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�� निजेछातः करिष्यति ��

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Reposts
  • fakir_ka_beta 40w

    सदियों से जो बदनामी का बोझ ढो रही है,
    आज वो ही सबके हाथों को धो रही है...

    ©अ-मित...

  • fakir_ka_beta 61w

    शहर से बाहर जाना है जानाँ,
    अपनी ख़ुश्बू भी बांध दें ज़रा..

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  • fakir_ka_beta 61w

    आसमानों के भी ज़मींदार कर दिए हैं,
    इंसान ने ख़ुदा और भगवान कर दिए हैं.

    किरायेदारों ने देखिये ना यूँ, आज कल,
    मकां मालिक अपने परेशान कर दिए हैं.

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  • fakir_ka_beta 61w

    हँसती है शम्मा भी हालत-ए-बशर पे,
    जलने से है निस्बत उसे बस एक रात की..

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  • fakir_ka_beta 62w

    �� Donate Food If You Can.. ��

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    खाली पेट कैसे बहस करू मैं ख़ुदा,
    मेरे हिस्से में कहाँ बादाम बनता है. !

    बड़े घरों के सामने से गुजर आता हूँ,
    सुना है उनके यहाँ क़बाब बनता है. !

    किस कौम से हूँ सवाल बनता है,
    मेरा भी भूख पे इल्ज़ाम बनता है. !

    माना दुनिया झूठ के आगोश में है आजकल,
    'मित' तेरी ईमानदारी पर भी सवाल बनता है. !

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  • fakir_ka_beta 62w

    ❤️

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    मंदिर, मस्ज़िद, गिरजा से मैंने दूरी रखी हैं,
    अपनी माँ से बतिया लेता हूँ मैं दो घड़ी रोज..

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  • fakir_ka_beta 62w

    चलिए बोल ही देता हूँ फ़िर..

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    किफ़ायती हूँ मगर कड़वा भी हूँ,
    सुगर फ़्री के दौर में एक निम सा हुँ..

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  • fakir_ka_beta 62w

    अच्छा, तो आपको इश्क़ है 'मित' से,
    यानि आपको अभी, और सीखना है..

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  • fakir_ka_beta 62w

    सत्य है...

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    नमनाक आँखों से ही होंगे रुख़्सत दुनिया से,
    ख़ुद की आग का ही ख़ुद को धुआं लगेगा..

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  • fakir_ka_beta 62w

    सब ख़ताएँ तो 'अ-मित' की ही नहीं,
    जैसी सोहबत थी वैसी अक़्ल हो गई..

    सारे इल्ज़ाम तस्लीम हमनें किये,
    दरमियाँ अब कोई मसअले ही नही..

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