#dil_ke_bol_alfaaz

1967 posts
  • dil_ke_bol_alfaaz 14w

    बा पर्दा निगाहों से उतरी चाहत सारी
    तग़ज़्जुल में भीगी हुई ख़ल्वत सारी

    इख्तियार है आब ए चश्म कनखियों में
    दश्त ए हैरत में खोई हुई मुस्कान सारी

    बेजा हसरतों की आंच पर सुलग कर
    बेकस झुलसी है अपनी पहचान सारी

    आदतन रही शायराना मिजाज़ी मेरी
    कागज़, कलम, स्याही बेज़ुबान सारी

    हर्फ पा - बस्ता ज़हन में दबे रूहीन
    ख़ल्वत में बैठी है इंसानियत सारी

    #dil_ke_bol_alfaaz

    तग़ज़्जुल - ग़ज़ल का रंग
    ख़ल्वत - एकांत
    इख्तियार - control
    पा- बस्ता - बेड़ियों में बंधी , bound in fatters

    Read More

    बा पर्दा निगाहों से उतरी चाहत सारी
    तग़ज़्जुल में भीगी हुई ख़ल्वत सारी

    इख्तियार है आब ए चश्म कनखियों में
    दश्त ए हैरत में खोई हुई मुस्कान सारी

    बेजा हसरतों की आंच पर सुलग कर
    बेकस झुलसी है अपनी पहचान सारी

    आदतन रही शायराना मिजाज़ी मेरी
    कागज़, कलम, स्याही बेज़ुबान सारी

    हर्फ पा - बस्ता ज़हन में दबे रूहीन
    ख़ल्वत में बैठी है इंसानियत सारी

    ©dil_ke_bol_alfaaz

  • dil_ke_bol_alfaaz 14w

    एक फ़रियाद हूँ
    या सौगात हूँ
    मोहब्बत की मिसाल हूँ
    मकबरा-ए -मुमताज़
    मैं यादों में तर मीनार हूँ
    नमकीन पानी आंखो का
    और नज़ारा ए संगमरमर हूँ
    फ़कत सनम - तराशी ही नहीं
    नुदरत मोजज़ा क़ायनात का
    आरास्ता तराशी हुई कारीगरी
    ब - कद्र - ए - सुकूँ नायाब हूँ
    फ़लक का टूटा दरख़्शाँ सितारा
    आयतों से लिपटी हुई
    खत्ताती यहाँ से वहाँ तक
    ख़ूबसूरत कूजा गरी
    मैं नाज़ाँ-ए-शाहजहाँ
    ख़्वाहिश -ए-मुम्ताज़ हूँ

    #dil_ke_bol_alfaaz

    Read More

    आयतों से लिपटी हुई
    खत्ताती यहाँ से वहाँ तक
    ख़ूबसूरत कूजा गरी
    मैं नाज़ाँ-ए-शाहजहाँ
    ख़्वाहिश -ए-मुम्ताज़ हूँ


    ©dil_ke_bol_alfaaz

  • dil_ke_bol_alfaaz 17w

    मशाल है जला ली
    पूर्ण स्वराज कि
    होगी ये ज़मीं भी अपनी
    और आसमाँ भी

    आज़ाद मेरा भारत
    आज़ाद हो भविष्य भी
    जो चाहत है मेरी
    वो आज है सभी की

    वीर पुत्र ही नहीं यहाँ
    है पुत्रियां भी शेरनी
    जना जिसने शेर को
    है वो शेरनी दहाड़ती

    गाँधी, भरत, आज़ाद ,
    चन्द्र शेखर और सुभाष
    देश की वीरांगनाएं भीकाजी, सावित्री,
    सुचेता , सरोजिनी

    देश अपना आज़ाद हो
    आज़ाद हिन्दुस्तान हो
    आज दिल में सबके
    ये ज्वाला है मचलती

    हो जन जन के मुख पर
    करो या मरो नारा बुलंद
    आओ सब मिल कर
    बनाए देश अपना सुदृढ़

    हाँ
    होगी ये ज़मीं भी अपनी
    और आसमाँ भी

    ©dil_ke_bol_alfaaz

  • dil_ke_bol_alfaaz 19w

    #motherlessdaughters

    मेरी माँ की याद बस्ती है मुझमें कहीं
    भीनी गीली मिट्टी की सुगन्ध की तरह
    ताज़गी से भरपूर हर एक एहसास
    दिल को मेरे तृप्त करती हुई एक टीस है
    उनका उजला रंग रोशनी की तरह
    चमकीला साफ सुथरा निखरा हुआ
    याद आती है हर सुर्यकिरण के साथ
    अब दिन का मेरे उजाला छिन गया है
    पौ फटने से पहले ही आंखें खुल जाती है
    आलस्य अब मुझमें नहीं दिखाई पड़ता
    उंगलियों से बालों की उलझन सुलझाते
    चोटी को ममता से बांधने वाले हाथ
    अब कहां सुलझते हैं ये उलझन भरे सवाल
    डबडबाई लिए आंखें सूनी बेजान सी
    होटों पर सारे गम झुठलाती हुई मुस्कान
    छोटी को थपकाती हुई मेरी हथेलियां
    जब महसूस होने लगती हैं मुझे
    वो गरम रक्तप्रवाह जोश देता है मुझे
    मुश्किलों से लड़ने कि ताकत
    दुनिया की सबसे शक्तिशाली ढाल
    मेरी माँ है और मैं उनका अक्स हूं

    Dil Ke Bol Alfaaz

    #dil_ke_bol_alfaaz #_bol
    #bikhre_alfaz

    Read More

    मेरी मां की याद बस्ती है मुझमें कहीं
    भीनी गीली मिट्टी की सुगन्ध की तरह

    ©dil_ke_bol_alfaaz

  • dil_ke_bol_alfaaz 21w

    ख़ामोश रहे दिल के कांच टूटने के बाद
    मुस्कुरइए कि ज़िंदा हूं मैं मरने के बाद

    #dil_ke_bol_alfaaz #_bol

    Read More

    ख़ामोश रहे दिल के कांच टूटने के बाद
    मुस्कुरइए कि ज़िंदा हूं मैं मरने के बाद

    ©dil_ke_bol_alfaaz

  • dil_ke_bol_alfaaz 21w

    मैं नन्ही सी परी

    #dil_ke_bol_alfaaz #_bol

    Read More

    मैं नन्ही सी परी , देखूं ख़्वाब कई
    कभी गुड़िया से खेली , तो खुश हुई
    मैं चुलबुल सी परी , सोचे शरारत नई नई
    कभी माँ को सताऊं , तो होती कान खिचाई

    मैं नटखट सी परी , हरदम मस्ती से भरी
    कभी बहनों से हाथापाई , तो हुई अच्छी पिटाई
    मैं अल्हड़ सी परी , किसी की भी सुनती नहीं
    कभी करी अटखेलियां और मिली दोस्त नई

    मैं अलबेली सी परी , हुई नज़ों से बड़ी
    कभी रोती कभी हस्ती , दिलों पर राज करती
    मैं सुंदर सी परी , देखूं दर्पण घड़ी घड़ी
    कभी इठलाती कभी इतराती , अपनेआप से शर्माती


    मैं नन्ही सी परी , क्यों हो गई मैं बड़ी
    कल बाबुल के आंगन खेली , आज ससुराल चली
    मैं नन्ही सी परी .......

    ©dil_ke_bol_alfaaz

  • dil_ke_bol_alfaaz 23w

    #deardaughter

    मेरी लाढ़ली परी, एक नन्हीं परी
    वो दुनिया में मेरी ,हो सुकून भरी
    तोहफ़ा ख़ुदा का मुझे भी मिले गर
    मेरी गोद में भी खिले, वो गुलाबी कली
    मासूम नटखट , चंचल शरारत
    लाखो में एक , वो मेरी अमानत
    पलकों पर बिठाऊँ मैं फूलों से सजाऊँ
    नज़र ना लगे उसको काला टीका लगाऊं
    में चेहरा छिपा कर के छिप जाऊंगी
    और ता कर के वापस आ जाऊंगी
    हस हस के वो मुझको ढूंढा करेगी
    आंखमिचौली मेरे संग करेगी
    मेरा आइना मेरी आत्मजा वो परछाई मेरी
    वो बिटिया मेरी सबसे पक्की सहेली
    जो हो घर में बिटिया, हो खुशियां ही खुशियां
    वो मेरी सारी दुनियां , उसकी उतारूं बलईयां
    तोहफ़ा ख़ुदा का मुझे भी मिले गर
    मेरी गोद में खिले वो गुलाबी कली

    #dil_ke_bol_alfaaz

    Read More

    मेरी लाढ़ली परी,
    एक नन्हीं परी
    वो दुनिया में मेरी ,
    हो सुकून भरी
    तोहफ़ा ख़ुदा का
    मुझे भी मिले गर
    मेरी गोद में भी खिले,
    वो गुलाबी कली
    मासूम नटखट ,
    चंचल शरारत
    लाखो में एक ,
    वो मेरी अमानत
    पलकों पर बिठाऊँ
    मैं फूलों से सजाऊँ
    नज़र ना लगे उसको
    काला टीका लगाऊं
    में चेहरा छिपा कर के
    छिप जाऊंगी
    और ता कर के वापस
    आ जाऊंगी
    हस हस के वो मुझको
    ढूंढा करेगी
    आंखमिचौली मेरे संग
    खेला करेगी
    मेरा आइना
    मेरी आत्मजा
    वो परछाई मेरी
    वो बिटिया मेरी
    सबसे पक्की सहेली
    जो हो घर में बिटिया,
    हो खुशियां ही खुशियां
    वो मेरी सारी दुनियां ,
    उसकी उतारूं बलईयां
    तोहफ़ा ख़ुदा का मुझे
    भी मिले गर
    मेरी गोद में खिले
    वो गुलाबी कली

    ©dil_ke_bol_alfaaz

  • dil_ke_bol_alfaaz 23w

    फ़िर इन आंखों में वो शरारत हो ना हो
    इस दिल में मोहब्बत का दर्द हो ना हो

    गुलाब ए रुखसार पर एक नमी आ बनी
    शायद फ़िर कल उसका दीदार हो ना हो

    आई है फिर याद बेवफ़ा की दिल को
    फ़िर वफ़ा का मौसम शायद हो ना हो

    दिल की धड़कन बढ़ाती है मुलाक़ात
    बेताबियां दिल को ये फ़िर हो ना हो

    एक दिन की मोहब्बत फ़िर निभा लूं
    कल उसे इश्क़ की तबीअत हो ना हो
    #dil_ke_bol_alfaaz

    Read More

    फ़िर इन आंखों में वो शरारत हो ना हो
    इस दिल में मोहब्बत का दर्द हो ना हो

    गुलाब ए रुखसार पर एक नमी आ बनी
    शायद फ़िर कल उसका दीदार हो ना हो

    आई है फिर याद बेवफ़ा की दिल को
    फ़िर वफ़ा का मौसम शायद हो ना हो

    दिल की धड़कन बढ़ाती है मुलाक़ात
    बेताबियां दिल को ये फ़िर हो ना हो

    एक दिन की मोहब्बत फ़िर निभा लूं
    कल उसे इश्क़ की तबीअत हो ना हो

    ©dil_ke_bol_alfaaz

  • dil_ke_bol_alfaaz 23w

    दिल करता है तेरे पास बैठी रहूं
    दिन के उजाले भी
    रात के अंधेरे भी
    तेरे ही साथ गुजारूं

    है इश्क़ मौसिक़ी से और
    शायरी के अल्फ़ाज़ों से
    लम्हे कुछ फुरसत भरे
    पन्नों के हाशिए पर गुजारूं

    कुछ शब्दों से कर के मित्रता
    अंधकार को तनिक हटा
    रात के अंधेरों से मैं
    चांद को निहारूं

    इश्क़ के किस्से उल्फत की बातें
    जुल्फ़ों कि उलझन यादों के जाले
    ना जाने कितनी बातें है पुरानी
    कागज़ों पर क्या क्या उतारूं

    हरफनमौला तू और तेरी जादूगरी
    और आंखो के नम किस्से सारे
    लफ्ज़ दर लफ्ज़ पन्नों पर बेआवाज़
    और मैं खामोशी इख्तियार लूं

    #dil_ke_bol_alfaaz
    #कलम_पन्ने_इश्क़

    Read More

    दिल करता है तेरे पास बैठी रहूं
    दिन के उजाले भी
    रात के अंधेरे भी
    तेरे ही साथ गुजारूं

    है इश्क़ मौसिक़ी से और
    शायरी के अल्फ़ाज़ों से
    लम्हे कुछ फुरसत भरे
    पन्नों के हाशिए पर गुजारूं

    कुछ शब्दों से कर के मित्रता
    अंधकार को तनिक हटा
    रात के अंधेरों से मैं
    चांद को निहारूं

    इश्क़ के किस्से उल्फत की बातें
    जुल्फ़ों कि उलझन यादों के जाले
    ना जाने कितनी बातें है पुरानी
    कागज़ों पर क्या क्या उतारूं

    हरफनमौला तू और तेरी जादूगरी
    और आंखो के नम किस्से सारे
    लफ्ज़ दर लफ्ज़ पन्नों पर बेआवाज़
    और मैं खामोशी इख्तियार लूं

    ©dil_ke_bol_alfaaz

  • dil_ke_bol_alfaaz 24w

    नन्ही नाज़ुक ख्वाहिश मेरी आत्मजा
    नटखट मासूम सी प्यारी बेइंतहा
    ज़ीनत ए गुलशन गुलफाम मेरी जां
    है आस अधूरी सी एक फ़रियाद आे आह

    #dil_ke_bol_alfaaz #_bol

    Read More

    आत्मजा

    नन्ही नाज़ुक ख्वाहिश मेरी आत्मजा
    नटखट मासूम सी प्यारी बेइंतहा
    ज़ीनत ए गुलशन गुलफाम मेरी जां
    है आस अधूरी सी एक फ़रियाद आे आह

    ©dil_ke_bol_alfaaz

  • dil_ke_bol_alfaaz 24w

    सुर्ख होंठो पर नमी उतर आई है आज फिर।
    ये इंतज़ार ए यार में क्यूं रात गुज़र जाती है।।

    ठहरते हैं ज़रा भर ही इन आंखो पर ख़्वाब ।
    फ़िर सारी रात चांद तारों पर नज़र जाती है। ।

    ©dil_ke_bol_alfaaz

  • talwanniya 26w

    वक्त

    तुम शायद इस गलतफहमी में हो, कि मैं तुम्हारा हूँ।
    जबकि सच तो यह है कि मैं वह वक्त हूँ, जिसकी कद्र तुमने आज नहीं की तो कल वो तुम्हारी कद्र नहीं करेगा।।
    ©Rajesh Talwanniya

  • dil_ke_bol_alfaaz 26w

    उर्दू के सर्वश्रेष्ठ रचनाकार व शायर अहमद फ़राज़ की लिखी हुई और महान ग़ज़ल गायक मेहदी हसन द्वारा गाई गई ग़ज़ल " रंजिश ही सही...." से प्रेरित एक छोटी सी कोशिश�� पेश ए खिदमत है ।

    रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
    आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
    ____________&&&&___________

    मिरा ख़ुद से अब कोई नाता ही ना रहा है
    तू मुझ को ख़ुद से ही मिलाने के लिए आ

    बनाया था जिसे तिनका तिनका अरमानों से
    उस ख्वाहिश ए बंजर आशियाने के लिए आ

    बड़ी सुलझी हुई है ये ज़ुल्फ ए परेशाँ भी
    इन्हें फिर उंगलियों से उलझाने के लिए आ

    वो शुग्ल ए इश्क बाज़ी आज भी बाक़ी है
    वो इश्क़ कारसाजी फ़िर दिखाने के लिए आ

    जाने क्यूं जागी है तेरे आने की उम्मीद दिल
    रोशन शम्मा ए इश्क को ही बुझाने के लिए

    #dil_ke_bol_alfaaz
    #bikhre _alfaz

    Read More

    रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
    आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
    ____________&&&&___________

    मिरा ख़ुद से अब कोई नाता ही ना रहा है
    तू मुझ को ख़ुद से ही मिलाने के लिए आ

    बनाया था जिसे तिनका तिनका अरमानों से
    उस ख्वाहिश ए बंजर आशियाने के लिए आ

    बड़ी सुलझी हुई है ये ज़ुल्फ ए परेशाँ भी
    इन्हें फिर उंगलियों से उलझाने के लिए आ

    वो शुग्ल ए इश्क बाज़ी आज भी बाक़ी है
    वो इश्क़ कारसाजी फ़िर दिखाने के लिए आ

    जाने क्यूं जागी है तेरे आने की उम्मीद दिल
    रोशन शम्मा ए इश्क को ही बुझाने के लिए

    ©dil_ke_bol_alfaaz

  • talwanniya 26w

    Happy Teacher's Day

    Happy Teacher's Day to all those parents who have been sitting and teaching their children at home from last 6 months in the time of this epidemic.
    ©Rajesh Talwanniya

  • dil_ke_bol_alfaaz 27w

    कच्ची उम्र और शादी

    एक बाल विवाह देखा मैने घर के सामने
    छोटी सी लड़की कोई आठ नौ साल की
    शादी की उम्र क्या होती उसको पता नहीं
    एक घर से दूसरे घर का सफ़र जाना नहीं

    शायद खेल समझ रहीं थीं वो मंत्र जाप को
    साथ फेरे लेने में वो फुदक फुदक दौड़ गई
    माथे पर उसको गुदगुदी महसूस होती होगी
    सिंदूर सिक्के से लगा वो खिलखिला उठी

    बड़ी मासूम थी वो भोली सी मुस्कान लिए
    मंगलसूत्र को माला समझ पहन इतरा रहीं
    मंडप सजा धजा और बारात तैयार खड़ी
    शहनाई की धुन पर वो पगली नाच रही

    मासूम उम्र में उसको बड़ा बनना होगा
    यह सोच मेरी मुझको खाए जा रही थी
    वो नन्ही जां मंडप में एक खेल रचा रही
    अपनी गुड़िया की शादी गुड्डे से करा रही

    ©dil_ke_bol_alfaaz

  • dil_ke_bol_alfaaz 27w

    संगीत

    संगीत ही शुरुआत है
    और है अंत भी संगीत
    कण कण में सुनाई दे
    सुरीली धुन कर्णो पर

    कोख़ में माँ की रही मैं
    धड़कनों के साज़ पर
    धक धक करती हुई
    ममता की राग पर

    जन्म ले जब आ गई
    दुनिया की राह पर
    माँ की लोरियां सुरीली
    सुनी रात भर

    फिर बड़ी हुई जो मैं
    चल पड़ी कदमों पर
    अठखेलियाँ करती हुई
    पायल की झंकार पर

    चम चमा गई चूड़ियाँ
    नाज़ुक सी कलाई पर
    थामा यौवन का हाथ मैने
    चूड़ियों की खन कार पर

    छोड़ा बाबुल का अंगना
    और मैके से हुई विदा
    पिया के संग चली मैं
    शहनाई की गूंज पर

    हो गई ज़िम्मेदार मैं
    अब घर बार सँभालूँ
    चाबियाँ छन छना कर
    इठला रहीं है कमर पर

    त्याग कर मोह माया
    छोड़ कर दैहिक काया
    है जीवन हुआ अंत
    सुरीले राम नाम पर

    ©dil_ke_bol_alfaaz

    माफ़ कीजियेगा जो कोई गलती हुई हो

  • dil_ke_bol_alfaaz 27w

    उसके आने की अभी उम्मीद बाक़ी है
    दिल ए राख़ को ख़ाक होना बाक़ी है

    कोई तो तमाशा अभी और देखना है
    धड़कते दिल को साँसें ज़रा बाक़ी है

    सब ठीक होगा ये तसल्ली तो अच्छी है
    अभी तो मेरा और बर्बाद होना बाक़ी है

    अभी तो सीखा है इन रस्तों पर संभलना
    सफ़र ए मंज़िल में छालें पढ़ना बाक़ी है

    ज़िक्र क्यूं आ गया ज़बाँ पर उसका
    दिल से उसका खयाल जाना बाक़ी है


    ©dil_ke_bol_alfaaz

  • dil_ke_bol_alfaaz 27w

    ज़रा इस नाचीज़ की ये गुस्ताख़ी माफ़ हो
    ना सही अमीर यारी, मेरी गरीबी माफ़ हो

    हमने बिखेर रखें है जज़्बात इस दिल में
    पन्नों पर जा ब जा फैली श्याही माफ़ हो

    ©dil_ke_bol_alfaaz

  • dil_ke_bol_alfaaz 27w

    अब मेरे दौर पर ना कोई चर्चा करो
    अब ऐसा करो के मुझसे पर्दा करो

    एक और इलज़ाम दे दो चाहो तो
    बे- इंतेहा दर्द दो ऐसे ना मुर्दा करो

    गुज़रा हुआ पल एक पलछिन हूं
    मुझ पर यादों का ना कर्ज़ा करो

    तिनके सी हासिल हूँ खुद को मैं
    मुझसे लिपट कर यूँ ना टूटा करो

    ये कब्र भी शिकवा कर रही रूहीन
    कभी तो मुस्कुराहटों का खर्चा करो

    #adhure_alfaaz
    #dil_ke_bol_alfaaz
    #_bol
    #kuch_yun_hi

    Read More

    अब मेरे दौर पर ना कोई चर्चा करो
    अब ऐसा करो के मुझसे पर्दा करो

    एक और इलज़ाम दे दो चाहो तो
    बे- इंतेहा दर्द दो ऐसे ना मुर्दा करो

    गुज़रा हुआ पल एक पलछिन हूं
    मुझ पर यादों का ना कर्ज़ा करो

    तिनके सी हासिल हूँ खुद को मैं
    मुझसे लिपट कर यूँ ना टूटा करो

    ये कब्र भी शिकवा कर रही रूहीन
    कभी तो मुस्कुराहटों का खर्चा करो

    ©dil_ke_bol_alfaaz

  • dil_ke_bol_alfaaz 105w

    # बाक़ी_है
    #_bol


    #adhure_ashaar



    उसके आने की अभी उम्मीद बाक़ी है
    दिल ए राख़ को ख़ाक होना बाक़ी है

    कोई तो तमाशा अभी और देखना है
    ना जाने क्यूं मेरी साँस और बाक़ी है

    सब ठीक होगा ये तसल्ली तो अच्छी है
    मेरा बर्बाद होना तो अभी और बाक़ी है

    अभी तो सीखा है इन रस्तों पर संभलना
    मेरे रास्तों पर अभी पत्थर और बाक़ी है

    #dil_ke_bol_alfaaz

    Read More

    अभी तो सीखा है इन रस्तों पर संभलना
    मेरे रास्तों पर अभी पत्थर और बाक़ी है

    ©dil_ke_bol_alfaaz