#shamhogayi

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  • chandansharma__ 112w

    शाम हो गयी..

    ख़ामोशी में दिन गुज़र गया, इज़हार में शाम हो गयी..
    तुने रोका मैं भी ठहर गया, बाज़ार में शाम हो गयी..

    जंतर-मंतर, भुल-भुलैया क्या कहूँ तेरी आँखों को..
    जब भी मिली मेरी नज़र से, तक़रार में शाम हो गयी..

    तुमने कहा मैंने सुना दिल की बात आँखों आँखों हुई..
    लब कुछ भी ना बोले हमारे,इक़रार में शाम हो गयी..

    हम बैठे रहे आँख पसारे राह पर नज़रें दौड़ाते रहे..
    कभी कभी ऐसा हुआ कि, इंतज़ार में शाम हो गयी..

    ना हमें पता चला 'चन्दन' ना उन्हें ही लगी ख़बर कोई..
    हम डूबे रहे सूरज डलता रहा, प्यार में शाम हो गयी..
    ©chandansharma__