gauni07

support me on Instagram@gauneev

Grid View
List View
Reposts
  • gauni07 1w

    वो महफिलों से गायब है कुछ दिन से
    डाकिया मेरे घर रोज़ आता है
    ©गौणी

  • gauni07 3w

    ये रेत के आशियाने हैं मेरे दोस्त अक्सर टूट ही जातें हैं
    पहरें लहरों पर लगाओ आंखो के आंसू तो छूट ही जाते हैं
    ©गौणी

  • gauni07 3w

    गिला नहीं है कि वो मेरे हालात नहीं पूछते
    शिकवे हजारों है कि वो अपने हाल नहीं सोचते
    ©गौणी

  • gauni07 3w

    तुमने ख्वाबों में आने से इनकार कर दिया
    इन पलकों को रीता किरदार कर दिया
    लाख सोना भी चाहूं जो मूंदकर इन्हें
    पर तेरे होने का इन्हें तलबगार कर दिया
    ©गौणी

  • gauni07 4w

    जो सोचते रहे हम, वो कभी कर ही न पाए
    जो सोचा न हो ,वो हो ही जाता है
    लिखने को तुम्हे ,कलम कान पकड़ ले आएं
    तो कमबख्त काग़ज़ खो ही जाता है
    ©गौणी

  • gauni07 4w

    रोज़

    बस शब्दों को घुमाकर
    रोज़ वही बात कहता हूं

    बस पत्तों को झुलाकर
    रोज़ वही वात बहता हूं

    बस थापों को छुपाकर
    रोज़ वही राग सुनता हूं

    बस रंगों को लुटाकर
    रोज़ वही भाग बुनता हूं

    हर रोज़ इसे बढ़ाकर
    रोज़ वही प्यार करता हूं |
    ©गौणी

  • gauni07 4w

    कितना दर्द होता होगा उस बूढ़े पेड़ को जो अपना जीव रस भर देते है एक एक फल को पकाने में और मिठास फलों के नाम को दी जाती है

  • gauni07 5w

    कविताएं मेरा दिल रखती हैं
    मुझमें है कविता का दिमाग
    मैं सोचती हूं कविता और
    वो मेरे दिल में लगाती है आग

    मैं धड़कती हूं उनमें
    वो मुझमें विचरती हैं
    मैं तड़पती हूं उनमें
    वो मुझसे निखरती हैं

    अचरज है की

    वो सुन्दर रंग चुनती हैं
    मेरा दिल है सफेद
    मुढ़मती ही रही मैं
    कविताओं को है खेद
    ©गौणी

  • gauni07 5w

    कुछ दिन से चुप हो
    कहीं मर तो नहीं गए न
    लंबी सुरंग थी यादों की
    कहीं उतर तो नहीं गए न

  • gauni07 6w

    हां मैं कमजोर हूं
    अगर अनगिनत बातें सुनाकर
    हर बार मेरी तुलना करना
    मुझे बाकियों से अलग बताना
    और हमेशा मुझे गलत ठहराना ही
    आपकी ताकत है
    तो हां मैं कमजोर हूं

    तुम्हारी इन आदतों से जब
    मेरे नयनों के मोती मेरे
    दिल की किताब में कैद
    हो जाते है
    और जब तुम पलटते हो पन्ने
    उसके तो तुम्हे यूं आंसुओ का
    खार महसूस होता है
    तो हां मैं कमजोर हूं

    जब मेरे चलते पैरों
    के तले अंगारे रख कर
    लड़खड़ाते पैरों से चलने पर
    तुम मेरा हाथ थामने आते हो
    और उन अंगारों की तपिश
    से अपने अहम को सेंक देते हो
    तो हां में कमजोर हूं

    अगर मेरे तेज को चहुओर
    से काली पुती दीवारों में
    कैद कर तुम मुझे एक
    मशाल लेकर मिलना चाहते हो
    और फिर मेरी अग्नि देहकना
    चाहते हो
    तो हां में कमजोर हूं


    अगर मेरी रूई सी सुकोमल
    काया पर तुम देना
    चाहते हो दाग
    और निर्मल श्वेत कपास
    को धूमिल करना चाहते हो
    तो हां में कमजोर हूं

    मैं कमजोर हूं
    क्यूंकि मेरे संस्कार जवाबों को
    शब्दों में देना नहीं सिखाते
    क्यूंकि मैं आज भी निश्छल हूं
    मेरे नयन नीर छलक जातें हैं
    क्यूंकि मुझे ना तुम्हारे कपट से फर्क
    है ना ही तुम्हारे इस साथ खड़े रहने
    के ढोंग से

    तो मैं कम ज़ोर हूं
    तुम सबसे और हूं