humanrathore

ek Shayar Ek human..insta- @human_ki_kalam

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  • humanrathore 5d

    सुनो

    जम जाने के बाद पिघलना कैसा लगता है?”


    @human_ki_kalam

  • humanrathore 5w

    सुनो

    तुम्हारी आँखें उस रूठी रात सी हैं जिसे मनाने सुबह भी आती है शाम भी...
    मगर वो चाँद तलाश रही है पानी में...


    @human_ki_kalam

  • humanrathore 5w

    एक सुबह ऐसी भी

    वो सुबह कुछ शांत सी थी, एक कहानी को बदलने वाली थी!
    वो सुबह कुछ नाराज़ सी थी, कुछ अल्फ़ाज़ों का दम घुटने वाला था!
    वो सुबह काली थी, लाली भी ग़ायब सी थी उसकी!
    वो सुबह हर रोज़ वाली सुबह नहीं थी, उसमें गलियाँ गुम थी जवाबों की!
    वो सुबह की खोज भी रात के अन्धकारों से घिरी थी, उसमें सच टटोलना मुश्किल था!
    जब मैं खड़ा था उजाले के इंतेज़ार में ,मुझे जगा क्यू गई थी वो सुबह,
    मैंने तो नहीं माँगी थी !

    @human_ki_kalam

  • humanrathore 5w

    सुनो

    तुम और मैं उस सड़क पर हैं जहाँ बात मंज़िल की नहीं सफ़र की है


    @human_ki_kalam

  • humanrathore 6w

    सुनो

    वो लिबाज़ जो शाम ने पहना था रात होने से पहले... मैं वो शाम देखता हूँ तुम में”


    @human_ki_kalam

  • humanrathore 12w

    सुनो

    जब कभी टटोले जाने पर सवाल खड़ा करने लगो तो समझ जाना तुम अब ख़राब हो चुके हो...
    वैसा ख़राब जिसकी नियत में कचरा है और अहम में “मैं” का वहम...


    @human_ki_kalam

  • humanrathore 12w

    सुनो

    काश टूटे दिल के लिए भी कोई वैक्सिनेशन बन पाती!


    @human_ki_kalam

  • humanrathore 14w

    सुनो

    आज सोचा के एक नज़्म लिख दूँ,
    अपने अक्स का वो वहम फ़िर से कह दूँ,,
    जब लिखने लगा तो तेरी नसीहत याद आई,,
    कि मुझे याद कर लिख मत देना,
    कहीं सारी वो जज़्बातों की स्याही ही ना ख़त्म कर बैठो।।।


    @human_ki_kalam

  • humanrathore 14w

    सुनो

    तेरी आँखों में वो नूर है
    जिसे देख कर कोहिनूर भी जलता होगा,,



    @human_ki_kalam

  • humanrathore 23w

    सुनो

    तुम मुझे उस धुँध सी लगी...
    जिसकी खामोशियाँ गुदगुदी दे जाती हैं!


    @human_ki_kalam