Grid View
List View
Reposts
  • hemlatajain 4d

    जीत का दिप

    दिप जलाऐ
    कंदलि जगमगा
    इतना उजाला फैलाऐ

    रात कि अंधियारे में
    नई किरण
    सूरज की फूट जाऐl

    आसमां में
    टिमटिमाते तारे सितारे
    घोर अंधियारे में
    साथ दे रहे

    आओ सब मिल
    के दीप जलाऐ।
    सब एक समय में
    उजियारा फैलाऐ

    वायरस यूँ ही
    खाख हो जाएगा
    समय साथ दे गया
    तो बुरेवक्त से जीत लेगे

    इस रोशन उजियारे में
    मिट जाऐ रोग व्याधि
    नो दिप नो बजे
    एक विशवास का

    दिपक जलाऐ
    चहूओर मची
    त्राहि, आफत में
    आत्मशक्ति का
    एक सो तिस करोड़
    दिप पृवजलित करें
    ⭐☀☀☀
    ©hemlatajain

  • hemlatajain 1w

    कहर

    पल ठहर सा गया वक्त रूक गया
    सडक सुन हो गई
    शहर के शहर विरान पडे।
    चारों ओर सन्नटा पसरा है चहूओर।
    घर घर दुआ हो रही मंदिरों में ताले पडे
    कैद हुआ इंसान चारदीवारी में
    बेबस हैं छोटे बड़े संगठन
    कुछ न कर पाते विश्व आर्गनाइज़ेशन
    काल गाल में समा गया।

    सब जन अग्नि पथ पर चल रहे
    खामोशी देख के वसुंधरा सेहम गईं
    न अणु न परमाणु है
    तीसरे विश्व युद्ध से कम नहीं।
    अग्नि परीक्षा से सीता गुजरी थी
    इस घड़ी हमें हर हाल में गुजरना है।

    चल रहे नवरात्रि कृपा करो देवी
    उपकार करो जन जन पुकार रहा
    है सुर्य देव सेहमी धरा पे ऐसी किरण भेजो
    कोरोना भस्म हो जाऐ इस धरा पे
    फिर से खिल उठे वसुंधरा चहके इंसा
    ©hemlatajain

  • hemlatajain 3w

    Go korona go

    कोरोना से डरना क्या
    वायरस से नहीं हार मानेंगे
    हम सबको
    मिलकर डट लडना है
    संग्राम हरहाल में जितना है
    बरतेंगे हर ऐतिआत
    इंतहान की घड़ी है
    यूँ निकल जाएगी
    समय से झूंझ कर
    आगे निकलगे
    जिंदगी है संघर्ष,
    कोरोना को समुल नष्ट करेगेँ


    चाऊमिन बर्गर
    नूडल्सपेकिंग
    खाने की
    कोल्डडिंकस
    अनहर्जनिक चिजोंका
    विदेशी शेली का बहिष्कार करेंगे

    ये छोटी छोटी आंख वाले
    हमें नहीं डरा सकेंगे
    जैविक हथियार बनाके
    नहीं झुका सकेंगे
    पुख्ता इंतजाम
    कर रखा है हमने
    जिवो से
    प्यार करने वाले हम

    हम भारतीय संस्कृति
    विश्व को सिख लाएगें
    रोटी सब्जी दूध मखखन
    नटस फुटस गरम पानी
    घी कडकधानय
    पालक है भोजन हमारा
    देशी खाना
    ताजा ताजा भोजन खाऐगे
    नीम करेला
    गिलोय तुलसी अदरक निंबु
    लांग कारिमिरि हल्दी
    केंसर किचन आयुर्वेद अपनाएगे
    जिवों की रक्षा कर
    धरती माँ को बचा लगें
    बासी खाना
    ओर मासांहार त्याग कर
    विश्व को शाकाहारी
    भोजन खिलाना सिखलागे
    विश्व धरोहर है
    ,विश्व गुरु हिंदुस्तान है हमारा।

    घबराने की जरूरत नही
    हिम्मत वाले हम
    दिनचर्या की
    नियमावली बना ले
    योग अपना ले
    मेडिसिन
    रूट निंग चेंकप ऐतिहासिक बरते
    दिनरात लगे है
    वैंक्सिशन की तलाश में
    हमारे भगवान
    पलक झपकते ही खोज लेगें।
    Don't worry
    ©hemlatajain

  • hemlatajain 3w

    संस्कृति

    भोर स्नान ओम से
    सुर्य नमस्कार
    की दिनचर्या
    नतमस्तक से करे प्रणाम
    हो उर्जा का संचार।
    दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम
    योग करे निरोगी
    प्रकृति साधना पूरित हो के
    बने जिव परोपकारी।
    अनमोल संस्कारो की
    संस्कृति क्रिया में विधि।
    उतरे पादुका बहार
    ,हाथपांव शुध्दी से गृह प्रवेश
    दिप धूप लोबान अगरबत्ती
    कपूर करे दुष्परिणाम का विनाश।
    भोजन में संस्कार
    आहार थाल के चारों ओर जल छिडकाव
    पेयजल से करे धरती को अर्पण।
    सात्विक भोजन करे
    अभक्ष्य भोजन का त्याग
    नियति के रक्षण न की भक्षण।
    जिवों से प्यार दुलार
    करे निर्मल भाव।
    कडे कानून की दिनचर्या
    देख बिन बोले जिवों पे
    न करो प्रहार
    दया करूणा कर उपकार
    पुकार रहा बिन बोला जीव
    दे दो जीवन दान जीवन दान.....?
    ©hemlatajain

  • hemlatajain 3w

    वक्त की आंधी चलती है, झोपड़े उजड़ ही जाते
    वक्त की रफ़्तार में कदम कम पड़ जाते हैं
    जरूरत से ज्यादा भागना पडाना पडता है
    सिकुड़ने से अच्छा है चद्दर बड़ी कर ले।
    ©hemlatajain

  • hemlatajain 3w

    दो डगर की राह
    राह में मिले फूल कांटे
    फूलों को सहेजने के लिए कांटों का जरूरी है
    कटिली राहों में अनेक मोड़
    चितंन मनन का रहे सफर
    मूडती राहे निर्णायक बने।
    ©hemlatajain

  • hemlatajain 3w

    कुदरत ने दिया संसार ने छिना
    है सृष्टि सर्जन, आज के युग में
    असतित्व खोजती हरेक एक कदम पे मिटना ही पड़ताहै।
    ©hemlatajain

  • hemlatajain 3w

    चारों ओर उडने की खबर है
    आसमां में अकेला ही था
    कोई अडचने नहीं खुला आसमां
    टकी लगाऐ दुनिया चर्चा मेरी थी
    कदमों में बुलंदी सर पे आसमां
    जिसको पता था उसे खबर नही कि
    सफर बस तंहा का तंहा रहा मेरा।
    ©hemlatajain

  • hemlatajain 4w

    अस्तित्व

    नहीं कमजोर तू अपनी शक्ति पहचान
    तन मन कोमल अपने कर्म आसक्त
    आंगन द्वार् संभाले हुए है उषा चावला।
    बहती गंगा, गीता पावन पुनिता
    पौरूष गौरव तोडती तू सृष्टि का सर्जन
    कोख में पलता आंचल में खेलता नर।
    पहचान शक्ति नारी तू वंसुधरा
    देवी स्वरूप ज्ञान दायनी
    है पुरुष का हौसला
    सिने में सपने, उडान भरे नभ में
    सरल सहज सहिष्णुता की मूरत
    तू लिख कलम से नारी पुर्ण असतित्व।
    ©hemlatajain

  • hemlatajain 7w

    आज फिर से चांद निकला
    डरा सा, थोड़ा सेहमा।
    दागील था, इसलिए बादलों में
    जा छिपा मिला।
    छुपा रहा गलतीयां
    फिर भी आस है...
    महक रही रूसवाई
    सोये जज्बात खिल रहे
    एक आंख में पानी
    एक आखं में खुशी
    है चांदनी प्यासी की प्यासी?
    ©hemlatajain