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  • jazzbaaatt 33w

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  • jazzbaaatt 40w

    ©_jazbaaatt

  • jazzbaaatt 40w

    महंगा-महंगा सब लिखते हैं
    हम सस्तेपन के शौकीन हैं
    मोलभाव के रेट तुड़वाने के
    इसलिए शायद कद्र करना नहीं आता
    समेटना नहीं आता बेचना नहीं आता
    वरक चढ़ाकर चेप डालना ऊंचे दामों में

    कोयले की खान में पड़े हीरे नहीं
    किसी मामूली पत्थर की तरह रहना
    मालूम नहीं होता मूल्य उस पत्थर को
    घिसता है पड़ता है

    सालों बाद उसकी नीलामी होती या की उसे
    मूर्ति बना दिया जाता है या अजायबघर में
    सजाकर रखने की वस्तु; विरासत!
    अनमोल कर दिया जाता है

    सस्तेपन या मामूलीपन का श्रृंगार छीनकर!!!

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    सस्तापन जादू है

    सस्ते से अल्फ़ाज़ हैं
    ऊंचा ज्यादा कद नहीं
    धूल से मोहब्बत वाले हैं
    बस ज़द यहीं तक ही


    अनमोल जैसा कुछ है भी?
    कोड़ियों में रखी गई बिक्री!
    अफ़सोस मनाने की फुर्सत!
    उन्स नहीं तो भी फ़ुर्क़त?

    नज़ारा ये भी लाज़िम है
    सदाक़त जो कि बरहम है
    ना जाने कब तक मैं हूँ मैं
    ना जाने कितने पैरहन हैं
    सस्तापन जादू है फिर
    क्यों ना करूँ इसके चर्चे!
    सस्ते की माया देखा-देखी
    सस्ते से दिखने लगे सब हैं!!!

    ©Jazbaaatt

  • jazzbaaatt 42w

    .

  • jazzbaaatt 42w

    ©_jazbaaatt

  • jazzbaaatt 42w

    इश्क में बस इतना कसूर था लोहा था पत्थर नहीं रिश्ता!
    पिघल गया आतिशी से

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    ज़ुल्फ की इतनी ख्वाहिशें थीं
    हमसे वो ना पूरी हुई
    इस तरह इश्क की आतिश
    रफ़्ता-रफ़्ता सिंदूरी हुई

    ©_jazbaaatt

  • jazzbaaatt 42w

    कोई वलवला आया था सिरहाने की चौखट पे रात को
    रेतों के महल मेरे ज़ख़मी कर गया

    ©_jazbaaatt

  • jazzbaaatt 43w

    गुलज़ार काग़ज़ पे जो बन गया है
    फूल फिर काग़ज़ी सा खिल गया है

    जज़्बात सारे तू इसमें भर दे
    पंख सांसों को तू इसके दे दे
    गुंथी हुई धड़कनों की पहेली
    निगाहे करम ज़िंदगी तू कर दे

    ©_jazbaaatt

  • jazzbaaatt 43w

    ग़मो की तेरे खुशबू 
    सांसों में जो घुल गई है

    ग़मो की तेरे खुशबू 
    सांसों में जो घुल गई है
    रौनक है हर लम्हा
    ज़ख्मों की अपनी खुशी है

    है अभी भी कहानी वही
    हैं यादें तेरी ज़ुबानी मेरी
    दवा बन गई हैं ये तन्हाईयां
    जुदाई भी है मज़ा दे रही

    उस रंग की शामे होती हैं मेरी
    जो साड़ी आखिरी दफ़ा पहनी थी
    ज़िंदगी साफ दिखने लगी
    कोहरे की चादर में जो ढकी थी

    है अभी भी कहानी वही
    हैं यादें तेरी ज़ुबानी मेरी
    दवा बन गई हैं ये तन्हाईयां
    जुदाई भी है मज़ा दे रही

    ©_jazbaaatt

  • jazzbaaatt 43w

    By unknown writer

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    सुपनो जगाई आधी रात में २
    तनै मैं बताऊँ मन की बात
    कुरजां ए म्हारा भंवर मिलादयो ए
    संदेसो म्हारै पिव नै पुगादयो ए || स्थाई ||
    तूं छै कुरजां म्हारै गांव की
    लागै धरम की भाण
    कुरजां ए म्हारा भंवर मिलादयो ए
    संदेसो म्हारै पिव नै पुगादयो ए ||

    पांखां पै लिखूं थारै ओळमो
    चांचां पै सात सलाम
    संदेसो म्हारै पिव नै पुगादयो ए
    कुरजां ए म्हारा भंवर मिलादयो ए ||
    लश्करिये ने यूँ कही
    क्यूँ परणी छि मोय
    परण पाछे क्यूँ बिसराई रे
    कुरजां ए म्हारा भंवर मिलादयो ए ||

    ले परवानो कुरजां उड़ गई
    गई-गई समदर रे पार
    संदेशो पिव की गोदी में नाख्यो जाय
    संदेशो गौरी को पियाजी ने दियो जाय ||
    थारी धण री भेजी मैं आ गई
    ल्याई जी सन्देशो ल्यो थे बांच
    थे गौरी धण ने क्यों छिटकाई जी
    कुरजां या साँची बात बताई जी ||

    के चित आयो थारे देसड़ो
    के चित आया माय'र बाप
    साथीडा म्हाने साँची बात बता दे रे
    उदासी कियां मुखड़े पे छाई रे रे रे ||
    आ ल्यो राजाजी थारी चाकरी
    ओ ल्यो साथीडां थारो साथ,
    सन्देशो म्हारी मरवण को आयोजी

    गौरी म्हाने घरां तो बुलाया जी |
    नीली घोड़ी नो लखो मोत्यां से जड़ी रे लगाम
    घोड़ी ए म्हाने देस पुगादयो जी
    गौरी से म्हाने बेगा मिलादयो जी ||
    रात ढल्यां राजाजी रळकिया
    दिनड़ो उगायो गौरी रे देस
    कुरजां ए साँचो कोल निभायो
    ए कुरजां ए राणयो भंवर मिलाया ए ||
    सुपनो जगाई आधी रात में
    तनै बताई मन की बात
    कुरजां ए म्हारा भंवर मिलाया ए
    सुपना रे बीरा फेरूँ -फेरूँ आजे रे ||