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  • himalayan_pride 4w

    ज्ञान


    ब्याह क्या है?
    ब्याह तो आत्मसमर्पण है!

    "अगर ब्याह आत्मसमर्पण है, तो प्रेम क्या है?'
    प्रेम जब आत्मसमर्पण का रूप लेता है,तभी ब्याह है, उसके पहले ऐयाशी है।"

  • himalayan_pride 5w

    तेरी साँसों की थकान, तेरी निगाहों का सुकूत
    दर-हक़ीक़त कोई रंगीन शरारत ही न हो
    मैं जिसे प्यार का अंदाज़ समझ बैठा हूँ
    वो तबस्सुम, वो तकल्लुम, तेरी आदत ही न हो

  • himalayan_pride 5w

    जिंदगी के सफ़र में बहुत दूर तक, जब कोई दोस्त आया न हमको नज़र |

    हमने घबरा के तन्हाइयो से ऐ “सबा”, इक दुश्मन को खुद हमसफ़र कर लिया ||

  • himalayan_pride 5w

    जुर्म के तसव्वुर में ग़र ये खत लिखे तुमने
    फिर तो मेरी राय में जुर्म ही किये तुमने
    जुर्म ही क्यों किये जायें
    खत ही क्यों लिखे जाएँ

  • himalayan_pride 5w

    क्या तुम्हें देखकर आते यों, मतवाली कोयल बोली थी,
    उस नीरवता में अलसाई कलियों ने आँखे खोली थीं//*

    क्या वसुधा के आंचल पर, तुम कनक ओढ़नी सी छाईं,
    उस अभिनव स्वर्णाभ शिखर पर बालारूण की परछाईं//*

    क्या नील गगन ने मोहित होकर, ताका था तुम्हारे नयनों को,
    उसके विस्तारित भावों ने चूमा था तुम्हारी पलकों को//*

    क्या तुम यौवन श्रृंगार समेटे, चाँद तले फ़िर जाओगी,
    उसके नभ-सिंहासन को तुम, प्रेम द्वार पर लाओगी //*

    ©himalayan_pride

  • himalayan_pride 5w

    राह संघर्ष की जो चलता है
    वही संसार को बदलता है
    जिसने रातों से जीती है जंग
    सुबह सूरज बन के वो ही चमकता है


    ©himalayan_pride

  • himalayan_pride 5w

    दिल का था एक मुद्ददा , जिसने तबाह कर दिया
    दिल में थी एक ही तो बात, वह जो फ़क़त सही गयी

    तुम ने बहुत शराब पी, उसका सभी को दुःख है जॉन
    और जो दुःख है वह यह है, तुम को शराब पी गयी

  • himalayan_pride 5w

    अनुभूतियाँ जो दफ़न हो गईं
    पुराने खण्डरों के बीच
    मेरी चाहतों के बिखरते निशानोंको
    पुराने किलों की महफिलों में
    इतिहास की गोद में
    चाँद के टुकुड़े को अपनी ओढ़नी में समेटे
    बैठी मेरी पुरातन प्रेमिका के
    कोमल हृदय में तुम ढूंढ लेना

    क्रांतियां जो अमर हो गईं
    उनके साये बीच पला,
    मेरा प्रेम जो कविकल्पित था
    मेघदूत के यक्ष सरीखा
    बिखर गया
    भागीरथी की गाद में
    शिलाओं की नसों से बहते हुए
    रक्त की सोंधी-सोंधी ख़ुशबू को
    अपने बदन को सौंपने वाली
    रात्रि की आभा जैसी
    मेरी उस सिंध वाली सभ्यता सी प्रेमिका से
    पूछ लेना


    ,अग्निमित्र
    ,मालविका के लिए ❤️

    ©himalayan_pride

  • himalayan_pride 8w

    There is a divinity that shapes our ends,
    Rough-hew them how we will.

  • himalayan_pride 8w

    Lol...I am laughing madly on my stupidity..
    Dearest people read rate suggest..
    I feel more comfortable in hindi ��❤️


    @vindhya_princess @love_whispererr @jigna___ @shellys @writersnetwork

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    So let's start.

    Cream coffee
    Is all she wanted at
    The night,having spatial
    Fragrance of mountain like climate
    Only those pine tree leaves could feel
    That in time of winter solstice;
    Coffee sometimes get mixed in pain!

    Coffee,
    Love!
    Memories of a soldier,
    The bravery at a regiment,
    Her Mr was love of Kumau *hills*
    At times when hills feel the blood
    And soul playing on mouth organ
    "In a backlane of the city;
    There is a gul who luvz me"
    In time of love;
    Coffee attains it's own emotions?

    Imagine oh darling,
    Ms indiana;
    Dawn is not waiting for the
    Triangle of trinity what you feel
    Will be there to heal you...
    "I" caption of the regiment
    Will chase you when you will be,
    Doing special service in chappel
    Or enjoying at favourite "meedoze"
    I will be checking your night-notes
    When you will be writing
    "Blessed are the meek; and i love stars"


    ©himalayan_pride