#my_burnt_diary

655 posts
  • prakhar_sony 4w

    (26.01.2021)
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    मुख़्तसर - कम
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    है मुहब्बत कहीं है जिगर हादसा।
    है ज़रूरी दिलों को मगर हादसा।।
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    ख़ामियों से कहाँ कोई सीखे मियाँ।
    ख़ामियों से तो है बेहतर हादसा।।
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    सिर्फ़ सपनों ही का सच है वो इक शहर।
    है हक़ीक़त में वो इक शहर हादसा।।
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    ज़ख़्म गहरे दे जाता है अक्सर मियाँ।
    फिर ज़ियादा हो या मुख़्तसर हादसा।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 5w

    (23.01.21)
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    आज़ार - रोग
    ख़ार - काँटे
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    है हक़ीक़त इस तरफ़ उस पार ख़्वाहिश।
    नफ़रतों के दरमियाँ हैं प्यार ख़्वाहिश।।
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    कुछ बनाते हैं याँ मरहम ख़्वाहिशों के।
    बन गए कुछ लोगों के आज़ार ख़्वाहिश।।
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    हमने समझा फूल जिसको उम्र भर तक।
    एक दिन आया समझ हैं ख़ार ख़्वाहिश।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 9w

    शेर

    वो जिस पे हँस पड़े थे लोग महफ़िल में।
    उसी इक शेर में मेरा ज़माना था।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 15w

    चाँद सूरज यहाँ दिखते चलते हुए।
    है मगर आसमाँ देख ठहरे हुए।।
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    कोई बेचे या कोई ख़रीदे दिए।
    लौ सभी के दिखे घर में जलते हुए।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 16w

    (06.11.2020)
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    एक मतला और चंद शेर पेश-ए-ख़िदमत हैं । आप सभी की समाअत चाहता हूँ । मुलाहिज़ा फरमाएं
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    गर - अगर
    पिन्हाँ - छिपा हुआ
    साया - परछाई
    हुजरा - झोपड़ी
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    और फिर क्या इस से ज़्यादा बेहतर था।
    सबकी आँखो पर इक पर्दा बेहतर था।।
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    हैं ख़फा सब लोग ज़ाहिर होने पे गर।
    फिर तो जैसे सच ये पिन्हाँ बेहतर था।।
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    बोलने अपने लगे इक दिन यहाँ पर।
    साथ चुप मेरे वो साया बेहतर था।।
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    रौशनी सूरज की , तारों की न छत है।
    घर से मेरा एक हुजरा बेहतर था।।
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    शुक्र है ज़िन्दा निकल आए है यारों।
    उनका दिल पे इक निशाना बेहतर था।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 16w

    इक मिले हैं ज़ख़्म सारे ख़ूबसूरत।
    और फिर उसपे इशारे ख़ूबसूरत।।
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    है किसी को वास्ता गहराई से कब।
    चाहिए सबको किनारे ख़ूबसूरत।।
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    है लगी नज़रें सभी की चाँद पे बस।
    लगते हैं हमको सितारे ख़ूबसूरत।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 16w

    (04.11.2020)
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    एक मतला और कुछ शेर पेश-ए-ख़िदमत हैं
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    याँ - यहाँ
    फ़क़त - सिर्फ़
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    यहाँ कुछ बाद कुछ पहले मुसाफ़िर हैं।
    मगर सब कोई मंज़िल के मुसाफ़िर हैं।।
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    समंदर है किसी का दरिया है राही।
    किसी के सिर्फ़ याँ कतरे मुसाफ़िर हैं।।
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    सुनाते हैं फ़क़त गम रौशनी वाले।
    दिखे ख़ुश जिनके अंधेरे मुसाफ़िर हैं।।
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    किसी के चुभ रहे हैं शीशे राहों में।
    किसी के लिए आईने मुसाफ़िर हैं।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 17w

    (31.10.2020)
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    तासीर - प्रभाव
    हर-सू - सब तरफ़
    पीर - धर्मगुरू/बुज़ुर्ग
    याँ - यहाँ
    सिपर - ढाल
    शमशीर - तलवार
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    रखे बाज़ार में हैं तीर काग़ज़ के।
    है कितने गहरे सब तासीर काग़ज़ के।।
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    दगा छल झूठ धोखा सब दिए हैं फिर।
    लगाए घर में हर-सू पीर काग़ज़ के।।
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    है हाथो में यहाँ सबके सिपर फिर भी।
    गले याँ काटते शमशीर काग़ज़ के।।
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    दिखेंगी टूटती जंज़ीरे लोहे की।
    मगर मजबूत है जंज़ीर काग़ज़ के।।
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    बिताए संग लम्हे मिट गए दिल से।
    न मिट पाए वो सब तस्वीर काग़ज़ के।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 19w

    (16.10.2020)
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    नइ - नई
    ज़ौ-फ़िशानी - चमक
    वर्क - कागज़
    उल्फत - मोहब्बत
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    ##my_burnt_diary @writer_in_disguise5

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    ग़ज़ल

    कहता नइ कोई , कोई पुरानी ग़ज़ल।
    अपनी-अपनी है सबकी कहानी ग़ज़ल।।
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    दिख रहा बढ़ता अंधेरा अब हर तरफ़।
    और अंधेरे में ज़ौ-फ़िशानी ग़ज़ल।।
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    कोइ डूबा है बस इसमें दरिया समझ।
    है किसी के लिए बहता पानी ग़ज़ल।।
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    है कहीं दफ़्न वर्कों में ग़ज़लें फ़क़त।
    बन गई है कहीं मुँह-ज़बानी ग़ज़ल।।
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    है दवा और मरहम किसी के लिए।
    और उल्फत की भी है निशानी ग़ज़ल।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 20w

    (9.10.2020)
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    सफ़्हात - पन्ने
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    हम न बदले और ना हालात बदले।
    दरमियाँ आँखों के ना दिन-रात बदले।।
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    हैं वही किस्से कहानी और मसले।
    एक अरसे में फ़क़त सफ़्हात बदले।।
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    एक मुश्किल मोड़ पर है फिर ये दास्ताँ।
    किस तरह इसकी प्रखर शुरुआत बदले।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 20w

    पेड़

    कट गए पेड़ साया भी छटता गया।
    और हिस्सा ज़मीनों का बँटता गया।।
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    बीता बचपन जवानी बुढ़ापा जहाँ।
    बस वहाँ आज रास्ता गुज़रता गया।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 24w

    (14.09.2020)
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    गुमगश्ता - खोता हुआ
    तिमिर - रात/अँधेरा
    इमरोज़ - आज
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    उजाला जैसे गुमगश्ता नज़र आया।
    तिमिर के दरमियाँ रस्ता नज़र आया।।
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    उसे था नाज़ मेरे लहज़े पे फिर क्यों।
    मिरे लहज़े पे वो हँसता नज़र आया।।
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    सलीके से कहा करता था बातें वो।
    मगर इमरोज़ वो फँसता नज़र आया।।
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    बड़ी रफ़्तार से सब फ़ैसले होते।
    मगर महबूब आहिस्ता नज़र आया।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 25w

    ढूंढूँ तुझे किस ओर ख़ुदा हर ज़गह तू रहता है।
    फूल बनके खिलता है कहीं,कहीं पानी बनके बहता है।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 28w

    (16.08.2020)
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    कोइ - कोई
    मुसलसल - लगातार
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    रुक मुझमे जाओ कोइ हलचल तुम नहीं।
    कोई धुआँ या कोइ बादल तुम नहीं।।
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    करते रहे बातें यूँ तुमसे नींद में।
    जब जब खुली आँखें मुसलसल तुम नहीं।।
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    वो इश्क ही क्या जिसमे पागलपन नहीं।
    पागल हुए हम और पागल तुम नहीं।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 28w

    (12.08.2020)
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    शज़र - पेड़
    दरिया - नदी
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    ##my_burnt_diary @writer_in_disguise5

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    है ज़िन्दगी कोई यहाँ से बेहतर।
    क्या कौन कैसे कब कहाँ से बेहतर।।
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    हो वादियाँ झरने शज़र दरिया जहाँ।
    कुछ चाँद तारे आसमाँ से बेहतर।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 28w

    (11.08.2020)
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    मुसलसल -लगातार
    स्याह - काली
    सहर - सुबह
    गोया - जैसे
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    ##my_burnt_diary @writer_in_disguise5

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    मुसलसल स्याह रातों की सहर मुश्किल।
    कभी आसां कभी लगता सफ़र मुश्किल।।
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    कभी लगता मुनाफ़िक सब मिरे गोया।
    कभी लगता यहाँ है दर-ब-दर मुश्किल।।
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    ©prakhar_sony

  • ellie_b 30w

    Whatever i felt, i wrote it down,
    Nobody knew, but my diary confined,
    Unable to abridge myself from you,
    I burnt my diary to burn the bridges that led to you,
    With every page i set ablaze,
    my every unsaid emotion,
    every hushed scream,
    every wiped tear disappeared in the infinite sky,
    Set my soul free to fly high..

    #my_burnt_diary. #poetry #write_to_express
    @mirakeenetwork. @mirakee

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    My burnt diary
    ©ellie_b

  • prakhar_sony 31w

    (27.07.2020)
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    बज़्म - महफिल
    फ़क़त - सिर्फ
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    ##my_burnt_diary @writer_in_disguise5

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    किस तरफ़ यार सारे फ़साने गए।
    आ गए दिन नए अब पुराने गए।।
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    जीत सकते थे सारे दिलों को मगर।
    बज़्म में यार दिल हम गँवाने गए।।
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    लोग सुनते ख़ुशी की कहानी नहीं।
    हम फ़क़त दर्द अपना सुनाने गए।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 41w

    किसी से शख़्स वो हारा नहीं लगता।
    सही अंदाज़ तुम्हारा नहीं लगता।।
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    चलानी है मुहिम हर-सू मुहब्बत की।
    हमें कुछ और तो प्यारा नहीं लगता।।
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    ©prakhar_sony

  • prakhar_sony 42w

    (11.05.2020)
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    बिस्मिल - घायल
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    ##My_burnt_diary @writer_in_disguise5

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    किन वाकयों में यार शामिल दौर है।
    हैं हम घरों में क़ैद मुश्किल दौर है।।
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    लगता सही सब कुछ मगर सब झूठ है।
    बस ये हक़ीक़त है कि बिस्मिल दौर है।।
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    ©prakhar_sony