#rekhta

8525 posts
  • piu_writes 49m

    क्यों बुझती नहीं हैं रातें और पिघलते नहीं हैं दिन , क्यों आंखें रहती है नम होंठो पर हँसी ठहरती नहीं एक दिन , जिंदगी ज़रा क्या माजरा है समझा दे , ऐ जिंदगी इतने दर्द दिये हैं अब तो मंजर खुशनुमा बना दे
    ©piu_writes

  • khwahishaan 4h

    दिल ही दिल में रक्स करूँ और मद्धम सुर में गाऊँ भी
    आईने से आँख मिलाकर रंगत पर इतराऊँ भी !

    रात को हिज्र के जुगनू पकड़ूँ दिन को यादों की तितली
    बाक़ी वक़्तों में तन्हाई को दो-चार सुनाऊँ भी !

    कोई मुश्किल काम नहीं है मेरा जीना या मरना
    रोज़ सवेरे ज़िंदा होकर शाम ढले मर जाऊँ भी !

    यूँ लगता है मेरे सर पर कुछ तो है जो तारी है
    ख़ुद ही रो लूँ, ख़ुद चुप हो लूँ , ख़ुद को ही समझाऊँ भी !

    इश्क़ का पानी खालिस मय है , डूब चुकी ये तब जाना
    फिर गोता खाना पड़ता है कभी जो बाहर आऊँ भी !

    तेरे कुर्ते के बटनों को तब टांकूँ जब पहने तू
    तेरे जनेऊ की उलझन को हाथों से सुलझाऊँ भी !
    ©अार्यन निर्मल

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  • piu_writes 6h

    बरस जाते हैं नैन तेरे एक दरस के लिए अब तो आ जा दरस दिखा ना तड़पा सांवरे
    ©piu_writes

  • archanatiwari_tanuja 7h

    क्यो बेटियों को

    समाज की कुरीतियों का पालन करना पड़ता है,
    क्यों बेटियों को ही घर छोड़ के जाना पड़ता है?
    बेटों से ही वंश बढ़े बेटियाँ तो पराया धन होती है,
    क्यों बार-बार हमको यह ताना सुनना पड़ता है?

    जब कभी राहों मे घूरती है गंदी नजरें लोगों की,
    क्यों शर्मिंदगी से सर हमें ही झुकाना पड़ता है?
    भाई-बहन हम दोनों जब इक ही माँ की संतानें है,
    क्यों हमको पक्षपात का शिकार होना पड़ता है?

    बात-बात पर रोक-टोक सुरक्षा के नाम पर होती
    क्यों हमें ही घुट-घुट के टुकड़ों मे जीना पड़ता है?
    ज़िंदगी हमारी और हक़ फैसला दूसरों का होता है,
    क्यों दूसरों के इशारों पर हमें यूं जीना पड़ता है??

    बचपन बीता है जिस आँगन की चार दीवारी मे,
    क्यों हमें फिर वो अँगनाई छोड़ जाना पड़ता है?
    जिसकी खातिर छोड़ा है मैने घर आँगन अपना,
    क्यों उसी के जुल्मों का शिकार होना पड़ता है?

    रिश्तों की कटीली कसौटी पर प्रतिपल चलते है,
    क्यों हमें ही तिरस्कार का जहर पीना पड़ता है?
    प्याग,तपस्या और समर्पण करने के बावजूद भी,
    क्यों शक़ की सूली हर बार हमें चढ़ना पड़ता है?

    दूसरों को खुश रखने की खातिर ही हर इक़ बार,
    क्यों हमें अपने अरमानों का गला घोटना पड़ता है?
    "तनुजा"घर हो या बाहर हार हमें ही मानना पड़ता है,
    क्यों"नारी को आज़ादी"से समझौता करना पड़ता है?

    ©archanatiwari_tanuja

  • archanatiwari_tanuja 8h

    आवारा बादल

    भला कौन कैद कर सका है पहलू मे इस दौरे जहाँ में,

    आवारा बादलों, गुजरते वक्त, और बदलते लोगों को।

    ©archanatiwari_tanuja

  • piu_writes 19h

    जुल्फों को हौले से सफ़ेदी छूने लगी है जिंदगी के लुत्फ को और उठाना है जश्न जिंदगी का पल दो पल का फिर कूच कर जाना है
    ©piu_writes

  • raman_writes 1d

    बदनाम

    होश संभालेंगे अब हम तो बहकेगा कौन ।

    चर्चा में रहने के लिए बदनाम होना जरूरी है ।।


    ©raman_writes

  • piu_writes 1d

    ऐ जिंदगी तुझसे मुझे है बस एक यही गिला अब तक मुझे यहाँ मुझ सा कोई नहीं मिला
    ©piu_writes

  • raman_writes 1d

    हालात

    मेरी बेकारी पर ध्यान दिया सब तमाशागरों ने ।

    मेरे हालात देखने वाली आँखे उनके पास नहीं ।।


    ©raman_writes

  • archanatiwari_tanuja 2d

    धवल,शीतल चंद्र

    धवल,शीतल चंद्र है बड़ा चंचल और मस्ती खोर,
    हर दिन वो तो घटता-बढ़ता नहि कोई ओर-छोर।
    संगीत सुनता दूर गगन की सैर करे सितारों संग,
    चुपके से सबका दिल चुरा ले जाये ऐसा है चोर।।

    शशि और हमारे बीच बंधी ऐसी नाजुक ड़ोर,
    मौसम सुहाना देख-देख के जैसे नाचे है मोर।
    न जाने कैसा ?? आकर्षक छुपा रखा है उसने,
    रात भर तकते-तकते जाने कब हो जाये भोर।।

    कवियों की कल्पना ने हर बार तुम्हें निखारा,
    प्रेमी युगल ने संदेश वाहक कह के तुम्हें पुकारा।
    बच्चों ने चंदा मामा नाम दिया है बड़ा निराला,
    दे-दे कर उपमा तेरी शृंगार रस को और सँवारा।।

    कृष्ण पक्ष से अमावस तक तुम नित घटते जाते,
    शुक्ल पक्ष मे बढ़कर पूर्णिमा तक परिपूर्ण हो जाते।
    तीज,चौथ,ईद मे परिजनों की खातिर आशीष मांगें,
    जो तुम न होते साथ!!हम कविता कैसे लिख पाते।।

    अर्चना तिवारी तनुजा
    ©archanatiwari_tanuja

  • raman_writes 2d

    मलाल

    जितनी भी ख़ूबसूरत बात हो ज़हन में सब बयाँ कर देनी चाहिए ।

    ख़ूबसूरत बात को ना कहने का मलाल सबसे ज्यादा होता है ।।


    ©raman_writes

  • piu_writes 3d

    मैं जब भी कभी ज्यादा गमगीन और मायूस होती हूं तुम्हारे ख़यालों से गुफ़्तगू कर के खुश हो लेती हूं
    ©piu_writes

  • piu_writes 3d

    Jigna के नाम चिट्ठी

    क्यूँ औरत अगर सही भी हो तो उसे जताना पड़ता है क्यूँ आदमी गलत होकर मदमस्त भी झूमकर और इठलाकर चलता है , बात यहां हमेशा क्यूँ औरत मर्द की होती है बात यहाँ क्यों सही गलत की नहीं होती है , दुनियां में रानी लक्ष्मीबाई या मंटो बनना आसान नहीं होता है unisex सोच रखना काम बड़ा होता है देखती हूँ जब औरत को अक्सर सेकंड क्लास treatment दिया जाता हाँ मुझे गुस्सा बड़ा आता है yes even men get exploited मुझे ये भी समझ मे आता है मगर फिर भी अगर अनुपात देखें women are exploited more and therefore being a women I stand with women for sure that does not mean I will not oppose men being exploited after all I stand for humanity and hope one day in the world humanity gets employed
    ©piu_writes

  • piu_writes 3d

    I raise me voice for woman's rights
    and humanity don't be a doormat raise your voice too though some means or poetry
    ©piu_writes

  • piu_writes 3d

    दुनियां भर की औरतों को एक दिन छुट्टी देकर देखना दुनियां अगर रुक ना जाए तो फिर मुझसे आकर कहना
    ©piu_writes

  • raman_writes 4d

    ख़ूबसूरती

    मैं उसकी मोहब्बत की ख़ूबसूरती कैसे बयाँ करूं ।

    नफ़रत करता है मुझसे लेकिन कभी बताता नहीं ।।


    ©raman_writes

  • piu_writes 4d

    मकान

    औरत से मकान घर बनता है औरत ही घर बसाती है फिर अपने ही घर में वो क्यों किराएदार सी रखी जाती है, बचपन मे बाप का घर फिर घर पति का फिर घर बेटे का औरत का घर कहिं ना औरत का किरदार है ऐसा जब दुनियां से जाना होता है बेटे से अपने मुखाग्नि भी दिलवाना होता है झुलसे हुए मुह को लेकर खुदा के घर जाती है ख़ुदा भी उसे घर पर नहीं रख पाता तो वो अगले जन्म में फिर औरत बन जाती है
    ©piu_writes

  • parle_g 4d

    @cosines @rani_shri @adeeba__ @my_sky_is_falling @archanatiwari_tanuja @rasiika @7saptarangi_lekhan

    ❤️❤️❤️❤️


    शुऊर-ए-जात - अक्लमंद गुण
    गर्दिश-ए-अय्याम - भाग्य का परिवर्तन
    पर्दा-ए-पोशीदगी- छुपने के लिए कोई पर्दा
    हैहात - अफ़्सोस
    अहद-शिकन - वादा तोड़ने वाला

    ........

    #hindiwriters #urdu #rekhta ❤️

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    जला देंगे !

    अपनी बे'कली ना सही,बैठ कर कभी ये शुऊर-ए-जात जला देंगे,
    हम सुख़ नवर है हबीब, फिर तुम्हें जला देंगे, तिरी बात जला देंगे।

    किसकी निग़ाहों पे उतार'कर कर लौटी हो अपने जमाल को तुम,
    ये जमाने के चराग़ है, दिल जला देंगे, हुश्न-ए-रिवा'यात जला देंगे।

    महज उन हाथों में था नश्शा, मुझे नही लग'ता शरा'ब में था कुछ,
    जाओ तहकीकात करो मियाँ,हम तो शहर-ए-ख़राबात जला देंगे।

    चाहे कुछ दिन ही सही, मगर तिरी निग़ाहों में खटक'ना है वाइज,
    तू इक़ पल को चीख उठेगा,जब तिरे दर तिरे खयालात जला देंगे।

    कभी ठहरता है कोई मुझमें, कभी निकल जाता है ख्वाहिश बन,
    सुनो ये गर्दिश-ए-अय्याम, हम कुछ दि'नों में तिरे हा'थ जला देंगे।

    अब'के आना, इक़ समन्दर में फेंक आयंगे अपने वहम की ख़ाक,
    उसी समन्दर के किनारों पर,दिन-ए-वक़्त-ए-मुलाकात जला देंगे।

    जेहन से उतर जाता है पर्दा-ए-पोशीदगी,तिरा नाँ लेने में अक्सर,
    औऱ तू कहता है खुलूस,तिरे ख़फ़ा रहने का हम हैहात जला देंगे।

    मिरी जाँ अब फरागत नही मिलती,अहद-ए-शिकन न कहो मुझे,
    कुछ दिन का मा'तम है मुहब्बत, हम भी तिरी औकात जला देंगे।

    फ़रिश्ता ले डूबता है, कहीं कहीं ज'फ़ा भी रख'ती है ज़िन्दा हमें,
    ज़िंदगी हम तिरे मुनाफ़िक़ किरदार,और तिरे इशा'रात जला देंगे।

    सहूलत से निकाल ले जाओ, मिरे गम से अपनी कुछ यादें मियाँ,
    ज़ियादा तासीर नही जचती,इक़ ही पल अपने हालात जला देंगे।

    इक़ दफ़ा नही, हर रोज, हजार दफ़ा तिरी रग़बत मांगता है दिल,
    माँ, तिरी दुआ लगती है मुझे, हम ये दवा के कागज़ात जला देंगे।
    ©parle_g

  • piu_writes 4d

    निरंकुश पुरुषसत्ता में औरत जब भी हक के लिए आवाज उठाती है , वही पर वह फिर शोषित होती है और लताडी जाती है
    ©piu_writes

  • archanatiwari_tanuja 1w

    #hindiwriters@hindiwriters#hks#hindinama#rekhta#mirakee#hindipost
    27/02/2021

    शेष पंक्तियाँ फिर कभी पोष्ट करती हूँ.....

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    दहेज..

    मनहरण घनाक्षरी
    ***************

    भीतर-भीतर बहे, सुर्ख अश्रु की धार है,
    उमड़ रही वेदना, कहे ज़जबात है।

    बेटी का पिता बना हूँ, ये मेरा अपराध है,
    दहेज के लोभियों की ,नहीं कोई जात है।

    लाड़ो पली बेटी मेरी, ये मेरा अभिमान है,
    दहेज की बेड़ियाँ ले, खड़े लगा घात है।

    किससे कहूँ मै भला,बस अश्कों का साथ है,
    मांग करु पूरी कैसे ?? बिगड़े हालात है।।

    ©archanatiwari_tanuja