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  • hindiwriters 2w

    कर्ण का परिताप

    तुम प्रपंचों में समय अपना खपाना
    मैं समर के हर नियम को मान दूँगा
    तुम बदलकर वेश मुझसे मांग लेना
    मैं कवच-कुण्डल ख़ुशी से दान दूँगा

    हाथ की सारी लकीरें हैं विरोधी
    अब भला कुछ झोलियों का रीतना क्या
    न्याय से या सत्य से सम्भव नहीं जो
    झूठ कहकर उस समर को जीतना क्या
    तुम निहत्थे वीर पर पौरुष दिखाना
    मैं किसी अभिशाप को सम्मान दूँगा

    धर्म के हाथों तिरस्कृत ही रहा हूँ
    पाप का आभार ले-लेकर जिया मैं
    दंश बिच्छू का सहा तो ये मिला फल
    शाप का उपहार ले-लेकर जिया मैं
    तुम धनुष के ज्ञान पर ऊर्जा लगाना
    मैं बस अपने जाति-कुल पर ध्यान दूँगा

    द्रोण, कुंती, कृष्ण, पांचाली, पितामह
    मैं सभी के द्वार से लौटा अभागा
    आज मेरे संग तुम्हारा युद्ध तय है
    आज पहली बार मेरा भाग्य जागा
    जो मुझे कुछ भी न दे पाए जनम भर
    मैं उन्हीं की इक ख़ुशी पर प्राण दूँगा

    © चिराग़ जैन

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    कर्ण का परिताप

    तुम प्रपंचों में समय अपना खपाना
    मैं समर के हर नियम को मान दूँगा
    तुम बदलकर वेश मुझसे मांग लेना
    मैं कवच-कुण्डल ख़ुशी से दान दूँगा

    हाथ की सारी लकीरें हैं विरोधी
    अब भला कुछ झोलियों का रीतना क्या
    न्याय से या सत्य से सम्भव नहीं जो
    झूठ कहकर उस समर को जीतना क्या
    तुम निहत्थे वीर पर पौरुष दिखाना
    मैं किसी अभिशाप को सम्मान दूँगा


    © चिराग़ जैन

  • hindiwriters 8w

    ज़िन्दगी, इतने भी सवाल न कर
    मैं आदमी हूं, इ.वी.एम तो नहीं !

    - ध्रुव गुप्त

  • hindiwriters 11w

    मैं चाहती हूँ तुमसे
    सीख लूँ
    खूबसूरत से मांडने मांडना
    देवी के पगलिए और चौक बनाना
    वो दिवासा
    जो गेरू से बनाती थी दीवार पर

    मैं चाहती हूँ तुमसे
    सीख लूँ
    वो दंतकथाए
    सीख लूँ
    वो दंतकथाएँ
    जो अवसर के अनुसार
    तुम सुना दिया करती थी
    मैं बहुत कुछ चाहती हूँ सीखना
    वो धैर्यता, तल्लीनता, सुगढ़ता...
    मगर
    अब बहुत देर हो चुकी है
    तुम
    चलती फिरती
    इनसाइक्लोपीडिया थी
    हमने पढ़ाई की/ नई तरीके की पढ़ाई की
    और इसी अहंकार में हमने तुम्हें पढ़ा नहीं
    अब
    बिदाई की बेला में
    तुम्हारी तैयारी
    मैं देख रही हूँ
    समेटकर ले जा रही हो
    वो फूलकारी/ मांडना
    लोकगीत/ भजन
    और
    ले जा रही हो अपने साथ भारतीयता!!!

    #hindiwriters

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    मैं चाहती हूँ ....

    मैं चाहती हूँ तुमसे
    सीख लूँ
    कश्मीरी और फूलकारी कढ़ई करना
    साङी/ दुपट्टे पर रंग बिरंगे धागों से
    रच दूँ फूल पत्ती,
    चिङिया,
    पनिहारिन और संपूर्ण प्रकृति

    मैं चाहती हूँ तुमसे
    सीख लूँ
    सुंदर सुंदर से लोकगीत
    जो तुम अलग अलग अवसरों पर गाती थी
    उकेङी* पूजन पर भी
    तुम्हारा वो गीत
    कचरे/ गंदगी में भी
    ईश्वरीय अनुभूति करा जाता था


    © वन्दना दवे भोपाल

    उकेङी_ कचरे का ढेर

  • hindiwriters 11w

    विधवाएँ टूटी हुई बाल्टियाँ हैं
    जिसमें सगुन का जल नहीं भरा जाता।
    विधवा हुई माएँ बेटियों के ब्याह में
    अपने आंचल से उनका सिर नहीं ढकतीं
    बस हारी आँखों से उन्हें निहारती रहती हैं।
    मन ही मन क्षमा माँग लेती हैं माएँ
    विदा होती बेटियों से
    और न जाने किन जंगलों में खो जाती हैं।



    ©Anupam Singh

  • hindiwriters 16w

    #HappyHoli

    मेंशन योर फेवरेट होली मोमेंट्स in कमेंट सेक्सन

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    होली मुबारक!

  • hindiwriters 19w

    लिखिए अपनी रचना निम्नलिखित शिर्षक पर और टैग किजिए #HwBarabar #Hindiwriters

    अगर रचना में चार से ज्यादा पंक्तियाँ हो तो उसे caption में रखें।

    धन्यवाद
    @reetey

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    'बराबर' की बातें...

  • hindiwriters 20w

    तोड़ती पत्थर

    वह तोड़ती पत्थर;
    देखा मैंने उसे इलाहाबाद के पथ पर-
    वह तोड़ती पत्थर।

    कोई न छायादार
    पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार;
    श्याम तन, भर बंधा यौवन,
    नत नयन, प्रिय-कर्म-रत मन,
    गुरु हथौड़ा हाथ,
    करती बार-बार प्रहार:-
    सामने तरु-मालिका अट्टालिका, प्राकार।

    चढ़ रही थी धूप;
    गर्मियों के दिन, 
    दिवा का तमतमाता रूप;
    उठी झुलसाती हुई लू
    रुई ज्यों जलती हुई भू,
    गर्द चिनगीं छा गई,
    प्रायः हुई दुपहर :-
    वह तोड़ती पत्थर।

    देखते देखा मुझे तो एक बार
    उस भवन की ओर देखा, छिन्नतार;
    देखकर कोई नहीं,
    देखा मुझे उस दृष्टि से
    जो मार खा रोई नहीं,
    सजा सहज सितार,
    सुनी मैंने वह नहीं जो थी सुनी झंकार।

    एक क्षण के बाद वह काँपी सुघर,
    ढुलक माथे से गिरे सीकर,
    लीन होते कर्म में फिर ज्यों कहा-
    "मैं तोड़ती पत्थर।"

    - सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

    #जन्मदिवस_विशेष

  • hindiwriters 20w

    अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की शुभकामनाएं!



    Let's see the diversity! Do comment in your mother tongue.

  • hindiwriters 21w

    बाधाएं आती हैं आएं
    घिरें प्रलय की घोर घटाएं,
    पावों के नीचे अंगारे,
    सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,
    निज हाथों में हंसते-हंसते,
    आग लगाकर जलना होगा।
    कदम मिलाकर चलना होगा।

    हास्य-रूदन में, तूफानों में,
    अगर असंख्यक बलिदानों में,
    उद्यानों में, वीरानों में,
    अपमानों में, सम्मानों में,
    उन्नत मस्तक, उभरा सीना,
    पीड़ाओं में पलना होगा।
    कदम मिलाकर चलना होगा।

    उजियारे में, अंधकार में,
    कल कछार में, बीच धार में,
    घोर घृणा में, पूत प्यार में,
    क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
    जीवन के शत-शत आकर्षक,
    अरमानों को ढलना होगा।
    कदम मिलाकर चलना होगा।

    #अटलकविता #AtalKavita

  • hindiwriters 21w

    मिराकी पर शांति बनाए रखने के लिए सुझाव:

    1) आपको जिस से भी आपत्ति है उसे नि: संकोच ब्लॉक कर दें।
    2) अच्छा लिखने एवं अच्छा पढ़ने के लिये स्वयं को प्रेरित करें।
    3) अनावश्यक सलाह देने/लेने से बचें।
    4) किसी भी महिला/पुरुष लेखक के प्रति सम्मान ना रख सकें तो मौन रहें परन्तु किसी को अपमानित ना करें।
    5) आपके हर व्यवहार को यहाँ सैकड़ों लोग चुपचाप देखते हैं इसलिये विनम्र रहने की अधिकाधिक कोशिश करें।
    6) इस स्थान की पवित्रता बनाए रखने में मदद करें और इसे राजनीतिक बहस का अड्डा ना बनने दें।
    7) यदि आपके पास अधिक समय है तो समाज एवं देश के उत्थान के बारे में सोचें और यथासंभव प्रयास करें। पूरा दिन सास-बहू की तरह चुगलखोरी में मिराकी पर बर्बाद ना करें।
    8) यदि आप दूसरों के मामलों में घुसने की आदत से मजबूर हैं तब कृपया अपनी ID ही डिलीट कर दें। आपकी शहादत मिराकी पर निसंदेह शांति लाएगी।