#panchdoot_sarthak

1555 posts
  • parulsharma 10w

    मैं #आईना हूँ या #रूह हूँ तेरी
    मुझमें बस तुम ही #नजर आते हो
    पारुल शर्मा
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    प्रेम

    मैं आईना हूँ या रूह हूँ तेरी
    मुझमें बस तुम ही नजर आते हो
    ©parulsharma

  • archanatiwari_tanuja 19w

    पहचान चाहती हूँ-

    खुद की तकलीफों की परवाह किए बगैर
    सेवा भाव लिए मैं निरंतर चलती रहती हूँ,

    औरों की खुशी के लिए जीती - मरती हूँ
    सूर्य की प्रथम किरण के संग मैं उठती हूँ,

    दिन भर सबकी फरमाईशें पूरी करती हूँ
    पति, बच्चे, सास-ससुर,देवर-जेठ,ननद,

    सब ही से है भरा- पुरा परिवार मेरा
    इन्हीं में सिमट गया अब संसार मेरा,

    विवाह से पहले मायके हाथ मे थी ड़ोर मेरी
    मान-मर्यादा बनाए रखना थी जिम्मेदारी मेरी,

    इक हाथ से छूटकर दूजे हाथ पहुंची ड़ोर मेरी
    अपनी जरुरतों के मुताबिक खीचें सब डो़र मेरी,

    मैं कब खाती हूँ, सोती हूँ कब आराम करती हूँ
    इससे किसी को भी कोई सरोकार नहीं रहता,

    इस पर भी मैं खरी- खोटी सुनती रहती हूँ
    लोगों की खुशी की खातिर चुप ही रहती हूँ,

    मुझे भी पीड़ा होती है मेरी भी आँखें रोती है
    पर कह नहीं सकती किसी से यही है तहज़ीब मेरी,,

    जन्म से माँ- बाप के संस्कारों का मोल चुकाती हूँ
    विवशता वश मैं छिप-छिपकर आंसू बहाती रहती हूँ,

    समझ लिया है कतपुली मुझे घर,परिवार और
    समाज की कुरीतियों को चलाने वाले ठेकेदारों ने,

    मै भी हूँ इक इंसान तुम्हारी ही तरह ऐ दुनिया वालों
    दर्द मुझे भी होता है मेरा भी दिल जार-जार रोता है,

    पत्थर की मैं कोई मूरत नहीं हूँ मुझमें भी प्राण है
    भोग की कोई बस्तु नहीं हूँ मैं भी तो इंसान ही हूँ,

    मानव जीवन को आकार,आधार मैं देती हूँ
    जीवन को सुरक्षित गर्भ मे सहेजे रखती हूँ,

    आखिर कब तक सहूं मैं अत्याचार तुम्हारे,
    प्यार, स्नेह, दुलार पर मेरा भी तो हक्क है,

    सम्मान चाहती हूँ स्वतंत्रता का अधिकार चाहती हूँ
    "मै औरत हूँ"कतपुतली नहीं अपनी पहचान चाहती हूँ।।

    ©archanatiwari_tanuja

  • archanatiwari_tanuja 20w

    #hindiwriters#writerstolli#writersnetwork
    #mirakee#@panchdoot#panchdoot_magazine
    #panchdoot_social#panchdoot_sarthak
    #panchdoot_news

    विजय दशमी के पावन पर्व की आप सभी को बहुत बहुत
    बधाई प्रभु श्री राम की दया दृष्टि सदा आप सभी पर बनी रहे....
    ����������❤️❤️����������

    08/10/19 01:40 PM

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    राम-रावण

    त्रेता मे तो था इक रावण
    राम ने जिसें मार गिराया
    अब है घर-घर मे रावण
    कैसे इसको तुम मारोगे
    तब तो रावण के घर रह
    सीता पवित्र बनी रही
    अब अपने ही घर में सीता
    असहाय नजर आती है।

    नहीं सुरक्षित अपने ही घर मे
    राम के वेश मे रावण छिपा है
    कैसे करें पहचान भला इसकी
    ये तो मुखौटा लगा बैठा है
    नहीं पहचानी जाती शक्लें
    किसपर हम कैसे करें भरोसा
    जमीर को मार सब बैठे हैं
    जिस्म की भूख मिटाने को।

    अखबार उठा कर तो देखों
    बलात्कार की खबरों से भरा पड़ा
    कई-कई रावणों ने मिलकर
    बेचारी,असहाय का शिकार किया
    इतने पर भी तृप्ति नहीं मिली!!
    जिस्म को टुकड़ों में बांट दिया
    बरसों पहले मरे रावण को
    हर साल ही हम जलाते है ।

    मन का रावण कभी ना मार सके
    अपने भीतर की बुराई ना जला सके
    अपनी गन्दी नियत को ना साफ किया
    बस चीर हरण को हरदम तैयार रहे
    पुतले को जलाने से सुधार नहीं होगा
    दोषियों को बली चढ़ाना होगा
    फिर इकबार राम राज लाना होगा
    अपनी सोई आत्मा को जगाना होगा।

    राम-रावण के इस युद्ध मे
    विजय हो सदा ही सत्य की
    देश,समाज मे हो शान्ति खुशहाली
    नारी को समुचित सम्मान मिले
    सर उठा चलने का अधिकार मिले
    कलुषित मानसिकता को त्याग दे
    सात्विक आचरण जब हम अपनाएं
    तभी सार्थक हो दशहरा और दिवाली।।

    ©archanatiwari_tanuja

  • jigyasabinni 23w

    हिंदी

    हिंदी आज तो तेरा दिन है ...
    आज कुर्सी तेरी है शाम तेरी है...
    .पर
    सत्ता के गलियारो मे कहाँ कैद है ?
    मै तो तेरी माथे की बिंदी हूँ
    पन्नों मे, इतिहास में , इंकलाब में , कहाँ छुपी है
    तोड़ दे चुप्पी बता अपना विशाल रूप...
    दूसरा कौन नीलकंठ होगा जो समेटेगा तुझे ?
    गंगा सी सरल ,तलवार सी तीक्ष्ण
    हर दुख की जुबां थी हिंदी .....
    पर
    सिसकियों की गूंज मे अभी जिंदा है...
    देश भक्ति के सुर में अभी तेरी ही लहर है
    मनोरंजन और व्यापार में T.R.P.मे तेरी ही धूम है
    पर....
    लोगों की नजर में ,सोच में ...
    तेरे पांवो के नीचे दलदल जमीं है ....
    दिलों मे भी दबी सहमी है...
    लबों पे आके ठिठक सी जाती है...
    बोलूँ या न ...
    पर....
    मेरी हिंदी तू मेरी पहचान है
    मेरा अभिमान है ,,
    मेरे उगते हिंदुस्तान के ललाट का...चमकता सूर्य तू है
    मेरी हिंदी तू मेरी पहचान है ...
    जय हिंद, जय हिंदी, जय हिंदुस्तान !!!!!
    ©jigyasabinni

  • archanatiwari_tanuja 24w

    #writerstolli#tod_wt#challenge#teacher_wt
    #panchdoot#panchdoot_social#hindiwriters
    #panchdoot_sarthak#repost

    05/09/19. 04:35 PM

    आप सभी को शिक्षक दिवस की ढ़ेरों शुभकामनाएं ��������������������������������

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    गुरु महिमा

    मैं लाख करु प्रयास
    गुरु महिमा कही ना जाए,
    आप जीवन के आधार हो
    डगमगाती नौका के खेवनहार हो।

    मै मतिमूढ़ बहुत हूँ
    आप ज्ञान के भंडार,
    सही गलत का भान कराया
    मुझे ज्ञान का रसपान कराया।

    मै लक्ष्य हीन भटक रही थी
    आपने ही लक्ष्य का बोध कराया,
    निराशा के अंधकार मे जब फंसी
    हरदम आश्वासन का हाथ बढ़ाया।

    बहुत भूल हूँ मैं करती
    पग पग पर है सुधार कराया,
    जब व्याकुल हो उथता था मन
    आपने मुझको प्रति पल धैर्य धराया।

    दुनिया में मुझको ऊँच नीच
    खरे खोटे का इल्म नहीं था"गुरु माँ"
    मै बहुत ही डरी सहमी सी रहती थी
    आपने गर्व से सर उठा चलना सिखाया।


    आपके चरणों में हैं मेरा
    नमन शत - शत बारम - बार,
    प्रति पल मेरा मार्गदर्शन करना
    बनकर जीवन ज्योति ज्ञान आधार।।

    ©archana_tiwari_tanuja

  • archanatiwari_tanuja 25w

    #we_are_one@birajv#triveni#panchdoot
    #panchdoot_social#panchdoot_sarthak
    #repost#hindiwriters#writerstolli#tod_wt
    #panchdoot_magazine#likho_india

    500th पोस्ट आज इस मंच पर मेरी पूरी हो गई है ।और इस
    देश भक्ति रचना जो कश्मीरी भाई बहनों के लिए लिख कर
    मैंने पूरी की। इतने लंबे समय तक आप सभी ने मेरा साथ निभाया है
    उसके लिए हृदय की असीम गहराइयों से मैं आप सभी का आभार व्यक्त करती हूँ तथा अभिनंदन करती हूँ ऐसे ही सदा अपना स्नेह
    बनाएं रखें......����������❤️��������❣️❣️

    03/09/19 04:35 PM

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    कश्मीर की घाटी

    त्रिवेणी :-
    -------------
    (1)
    आज वह है स्वतंत्र हुई,
    अत्याचार सहे उसने अनेक।

    अब तक जो बंधक थी आतंक की।।
    (2)
    बम, बारुद,गोलियों की,
    अब तक बहुत है गूंज सुनी तुमनें।

    वक़्त है अब आ गया प्रतिशोध का।।
    (3)
    आतंकियों के बहुत सहे अत्याचार,
    जिसमें कुछ अपने भी है भागीदार।

    करना होगा उनका भी अब बहिष्कार।।
    (4)
    पराये तो पराये थे,
    ऐ पत्थरबाजों तुम तो अपने थे।

    फिर कैसे तुमनें अपनों का लहूँ बहाया।।
    (5)
    होगा तेरे भी हर जुर्म का हिसाब,
    कश्मीरी युवाओं को भ्रमित कर।

    मौत का भयावह खेल जो तुमनें खेला है।।
    (6)
    गैरों की औकात ना होती,
    गर कोई अपना ना डसता।

    कोई कश्मीरी ना जान गवाता।।
    (7)
    देश द्रोही है वे सब,
    जो भाई को भाई से लडवाते रहे।

    कत्ल करने को हथियार थमाते रहे।।
    (8)
    श्वेत मखमली चादर पर,
    वे रक्त का दाग लगाते रहे।

    जगह जगह लाशों का ढ़ेर लगाते रहे।।
    (9)
    सुनलो ऐ देशद्रोहियों,
    अन्त तुम्हारा अब निकट है।

    कही नहीं तुम्हें अब सरण मिलेंगी।।
    (10)
    हम एक ही माँ की संतान है,
    हम एक है और सदा एक ही रहेंगे।

    फूट का तुम चाहे जितना जहर घोलों।।
    (11)
    कश्मीर की घाटी ,
    करती है उसका आभार।

    जिसनें उसको बंधन मुक्त कराया।।
    (12)
    डरी-सहमी सी घाटी में,
    फिर से लाएंगे हम नई बहार।

    जब हम सब एक जुट हो जाएंगे।।
    (13)
    कश्मीर की वादियों में,
    खुशनुमा माहौल घुल जाएगा।

    जय हिंद के नारों से आकाश भी गूंज उठेगा।।
    (14)
    आतंक की जड़ें है कमजोर हुई,
    जन-जन मे है नव जागृति आई।

    चल पड़ा कश्मीर विकास की ओर।।
    (15)
    गिले शिकवे सब भुलाकर,
    हम सुख दुःख के भागीदार बने।

    इन्हें गले लगाकर नये रिश्ते की शुरुआत करें।।
    (16)
    रंग रुप का भेद-भाव मिटें,
    जाति - धर्म ना आने पाए आड़े।

    एक माँ की सब संतानें हिल- मिल रहें।।
    (17)
    एक ही देश,एक ही झंडा,
    एक ही नारा,एक ही कानून।

    तब जग में हिन्दुस्तान का मान बढ़ें।।

    जय हिंद जय भारत
    ©archana_tiwari_tanuja

  • parulsharma 31w

    जब गम अंतहीन हो जाते है
    तो जिन्दगी अंत की राह देखती है
    पारुल शर्मा
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    जब गम अंतहीन हो जाते है
    तो जिन्दगी अंत की राह देखती है
    ©parulsharma

  • monika_kakodia 32w

    नज़रों का फ़ेर है मैं दाग हूँ या पाक हूँ
    ज़िस्म में दबी छिपी ख़ाक हूँ या आग हूँ

    हलक में रुकी हुई ,मैं बिलखती आवाज़ हूँ
    अपने हक़ के वास्ते चीखती चित्कार हूँ

    समाज के पैमाने पर भले ही मैं विकार हूँ
    मानते क्यों नहीं मैं सृष्टि का आधार हूँ

    बेड़ियों में कसी हुई कोई परवाज़ हूँ
    अंनत तक फैला आकाश का विस्तार हूँ

    तोड़ कर सब बंदिशें आज मैं बैराग हूँ
    हलाहल गटक रही ,अब मैं महाकाल हूँ

    ✍️Mk _monikakakodia



    @panchdoot #panchdoot #panchdoot_sarthak
    @writersnetwork @hindiwriters @hindiurduwriters
    @hindiurdu_network @musaafiir @sanki_shayar @iammusaafiir

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    नज़रों का फ़ेर है मैं दाग हूँ या पाक हूँ
    ज़िस्म में दबी छिपी ख़ाक हूँ या आग हूँ

    हलक में रुकी हुई ,मैं बिलखती आवाज़ हूँ
    अपने हक़ के वास्ते चीखती चित्कार हूँ

    समाज के पैमाने पर भले ही मैं विकार हूँ
    मानते क्यों नहीं मैं सृष्टि का आधार हूँ

    बेड़ियों में कसी हुई कोई परवाज़ हूँ
    अंनत तक फैला आकाश का विस्तार हूँ

    तोड़ कर सब बंदिशें आज मैं बैराग हूँ
    हलाहल गटक रही ,अब मैं महाकाल हूँ

    ✍️Mk
    ©monika_kakodia

  • monika_kakodia 32w

    समेट कर सारा जहान अपने दामन में
    देखना है हवा का रुख़ किस ओर का है

    ✍️Mk
    ©monika_kakodia
    @panchdoot #panchdoot #panchdoot_sarthak
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    @hindiurdu_network @musaafiir @sanki_shayar @iammusaafiir

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    समेट कर सारा जहान अपने दामन में
    देखना है हवा का रुख़ किस ओर का है

    ✍️Mk
    ©monika_kakodia

  • anupamsabhivyakti 32w

    NATURE

    Nesting and nourishing the noble life network,
    Adapting to the advances of aging atmosphere,
    Trying to tune with time, it trains the temperature,
    Urging the universe to unwind the ubiquitous,
    Revolving round the realized rational relations,
    Empathic environment enriches every emotions.
    ©amritsagar

  • parulsharma 33w

    मेरी एक तरफा मोहब्बत की
    एक बस यही है दुआ
    कि तेरी मोहब्बत एक तरफा न हो
    पारुल शर्मा
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    #panchdoot_
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    एक तरफा मोहब्बत

    मेरी एक तरफा मोहब्बत की
    एक बस यही है दुआ
    कि तेरी मोहब्बत एक तरफा न हो
    ©parulsharma

  • anupamsabhivyakti 33w

    Written for Writerstolli

                   अब अौर नहीं
    कब तक यूँ शब्दों से भ्रास निकालेंगे,
    दरिंदों को कब तक हम और पालेंगे,
    कब तक उनको यूँ दरिंदगी करने देंगे?
    बस बहुत हुआ अब मोम से प्रतिकार,
    उठाकर हमें कोई प्रलयंकारी हथियार
    करने होंगे उन दुष्ट दानवों पर घातक वार।

    काट डाले टूकड़ों में उनके अंग दो चार
    जिन्होेंने छीना उनसे जीने का अधिकार
    जो बस अभी हुये थे चलने को तैयार।
    क्यूँ  हम ऐसे हैवानों को पनाह देते रहे,
    जो मासूमों की आबरूओं से खेलते रहे,
    क्यूँ न शैतानों को जलाकर राख करते रहे?

    कोई बताये उस शैतान की जननी को,
    जिसने कोख में पाला खूनी नेवले को
    अभिशाप बनकर बेखौफ रौंदता है जो
    कितनी ही निरीह कलियो औ' फूलों को;
    जो किया सो किया अब पाप धोने को,
    झूठी ममत्व भूला, मार दे खूनी संतान को।

    कितने कुकर्मों पर हम बस यूँ ही बौखलायेंगे
    जगह जगह कितनी ही मोमबत्तियाँ जलायेंगे
    दो चार गालियाँ देकर फिर चुप हो जायेंगे?
    यूँ ही अगर इन वारदातों को भूलते जायेंगे
    निर्दयी दानव कितने निर्भयों को खा जायेंगे,
    और हम बस मोमबत्तियाँ जलाते रह जायेंगे। 

    अब और नहीं, इन कपूतों को हम दिखायेंगे
    कि कैसे चील कौवे इन्हें ही नोंच नोंच खायेंगे
    औ' हम कोई और मातम नहीं,जस्न मनायेंगे।
    सामने खड़े भेड़िये पर हम इतना चिल्लायेंगे
    कि कान ही नहीं, रोंगटे भी उसके मुकर जायेंगे
    सशक्त प्रहार से उसे तिलमिला कर छोड़ेंगे।

    एक एक बेटी को हम इतना सशक्त बनायेंगे
    कि वह हर हरामी का सही जवाब दे पायेंगे;
    हर बेटे में ऐसी भावनाओं को हम जगायेंगे
    जो अन्याय के आगे सर न कभी अपना झुकायेंगे
    हर बहन की पूकार पर सब छोड़ दौड़ते आयेंगे
    हाथ से हाथ मिला सभी राक्षसों का सामना करेंगे।
    ©amritsagar

  • anupamsabhivyakti 33w

    भीतर की आँखों से परख मेरी चाल

    पहचाना है हमने हमारे पेशानी के पसीने से परेशान पथिकों को
    जो नाक भौ सिकोड़ कर कहते हमें दूरी बनाये रखने को,
    जी तो चाहता है कि एक अपना पूरा दिन ही थमा दूँ उनको,
    फिर पूछूँ बड़े प्रेम से कि कहाँ छिपाया दिलो-दिमाग की गरमी को।

    हम चुप चाप उनकी हर बात सुन लेते हैं ताकि शांति बनी रहे
    पर अंत:करण की चीत्कार पर हम भी गला फाड़ चिल्लाते हैं,
    भले समझे कोई हमें बेजुबान या फिर हारा हुआ खिलाड़ी
    हम किसी की तसल्ली को नहीं कभी चौके छक्के लगाते हैं।

    हाँ, माना कि गाड़ी नहीं, बँगला नहीं, गहनों से भरी आलमारी नहीं,
    पर किसने कहा उनसे की जीने की हमारे पास कोई तैयारी ही नहीं?
    चाहे कितने भी हो वो धनी, क्या खरीद पाये हैं खुशियाँ कभी,
    या फिर दिल में बसे सकून और प्यार की दो-चार घड़ी ही सही?

    बहुत अनुमान लगाते हैं हमारी चमड़ी देखकर कुछ लोग
    उनको कहाँ पता कि इसके भीतर किस हद तक का है जोग,
    चाहे मैं हूँ कितना भी चर्बीदार, पकड़ कर दिखाऊँ सारे सूर ताल
    और सिकिया पहलवान होकर भी ला सकता हूँ मैं भूचाल।
    ©amritsagar

  • parulsharma 33w

    खुदा का शुक्र है तेरी तस्वीर है मेरे हाथों में
    अब इसके सहारे पूरी जिन्दगी कट जायेगी
    पारुल शर्मा
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    तस्वीर

    खुदा का शुक्र है तेरी तस्वीर है मेरे हाथों में
    अब इसके सहारे पूरी जिन्दगी कट जायेगी
    ©parulsharma

  • parulsharma 33w

    love in 7words (part-1)

    इश्क दिखता लड्डू है
    होता है एटमबम
    पारुल शर्मा
    ©parulsharma

  • parulsharma 33w

    Life without
    you
    nothing
    ©parulsharma

  • parulsharma 33w

    बातें होती हैं खामोशी के दरम्या भी
    पर अल्फाजों की नहीं अहसासों की
    पारुल शर्मा
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    बातें होती हैं खामोशी के दरम्या भी
    पर अल्फाजों की नहीं अहसासों की
    ©parulsharma

  • parulsharma 33w

    बचपन में ठोड़ा बचपन रहने दे
    'ऐ जिन्दगी '
    जरा रहम कर मुफलिसी पर पर
    पारुल शर्मा
    Insta ID bol_dil_k_phool_se
    #panchdoot_
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    बचपन में ठोड़ा बचपन रहने दे
    'ऐ जिन्दगी '
    जरा रहम कर मुफलिसी पर पर
    ©parulsharma

  • parulsharma 33w

    संगीत जिन्दगी की धड़कन होते है
    जिसके बिना खुशी और गम अधूरे है
    पारुल शर्मा
    @hindiwriter@mirakeeworld@writersnetwork @panchdoot @hindilekhan @hindiurdu_saahitya @merakee @hindikavyasangam @readwriterunits @thegoodquote#likho_india#panchdoot_social#panchdoot_magazine #new_india #panchdoot_sarthak#hks#shabdanchal

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    संगीत जिन्दगी की धड़कन होते है
    जिसके बिना खुशी और गम अधूरे है
    ©parulsharma

  • anupamsabhivyakti 35w

    इस रचना को लिखे दस वर्ष हो गये पर मुझे यह आज भी उतनी ही ताजी लगती है जितनी की तब थी जब मैंने इसे पहली बार लिखा था। ज़िंदगी की असली सच्चाई यही है।
    #spirituality #eternaltruth #laughing_soul
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    #panchdoot #magazine #panchdoot_magazine #new_india #impureindia #panchdoot_sarthak #panchdoot_vishal #panchdoot_news #hindiwriters #hindii #hindipoetry #hindipoems #poem #kavya #kavita

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    अध्यात्म

    मुझमें ही है राम, मुझ ही में रावण,
    कभी मैं बनूँ राम, तो कभी मैं रावण।
    जब तक प्रेम के वश में रहूँ, मैं रहूँ राम,
    प्रेम को वश में 'गर करूँ तो मैं रावण।

    परमार्थ जियूँ जब तक, मैं रहूँ राम,
    पर हो 'गर स्वार्थी जीवन, तो मैं रावण।
    सारा जग मुझमें है, मै सारे जग में
    अहम से निकलूँ 'गर, मैं हर कण में।

    मैंने कल जन्म लिया था यहाँ
    कल मुझे ही छोड़ना है ये जहाँ।
    हूँ जगत के इस पार आज मैं ही,
    उस पार भी जाना है कल मुझे ही।

    मै नश्वर हूँ, जल जाएगा ये शरीर,
    मैं ही हूँ आत्मा, जो रहेगा अमर।
    मैं हूँ शून्य, उसका पूर्ण भी स्वयं ही
    शून्य - पूर्ण की अनंत कड़ी भी मैं ही।

    मैंने पाप किया है, किये पुण्य भी
    मैंने कष्ट दिया है, भोगी भी मैं ही।
    जो भी लूटाया है, उसे ही पाया भी,
    कर्म हूँ मैं और परिणाम भी मैं ही।

    मैं ही सत्य हूँ और मैं ही मिथ्या,
    मै ही नाविक हूँ और मैं ही खेवैया।
    मैं ही प्रश्न हूँ और मैं ही उसका उत्तर
    जो भी ढूँढू वह सब है मेरे ही भीतर।

    जो अँधेरापन है, उसकी रौशनी मुझीमें
    जो मेरी मंजिल है, राह उसकी मुझी में।
    मुझमें ही है अमृत, विष भी है मुझी में
    जो दर्द है भीतर, उसकी दवा भी मुझी में।

    मैं विजयी हूँ और पराजित भी मैं ही
    प्रेम को जीता है मैंने, हारा भी प्रेम से ही।
    मैं ही शोला हूँ, और शबनम मैं स्वयं ही,
    मैं ही कर्त्ता हूँ, उसका स्त्रोत औ' प्रारब्ध मैं ही।
    ©amritsagar