#maledominance

5 posts
  • spoiledwifeslifediary 59w

    Why?

    My personality is mistaken as attitude
    Why? It isn't Unknown fact to you
    Stating I changed but was is always will be same
    Just that you can't handle it
    As my confidence blows away your orthodox theories
    Your narrow minded Conservative opinion
    Doesn't bother to me
    I gladly announce you can deal with my open nature
    Happy to be myself not bounded by your cliche societal statements
    Sadly your spectacles also makes seen facts to unseen events
    And I, I belong to my element my choice
    By-Ar Rashmi Lath(@spoiledwifeslifediary)
    ©rashmi_lathi

  • raaz_meghwanshi 91w

    हां तुम मर्द हो
    जो अपनी मर्दानगी के नशे में चूर हो
    तुम ज़माने का इक़ लाईलाज़ गुरुर हो
    जो साफ सुथरी इंसानियत है
    उस इंसानियत पे तुम ज़र्द हो
    इक़ मां की कोख, इक बहन की उम्मीद
    और इक पत्नि के गले का महज़ दर्द हो
    वो किस नाम से पुकारे तुम्हें
    ये समाज भी तुम्हारा है
    मंदिर और मज़ार भी तुम्हारा है
    उसमें बैठा वो खुदा भी तुम्हारा है
    सड़कों पे खेलों ईज्ज़त से चाहे
    घरौंदों में करो हैवानियत तुम
    हर दरबार कब से तुम्हारा है
    बेशक़ तुम बादशाह हो ईश्रत-ऐ-मर्दानगी के
    और ये लश्क़र भी तुम्हारा है
    तुम्हारे वो नियम और कायदे
    कभी जन्मते ही दफ़ना दिया
    हो गई वो कभी बिन शोहर के
    तो ज़िंदा ही जला दिया
    चारदीवारी बांधें उसको, जकड़े जेल सलाखों में
    तुमने क़हर है ढाया इस क़दर, शर्म न रही आंखों में
    जो कभी न उतरेगा उससे, वो शर्म का तुम कर्ज़ हो
    हां तुम मर्द हो


    ©raaz_meghwanshi

  • raaz_meghwanshi 91w

    'मर्दानगी'

    आज क्यूं चुप हो , आज क्या हुआ?
    मारो मुझे पीटो मुझे
    हाथ उठाओ मुझ पर, दो ना गाली मुझे
    हिम्मत कहां गयी अब तुम्हारी
    पी कर नहीं आए आज तुम ?
    हां मेरा महिना है आज पर फिर भी
    चलो तुम्हारा बिस्तर तो गर्म करना होगा
    औरत जो ठहरी , नाचीज़ हूं
    बस शरीर बचा है नौंच लो
    मेरी आत्मा मेरा चित्त तो मर चुका कब का
    अरे बोलते क्यूं नहीं , चुप क्यूं हो अब?
    मारो मुझे पीटो मुझे , खाना क्यूं नहीं मांगते?
    नमक कम ज्यादा हो तो मेरी मां को गाली देना
    लात मारो मेरे पेट पर, मेरे बाल पकड़ कर घसीट लो
    मेरे शरीर को तहस नहस कर दो
    कुछ भी न छोड़ो बाकी मुझमें
    बोलो भी अब, बेसुध क्यूं हों ?
    आज तुम्हें एक पत्थर क्या मारा
    तुम तो गिर ही गये बेसुध हो कर
    हां बहुत हो गया था ये, बर्दाश्त नहीं हुआ मुझसे
    नहीं सह सकी और मैं तो मार दिया
    मगर तुम तो 'मर्द' हो ना, तुम में तो कितनी हिम्मत है
    तुम कैसे मर सकते हो 'मर्द'
    उठो 'मर्दानगी' दिखाओ मुझ पर
    जो बस मुझ पर ही आजमाते हो तुम
    आज चुप क्यूं हो, आज क्या हुआ?
    मारो मुझे पीटो मुझे.......
    ©raaz_meghwanshi

  • harshii_ash 132w

    We belong to a world,
    Where we talk about equality,
    But are curbed under patriarchal norms.

    Harshita Ashwani
    ©harshii_ash

  • darkpoetess 143w

    Call girl

    Leg's wide apart
    Or should I sit straight?
    Or should I bend lower?
    I know my spine is a pine,
    And I know that I look so fine,
    What? Do I need some wine?
    No, don't strain.
    Okay. I'll take a sip.
    But, just one.
    So that I could lose my focus,
    And forget about your gaze
    That's resting between my thighs,
    Another sip,
    To forget all my pains,
    Wrecking my veins.
    One more to numb the voices
    In my head,
    That are calling me slut.
    One last sip,
    Before i completely lose myself
    To someone else tomorrow.
    -Darkpoetess