#anougraphy_

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  • archana_tiwari_tanuja 4w

    सूखे पत्तों सी-

    सूखे पत्तों सी है ये ज़िंदगी की कहानी...
    जो थी कभी हरी-भरी और सुहानी........

    कभी शाख पर अपनी थी मुस्कुराती.....
    आज बिछड़ कर अपनी ही डाल से......

    है बड़ी ही मायूस और थकी-हारी सी.....
    याद करती है वो बहारों के हसी मौसम....

    नन्ही पत्ती से पतझड़ तक का सफ़र.......
    ऐसे ही तय करते है हम ज़िंदगी का सफ़र

    कभी धूप तो कभी छाव बसर करते है.....
    सुख,दःख के बसंत,बहार,पतझड़ देखते है

    अंत सभी का एक सा ही होता है यहां पर.
    एक रोज़ हमे भी सूखे पत्तों सा साख छोड़

    इस जहाँ को अल्विदा कह जाना है.....
    लोगों के दिलो मे अपनी छाप छोड़ जाना है

    ©archana_tiwari_tanuja