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  • jain_shakshi 8w

    बचपन मैं जब कभी
    पापा और मैं
    माँ का घंटो इंतज़ार करते थे
    बस स्टैंड पर तब लगता था
    सबकी माँ तो घर पर रहती हैं
    मेरी माँ को ही क्यों
    डेली बस से नौकरी पर जाना पड़ता है।
    उस वक़्त फ़ोन नहीं आये थे
    लैंडलाइन था।

    तब माँ की पोस्टिंग गाँव मैं थीं।

    एक बार की घटना हैं
    मैं और पापा रोज़ की तरह
    माँ का बस स्टैंड पर इंतज़ार
    कर रहे थे।
    उस दिन बहुत पानी बरस रहा था
    पहले हम 2:00 बजे गए
    पर बस नहीं आई
    उस वक्त पापा के पास स्कूटर था
    जो थोड़ी आवाज भी करता था
    लगा चलो बस लेट हो गई होगी
    अगली बस 4:00 बजे थी
    फिर 6:00 बजे फिर 8:00 बजे
    और लास्ट बस 10:00 बजे
    8:00 बजे तक तो हम
    घर से बस स्टैंड और
    बस स्टैंड से घर होते रहे
    कैसे हताश दो व्यक्ति इंतज़ार कर रहे थे
    किसी अपने का
    और वहां माँ क्या-क्या
    कैसी-कैसी परेशानियों से
    जूझ रही थीं वो अलग
    मां कुछ 8:30 से 9:00 बजे करीब हमको मिली
    कोई लोकल बस हमारे आगे आकर रुकी
    और मां उसमें से उतरती हुई दिखी
    वो भी एक पल था जो ठहर सा गया था
    मां हमको देख रही थी और हम मां को
    पता नहीं क्या कहना था उसको
    जो उसने सहा और जो हमने ।
    हमारी जिंदगी का इतिहास का एक दिन।
    #आज_भी_ऑंसू_आ_जाते_याद_करके����

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    'संघर्ष'

    (अनुशीर्षक पढ़े)





    ©साक्षी जैन

  • jain_shakshi 10w

    एक तरफा बात सुनना सबसे बड़ी नालायकी है
    दूसरे की भी तो सुनो।

    ©jain_shakshi

  • jain_shakshi 11w

    कैसी कैसी बातें करते हैं दो लोग❣️��

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    वार्तालाप

    प्रेम करने से खूबसूरत भला और क्या हो सकता है मैंने बोला ?
    उसने बोला सफल हो जाना। मैंने पूछा प्रेम में?

    उसने बोला नहीं जिंदगी की लुका-छुपी में, रिश्तो में, जिम्मेदारियों में, ख्वाहिशों में आखिर मैं इंसान की ख्वाहिशें ही है जो अधूरी रह जाती है और ना वो सफल हो पाता ना ही संतुष्ट।

    उसने बोला प्रेम अस्थाई है और प्रेमी भी।
    मैंने बोला मैं नहीं मानती तुम्हारा होना मुझे एक सकारात्मक ऊर्जा देता है, तुम से जुड़ी बातें मैं गुनगुनाने लगती हूं, तुम्हें सोचना, महसूस करना तुम्हारा स्पर्श मुझ में अपनापन भर देता है। छोटी मोटी नोक-झोंक एक दूसरे को तलाशने में मदद करती हैं।

    उसने बोला वो इसलिए क्योंकि तुझे अभी मुझसे प्रेम मिला ही नहीं है पर मुझे मिल चुका है तुझसे।

    ©jain_shakshi

  • jain_shakshi 11w

    आज रात भर सो नहीं पाई सुबह नींद तो लगी पर तुम सपने में दिख गए फिर क्या उठ कर बैठ गई पसीने से लथपथ सूखा गला जैसे पता नहीं कब से पानी नहीं पिया हो।

    सपने मैं,
    सोचा तुम्हें जी भर के देख लू जी भर के बातें कर लू बहुत दिन हो गए ना, कहां मैं 1 दिन नहीं रह पाती थी और कहां इतने दिन हो गए मजाक सा लगता है। सांसें बहुत तेज चलने लगी, लगा जैसे हार सी गयीं हूं तुम्हारे आगे, लगा तुम थाम लोगे मुझे, सीने से लगा लोगे और कहोगे पुरानी बातें बीत चुकी हैं वह बीता कल है मैं आज हूं तेरा और हमेशा रहूंगा।

    "हमेशा" सुनते ही आंख खुल गई होश आगया,
    बस आज मैं सो नहीं पाई।

    ©jain_shakshi

  • jain_shakshi 11w

    हम दोनों की कहानी मुझे अकेले लिखना बहुत मुश्किल हो जाता है।������

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    कैसे कोई कर सकता है कैलकुलेशन प्यार में ?

    यार समझों प्यार कोई पाइथोगोरस थेऔरम थोड़ी ना हैं। यही बोलते-बोलते मैंने थाम लिया उसका हाथ और अपनी उंगलियों से उसकी उंगलियों को छुपाते हुए मैंने कहा तुझे पता है तेरी उदासियों से मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं, घबरा जाती हूं मैं उसने कहा जानता हूं तभी तो डरता हूं मैं नहीं चाहता तू हम दोनों के बारे में सोचें मैं चाहता हूं तू बस तेरे बारे में सोचे यही सुनते सुनते मेरा महसूस की उसकी हथेलियों पर गर्माहट बहुत उदासी थी उस लम्हे में।

    मैंने कहा तुम तो कहते हो कि प्यार है पर तुम्हें तो प्यार करना आता ही नहीं चलो कोई बात नहीं साथ रहो, मैं जानती हूं सपने है जिम्मेदारियां है मैं सब जानती हूं मैं तुम को समझती हूं पर हो सकता है मैं तुमको कभी नहीं समझ पाऊँ तब तुम समझ लेना मुझे तब तुम महसूस कर लेना मेरी हथेलियों की गर्माहट..... तुम्हारे सीने से बेहतर जगह कोई और हो सकती है क्या?

    उसने कहा मैं पुरुष हूं और पुरुष चले जाया करते हैं वो नहीं ठहरते प्यार के मोह मैं। उसने कहा यही मानवता है तू समझ।

    ©jain_shakshi

  • jain_shakshi 11w

    युद्ध

    मैंने कभी गांव नहीं देखे, देखती भी कैसे शहर में पली-बढ़ी जो हूं, गांव से तो वास्ता ही नहीं रहा कभी पर हां मैंने गांव की कहानियां काफी सुनी है तुमसे।
    बहुत दिल था और आखिर तुमने वादा भी तो किया था गांव घुमाने का उस रोज जिस वक्त मेरी उंगलियों से खेल रहे थे तुम भूल गए होगे शायद हमेशा की तरह।
    तुमने कहा था कभी मैं तुझे गांव ले जाऊंगा और मैंने फुदक कर कहा था गांव के खेत के घूमूंगी, मिट्टी के खिलौने बनाऊंगी, चूल्हें की रोटियां खाऊंगी, खाट पर सोऊँगी और पता नहीं क्या क्या, फिर तुमने कहा था बस-बस सबसे पहले मैं तुझे "मां से मिलवाऊंगा" ।
    और चूम लिया था मेरा हाथ।

    आज यह किस्सा याद आ गया और महसूस हुआ कि रिश्ते तो कभी हाथ से छूटते ही नहीं है, बस पीड़ा अपना कर्तव्य निभाती रहती है वैसे भी बिना महबूब के श्रृंगार करना, पुराने किस्सों को दोहराना, बिना पते के खत लिखना इक युद्ध जैसा है।

    ©jain_shakshi

  • jain_shakshi 11w

    वक्त गलत हो सकता है
    पर हमारा रिश्ता नहीं
    दूरियां बढ़ सकती है
    पर नज़दीकियां भी तो कम नहीं


    ©jain_shakshi

  • jain_shakshi 11w

    कैसे?

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    खुशकिस्मत हूं मैं जो इश्क को काम समझती हूं
    बदकिस्मत हो तुम जो इश्क को बोझ समझते हो ।

    ©jain_shakshi

  • jain_shakshi 11w

    आजकल फोन की घंटी नहीं बज रही है तुम सुन पा रहे हो ना मुझे ?

    #hindi

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    क्या तुम सुन पा रहे हो ?

    बहुत याद आ रही है तुम्हारी अगर तुम ये अभी पढ़ पा रहे हो तो बताओ यार इशारा तो करो कब तक चलेगा ये कुछ ना कहने कुछ ना सुनने का दौर।

    तुम्हें पता तो है उदासियां मुझे पसंद नहीं, तुम्हारी गैरमौजूदगी बीमार कर देती है मुझें, छोटी-छोटी बातों पर मुंह फेर कर रूठकर रिश्तो का कत्ल करके चले जाना गलत है यार!

    तुम तो जानते हो मेरी सुंदरता यह सौंदर्य तुमसे जुड़ा है, नहीं नहीं ऐसा नहीं है मुझे कोई और भाता नहीं है बहुत लोग हैं तुमसे अच्छे भी मिले और तुम्हारे अंदर तो लाखों खराबी है पर समझो इस बात को तुम ही भाते हो मुझे। तुम को मनाना तो कभी तुमसे रूठ जाना और खुद मान जाना कुछ हम सा लगता है।

    शाम को जब रोज़ फोन की घंटी बजती है नाम तो देखना ही नहीं पड़ता, मुझे पता होता है तुम हो, आजकल फोन की घंटी नहीं बज रही है तुम सुन पा रहे हो ना मुझे ?

    ©jain_shakshi

  • jain_shakshi 11w

    तू समझे या ना समझे
    पर मेरी हर कहानी मैं
    तेरा किरदार ज़रूरी है.

    ©jain_shakshi