#soulfulstirrings

30 posts
  • dil_k_ahsaas 5w

    दिल में कुछ बातें कांटों की तरह हैं चुभती
    चुभती हैं तो तन-मन करती हैं जख्मीं

    जख्मीं हैं जो मन तो कोई राहत नहीं मिलती
    मिलती तो वो भी नहीं जिसकी चाहत में हूं जीता

    जीता भी उसके लिए जो अनकही मोहब्बत है मेरी
    मेरी चाहत मेरे सपने बस दिल में लिए फिरता हूं

    हूं तो चाहत का मारा मैं पर चाहत में नहीं मर मिटूंगा
    मिटूंगा पर अपने सपनों को हकीकत बना कर मानूंगा

    मानूंगा गर जिंदगी मुझे करेंगी खुशियों का कोई इशारा
    इशारा भी इक मिल जाए तो मिलेगी इक तसल्ली

    तसल्ली भी महज काफी नहीं है गर दूरियां हैं लिखी
    लिखी है कुछ बातें दिल की दीवारों पर और रह जाएंगी मन के अंदर

    अंदर तो बहुत कुछ समेट रखा है मैंने जो नहीं करता मैं किसी से जाहिर
    जाहिर तो वो जख्म भी नहीं किए जो रोज़ छलनी करते हैं मेरा दिल

    दिल के एहसास। रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • hilla254 6w

    ____Soulful Stirrings___

    I never had you
    So I can pretend
    That you were mine
    I never had you
    In my arms
    So I can say
    I miss your embrace
    And now that you gone silent
    There's little to talk about
    I gave up my life
    Just to be by your side
    But you weren't on my side
    I was so blind in love
    I never saw it coming

    You once said
    You loved me
    But also said you didn't mean it
    You already said
    It's a mistake we met
    But how can a mistake
    Feel so right?

    @_Hilla

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    ____Soulful Stirrings___

    I never had you
    So I can pretend
    That you were mine
    I never had you
    In my arms
    So I can say
    I miss your embrace
    And now that you gone silent
    There's little to talk about
    I gave up my life
    Just to be by your side
    But you weren't on my side
    I was so blind in love
    I never saw it coming
    ©hilla254

  • dil_k_ahsaas 10w

    मेरी ✍️ कलम से ......... दिल के एहसास


    कभी खामोशियां बोलती हैं
    कभी शब्द निशब्द हो जाते हैं ।।

    कभी बेबाक बेशुमार बातें लुभाती हैं ।।
    कभी मौन भी चुभ जाता हैै।

    कभी किसी का साथ नहीं भाता,
    कभी अकेलापन भी सुकून दे जाता हैं ।।

    कभी किसी का प्यार नहीं मिलता,
    कभी किसी से रूह का बंधन हो जाता हैं ।।

    कभी नज़रों से नज़रें नहीं मिलती,
    कभी कोई नज़रों से दिल में उतर जाता हैं ।।

    कभी दिल के दिल से तार नहीं जुड़ते,
    कभी जन्मों का बंधन बंध जाता हैं ।।

    ***‌ रेखा खन्ना ***
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 11w

    जख्म़

    मेरी कलम से ....... दिल के एहसास

    " जख्म़ "

    जख्म़ हूं क्या मुझ में झांक कर नहीं देखोगे गहराइयों को मेरी
    अरे इक बार झांको तो सही ।

    देखो तो सही कितनी गहराई में जड़ें फैलती हैं किसीके जिस्म में मेरी
    तुम तो बिना सोचे समझे ही मुझे किसी को भी दे जाते हों ।

    वादा हैं इक बार देखोगे तो डूब जाओगे
    तर नहीं पाओगे, बस अंदर ही अंदर धसते जाओगे ।

    मैं वो दलदल हूं जो अच्छे भले को भी अपने में समा
    जिंदगी से विमुख कर तन्हाइयों का साथी बना देता हूं।

    ना-ना खून नहीं रिसता इन ज़ख्मों से
    मैं तो मुझमें झांकने वाले का भी खून जमा दूं ।

    क्यूं मुझमें झांकने से डरते हो तुम
    जब किसी को देने से डरते नहीं मुझे तुम ।

    कितना आसान होता है ना किसी को भी मुझे देना
    फिर खुद मुझे झेलने से क्यूं डरते हो ।

    जख्म हूं फिर भी नहीं चाहता किसी को भी परेशान करूं
    जबकि फितरत मेरी जिसे भी मिलूं उसकी ही जिंदगी तार - तार करूं ।

    दिल के एहसास। रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 11w

    किरदार

    मेरे किरदार में तुम क्या देखना चाहते हो
    यूं तो तो हर कोई अपनी सोच के मुताबिक ढाल लेता हैं किरदार मेरा

    अपनी सोच के मुताबिक नहीं
    मेरी सोच के मुताबिक तुम मुझे देखने की कोशिश करना

    अपने और दुनिया के ख्यालातों को ना मेरे किरदार पर लादना
    देखो मेरे किरदार पर बेवजह यूं ही ना बोझ बढ़ा देना

    दिल के एहसास। रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 12w

    दीवारें

    कमरें की दीवारें रोज़ मुझे देखती है
    वो ज्यादा बेबस है यां मैं हूं ये सोचती है
    अक्सर अपने ऊपर लगे निशान देखतीं हैं
    उस पर घाव ज्यादा है यां मुझ पर , ढूंढती है
    उसका अकेलापन और मेरी तनहाई एक ही हैं
    दोनों अकेले अपनी अपनी जगह स्थिर है
    ना वो हिलती है ना मुझे दर्द में हिलता देखती हैं

    रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 12w

    तेरा साथ

    इक तेरा साथ हो
    हाथों में हाथ हों
    समन्दर का किनारा
    लहरों का साथ हो

    और

    पैरों तले गीली रेत हो
    तेरे कदमों के निशान पर
    मेरे कदम के निशान हो
    लहरों का इक रेला आए

    और

    उन्हें बहा ले जाएं
    अपने विशाल हृदय में
    हमारे निशान समा कर
    हमारे प्रेम को अमर कर जाए।

    रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 12w

    दिल में खारापन जब भर जाता हैं फिर धीरे-धीरे दिल की दीवारों पर इक काला रंग चढ़ता जाता हैं। जैसे काई सी जमती जा रही हैं । शक्ल और सूरत भी फिर चमक खोती चली जाती हैं।

    खारापन भी ऐसा जो दिल की जमीं को धीरे धीरे बंजर बनाता जाता हैं। जहां फिर से विश्वास और मोहब्बत के बीज नहीं पनपते। पनपता हैं तो सिर्फ उदासियों और निराशाओं को पौधा जो बीते वक्त के साथ मजबूत जड़ों का पेड़ बन जाता हैं।

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    दिल का खारापन

    दिल में जब खारापन भर जाता हैं
    हर जख्म पर नमक चुभता नज़र आता हैं

    कभी-कभी कुरेद-कुरेद कर देखती हूं मैं
    अभी भरने में और कितना वक्त बाकी हैं

    जो दिल की गहराइयों में बसता था कभी
    क्यूं अब वो अनजान नज़र आता हैं

    बेरूख़ी की इंतेहा तो देखो
    अब पहचानने में भी वक्त लगाता हैं

    जिस्मानी नजदिकियो को मोहब्बत कहने वाला
    पूछता हैं ये रूहानी प्यार क्या होता हैं

    मन खुद को ही धिक्कारता हैं अपनी ही पसंद पर
    दिल में फिर खारापन भर जाता हैं

    जो भी हाथ लगाने की कोशिश करेगा
    मेरे अंदर का खारापन तेजाब बन उसे जला देगा

    खुद को खुद में ही समेट कर यूं महफूज कर लेती हूं
    जैसे इक कवच खारेपन का हर पल ओढ़े हुए हूं

    जिसे भेद कोई मुझ तक पहुंच नहीं सकता
    कुछ यूं अपनी तल्ख़ियों के संग जी लेती हूं

    रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 12w

    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 13w

    आहिस्ता-आहिस्ता

    मेरी कलम से ......... दिल के एहसास

    जख्म जो‌‌ मेरे बनें हैं नासूर
    हाथ लगा ‌इन्हें‌ आहिस्ता ।।

    देख इनकी गहराई
    आंख ना भरें तेरी आहिस्ता ।।

    नीले पड़े हैं जख्म मेरे
    किसी के ज़हर से आहिस्ता ।।

    दर्द के छाले अब दुखते है
    आंखों से लहू बहता है आहिस्ता ।।

    देख रबा तेरे इंसानों की फितरत
    मेरा तन मन मारा आहिस्ता ।।

    हैं जो तू उस खुदा का बन्दा
    फेर हाथ मेरे ज़ख्मों पर ज़रा आहिस्ता ।।

    दे दुआ और कर फरियाद उस रब से
    करें मन मेरा शान्त आहिस्ता ।।

    *** रेखा खन्ना ***
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 13w

    औरत

    मेरी कलम ✍️ से ......... दिल के एहसास

    कभी घुंघरूवों की आवाज़ सुनीं हैं
    हां वोही, वोही घुंघरू
    जो किसी के पैरों में बंध
    इक महफ़िल सजाते हैं
    कभी गौर से सुना है उस आवाज़ को
    हां वोही, वोही आवाज़
    जो किसी की सिसकियों को अपनी
    झंकार तले दबाते हैं।

    कभी देखा है उस बदन को
    हां वोही, वोही बदन
    जो सरे-आम महफ़िल में थिरकता है
    कभी देखा है गौर से उसे
    महफ़िल में लहराते हुए
    कहीं, कहीं शायद वो लहराते हुए
    छुपने की जगह ढूंढता है
    छुपना चाहता है बेर्शम आंखों से
    छुपना चाहता है बेर्शम वाहवाही और ठहाकों से।

    कभी देखा है उस की मुस्कुराती आंखों में
    हां वोही, वोही आंखें
    जो महफ़िल में आए हुओं का इस्तकबाल करतीं हैं
    कभी गौर से देखा हैं उन आंखों में
    छुपे बेबसी के आंसूओं को
    की आज फिर महफ़िल उसे सजानी होगी
    आज फिर खुद को मार
    दूसरों को खुश करना होगा।

    कभी देखा है मन को मरते हुए
    हां वोही, वोही मन
    जो कभी मुरझाना नहीं चाहता
    हमेशा खिलखिला कर हंसना चाहता है
    कभी गौर से देखा है
    उस मन के भीतर झांक कर
    कैसे हर खुशी, हर आस
    हर बीते पल के साथ ही दम तोड रही है
    कैसे ज़ज्बात और इक इन्तज़ार
    पल-पल उसे भीतर ही भीतर मार रहे हैं।

    वो थिरकती है तो बहुत लोग खुश हो
    अपने ग़म भूल जाते हैं
    क्या कभी कोई उसके लिए थिरका
    कि इक पल वो भी हंस लें
    और अपना ग़म भूल थोड़ा सा जी लें
    क्या कभी किसी महफ़िल में
    ऐसा कोई आएगा जो उससे कहेगा
    आज तुम महफ़िल में बैठो
    आज तुम्हारे लिए मैं घुंघरू बांधूंगा
    आज दुनिया की बेर्शम नज़रों का सामना मैं करूंगा।

    शायद ऐसा दिन कभी नहीं आएगा
    मैं भी कितनी पागल हूं
    अपने ही ख्यालों में खो कर
    देखो क्या-क्या लिख जाती हूं
    जो हो नहीं सकता उस पर ही सवाल उठाती हूं।

    रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 13w

    मौसम

    मेरी कलम ✍️ से ...... दिल के एहसास

    " कौन सा मौसम तुम्हारे नाम करूं "

    इक ऐसा मौसम नया इजाद करो
    जो कभी ख़त्म ना हो ।

    जिस में ऐसी गर्मी ना हो
    जो रिश्तों को पिघला दे ।

    जिस में कोई पतझड़ ना हो
    जो पत्तों की जगह रिश्तों को गिरा दें ।

    जिस में बारिशों की बहार तो हो
    जो पानी संग थोड़ा प्रेम भी बरसा दे ।

    जिस में ऐसी सर्दी ना हो
    जो बर्फ की जगह रिश्तों को जमां दे ।

    इक ऐसा मौसम इज़ाद करो
    जिस में प्यार और रिश्ते ,फूलों के जैसे हर पल खिलें ।

    फिर वो मौसम तुम मेरे नाम कर
    देना ।।

    *** रेखा खन्ना ***
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 14w

    खुदा की दुनिया

    ना खुदा देखा ना ही खुदा सा इंसान देखा
    जब देखा दिल में झांक कर किसी के
    *
    बस इक जाना-पहचाना फरेब ही देखा
    हैं मतलब परस्तो कि ये दुनिया
    *
    कभी चमकता था किस्मत का सितारा
    अब गर्दिशों में हर वक्त हमनें नसीब हमारा देखा
    *
    हाथ बढ़ाया जिस ओर भी कभी
    बस हाथ हमारा झटकते ही देखा
    *
    खुदा की ये दुनिया और खुदा ही नहीं मिलता
    हर जगह ढूंढ़ा पर खाली हाथ ही अपना देखा
    *
    दिल के एहसास।
    रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 14w

    इश्क

    मेरी कलम ✍️ से ...... दिल के एहसास

    इश्क का ज़हर पी कर
    तेरी जोगन ना मैं बन जाऊं

    मुझे जीने दे ज़रा तू
    तेरी सांसे मैं बन जाऊं

    हर सांस में मुझे महसूस करें तू
    हर सांस में मेरी तलब लगे तुझे

    मेरे इश्क में तू भी तड़प जा जरा
    कभी तू भी तो जोगी बन जा

    रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 14w

    तेरा ख्वाब

    मेरी कलम ✍️ से ....... दिल के एहसास

    मेरे ख्वाबों में तेरी इक खास जगह हैं
    मैं कहीं भी होऊं, तेरे आने की दस्तक मिल जाती हैं
    अक्सर अपने कमरे के दरवाजे पर
    तुम्हें खड़ा हुआ देखती हूं

    देखती हूं कैसे बिन पलकें झपकाएं मुझे देखते हो
    कभी कभी भीतर आकर पास मेरे बैठते हो
    पर ना जाने क्यूं बात नहीं करते हो
    बस प्यार से बालों में हाथ फिराते हो

    ऐसा नहीं कि बंद आंखों का सपना हैं ये
    अक्सर आधी खुली आंखों से देखती हूं
    ज्यूं ही रात के तीन बजते हैं
    मैं खुद-ब-खुद दरवाजे की ओर करवट लेती हूं

    मुस्कुराहट आ जाती हैं चेहरे पर तुम्हें देखते ही
    नींद में भी आंखें चमक उठती हैं मेरी
    जाने कैसी कशिश है जो खींचती हैं तेरी ओर मुझे
    जाने कौन से जन्म का बंधन है जो धकेलता है तेरी ओर मुझे

    रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • silver_flakes 15w

    Fiery Love

    Marry me under the tiny drops of eternal flames
    Then our love shall be forged in the burning furnace
    Our hands shall stick together like smelted gold
    Our hearts shall burn together in the fire of unison
    For through the tiny drops of eternal flames
    Forever will be but a handful of fiery coals
    ©silver_flakes

  • dil_k_ahsaas 15w

    #mirakee #writerstolli # Odysseus # hindiwriternetwork # hindinetwork #soulfulstirrings

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    बुनियाद

    बुनियाद यूं तो नहीं दिखती, अक्सर ज़मींदोज़ होती हैं
    जब धरती में हलचल होती हैं तो हिल कर अपना महत्व जरूर जताती हैं

    रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 15w

    लम्हा

    मेरी कलम ✍️ से ...... दिल के एहसास

    ना पाया , ना खोया, बस लगा कि
    इक लम्हा था जो कहीं ठहर गया
    हाथ बढ़ाती हूं पकड़ने के लिए
    लम्हा कहे मैं ठहरा नहीं बीत गया हूं
    फिर से नए रूप में आऊंगा पर हाथ नहीं लग पाऊंगा
    चाहे तो जी लेना हंस कर मुझे
    यां फिर यूं ही गंवा देना
    मैं सोच में रहतीं हूं ये कैसी विडम्बना है
    जिसे जीना चाहिए दिल खोलकर के
    वहीं लम्हा क्यूं क्षणभंगुर हैं
    किसी की जिंदगी में कुछ पल ठहरता क्यूं नहीं है
    क्या इसे भी किसी से मोहब्बत है
    जो मारा मारा फिरता है उसकी तलाश में
    फिर इक नया इंतज़ार इक नए लम्हे का
    शायद हाथ जा जाए गलती से ही सही पर आ जाए इक बार

    रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 15w

    हुस्न

    हुस्न की लौ इतनी तेज है, देखते ही आइना चटक गया
    आइने की‌ भी हिम्मत है, कुछ देर बेपनाह हुस्न को‌ बर्दाश्त कर गया

    दिल के एहसास
    रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas

  • dil_k_ahsaas 16w

    " कौन हो तुम"

    मेरी कलम ✍️ से ....... दिल के एहसास


    " कौन हो तुम "

    कौन हो तुम
    इक ख्याल या फिर इक ख्वाब

    ख्वाब भी वो
    जिसे मैं खुली आंखों से देखती हूं

    क्यों छूने से तुम्हें डरती हूं
    लेकिन गले भी लगाना चाहती हूं

    डरती हूं कि छूते ही, कहीं तितली की तरह
    ख्वाबों और ख्यालों से उड़ ना जाओ तुम

    हकीकत भी तो नहीं हो तुम
    काश कि तुम हकीकत बन जिन्दगी में शामिल हो जाते

    मेरा अधूरापन दूर कर , मुझे भी पूरा कर जाते
    चलो तुम ख्वाब तो मैं तुम्हारा सुनहरा रंग बन जाऊं

    कौन हो तुम

    इक बादल
    जो मुझ पर कभी बरसता ही नहीं

    काश इक बार बरस जाओ
    तन मन मेरा सब भीगा जाओ

    प्रेम का ऐसा रंग चढ़ा जाओ
    कि अन्तर्मन में ही बस जाओ

    क्यूं दूर दूर ही रहते हो तुम
    क्या मैं भी तुम्हारा इक ख़्वाब हूं

    जिसे छूने से तुम्हें भी ड़र लगता है
    कि कहीं मैं भी गुम ना हो जाऊं

    तो चलो क्यूं ना हकीकत बन जाएं
    और इक दूजे में समां जाए

    फिर ना कोई हमें जुदा कर पाए
    तुम बादल और मैं तुम्हारी बूंदें बन कर

    बस इक दूजे में ही खों जाएं
    बस इक दूजे के जन्मों तक हो जाए


    रेखा खन्ना
    ©dil_k_ahsaas