#jhala

509 posts
  • jayraj_singh_jhala 5w

    किसी के
    अंत:सागर में पनपती लहरों से
    लहलहा सकती है
    सम्पूर्ण प्रकृति की मुरझाई हुई फसलें
    किसी के
    तीक्ष्ण-उज्जलव-दिव्य चक्षुओं से
    जगमगा सकती है
    अंधकार मलिन सृष्टि की सभी दिशाएँ
    कोई तो
    संसार का कोना-कोना
    रंगों से भर सकता है
    अपनी रंगीन उँगलियों से
    कोई तो
    अनन्त विहंगम ब्रह्मांड की
    परिक्रमा कर सकता है
    अपने तीव्र गतिमान कदमों से
    लेकिन तभी बीच में आ जाते है बंधन
    बंधन असंगत रीतियों के
    बंधन अतार्किक तथ्यों के
    विषाक्त रूढ़िवादिताओं के
    शिथिल मानसिकताओं के
    परिणाम स्वरूप
    समाप्त हो जाती है तमाम संभावनाएँ
    और इंसान
    पुनः अग्रसर हो जाता है
    असाधारण से साधारण मानव की ओर
    ©झाला
    #jhala

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    "बंधन"
    { अनुशीर्षक में पढ़िए)

  • bal_ram_pandey 5w

    ज़िंदगी जैसे ,कटी पतंग हो गई
    जिसने पकड़ी डोर, उसके संग हो गई

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 5w

    बड़ी दूर तक आंखों में आसमान रहे
    रहो तुम साथ के डगर आसान रहे

    आंसुओं को रोक ले पलकों पर
    हंसता देख तुझे वक़्त भी हैरान रहे

    उगता सूरज , खिलता फ़ूल देख
    पुराने सपने आंखों में जवान रहे

    आब- ए - आईना कम नहीं होगी
    चेहरे पर जो तेरे मुस्कान रहे

    गरजता दरिया भी पार हो जाएगा
    धड़कते दिल में बस तूफ़ान रहे

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 6w

    धुआं ए ग़म से ज़िगर को जलाता हूं
    ज़िंदगी तुझको हुक्के सा गुड़गुड़ाता हूं

    मेरा साया खड़ा दूर से देखता है मुझको
    तपती धूप से उस साये को बचाता हूं

    अल्फ़ाज़ ग़ज़ल के कभी रूठ जाते हैं
    तसव्वुर को तेरे जब भी दोस्त बनाता हूं

    छप जाते हैं सबके चेहरे पर कुछ सवाल
    दिल से कोई रिश्ता जब निभाता हूं

    कहीं कैद ना हो जाए अक्स आईने में
    रूबर आईने के आने से बहुत घबराता हूं

    इख्तियार मेरे जिस्म पर मेरा ही न रहा
    मुस्कुराते हैं लब जब अश्क छुपाता हूं
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 6w

    मेरे चेहरे का नक़ाब हटाया जाए
    आईना आपको भी दिखाया जाए

    रोज़ गिनता हूं गुनाह औरों के
    उंगली मेरी ओर भी उठाया जाए

    अब्र ए तर को गिरने दो अब
    तेज हवाओं को भी बुलाया जाए

    सीमेंट से हमारे घर गर बने हो
    आओ मिट्टी के घरों को बचाया जाए

    तुलसी की जगह ले ली कैक्टस ने
    संस्कार के गुलाब घर में उगाया जाए

    बदलता है रिश्ता गिरगिट की तरह
    एक जाम वफादारी का पिलाया जाए

    बेच दूंगा मेरी खुशियां बाज़ार में
    दाम मेरे गम का भी दिलाया जाए

    छूकर गुज़र गई यादों की ख़ुशबू
    दिलबर को मुझसे अब मिलाया जाए
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 6w

    लगता है ,कुछ तो दुआओं में कमी है
    कहां अब , इन हवाओं में नमी है

    मुख्तसर मुलाकात गोया हो कैसे तुमसे
    मैं हूं आसमानी परिंदा,तू गुल ए जमीं है

    मोहब्बत को धोखा ना कहना, तुम्हारा
    जेहन कहीं और, और दिल कहीं है

    सलामत रहे हमारा कातिल- ए - वफ़ा
    गुनहगार तू ! दोजख के काबिल नहीं है

    जख्म -ए -दिल- ए- अहले- वफा देख
    आदमी अब शैतान है कोई नबी नहीं है

    बेबस, बेजार,बेसबब, बेकस बैठा हुआ
    जिंदा हूं मगर अब लबों पर हंसी" नई"है
    ©bal_ram_pandey

  • jayraj_singh_jhala 7w

    बड़े वसूक़ से दुनिया फ़रेब देती रही
    बड़े ख़ुलूस से हम ए'तिबार करते रहे
    ©शौकत वास्ती
    #jhala

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    रुबाई

    उम्मीदों का आसमान झूटा निकला
    "झाला" तेरा हम-ज़बान झूटा निकला
    मैं जिसको घरौंदा मान बैठा था वो
    मिट्टी का बना मकान झूटा निकला
    ©झाला

  • bal_ram_pandey 7w

    #mirakee#hindiwriters
    #hindilekhan#gazal
    @riya_expression#anitya
    @rangkarmi_anuj
    #osr#jhala#naajnaaj
    @naushadtm
    @odysseus#sumit_
    #anjali_chopra#agentrkd007
    @word_of_the_heart
    @lafze_aatish
    #mirakeeworld#naajnaaj#universe...

    रचना शायद कुछ गंभीर लगे....

    मन कुछ व्यथित सा है
    भटका हुआ पथिक सा है ����

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    सुबह है अब कैद में,
    कैद में है शाम ,
    कैद में है मेरा घर ,
    खोया चैन - आराम ।।

    फुटपाथ पर रहे सो ,
    भारत के भविष्य ,
    नेताजी गिना रहे ,
    अपने वादे अपने काम ।।

    बोतल में लहु बिके,
    ख़ुदा हुए हकीम ,
    जीवन सस्ता हो गया,
    बढे दवा के दाम ।।

    दाढ़ी टोपी तिलक से ,
    हुई हमारी पहचान ,
    मंदिर मस्जिद सूने पड़े ,
    मचा हुआ कोहराम ।।

    विकट हो गया देश में ,
    राजनीति का खेल ,
    हंस बौराये फिर रहे ,
    और गिद्ध नोच रहे चाम ।।

    मस्जिद में अल्लाह बसे,
    मंदिर में भगवान ,
    जो हर कण में बसे ,
    उसका कौन सा धाम ।।

    धड़कन भूली धड़कना ,
    सांसे हुई उदास ,
    सपनों पर पहरे लगे हैं ,
    नींद हुई हराम ।।
    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 7w

    अंधेरों से परे नूर तक
    आओ चलें कुछ दूर तक

    मैं उसूलों से बंधा परिंदा
    न जाता रास्ता मेरा हूर तक

    तुम्हें पिज़्ज़ा बर्गर की चाहत
    रोटी नहीं पहुंची मज़दूर तक

    राहे सबकी हैं जुदा - जुदा
    दौड़ तितलियों की फूल तक

    सपने गीले हैं , हुए चांदनी में
    पहुंचाए कोई इसे धूप तक

    ©bal_ram_pandey

  • jayraj_singh_jhala 8w

    घबराओ मत दोस्तों ये app डिलीट कीजिए और
    गूगल से पुराना से पुराना मतलब 2018-19 का version
    Download कर लीजिए।
    हमें कोई नई सुविधाएँ नहीं चाहिए ��
    हो सके तो किसी भी माध्यम से{mention friend,repost या खुद कोई नया पोस्ट डालकर}जानकारी अधिक से अधिक share
    कर दें , ताकि लोग miraakee छोड़कर जाए नहीं


    "5k" followers ❤️❤️❤️
    बधाई दे दो सब ��
    #jhala

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    ग़ज़ल

    ज़मीं से भूल के रिश्ता अब आसमान की ओर
    जो मौन थे अभी तक चल दिए ज़बान की ओर

    ये कह रहे है ये जो भी करेंगे जायज़ है
    मगर इशारा करेंगे ये संविधान की ओर

    मियाँ तुम्हारे इरादें मुझे पता है सब
    तभी नज़र लगा कर बैठा हूँ कमान की ओर

    किया ना-पाक हवाओं ने सब तबाह मगर
    बयाबाँ खींचता है तेग बागबान की ओर

    गुमान से कभी उठ के भी देख लेते आप
    किसी ग़रीब के ढहते हुए मकान की ओर

    बयान और किसी के मायने नहीं रखते
    सभी के कान गढ़े है मेरे बयान की ओर

    अभी समय नहीं मज़हब-परस्ती का "झाला"
    धियान दीजिए फ़िलहाल देश गान की ओर
    ©झाला

  • bal_ram_pandey 8w

    #mirakee#hindiwriters
    #hindilekhan#gazal
    @riya_expression#anitya
    @rangkarmi_anuj
    #osr#jhala#naajnaaj
    @naushadtm
    @odysseus#sumit_
    #anjali_chopra#agentrkd007
    @Vishal__
    #mirakeeworld#naajnaaj#universe

    बहुत दिनों बाद प्रस्तुत है एक 'आशावादी' कविता.........����

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    जीवन के कंटक पथ पर
    चल चला चल चल राही चल.......

    बन मत निर्बल ,
    कर मन निर्मल ,
    कठिनाइयों को रौंदते,
    सतपथ पर दौड़ते ।।
    चल चला चल चल राही चल.........

    आत्मशक्ति जगा के ,
    संशय तिमिर हिय से भगा के ,
    कितने भी हो राह में शूल ,
    हे बटोही ध्येय न भूल ।।
    चल चला चल चल राही चल........

    मन निराश न कर अधीर ,
    उठ चल बन आशा के तीर ,
    तुम जगत के हो प्रकाश ,
    क्यों बैठे हो उदास ।।
    चल चला चल चल राही चल......

    जात -पात के बंधन तोड़,
    देश ,धर्म ,दुनिया को जोड़,
    अजान ,शबद और प्रार्थना,
    है एक प्रभु की ही आराधना ।।
    चल चला चल चल राही चल.........

    कर्म में करता जा विश्वास,
    कर्तव्य पथ से रखना आस,
    खोल भाग्य के बंद द्वार ,
    अरुणोदय करे तेरा इंतजार ।।
    चल चला चल चल राही चल..........

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 9w

    खिला हुआ फूल भी, अब खार सा लगे
    इंसान आज ,बिजली की तार सा लगे

    चाहता हूं लौट आऊं, तेरे गांव पर
    मुझ में भी एक शहर, बीमार सा लगे

    अहले नज़र मुझे ,तुझसा ना मिला कोई
    भीड़ आशिकों की ,इश्क बाज़ार सा लगे

    सुब्ह से सुखा रहे, कुछ ख्वाब धूप में
    चांद तन्हा है , मन में गुबार सा लगे

    वक्त ए आईना में , देखा जब चेहरा
    दरमियां मेरे- तेरे , एक दीवार सा लगे

    खिला हुआ फूल भी खार सा लगे
    इंसान आज बिजली की तार सा लगे

    ©bal_ram_pandey

  • jayraj_singh_jhala 10w

    समस्त मिराकी परिवार को नव वर्ष एवं नव रात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं��

    साल की पहली ग़ज़ल देखिए
    _____________________________________
    यूज़ कीजिए सेनेटाइजर पहनिए मास्क
    घर में बैठिए और रोग-ए-अजीब से बचिए
    ©झाला
    _____________________________________
    मुहीब/dreadful, formidable
    दहर/दुनिया
    रक़ीब/प्रतिद्वंदी,दुश्मन
    हबीब/दोस्त
    ख़याबाँ/उद्यान
    अंदलीब/nightingale
    तबीब / डॉक्टर
    #jhala

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    ग़ज़ल

    बेकली-ओ-वहशत , हाल-ए-मुहीब से बचिए
    और भी अच्छा होगा,दहर-ए-अजीब से बचिए

    कैसे कैसे चेहरे दरपेश आ रहे मेरे
    अब रक़ीब से बचिए या हबीब से बचिए

    फिर गुज़ारिए सारी उम्र बे-करारी में
    कहना है ख़याबाँ का अन्दलीब से बचिए

    इश्क़ रोग ऐसा है ,फाख़्ता हो जाए दिल
    ज़ेहन चाहता है लेकिन तबीब से बचिए

    ये न हो कि फिर धोके का शिकार हो जाओ
    बेहतरी यही है "झाला" नसीब से बचिए

    नुक़्स मिल रहे हैं सादा मिज़ाज़ में अपने
    अब यूँ कीजिए "झाला" इस सलीब से बचिए
    ©झाला

  • mukesh_kumar_ojha 10w

    अब फ़र्क़ नहीं पड़ता किसी के आने-जाने से
    जब वो शक़्स ही आया नहीं लाख बुलाने से

    ©futurefamouspoet

  • bal_ram_pandey 10w

    जुगनूओं की तरह जगमगाना क्या
    न मिले मंज़िल तो जख्म खाना क्या

    कागज के फूलों से उम्मीद ख़ुशबू की
    झूठी तसल्ली में ज़िंदगी बिताना क्या

    मयस्सर नहीं उनसे मुख्तसर मुलाक़ात
    उनसे मिलना क्या हाथ मिलाना क्या

    दोस्तों से हुई मुझे मेरी ख़बर अक्सर
    मुझ सा होगा कहीं कोई दीवाना क्या

    बू ए ख़ुशबू कौन रोक सकता है कभी
    ज़ाहिर हो जाएगा प्यार छुपाना क्या

    बावफा की उम्मीद बेवफ़ा को ग़ज़ब है !
    दरख़्त के साए को पानी पिलाना क्या

    जर ज़मीन महल कजा ले जाएगी साथ
    अब यहां रहना आशियां बनाना क्या

    ©bal_ram_pandey

  • mukesh_kumar_ojha 10w

    डगमगाई कश्तियां भी अक्सर संभल जाती हैं "मुकेश"
    अगर माझी सच के लहरों से टकराने का माद्दा रखता है

    ©futurefamouspoet

  • bal_ram_pandey 11w

    इश्क़ में ना गर इतने सदमे होते
    आज हम भी अपने घर में होते

    खुला आसमां है हमसफ़र हमारा
    हम वरना आंधियों के डर में होते

    न तैर सके हम दरिया ए दिल में
    वरना तेरी आंखों के समंदर में होते

    गर जीत जाते वक़्त की अदालत में
    हम भी दुनिया की हर ख़बर में होते

    न बेचा इमान दौलत के लिए हमने
    हम वरना फूलों के बिस्तर में होते

    हमने ना बनाया सियासत को पेशा
    वरना लहू के भी दाग खंजर में होते

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 11w

    बग़ैर तेरे ज़िंदगी , ज़िंदगी है क्या
    मोहब्ब्त में इतनी दीवानगी है क्या

    खयालों को कैसे बांधे ज़ंजीरों में
    जिस्म की इतनी , बेबसी है क्या

    क़ैद हो जाता हूं, जब भी देखता हूं
    आईना देखना भी खुदकशी है क्या

    ख़ुश होकर भी, मर जाता है कोई
    मौत की, ज़िंदगी से दुश्मनी है क्या

    तपती सड़क और , दूर है मंजिल
    धूप के बिना कहो ,चांदनी है क्या

    गुज़र जाता है दिन, जो साथ होते हो
    वक्त को न जाने इतनी जल्दी है क्या

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 11w

    हुनर को पहचाने मेरे ,अब वह नज़र कहां है
    पहुंचा दे मंज़िल मुझे वह रहगुजर कहां है

    मेरे तनाफ्फुस ना है क़ैद अब मेरे जिस्म में
    एहसास करें दर्द अब , वह ज़िगर कहां है

    कत्ल कर रहे हो जिससे सारे रिश्तों का
    छुपा के रखा हुआ तुमने वो खंजर कहां है

    साल भर देता था फल, फूल और पत्तियां
    सूख गया अब बूढ़ा सा प्यारा शजर कहां है

    उड़ गए सारे परिंदें अब गांव के शहर को
    गांव में बचा अब सुहाना वो मंज़र कहां है

    सूने चौपाल , कजरी सोहर और नाच गाने
    तीज त्यौहार पर मिलना अब अक्सर कहां है

    सुना है ,अब बहू -बेटे मां से अलग ही रहते हैं
    बुजुर्गों के हाथों से रखे नींव के पत्थर कहां हैं

    ©bal_ram_pandey

  • bal_ram_pandey 11w

    #mirakee#hindiwriters
    #hindilekhan#gazal
    @riya_expression#anitya
    @rangkarmi_anuj
    #osr#jhala#naajnaaj
    @naushadtm
    @odysseus#sumit_
    #anjali_chopra#agentrkd007
    @Vishal__
    #mirakeeworld#naajnaaj#universe

    गमगुस्सार..... दिलासा देने वाला
    इखलास........ प्रेम, श्रद्धा
    पयाम............ संदेश
    गमदीदा......... दुखित
    अब्सार......... आंखें
    इत्तहाद........... दोस्ती
    आब ए चश्म..... आंसू

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    चंद ख्वाब अभी हैं ज़िंदा,
    मचलने के लिए
    आए हैं तेरे शहर, कुछ
    दिन ठहरने के लिए

    तू ही है एक गमगुस्सार,
    मेरे नाशाद दिल का
    चल पड़े आज तेरी,
    गली से गुजरने के लिए

    कैसा होगा मंज़र ,
    रू-ब-रू होगा सितमगर
    आब ए चश्म तैयार हैं,
    कुछ कहने के लिए

    कोई समझा दे उनको ,
    इखलास मेरे दिल के
    पयाम ले कर आए हैं,
    इत्तिहाद करने के लिए

    गमदीदा है मेरे अब्सार,
    एक अरसे से
    अब्र ए उम्मीद छा गए हैं,
    अब बरसने के लिए

    ©bal_ram_pandey