी असल कलाकार की रचनाओं से,
    कहाँ इस समाज ने ,उसके जीवनपर्यन्त पार पाया।
    ©wanderers_thought

  • faulty_puppet 12w

    Abhimaan

    Tu apne aap me khaas
    Yeh kisi ko kehne ki zaroorat nahi
    Tu alag tera alag hai kaam
    Kisi aur se tulna ki zaroorat nahi

    Zindagi nirantar chalti gaadi
    Gaadi me kamiyabi behroopiyan raahi
    Mile to thik, zyada mile to kharab
    Tulna ke bazaar me jo mehenga, woh abhimaani

    Har goon ko khane wala
    Yeh ek lauta dosh hai
    Teri bagiche me ghus kar
    Tere sukh ukhadta ye roz hai

    Na jaane kab, kaise aur kahaan
    Tere soch se karta khilwaad hai
    Teri har kaamiyaabi bekar kar
    Teri zindagi karta dushwaar hai

    Abhimaan hai nahi itna bura
    Jitna bura uski pehchaan hai
    Duniyadari ke berehem khel mein
    Abhimaan bhi ek zaroori hathyaar hai

    ©the_prabhashish

  • chattevedang 14w

    जनता का कायदा

    इस देश में लोगो को बड़ी देश भक्ति की बाते सिखाई जाती है,
    पर गर खुद पर आ गयी तो बीच मे धर्म जात की लकीरें लायी जाती है।
    ©chattevedang

  • ypravin054 14w



    Dil lagaane se achha hai,
    Paudhe lagaye,
    Ye ghaav nahi ,
    Chhaav denge.
    ©ypravin054

  • nidhi_yadav 14w

    सवालों से भरी हुई कहानी,
    जवाबों में बँधी हुई बेचैनी।
    जिंदगी पर है,
    भीड़ के कायदों का असर।
    इस जान में बसता है,
    बगावती सपनों का घर ।

    ©nidhi_yadav

  • kumar_adi 15w

    #vichar#soch#ladka#jimmedar#rishte#zindgi
    Hello Dear Mirakee family, hope that you all are healthy and happy. I am here with Part 2 of my writup
    titled above. You can check Part 1 of it in my profile.
    Please give some time to this and read��������. I hope that you all will like it.

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    लड़का हूँ तो...

    विचार मेरे और सोच मेरे के तुम सब हिस्सेदार हो,
    युहीं नहीं बदनाम मैं, इसके लिए तुम सब जिम्मेदार हो...
    बद से बदनाम बुरा, ये तो तब समझ आता है,
    जब कई बार मेरी गलती न होने पर भी मुझे ही कोशा जाता है...

    कभी किसी लड़की से खेल में हार जाऊँ तो मजाक बनाया जाता है,
    जब लड़का और लड़की समान हैं तो ये भाव क्यूँ उगाया जाता है...

    रिश्तों में भी कभी-कभी मैं फँस सा जाता हूँ,
    किसकी सुनूँ किसकी नहीं, अंदर ही अंदर दब सा जाता हूँ...
    बताना कुछ नहीं चाहता मैं, जताना कुछ नहीं चाहता हूँ,
    बस ये मत सोचना कि लड़का हूँ तो बहुत खुशहाल ज़िंदगी जीता हूँ...
    ©kumar_adi

  • hoorbanu98 16w

    Naseeb apki soch mai hai

    Gareeb hona naseeb mai hai,
    Lekin:-)
    Dil se Gareeb hona;
    Aapki soch ke naseeb mai hai!
    ©hoorbanu98

  • quotescribe 16w

    हकीकत

    जो परिंदे घर शाम को नहीं लौटते है
    वो या तो किसी मुश्किल में है
    या तो वो रास्ता भाटक गए है
    अगर एसा नहीं है तो समझ लेना वो खोटे हैं

    ©uncondition_thoughts

  • quotescribe 16w

    काश कि मैं

    काश कि मैं फिर बदल जाऊँ
    काश कि मैं फिर गाँव जाऊँ
    काश कि मैं फिर फसल उगाऊँ
    काश कि मैं फिर सम्भल जाऊँ

    छोटी सी कुटिया मैं रह जाऊँ
    काश कि मैं फिर उछाल जाऊँ
    लहराते हुए पेड़ फिर लहराऊँ
    काश कि मैं फिर चहल जाऊँ

    फिर से वो लहराते खेल देख आऊँ
    विशाल झरनों में फिर से नहाऊँ
    पानी कभी कुए से भर लाऊँ
    नदी के तट पर कुछ पल बिताऊँ

    ©uncondition_thoughts

  • demiiii 17w

    Parho Mujhe

    Meri khwaisho ki bhi khwaishe hai
    Or jazbaato ke bhi jazbaat hai

    Mein itna gehra hu
    Ki meri gehraiyo ke unginat se Raaz hai

    Mujhe suljhane baithoge
    Toh zindagi kam parjayegi

    Mein tumhe itna uljhadunga apne andar
    Ki bahar nikalna bhooljaoge

    Tumhari khud ki soch hu mein
    Mujhe kis kis se chupaoge

    Ab bus or kitne sawalo mein
    Apne aapko uljhaoge
    ©demiiii