firdous_alam

आंखो में पवित्र जल है

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  • firdous_alam 1d

    धर्म

    धर्म इंसानियत को बनाने के लिए बनाया
    इंसानियत को ख़त्म करने के लिए नहीं



    © बाग़ ए फिरदौस

  • firdous_alam 2d

    अगर आप धर्म के आदेश पर चल नहीं सकते
    तो
    आप को धर्म का उपदेश देने का कोई हक नही


    © बाग़ ए फिरदौस

  • firdous_alam 3d

    मानवता

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    सच्चे मन से भक्ति और श्रद्धा करय
    ईश्वर अल्लाह चित्त में पाए सब कोय

    शोणित का रंग जाने अगर सब कोय
    तो धर्मवाद पर खून बहाय ना कोय

    जात पात और धर्म में कोय ना खोय
    मानवता का बीज जब हर कोय बोय

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    © बाग़ ए फिरदौस

  • firdous_alam 1w

    काल देखो

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    चारो ओर देहशत का मंज़र देखो
    देखो अा रहा सामने काल देखो
    बहादुरों के भी जज़्बे अब जा छूटे
    ना जाने इसके सामने कितने दम टूटे
    फैली जग जग में कोरोना का प्रकोप
    भयभीत हो लगाते एक दूसरे पर आरोप
    ना जाने कितने राह चलते लोगो के होश छूटे
    कितने सपने और हौसले इनके साथ टूटे
    चारो ओर देहशत का मंजर देखो
    देखो अा रहा सामने काल देखो

    कितने रिश्ते को इसने जुदा किया
    अपने अपने को इसने अलग किया
    मुस्कान की कलियों को मुर्झा दिया
    चलती हवा जलता चिराग़ बुझा दिया
    उड़ते परिंदे को कालकोठरी में बंद देखो
    ज्ञान की मंदिर मस्जिद में ताला बंद देखो
    दूर दुनियां से तबाही का गोला आते देखो
    चारो ओर देहशत का मंजर देखो
    देखो अा रहा सामने काल देखो

    काल को मिटाने को तुम लौ सा सींच उठो
    पृथ्वी को हरा करने को बारिश बनकर बरस उठो
    अपने भय को दूर कर पत्थर बन कर तन उठो
    मानवता बचाने को एहतियात बरतने को तैयार हो
    जग जग में फैली मृत्यू रूपी विष से होशियार हो
    थोड़ा सा और प्रत्यन्न कर और लड़ने को तैयार हो
    चारो ओर देहशत का मंजर देखो
    देखो अा रहा सामने काल देखो

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    © बाग़ ए फिरदौस

  • firdous_alam 1w

    एक साहित्यकार से बढ़िया समाज सुधारक कोई नहीं है
    क्योंकि समाज सुधारक साहित्य का दर्पण से ही
    बेहतर समाज का निर्माण और कल्याण करता है


    © बाग़ ए फिरदौस

  • firdous_alam 1w

    शक की निगाहें बहुत है जनाब
    खुशी इस बात की है
    कि उम्मीद अभी बरक़रार है


    © बाग़ ए फ़िरदौस

  • firdous_alam 2w

    एक कविता होली के नाम

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    जिंदगी है यूं ही एक नायाब सा
    बन गया इस जहां में किताब सा

    इन किताबों के पन्ने पर लिख दो अपना नाम
    क्या पता यारो फिर मिले ना दोबारा य शाम

    इन किताबों के पन्ने पर लिखता हूं एक उसका भी नाम
    जो छोड़ चल बसे अपने परिवारों को लौटे ना उस शाम

    उसकी शक्ले थी भोली, वो बोला करता था कभी मधुर बोली
    माथे पर लगी थी गोली, वो फूल सी जिंदगी चमन छोड़ बोली
    मेरे ह्रदय के चांद रूपी भारतवासी मुबारक हो तुमको ये होली

    गरीब अमीर का भेद भुलाकर सुनाने आ रहा हूं मैं एक पैग़ाम, विवादों और शिकवे को भुला कर पेश करता हूं अपना सलाम

    मै दूर रहूं या रहूं पास
    बनाइए यह बेला खास

    होली का है यह अनोखा दिन बनिये सभी के लिए मिशाल
    थोड़ा मेरी तरफ़ से भी लगाना यारो एक प्यार भरा गूलाल

    © फिरदौस आलम

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  • firdous_alam 3w

    बाग़ ए फ़िरदौस की तरह खिल उठते हैं वो लोग
    जिनके गुरु और शिष्य उनके मां बाप होते है


    ©firdous_alam

  • firdous_alam 3w

    रात

    रात भर ऐसे ही नहीं जागता कोई
    कोई यादों को बनाने के लिए
    तो कोई अपनी तकदीर बनाने के लिए
    कोई हवा को आंधी बनाना चाहता है
    तो कोई ख्वाबों को उड़ान देने के लिए
    कोई खोई हुई मुरादे को जगाने के लिए
    अपनी आंखो को सेकता है तभी वो जागता है

    जागने का कोई बहाना नहीं है
    सभी इस जहां में सोना चाहता है
    आराम तो सभी को पसंद हैं
    लेकिन सपनों को आग देने के लिए
    वह रातो से लड़ता है तभी वो जागता है

    किसी को कुछ करने के लिए
    तो किसी को कुछ करवाने के लिए
    कोई पेट की पुकार की सुनने के लिए
    दूसरों के घर में चुपके से झांकता है
    सुबह हर किसी का नहीं होता है
    तभी वो रात भर जागता है

    सूरज की रौशनी में तो हर कोई चमकता है
    लेकिन सूरज की रोशनी में पहचान खो देता है
    सूरज ने तो चांद और तारे को बदनाम किया है
    वो रात ही है जो उसकी रोशनी का नाम किया है
    इसी की तरह चमकता है जो रात भर जागता है

    ©firdous_alam

  • firdous_alam 3w

    ख़्वाहिंसो के दुनियां में गरीबी का एक कफ़न बन गया
    इस कफ़न में कितना सपना और हौसला दफ़न हो गया



    ©firdous_alam