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10881 posts
  • meri_kissebaazi 4h

    चिट्ठियों का पता

    क्या तुम मेरी कभी ना भेजी गई
    चिट्ठियों का पता बनोगे...
    .
    मुझे मालूम है तुम जिसे ढूंढ रहे हो
    वो चिट्ठी मैं नहीं...
    लेकिन जो तुम्हारा हो ही ना
    उसका इंतज़ार क्यों करना !
    .
    मैंने आजतक कोई चिट्ठी नहीं लिखी
    जो लिखीं उनका पता मेरे पास नहीं...
    .
    मैं तुम्हें फॉर ग्रांटेड नहीं लेना चाहती,
    तुम ख़ास हो मेरे लिए।
    .
    अजीब है ना !
    पर यही सच है...
    .
    कभी कभी गलत पते पर भेज दी गई चिट्ठियां भी ख़ास होती हैं।
    क्या तुम वो गलत पता बनोगे !
    .
    क्या तुम मेरी कभी ना भेजी गई
    चिट्ठियों का असल पता बनोगे...
    ©meri_kissebaazi

  • the_innocent_girls_voice 17h

    खुली किताब सी है ज़िन्दगी मेरी,
    पढ़ते तो सब है समझता कोई नही।
    ©the_innocent_girls_voice
    Sona

  • meri_kissebaazi 20h

    ©meri_kissebaazi

  • sharadnagpal 1d

    Us Ladke Ka Dukh Bhala Koi Kyaa Samjhega
    Jisko Mohabbat Gher Le
    Aur Wo Berozgaar Ho :)
    ©Unknown

  • lafzdari 1d

    Dhyan se dekho jara us sha'khs ko tum,
    Dikhta masoom hai kambakhat pr bewafa meri tarah hai.

    ©lafzdari

  • 73mishrasanju 1d

    जीवन बोध

    स्मृति के वे चिह्न उभरते हैं कुछ उजले कुछ धुंधले-धुंधले।
    जीवन के बीते क्षण भी अब कुछ लगते है बदले-बदले।

    जीवन की तो अबाध गति है, है इसमें अर्द्धविराम कहाँ
    हारा और थका निरीह जीव ले सके तनिक विश्राम जहाँ
    लगता है पूर्ण विराम किन्तु शाश्वत गति है वो आत्मा की
    ज्यों लहर उठी और शान्त हुई हम आज चले कुछ चल निकले।
    स्मृति के वे चिह्न उभरते हैं ... ...

    छिपते भोरहरी तारे का, सन्ध्या में दीप सहारे का
    फिर चित्र खींच लाया है मन, सरिता के शान्त किनारे का
    थी मनश्क्षितिज डूब रही, आवेगोत्पीड़ित उर नौका
    मोहक आँखों का जाल लिये, आये जब तुम पहले-पहले।
    स्मृति के वे चिह्न उभरते हैं ... ...

    मन की अतृप्त इच्छाओं में, यौवन की अभिलाषाओं में
    हम नीड़ बनाते फिरते थे, तारों में और उल्काओं में
    फिर आँधी एक चली ऐसी, प्रासाद हृदय का छिन्न हुआ
    अब उस अतीत के खंडहर में, फिरते हैं हम पगले-पगले।
    स्मृति के वे चिह्न उभरते हैं ... ...
    अज्ञात



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  • writer_at_heartt 2d

    .

  • writer_at_heartt 2d

    अपने हिस्से का प्यार मैं निभाये जा रही हूं,
    दिन -रात उसकी यादो में वक्त बिताये जा रही हूं,
    लौट अाए किसी दिन हमारे प्यार के खातिर ,
    बस इसी आश में हर रोज विश्वास का नया दिपक जलाए जा रही हूं |
    ©writer_at_heartt

  • thedark_writer 4d

    माँ! मुझे याद है।

    माँ मुझे आज भी याद है,
    जब तू मेरे लिए पहेली बार रोई थी,
    मेरी तबियत खराब होने पे केसे पूरी रात जग गई थी,
    मेरे पानी की बोतल छोर आने पे लंगे पाओ दौड़ आई थी।

    माँ मुझे आज भी याद है,
    जब तू मेरे लिए पहेली बार रोई थी,
    मेरे भूके होने पर भर भुखर में रोटिया बनाई थी,
    मुझे उस गर्मी की धूप से बचने के लिए अपनी आचल ओढ़ा लाई थी

    माँ मुझे आज भी याद है,
    जब तू मेरे लिए पहेली बार रोई थी,
    मेरे जीद्द करने पर पापा से लड़ गई थी,
    मेरे सही होने पे पूरे जग से टकरा गई थी।

    माँ मुझे आज भी याद है,
    जब तू मेरे लिए पहेली बार रोई थी,
    मेरे ना खाने पे तूने भी ना खा पाई थी,
    मेरे सो जाने तक मुझे गले से लगाई थी।

    माँ मुझे आज भी याद है,
    जब तू मेरे लिए पहेली बार रोई थी,
    मेरे गलती करने पे मुझे मार भी खिलाई थी,
    और उसी दिन तू मेरे लिए पहली दफा रोई थी।
    ©thedark_writer

  • meri_kissebaazi 4d

    ©meri_kissebaazi

  • meri_kissebaazi 6d

    ©meri_kissebaazi

  • lafzdari 1w

    समंदर को समझाओ ज़रा कि इतराना कम करे,
    उसकी लहरों से ज्यादा शोर है पहाडों की खामोशी में।।


    ©wahiyaat_shayar

  • meri_kissebaazi 1w

    ©meri_kissebaazi

  • meri_kissebaazi 1w

    गलतफहमियां

    जब भी प्लेटफॉर्म पर
    यात्रीगण कृप्या ध्यान दें...
    की अनाउंसमेंट सुनती हूं
    ऐसा लगता है बड़े से माइक पर
    किसी ने तुम्हारा नाम ले लिया हो
    .
    ट्रेन में घुसते ही जब खिड़की के पास की सीट मिलती है
    मुझे तुम याद आ जाते हो
    यूं लगता है तुम मेरे आस पास ही हो
    .
    तुम्हारे होने के एहसास को ना खोने की चाह में
    मैं अक्सर अपनी आंखें बंद कर लेती हूं
    फिर तमाम लोगों से भरी इस ट्रेन में
    बस मैं और तुम रह जाते हैं
    .
    जब ट्रेन की खिड़की से धूप छनकर मेरे हाथों पर गिरती है
    ऐसा लगता है तुमने मुट्ठी भर जुगनू मेरे हाथों पर रख दिए हों
    .
    गुजरती हवा जब सनसना कर मेरे चेहरे को छू जाती है
    यूं लगता है तुमने वो गाना सुना दिया हो
    जिसे सुनते ही मुझे तुमसे मोहब्बत हो गई थी
    .
    रेल की पटरी की धड़धड़ाती हुई आवाज़
    मेरी नींद को वैसे ही चीरती है
    जैसे कि हमारे साथ ना हो पाने का सच
    मेरे दिल को चीरता है
    .
    हमारे दरमियान मोहब्बत से ज्यादा गलतफहमियां हैं
    दीवार इतनी बड़ी है कि
    हमें एक-दूसरे के आंसू भी नहीं दिखते
    .
    मैं जानती हूं, तुम मेरे हो और हमेशा मेरे ही रहोगे
    तुम जानते हो, मैं तुम्हारी हूं और हमेशा तुम्हारी ही रहूंगी
    .
    पर काश ! हम इक दूजे से ये कह भी पाते
    .
    काश! मैं हमेशा कि तरह इस ट्रेन में बैठे हुए
    जब अपनी बंद आंखें खोलती
    तो तुम ठीक मेरे सामने वाली सीट पर
    मुझे मुस्कुराते हुए बैठे मिलते
    .
    शायद तब,
    मेरा सफर ज़रा सा बेहतर होता
    शायद तब,
    ट्रेन की खिड़की वाली सीट
    मुझे भी उतनी प्यारी होती
    जितनी एक बच्चे को होती है।
    ©meri_kissebaazi

  • jayadhika 1w

    ©jayadhika

  • the_messy_writer 1w

    दस्तूर

    तेरी यादों से अब दूर हो जाएंगे
    हम भी अब मगरूर हो जाएंगे.

    तुम रहो मसरूफ अपनी दुनिया में
    हम भी जल्द ही मशहूर हो जाएंगे.

    मेरे इश्क का जब चढ़ेगा फितूर
    हम भी बदल देंगे मोहब्बत का दस्तूर.

    ©the_messy_writer

  • beautisharma 1w

    _

    :
    ©beautisharma

  • beautisharma 1w



    .
    ©beautisharma

  • eashadas123 1w

    लॉकडाउन

    इस लॉकडाउन में,
    मैंने खुद केे साथ उलझना सीखा,
    मैंने खुद केे रूह के साथ हँसना सीखा,
    मैंने खुद का हाथ खुद से पकड़ना सीखा,
    मैंने खुद को खुद से संभालना सीखा,
    मैंने दिखावट को पहचाना सीखा,
    मैंने खुद केे कमज़ोरी को सुधारना सीखा,
    मैंने खुद केे मज़बूत पहलु को सराहना सीखा,
    मैंने घंटो खुद से बात करना सीखा,
    मैंने तन्हाई को सहना सीखा,
    मैंने खुद को गिर कर उठाना सीखा,
    मैंने खुद को खुद का ताक़त बनाना सीखा,
    मैंने ज़िन्दगी से धुंधलापन हटाना सीखा,
    मैंने शिकायतें कम करना सीखा,
    मैंने खुद से उम्मीद करना सीखा,
    मैंने सच्चाई को स्वीकार करना सीखा,
    मैंने भीड़ से अलग रहना सीखा,
    मैंने खुद का रास्ता खुद से निकालना सीखा,
    मैंने अनकही बातों को कहना सीखा,
    मैंने खुद केे जज़्बातो को उड़ाना सीखा,
    मैंने दिल और दिमाग़ को आराम देना सीखा,
    मैंने खुद को खुश करना सीखा,
    मैंने खुद को ज़रूरी बनाना सीखा,
    और क़सम से,
    खुद से बहुत प्यार करना सीखा !!!
    ©eashadas123

  • sanjay_kumr 9w

    तेरी याद अब तो रोज आने लगी है
    मेरे सपनो मैं बस तेरी ही तस्वीर आने लगी है
    ©sanjay_kumr