#mirakeehindi

2906 posts
  • rahul_varsatiy_parmar 19h

    Adjust kar lena 3

    Tareef karta nahi juth batata nahi adjust kar lena ☝️
    Rahul_Varsatiy_Parmar
    Aka उर्फ निशार ser@ph

    ©rahul_varsatiy_parmar

  • none_ever_thee 2d

    #गुरु
    #ग़ुरूर
    #गुरुवाणी
    #जीवनज्ञान
    #hindinama
    #hindiwriters
    #lifelessons
    #teachingswonder
    #mirakeehindi
    #mirakeeworld
    #mirakee

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    "ग़ुरूर"

    जो कहता है, "मैं तेरा गुरु हूँ!"
    तो ध्यान रहे, वह गुरु नहीं,
    उनका ग़ुरूर बोल रहा है...

    ©none_ever_thee

  • inoxorable 5d

    प्रेम

    प्रेम न प्रथम होता है ना अंतिम
    प्रेम बस प्रेम होता है
    ©inoxorable

  • rahul_varsatiy_parmar 1w

    Out of way

    LIVE IKE PRIMITIVE, THINK LIKE CLASSY

    Rahul_Varsatiy_Parmar
    Aka
    उर्फ निशार ser@ph


    ©rahul_varsatiy_parmar

  • rahul_varsatiy_parmar 1w

    Sane- Insane

    समझदार लोग हमेशा दुखी रहते है,,
    मूर्ख लोग हमेशा सुखी रहते है!!!

    Sane people always being unhappy,
    Insane people always being happy....

    Rahul_Parsatiy_Parmar
    Aka
    उर्फ निशार ser@ph
    ©rahul_varsatiy_parmar

  • blue_nib 2w

    फ़िक्र

    महफ़िल में!!!
    जिक्र तेरा...
    नहीं हुआ...
    न जाने क्यों फिर...
    फ़िक्र तेरी ही हुई ||

    ©माही
    ©blue_nib

  • itsmegirl_ 2w

    वो जो एक - दूसरे के संग,
    एक-दूसरे के शहर घूमने के
    वादे किए थे हमने,

    वो वादे महज़ वादे ही रह गए...
    और हमने अपने शहर ही बदल लिए!!

    ©itsmegirl

  • anshsisodia 2w

    ये भी गजब सिलसिला है मेरी ज़िंदगी का..
    मैं पल-पल में लोगों को दुखता हूँ,
    मिलते हैं तो संभालते हैं फूलों की तरह..
    फिर न जाने क्यों बाद में काटों सा चुभता हूँ..।।

    अंश सिसोदिया
    ©anshsisodia

  • ashishpratap 2w

    इन्सान कोई भी हो अपने अंज़ाम
    तक पहुँचता है
    परिंदा मीलों चलकर ही आशियाने
    तक पहुँचता है

    करा लो जितना कराना है आज
    मेहनत खुद से
    कल पर रहने वाला फ़क़त रास्तों (फ़क़त - सिर्फ़)
    तक पहुँचता है

    अगर आसां हुई तेरी मंज़िल तो
    मज़ा क्या आएगा
    मुसाफ़िर धूप में जलकर ही छांव
    तक पहुँचता है

    वफ़ा करना ही है तो एक बार
    आज़मा ले खुद को
    हुस्न का आशिक महज़ जिस्म
    तक पहुँचता है

    भरोसा ख़ुद पर रखोगे तो जीत
    तुम्हारी होगी
    दूसरों के सहारे तो मुर्दा शमशान
    तक पहुँचता है

    मौत का वक़्त आ जाए तो
    फिर कोई नहीं रूकता
    शिकार ख़ुद से चलकर ही
    शिकारी तक पहुँचता है

    - आशीष प्रताप

    ©ashishpratap

  • none_ever_thee 2w

    #तबियत
    #कुछ_यूँ_ही_कभी
    #अनकहे_लफ़्ज़
    #हसरतें
    #mirakreeworld
    #mirakeenetwork
    #mirakeehindi
    #नज़्म
    #hindinama
    #hindiwriters

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    तबियत...

    कुछ तस्वीरें गुमसुम बैठी हैं दीवारों पर,
    घूल जम गई है रिश्तों की मिनारों पर!
    सोचता हूंँ, लौट चलूंँ अब बस्ता उठाकर,
    उन गलियों में, गाँव के ठिकानों पर!

    पाँव थक कर, रक्त में सने हैं बरसो से,
    हथेलियों की नसे फटे नज़र आते हैं।
    कैसी विरासत है ये दरख्तों की,
    अब मूर्गे भी टिक-टिक करते बरौंदे में!

    फूलों का गुलदस्ता कई आते हैं,
    खुशबुएं कभी उनसे आती नहीं मग़र!
    बहुत चहल-पहल हैं रस्ते पर,
    हर शख़्स ख़ुद से अनजान है मग़र...

    हवा चली है पश्चिम से, या पूरब की उल्टी दिशा है?
    मुँह छिपाता हर रौशनदानों से!
    सत्ता की कुर्सी से गिर गया है जिस्म,
    सुकूं से लेटा है वह, दो ग़ज ज़मीं में!

    हसरतों को कांधा देकर आया हूँ मैं,
    ख़्वाबों को भी रौंद आया हूँ मैं,
    यूँ तो तबियत मौसम सा है मग़र...
    मयकदे से तन्हा लौट आया हूँ मैं!


    ©none_ever_thee

  • rahul_varsatiy_parmar 3w

    माह-ए- मोहब्बत जरुर है,
    पर शहीद जो हुये उनका मुझ पर अभी तक
    फितूर है....!
    _REBEL क्रांतिकारी PARMAR_
    ©rahul_varsatiy_parmar


    #Rahulvarsatiyparmar #shaheed #february #mohhabt #fitoor #mirakeenetwork #mirakeehindi

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    माह-ए- फरवरी

    माह-ए- मोहब्बत जरुर है,
    पर शहीद जो हुये उनका मुझ पर अभी तक
    फितूर है....!
    _REBEL क्रांतिकारी PARMAR_
    ©rahul_varsatiy_parmar

  • rittujoshi 3w

    #खुदगर्ज़_मैं

    जब से चालीस के पार हुई हूँ
    थोड़ी सी खुदगर्ज़ हो गयी हूँ
    अब अपना सारा समय
    अपनों पर नहीं लुटाती
    उसमें से कुछ पल खुद के लिए भी चुराती हूँ
    सुनती हूँ रसोई में काम करते हुए
    Earphones लगा ,
    कोई मनपसंद संगीत, पुरानी कोई गज़ल या गीत
    बिस्तर पर जाने से पहले
    हाथ में लेती हूँ कुछ देर पढ़ने के लिए
    वो किताब जो न जाने कब से
    पढ़ने की इच्छा थी
    पर घर के काम काज में उलझी
    कभी पढ़ न सकी
    शाम ढले चली जाती हूँ कभी
    अपने काॅफी कप के साथ छत पर
    घूंट घूंट पीती हूँ
    डूबते सूरज की सौंदर्य
    काॅफी के साथ साथ
    या किसी पुराने मित्र के घर जाकर
    चाय के साथ गपशप कर आती हूँ
    जब से चालीस के पार हुई हूँ
    थोड़ी सी खुदगर्ज़ हो गयी हूँ
    अब मेरी रसोई में नहीं बनता
    केवल बाकी लोगों की फ़रमाइश पर खाना ,
    किसी किसी दिन
    जो मुझे खाने का मन हो वो भी
    पकाती हूं
    थोड़ा खयाल अब खुद की इच्छाओं का भी रखती हूँ
    देखती हूँ दोपहर के खाली समय में
    सब्जी काटते हुए ,
    बरसों से बनी पड़ी watchlist में से
    कोई पसंदीदा फिल्म
    मितव्ययी थी जो मैं,
    अब फीजूलखरची कर लेती हूँ कभी-कभी
    कर लेती हूँ online order
    बस मन करने पर
    कोई ग़ैरजरूरी चीज़ भी
    जब से चालीस के पार हुई हूँ
    थोड़ी सी खुदगर्ज़ हो गयी हूँ
    सब कहते हैं
    मैं अब पहले सी नहीं रही
    बहुत बदल गयी हूँ
    मैं सोचती हूँ
    वक्त रहते संभल गयी हूँ
    वरना शायद,
    मनचीता सब करने से रह जाता
    और वक्त रेत सा मुट्ठी से
    फिसल जाता ...
    और हथेलियों पर अफसोस के सिवा कुछ न बच पाता...
    .
    .
    .
    .

    ©rittujoshi

  • ashishpratap 5w

    तोड़ के सारी बंदिशें, उड़ जा तू आसमाँ चीर के
    देखना क्या जमीं को, जब ऊँची हैं तेरी मंज़िले

    तू रख हौसला, तेरे हौसले से मौसम भी बदलेगा
    क्या डरना बादलों की गरज से,जब तुझे भी जीत का शोर पसंद है
    ©ashishpratap

  • rittujoshi 6w

    दो बूढ़ी आंखें

    दो बूढ़ी आंखें देखा करती हैं
    खामोशी से
    एक बदलता हुआ दौर
    अपने चश्मे के पार
    सोचा करती हैं अक्सर
    क्या जमाना आ गया है
    कि रिश्तों की जगह भर दी है
    हाथ भर के मोबाइल ने
    एक छत के नीचे रह कर भी
    किस तरह बंटा हुआ है
    अलग अलग कोनों में
    उनका चार सदस्यों का परिवार
    वे कई बार चली जाती हैं
    बीती हुई गलियों में
    सोचने लगती हैं
    सब सिलसिलेवार
    क्या जमाना था वो भी
    जब उनके पति दफ़्तर से लौटते हुए
    खरीद लाते थे दो रूपये का गजरा
    और प्यार से खोंस दिया करते थे
    उनके बालों में
    कितनी खुशियाँ समेटे थे
    वो छोटे छोटे पल
    गरीबी के उन दिनों में भी
    वे ले ही जाते थे
    एक आध बार उन्हें साईकिल पर आगे बैठा कर
    दिखाने सिनेमा
    क्या दिन थे वो भी
    जब वे साथ बैठते थे,बतियाते थे
    और एक दूसरे की आँखों में आँखे ड़ाल कर
    सब दुख दर्द भूल जाते थे
    आज उनकी बहू घूमती है
    उनके बेटे के बगल में बैठ कर
    एक महंगी कार में
    पर उन दोनों के
    रूखे, फीके ,नीरस और उदासीन से रिश्ते में
    वो खुशबू कहाँ जो उनके दो रूपये के मोगरे के गजरे में हुआ करती थी
    घर में तीन बेटियों और एक बेटे समेत
    चार बच्चे थे उनके
    जिनके झगड़े सुलझाते सुलझाते
    उनका पूरा दिन बीत जाता था
    खिलौनों के नाम पर था ही क्या उनके बच्चों के पास
    गेंद, कंचे, सतोल और गुलेल के सिवा
    फिर भी खुश थे
    आज उनकी पोती के पास
    Laptop, DSLR,synthesizer,playstation और guitar और भी न जाने क्या क्या है महंगे मोबाइल के अलावा
    पर कितना ऊब जाती है वो इन सब के बीच
    अपने कमरे में
    अकेले वक्त बिताते बिताते
    कितनी चिड़चिड़ी और तुनक मिजाज हो चली है
    अकेलेपन से लड़ते लड़ते
    दो बूढ़ी आंखें देखा करती हैं
    खामोशी से
    सब कुछ होते हुए भी
    तैरता हुआ बेटे, बहू और पोती की आँखों में
    खालीपन और उदासी
    वो छोड़ती हैं एक गहरी साँस
    कि वो महसूस तो करती हैं अपने परिवार की व्यथा
    पर कर कुछ नहीं सकती उम्र के इस पड़ाव पर
    उनके दुखों के बारे में
    ©rittujoshi

  • vitthalshukla 6w

    चंगेज़ खान ने धर्म परिवर्तित किया
    ईशा ने अपना देह समर्पित किया
    क्रूर शासकों ने जब ताकत दिखाई
    तब इतिहास को भी शर्म आयी
    ऐसी मानसिकता ने हमेशा हिंसा को दिया जन्म है
    लेकिन अमरत्व का ज्ञान लिये-
    सदा जीवित हिन्दू धर्म है,

    कोई एक की पूजा करता है
    तो कोई एक ओंकार की
    किसी के अंदर डर छुपा है
    तो किसी में श्रद्धा प्यार की
    जहाँ राधा के कृष्ण को पाने के लिए मीरा ने किया कठोर कर्म है
    अपने अपने इष्ट का ध्यान किये-
    सदा जीवित हिन्दू धर्म है,

    यहाँ जल में भी देवता विराजमान हैं
    हमारे लिए तो अग्नि भी पवित्र है,
    यहाँ पेड़ पौधे भी पूजित हैं
    हमारे लिए जानवर भी मित्र हैं,
    ये साक्ष नहीं, ये हमारी शिक्षा है
    जहाँ एक राहगीर ने शिव को दी भिक्षा है
    इस प्राचीन शैली से अवगत कराने में ही इस कविता का मर्म है
    सदाचार का मान लिये-
    सदा जीवित हिन्दू धर्म है..
    ©vitthalshukla

  • kaach_ka_panchi 6w

    मर्यादा और बंधन

    जब एक स्त्री किसी पुरूष के प्रेम में होती है,
    तो वो अपनी मर्यादा और बंधनो से ख़ुदको मुक्त कर लेती है।

    और जब एक पुरूष किसी स्त्री के प्रेम में होता है,
    तो वो उस स्त्री को अपनी मर्यादा और बंधन बना लेता है।

    ©kaach_ka_panchi

  • ankur_kanaujia 6w

    ©ankur_kanaujia

  • skchauhan 7w



    कितने प्यारे कितने अच्छे होंगे,,
    जो लोग तुम्हें चाहते होंगे।
    कितना नखरा कितना गुस्सा सहते होंगे,,
    जो लोग तुम्हें भाते होंगे।
    वो लोग भी कितने सच्चे होंगे,,
    जो फिर भी तुम पर मरते हैं होंगे।।
    ©skchauhan

  • naincy_yashika_nainooo 8w

    कैसे कह दूँ कि कोई मुझे समझता नही हैं,
    कैसे ही कह दूँ कि कोई मुझे समझता नही है ,

    कम्बख़्त ख़ता मेरी है
    मुझे ही कभी समझाना नही आया !!!

    ©naincy_yashika_nainooo

  • none_ever_thee 8w

    #मरहम
    #ज़फ़ा
    #फरेब
    #जालसाज़ी
    #mirakee
    #mirakeehindi
    #mirakeeshayari
    #lifelesson

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    "मरहम"

    सोचा था, ज़ख़्मों के मेरे, लाए वो मरहम हैं,
    मरहम नहीं ज़हर था घुला दवाओं में,
    ज़ख़्म हुआ और भी गहरा, ज़फ़ा थी हवाओं में,
    अब न दुआ करे असर, न दवा काम आए,
    हुई शाम सहर में,मरहम ने छोड़ा नहीं क़सर,
    नफ़्ज़ थी धीमी, सांस थामे चल रही थी डग़र,
    कि, फ़िर आया कोई क़रीब, मरहम देख हाथों में, "मर हम" गए...

    ©none_ever_thee