in_my_heart

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    खुद से खफा करा कर ही माने...
    तुम हमें तुम बना कर ही माने...
    ©in_my_heart

  • in_my_heart 3d

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    Part-2

    ����यहां से मेरी हवाई यात्रा पढ़ना शुरू करें...������

    अपनी हवाई यात्रा संपन्न करने के बाद मैं उदास चेहरा लेकर घर वापस आ ही रही थी तभी अक्षत फिर से मेरे सामने आ गया। उसे ऐसे देखकर एक बार को मुझे लगा, कि कहीं उसे ये सब पता तो नहीं चल गया फिर मैंने सोचा ये तो वहां था ही नहीं, इसे कैसे पता होगा,क्या हुआ क्या नहीं। इसलिए मैंने अपने चेहरे का नक्शा सुधारा और मुस्कुराते हुए आगे बढ़ने लगी। तभी अक्षत ने मुझे रोकते हुए बोला।

    अक्षत:- मैंने सुना है तू हवाओं से बातें करने के बहाने बुढ़िया अम्मा से वार्तालाप करने गई थी।

    आयत:- क्या...? क्या बोल रहा हैं। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।

    अक्षत:- अरे अरे अब समझ आएगा भी क्यूं, फिर भी कोई बात नहीं मैं तुझे सब समझा दूंगा।

    आयत:- क्या समझा देगा अब भोंक भी ले।��

    अक्षत:- यहीं की तू हवाई जहाज भी उड़ाने लगी है, और उसकी लैंडिंग तू अम्मा की खाट पर करती हैं (ज़ोर से ठहाका लगाकर हंसते हुए)।

    पहले मैंने सोचा इसे कैसे पता चल गया सब... ��फिर मुझे याद आया पड़ोसी नाम की भी कोई चीज़ होती हैं��इसलिए मैं बिना कुछ कहे वहां से चली गई । क्यूंकि इस समय चुप रहना ही मेरे लिए बेहतर था।��

    अगली सुबह फिर मैं हवाई यात्रा के लिए निकली। पर आज मैंने सोच लिया था कि अम्मा की दुकान वाले रास्ते पर नहीं जाऊंगी। मैं अलग रास्ते पर ही साइकल चला कर वापस आ जाउंगी। और मैंने ऐसा किया भी। पर ये क्या अचानक मेरे दिमाग़ की बत्ती जली�� और उसमे खयाल आया अगर मुझे अच्छे से साईकल चलानी हैं तो मुझे सभी रास्तों पर साईकल चलानी आनी चाहिए। मन में सोचते हुए (��मान ले आयत अगर तुझे कहीं जाना हो और वहां भी ऐसा ही ढलान वाला रास्ता हो, तो क्या वहां भी तू गिर के ही ब्रेक लगाएगी... और वहां तो अम्मा की दुकान भी नहीं होगी साइकल रोकने के लिये)। बस फिर क्या था मैंने अपना हवाई जहाज अम्मा की दुकान की ओर मोड़ दिया।

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    हवाई यात्रा ✈️

    मैं आगे बढ़ रही थी।आज अम्मा भी दुकान पर बाहर ही बैठी थी ।मैंने मन में सोचा आज अम्मा की दुकान से चीज़ भी खरीद लूंगी अम्मा ख़ुश हो जाएगी और कल की बात भी भूल जाएगी। मैं ये सोचते हुए आगे बढ़ ही रही थी की फिर वही ढलान आयी और मेरे दिल की धड़कने बढ़ गई।मैंने डरते-डरते साइकल आगे बढ़ा दी पर फिर वही अरे अरे रुक जा... नहीं-नहीं....मम्मी...धड़ाम....अब की बार साइकल खाट में नहीं अम्मा की कुर्सी से जा भिड़ी जिस पर वो बैठी थी। और अम्मा आधी बैठी और आधी लेट गई।

    मेरे साथ वही हुआ। मैं फिर से गिरते गिरते बच गई। पर अम्मा...

    अम्मा:- छोरी आज तो तूने मुझे मार डाला... अरी कौन से जन्म का बदला लेने आई है मुझसे । रोज़ ये हवाई जहाज मेरी छाती पर लाकर दौड़ाती हैं। (मेरा हाथ पकड़ते हुए गुस्से में बोली)चल अब तू आज तो तेरी दादी से तेरी शिकायत करूंगी। तेरा रोज का काम हो गया है कल तो मेरा सामान गिराया था आज मुझे ही गिरा डाला ।

    मैं:- अम्मा माफ़ कर दो। मैंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया गलती से हो गया। फिर से ऐसा नहीं करूंगी। (रोते हुए)

    अम्मा:- चुप कर । कल भी तू यही बोल कर बच गई थी। आज मैं तेरे इन टसूओ से नहीं पिघलने वाली। (मुझे खीचते हुए ले जाने लगी)।

    मैं:- अम्मा माफ़ कर दो। (पर अम्मा तो जैसे कुछ सुनना ही नहीं चाहतीं थी)तभी मेरे दिमाग़ की बत्ती जली और उसमे जो आया मैंने बोल दिया। अम्मा ये सब करने को अक्षत ने कहा था। उसी ने बोला था ऐसा कर।

    अम्मा:- ये छोरा कौन है। और ऐसा क्यों बोला उसने।

    मैं:- अम्मा उसी ने बोला था तुझे अच्छे से साईकल सीखनी हैं तो इस रास्ते पर ही प्रैक्टिस किया कर। मैंने उससे बोला भी कि मैं यहां गिर जाती हूं। साइकल नहीं रोक पाती तो उसने कहा कोई बात नहीं अम्मा की खाट के पाय में साईकल अडा कर रोक लिया कर। मैंने उससे बोला कि अम्मा की खाट टूट जाएगी तो उसने कहा कि नहीं टूटेगी बोहोत मज़बूत खाट हैं उस बुढ़िया की।(मासूम चेहरा बनाते हुए)ऐसे ऐसे बोल रहा था वो

    मेरी साज़िश कामयाब होती हैं या नहीं इसके लिए आपको आगे कहानी पढ़नी होगी

  • in_my_heart 4d

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    ����यहां से मेरी हवाई यात्रा पढ़ना शुरू करें...������

    ये कहानी मेरे बचपन की है...�� उस वक्त की जब मुझे साइकल चलाने का भूत सवार हुआ था। और इस साइकल ने एक इन्सान..... अरे नहीं नहीं... दो इन्सानों का जीना हराम कर दिया था....!

    बचपन से मेरा बस एक ही दोस्त था। �� अक्षत ❤️
    प्यारा सा ... न्यारा सा... सांवला... सलोना...थोड़ा सा शर्मीला भी था। और उसकी सबसे खास बात मेरे लिए ये थी, कि आज तक वो मुझसे कभी गुस्सा नहीं हुआ।कभी सोचती हूं तो ये बात तो बोहोत अजीब लगती हैं... ऐसे कैसे हो सकता हैं कोई इन्सान कभी किसी से गुस्सा ना हो। पर वो तो ऐसा ही था।।����

    उस पर हक मैं ऐसे जताती थी... जैसे मैं उसे खरीद कर लाई हूं। ये मैं नहीं कह रही बाकी सब कहते थे...��
    मुझे साइकल सीखनी थी... और आप सब समझ ही गए होंगे मुझे साइकल सिखाने का ज़िम्मा किसने लिया...��

    उस टाइम मुझे साइकल का इतना भूत सवार था कि मैंने उसका खाना... पीना... सोना... सब हराम कर दिया था।बस जब मन करता था खींच लाती थी उसे उसके घर से और मजे की बात ये हैं आंटी भी कुछ नहीं कहती थी। बस यहीं कहती थी,अक्षत जा आयत आयी हैं तुझे बुलाने जा अपनी ड्यूटी पर ।खाना तो तू बाद में भी खा सकता हैं... पहले उसे साइकल सिखा...�� और हम निकल पड़ते थे साइकल चलाने ... मैं साइकल चलाया करती थी और अक्षत मुझे और मेरी साइकल को संभाला करता था।

    अक्षत ने अपनी ज़िम्मेदारी पूरी मेहनत और ईमानदारी से निभाई। इतनी ईमानदारी के साथ कि हमारा ट्यूशन हमारे घर से चार घर छोड़कर था, पर वहां भी हम दोनों साइकल से जाते थे। हां ये बात अक्षत को अच्छी नहीं लगती थी। पर वो बेचारा मेरे आगे लाचार था...! उस समय अक्षत साइकल गुरु के नाम से प्रसिद्ध हुआ था। और ये तो होना ही था। क्योंकि उसकी शिष्या मैं जो थी

    अक्षत की खून पसीने की मेहनत की बदौलत मैंने तीन दिनों में ही साइकल चलाना सीख लिया। अब मैं साइकल चलाना अच्छे से सीख गई थी।मेरी ख्वाहिश पूरी हो गई थी��और अब बारी थी हवाओं से बातें करने की। और कांड करने की।��

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    हवाई यात्रा✈️

    अगली सुबह मैं उठी और जल्दी से तैयार होकर अपनी साइकल की तरफ़ दौड़ी। जैसे ही मैं आगे बढ़ी सामने अक्षत खड़ा था।

    अक्षत:-आज तू मुझे बिना बुलाए ही जा रही थी। चल कोई बात नहीं मैं खुद ही आ गया।

    आयत:- अबे क्या कर रहा है हट आगे से और मुझे जाने दे... अब मैं साइकल चलाना सीख गई हूं। मैं खुद संभाल लूंगी तू जा अपना काम कर। और वैसे भी आज मैं अकेले साइकल चलाऊंगी।आज मुझे हवा से बातें करनी हैं (और ये कहते हुए मैं आगे निकल गई।)

    मैं मुस्कुराते हुए... इतराते हुए ...लहराते हुए... आगे बढ़ ही रही थी कि अचानक से एक ढलान आई जिस पर मेरी साइकल उतरते वक्त... अरे... अरे... नहीं ...नहीं...........धड़ाम

    आवाज़ सुनकर एक बुढ़िया बाहर आई। जो ताड़ जैसी लंबी और बांस जैसी पतली थी। देखने में वो मुझे अमिताभ बच्चन की बहन जैसी लगी दरअसल वो ढलान खत्म होते ही एक घर था जहां बाहर ही एक खाट बिछी हुई थी। और उस खाट पर वो अम्मा अपनी छोटी सी दुकान लगाया करती थी।बच्चो के खाने वाली चीज़ की...

    और आप सब ये सोच रहे होगे की मैं वहां गिर गई। तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं हैं। मैं वहां गिरते-गिरते बच गई पर मेरी साइकल अम्मा की दुकान से जा भिड़ी... और उनका कुछ सामान ज़मीन पर गिर गया।☹️

    अम्मा:- ए छोरी ये क्या किया तूने...
    मैं :- अम्मा वो..... म.. म.. मैं...

    अम्मा:- अरी क्या मैं- मैं कर रही हैं... अरे ये हवाई जहाज उड़ाने के लिए यही जगह मिली थी तुझे...
    ये हवाई जहाज मेरी दुकान पर चढ़ा डाला तूने... सारा सामान गिरा दिया मेरा... इतना नुक़सान कर दिया ।

    मैं:- अम्मा माफ़ कर दो। ग़लती से हो गया ये सब। मैंने जानबूझकर नहीं किया। (मासूम सा चेहरा बनाते हुए रोने लगी)

    अम्मा:- अच्छा ठीक हैं।कोई बात नहीं अब रो मत और मेरे साथ ये सामान रखवा। अरे वो तो तू इतनी प्यारी सी सुंदर सी मासूम सी हैं इसलिए माफ़ कर रही हूं। कोई और होती तो पक्का कूट कर भेजती उसे...

    मैं:- मन ही मन ( वो तो मैं हूं ही)
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    #prayasss70


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    ������️महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम्��️����


    अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते
    गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते।
    भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१॥


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    हे गिरिपुत्री, पृथ्वी को आनंदित करने वाली, संसार का मन मुदित रखने वाली, नंदी द्वारा नमस्कृत,पर्वतप्रवर विंध्याचल के सबसे ऊंचे शिखर पर निवास करने वाली, विष्णु को आनंद देने वाली, इंद्रदेव द्वारा नमस्कृत, नीलकंठ महादेव की गृहिणी, विशाल कुटुंब वाली, विपुल मात्रा में निर्माण करने वाली देवी, शिव की प्रिय, महिषासुर का अंत करने वाली, मां गौरी की जय हो, जय हो।।


    ����������जय मां गौरी ����������


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  • in_my_heart 15w

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    तू हकीक़त हैं...मैं सिर्फ़ एहसास हूं!
    तू समुंद्र...मैं भटकी हुई प्यास हूं!

    ©in_my_heart

  • in_my_heart 20w

    ❤️@r

    मुझे शोर नहीं,
    खामोशियां पसंद हैं...
    नयी सी लड़की हूं मैं,
    पुराने खयालातों की....

    ©in_my_heart

  • in_my_heart 24w

    जो दौड़ दौड़ कर भी नहीं मिलती
    वो संसार की तृष्णा हैं.....
    जो बिन दौड़े प्रेम से मिल जाता हैं
    वो राधा का कृष्णा हैं.....����

    ��राधे राधे��

    ����कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं����

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