jazbat

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  • jazbat 18h

    दूर+दूर=पास

    यक़ीनन मेरे एक दिया जलाने से
    कोरोना की दहशत , डॉक्टरों की दिक्कतें
    पुलिस की ड्यूटी , ज़िंदगी के झंझट
    कम नही होंगे ... पर सोचा कि...
    इस बहाने तेरे मेरे ‘ दूर दूर ‘
    के दियों की रोशनी और दिलों के एहसास तो
    ‘ संग संग ‘ होंगे ।
    ©jazbat
    Ranjana B.

  • jazbat 2d

    पलायन

    कमज़ोर हो क्या
    या कायर हो ?
    जाँच लो ...
    ये तय है कि दिक्कतें आएँगी !
    ये भी कि वो हिम्मत आज़माएँगी !
    ये भी देखा जाएगा कि
    तुम्हारा बर्ताव होगा क्या ?
    कमज़ोर हो या कायर
    जाँच लो ज़रा ...!
    अगर डटे रहे तो ज़रूर
    पार हो जाओगे !
    और कहीं घबराए तो
    फँसते जाओगे !
    तो करना है क्या ?
    आज ही फ़ैसला करना होगा
    चुना है तुमने ताक़त से करना मुक़ाबला
    या तुम्हें डरकर ‘ पलायन ‘ करना होगा !
    सोचो ज़रा .....
    ©jazbat
    Ranjana B.

  • jazbat 3d

    Lockdown (2020)

    अजीब हुआ कुछ इत्तेफ़ाक ..
    मजबूरी में ही सही ,आज तीनों पीढ़ी
    घर में बैठी हैं साथ साथ !
    कभी खिसियाहट कभी फुसफुसाहट
    कभी खिलखिलाने और कभी बड़बड़ाने की
    भी आवाज़ें आ रही हैं ... क्योंकि
    तीनों पीढ़ियाँ लम्बे अरसे बाद मजबूरन
    एक साथ समय बिता रही हैं !
    रसोई खुश है की उसका रुतबा बढ़ गया है ,
    टीवी को तो जैसे एटीट्यूड चढ़ गया है ,
    मोबाइल की जान पर बन आयी है ,
    आँगन और छत भी गुलज़ार हैं ..
    सुबह शाम सबका उन पर उमड़ता प्यार है ।
    बालकनियाँ भी शैतान हो गयी हैं अड़ोस पड़ोस की
    चटपटी बातों का पूरा मज़ा ले रही हैं
    वक़्त कड़ा है ,कल क्या होगा कुछ नही पता है ..
    दिलों को अनजाने डर ने घेरा है
    पर जब तक सब साथ हैं और इर्द गिर्द
    चारदीवारी का पहरा है ,तो मन को मत हारने दो ..
    जी भर साथ जी लो ,हर घर मुस्कुरा कर कह रहा है ।
    ©jazbat
    Ranjana B.

  • jazbat 3d

    ©jazbat

  • jazbat 1w

    Brutally beaten and raped
    she furiously erected
    and howled .....
    “ Pity on you and on
    your worthless upbringing
    you have brought up
    ruthless with absence of sensitivity .
    Today I have lost my virginity and faith in morality....
    your inhumane act has confirmed You ALL are truly WEAK , COWARD and SISSY “ .

    ©jazbat
    Ranjana B.

  • jazbat 1w

    @Mirakee@writersnetwork #Mirakee#Lekhakmandali #Hindi #Hindilekhan #Poetry #Pod #urdu #shayari #ख़्वाहिशें#जज़्बात

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    देखे ना उम्र ना ही जगह
    क़भी बावज़ह कभी बेवज़ह
    बच्चा बना देती हैं कभी कभी
    फ़िर सुनती किसी की नही
    ये ख्वाहिशें भी ना ....

    ©jazbat
    Ranjana B.

  • jazbat 1w

    जंगली झाड़

    बढ़ते जाते हैं जंगली झाड़ से अकसर
    वो बच्चे जो बेमतलब उग आते हैं !
    वो उग जाते हैं ग़रीब , बेपरवाह
    अनपढ़ , अड़ियल माँ बापों के घर
    उन परिवारों में भी ...
    जहाँ लड़के का होना ही अंतिम लक्ष्य है ,
    जहाँ समाज हावी है , जहाँ सोच तंग है ,
    जहाँ बुद्धि मंद है , जहाँ जागरूकता कुंद है !
    बेतरतीब बढ़ते जाते हैं , बिना सहारे के
    आधा अधूरा खा कर भी ,
    नाम करने को पढ़कर भी
    बिना काँट छाँट के जंगली झाड़ से !
    स्कूलों में डाँटे डपटे जाते हैं क्योंकि
    घरों में टोके , पढ़ाए , समझाए नही जाते हैं
    अंदर ही अंदर सुलगते और अपनी क़िस्मत
    पर मलाल करते वो बढ़ते जाते हैं
    अवारा , शरारती , अपराधी , बलात्कारी
    भी बन जाते हैं ..
    जान नही पाते कि गलती सिर्फ़ उनकी नही
    ये कमनसीबी भी है और ग़लत परवरिश भी ..
    और आख़िर में हसरतें पूरी करने को
    सही ग़लत रास्तों से गुज़रते ये
    ‘काँटेदार झाड़ ‘ ... काट गिराए जाते है ..या
    कभी कभी फाँसी पे लटका दिए जाते हैं ।
    अपने अंत से पहले वो दुनिया में अपने जैसी
    कई नई पौध तैयार कर जाते हैं ।
    ©jazbat
    Ranjana B.

  • jazbat 1w

    अक़सर दिल और दिमाग़ में
    करा देता है .. अनबन !
    ये बावरा मन ! !

    ©jazbat
    Ranjana B.

  • jazbat 1w

    Just a sec. !

    I think this is the best high time to realise the ....
    mental state / emotional condition
    of a person who is either
    elderly / dependent / disabled
    or in depression
    confined to bed or not exposed to the outer world
    neither techno friendly nor in condition to read even ..
    How does it feel & how desperately
    S/He longs for a few minutes of ours to relish them for the whole day ‘ALL ALONE ‘ .
    This lockdown is unlocking many emotional chapters to be read by us all .
    ©jazbat
    Ranjana B.

  • jazbat 2w

    करुण पुकार

    जन मन करता करुण पुकार
    माँ तू सुन ले ..फिर एक बार !

    जान लिए हथेली पर ,बैठा हर इंसान
    तेरे चरणों में है सर ,तू ही बचाए प्राण
    जन्म दिया है तूने ही ,तू ही पालनहार ,
    हाथ जोड़कर बैठें हैं ,सुन ले तू एक बार
    गलती को तुम क्षमा करो
    हर मनुज को शरण में लो
    भय व्याप्त है जन जन में
    मृत्यु की छाया ,कण कण में
    दिखता कहीं ना कोई छोर
    पसरा सन्नाटा चारों ओर
    अंधकार का नाश करो
    कष्ट रोग अब शांत करो
    तू माँ है .. तू समझेगी
    तू विपदा को हर लेगी
    अश्रुपूर्ण हम करें पुकार
    माँ कष्टों का करो संहार !
    ©jazbat
    Ranjana B.