groovyangel

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I write with my experiences , what i have learnt and observed from my life. Animallover , Naturelover , FaithInGod , lovetohelp , #Lightworker

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Reposts
  • groovyangel 2d

    उलझने बढ़ रही है ,
    सुलझने का नाम ही नहीं ले रहीं ।



    - अदिति त्रिपाठी
    ©groovyangel

  • groovyangel 4d

    हरे कृष्ण

    ❤️

  • groovyangel 1w



    अश्क है कि रुकते नहीं ,
    लगता है अब तो सैलाब आएगा।
    खुद को जानने की ये इच्छा ,
    ले जाएगी मुझे अंतर ब्रह्माण्ड में।।

    - अदिति त्रिपाठी
    ©groovyangel

  • groovyangel 2w

    #prayasss2

    @reenu312

    सिर्फ एक कोशिश करी है लिखने की ☺️

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    व्यंग बाण

    ज़िन्दगी में क्या लोग है ,
    निशब्द कर दिया है मुझे ,
    जब साथ नहीं निभाना था ,
    तो मुंह पे यू सत्य के बाण छोड़ देते ,
    पीठ - पीछे "सौतन" भी बना ली ।
    मेरी ज़िन्दगी में तुमने ,
    धोके बाज़ी के रत्न कुछ ऐसे लगाए ,
    कि हम भी रत्न की सुंदरता में इतना मग्न थे ,
    सत्य सामने ही था ,
    नकली रत्नों को हम पहचान ना पाए ।


    - अदिति त्रिपाठी
    ©groovyangel

  • groovyangel 2w



    आध्यात्म उस बारिश के जैसी है ,
    जो अपने स्पर्श से सृष्टि की हर एक वस्तु को ,
    अपने ज्ञान रूपी जल से स्वच्छ कर देती है ,
    और हर उपज को एक नया जीवन प्रदान करती है ।

    यह आध्यात्मिक जल ,
    हर वृक्ष और पौधों की धूल को स्वच्छ कर देता है ।
    हर नई कली व बीज को उगने में सहायता करता है ।
    वातावरण को शुद्धता , ताज़गी , हरियाली तथा शांति से भर देता है ।

    यह आध्यात्मिक जल अपने स्पर्श से हमारी अंतर आत्मा को पवित्र कर देता है ।

    - अदिति त्रिपाठी
    ©groovyangel

  • groovyangel 2w

    Part - 4
    (Part - 1 , 2 , 3 भी पढ़िए)

    #prayasss1

    @reenu312

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    गरीबी

    गरीबी बेरोज़गारी और अत्यधिक जन - संख्या से भी बढ़ती है । इसके कई और भी कारण है जैसे जानलेवा और संक्रामक बीमारियाँ , प्राकृतिक आपदा , कम कृषि , पैदावर , जातिवाद , अशिक्षा , लैंगिक असमानता , पर्यावरणीय समस्याएं , देश में अर्थ्यवस्थाओं की बदलती प्रवृत्ति , अस्पृश्यता , लोगों का अपने अधिकारों तक कम या सीमित पहुंच , राजनीतिक हिंसा , प्रायोजित अपराध , भ्रष्टाचार , प्रोत्साहन की कमी , अकर्मण्यता , प्राचीन सामाजिक मान्यताएं , आदि जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

    गरीबी के निवारण यहीं है कि हम सभी जरूरतमंदों की मदद करें , हम उन्हें खाने के लिए राशन दे सकते हैं , कपड़े दे सकते है , दवाइयां दे सकते है , उनके लिए छत बनवा सकते हैं , स्कूल खुलवा सकते हैं जहां वे अच्छे से पढ़ सके , लोगों को रोज़गार दे सकते हैं ।


    ( नीचे दिया गया सुझाव भारत सरकार द्वारा जन हित में जारी)

    "एक समस्या गरीबी निवारण योजनाओं के कुशल क्रियान्वयन से भी जुड़ी है। मनरेगा योजना के उचित प्रयोग से संसाधनों का विकास कर गरीबी को कम किया जा सकता है। गरीबी केन्द्रित योजनाओं के क्रियान्वयन को उचित किये जाने की आवश्यकता है। इन तत्त्वों के अलावा गरीबी निवारण के लिये सामाजिक तथा आर्थिक अवसंरचना का विकास भी आवश्यक है।"

    मेरे विचारों को धैर्यपूर्वक सुनने और उन्हें पढ़ने के लिए , अपने दिल की गहराई से आप सभी को धन्यवाद देना चाहूंगी।

    - अदिति त्रिपाठी
    ©groovyangel

  • groovyangel 2w

    Part - 3
    (Part - 1 , 2 , 4 भी पढ़िए)


    #prayasss1

    @reenu312

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    गरीबी

    शायद मैं अपने विषय से भटक गई हूं , लेकिन कहीं - न - कहीं भ्रष्टाचार की वजह से ही हमारे देश की कुछ संख्या गरीब है ।

    अगर देश से काला धन निकल आता है तो बहुत सारे गरीबों की मदद हो सकती है , उनके लिए रहने का स्थान बनाया जा सकता है , उन्हें रहने के लिए छत मिल सकती है , अनाज मिल सकता है , पीने को साफ पानी और सौंचालय मिल सकता है तथा सभी को रोज़गार और बच्चों को विद्यालय भी मिल सकता है ।
    अगर अमीर लोग थोड़ा अपना सहयोग करके अपने - अपने क्षेत्र में गरीबों के सहयोग के लिए आगे आए तो बहुत कुछ संभव है । सरकार भी अपना कर्तव्य निभाने की पूरी कोशिश कर रही है , वह सब जगह तक नहीं पहुंच पा रही है , तो हम वहां तक पहुंच सकते है । याद रखिए ताली एक हाथ से नहीं बजती , दोनों हाथों को इस्तेमाल करना ही पड़ता है ।

    "एक वृक्ष भी तभी इतना स्वस्थ और अच्छे से उग पाता है जब सूर्य , जल , वायु , मिट्टी , पानी सभी उसकी बढ़ने में सहायता करते है परन्तु ऐसा नहीं है कि वृक्ष अपने खुद के प्रयासों को रोक देता है , वह भी उनके दिए गए पर्याप्त सहयोग का अच्छे से उपयोग करता है तथा एक बीज से एक विशाल फलदार वृक्ष बनने के लिए खुद के प्रयासों को कभी नहीं रोकता ।"

    - अदिति त्रिपाठी
    ©groovyangel

  • groovyangel 2w

    Part - 2
    (Part - 1 , 3 , 4 भी पढ़िए)

    #prayasss1

    @reenu312

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    गरीबी

    यहां भारत में जो अमीर है , वे अधिक अमीर बनते जा रहे है लेकिन जो गरीब है वे और गरीब होते जा रहे है । क्या है इसका कारण ?
    अमीर लोग भी गरीब ही हैं , लेकिन दिल से , अपनी सोच से ।
    हमारे देश में अमीरों की संख्या भी कम नहीं। इसमें से कुछ तो घोटाला करके धन कमाते है और कुछ भ्रष्टाचार में इतने लिप्त हैं कि काला धन कमाते ही जा रहे है और वे पकड़े भी नहीं जाते । क्या लगता है आपको की देश के लोग इतने नासमझ है कि इस घोटाले और भ्रष्टाचार के बारे में किसी को कानों - कान खबर हो ही नहीं पाएगी । और अगर खबर हो भी गई तो उसे छुपाने वाले आ जाएंगे और उस अनैतिक कार्य में शामिल हो जाएंगे , क्योंकि उसमें उनका फायदा जो हो रहा है । अगर कोई आवाज़ उठाने आएगा तो उसे मार दिया जाएगा , आखिर सबको अपने जान की परवाह है , फिर कौन आएगा आगे आवाज़ उठाने अगर ऐसे ही उन्हें मार दिया जाएगा ।
    अगर न्याय दिलाने वाले ही भ्रष्ट होंगे तो हम किसके पास जाए न्याय मांगने और गलत कार्य को रोकने के लिए । यहां इस दुनिया में आखिर क्या हो रहा है , कोई अपने कर्तव्य का पालन ईमानदारी और सच्चाई के साथ नहीं कर रहा है , सभी धीरे - धीरे कर भ्रष्ट हो रहे है । जिसमें अच्छे, सच्चे और ईमानदार लोग भी पिस रहे है ।
    अगर न्याय हो भी जाता है , तो अपराधी को कुछ साल की सजा या कुछ महीनों की , या फिर कुछ दिनों में ही वह छूट कर जेल से बाहर आ जाता है और फिर से वही अपराध दूसरों के साथ करता जाता है क्योंकि अब उसमें जुर्म करने की क्षमता और बढ़ गई है । वह जानता है , फिर अंदर जाऊंगा और दो दिन में पैसे देकर बाहर आ जाऊंगा । बताइए जिस देश में , देश के नागरिक ही गद्दारी कर रहे हों , वहां देश आगे कैसे तरक्की करेगा।



    - अदिति त्रिपाठी
    ©groovyangel

  • groovyangel 2w

    Part - 1

    (Part - 2 , 3 , 4 भी पढ़िए)

    #prayasss1

    @reenu312

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    गरीबी

    एक बार फिर से , अत्यधिक उत्तम शीर्षक - "गरीबी" , जो एक बहुत बड़ी समस्या है ।
    मैं मेरी प्यारी बहन @reenu312 जी को दिल से धन्यवाद देना चाहूंगी क्योंकि उन्होंने एक बहुत ही अनोखे और गंभीर विषय को चुना है । इस विषय पर लिखते समय मैं सभी संभावनाओं और मेरे विचारों का उल्लेख करना चाहती हूं।
    आप सब भी उनका समर्थन करें और इस लेखनी में भाग लें।

    तो गरीबी एक ऐसा शब्द है जिससे ये समझ आ जाता है कि ये शब्द ' किसी चीज़ की कमी ' को दर्शाता है । हम जिस वतन के नागरिक है , वहां हम इस चीज़ से रू - ब - रू है कि हमारे देश में परिस्थितियां बहुत हद्द तक खराब है । यहां सभी नागरिक उच्च वर्ग के नहीं और ना ही सभी मध्य वर्ग के हैं । यहां बहुत से ऐसे भी परिवार मौजूद है जिनके हालात बहुत ही ज़्यादा खराब है । वे जिस तरह से अपना हर दिन गुजारते है ये सिर्फ वही समझ सकते है ।

    कितने ही ऐसे परिवार है जो मलिन बस्तियों में रहते है , उनकी स्थितियाँ कितनी दयनीय हैं । ना तो उन्हें खाने को मिलता है , ना ही साफ पीने का पानी , ना ही सौंच के लिए कोई व्यवस्था , ना ही नहाने की कोई व्यवस्था । आप खुदको उनकी जगह रख कर देखिए , उनके पास बुनियादी आजीविका भी उपलब्ध नहीं । वे सीवर का पानी पीते है , उसी से नहा लेते है , उसी पानी से खाना भी बना लेते है ।
    वे छोटी - छोटी बस्तियों में रहते है , जहां ना तो साफ - सफाई होती है और बुरी गंध आती है , ज़रा सोचिए एक बार उनके इन हालातों को । अगर ऐसी अस्वच्छ जगहों पर वे रहेंगे तो उनके स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। कुछ परिवारों में तो छोटे - छोटे बच्चे होते है , ना उनके लिए कोई दवाई उपलब्ध होती है , और ऐसी अस्वच्छ जगह पर रह कर वह बच्चा बीमार हो सकता है । आखिर एक नन्हे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता होती ही कितनी है ।


    - अदिति त्रिपाठी
    ©groovyangel

  • groovyangel 2w

    Imaginary ✨

    Tearing the emotions of my heart through the tears.
    The blue droplets of sorrow my heart sealed with.
    That blews away the inner citadel of grief and pain.
    And takes me to the new esteemed world erected from the word ' light '.
    The spark of the star , inside my eyes looks like the lightest wishes, I had ever wished for.
    Takes my emotions to the widest range.


    -Aditi Tripathi
    ©groovyangel