kshatrani_words

Living with lol��

Grid View
List View
Reposts
  • kshatrani_words 16h

    आसमाँ में छाया नीला था
    वो अम्बर भी ख़ूब मुस्कुराया था,
    पहली बार जो भरी थी उड़ान
    देख कर पवन भी ख़ूब लहराया था।

    उड़ने को और देखने को जहान
    उसका भी दिल ललचाया था,
    फुदक-फुदक कर यूँ जो वो मचल रही थी
    समुद्र में भी उफ़ान आया था।

    कदमों में न शिथिलता थी
    बाहर की दुनिया से न वाक़िफ़ थी,
    मन ही मन सपने वो
    न जाने कितने सजों रही थी।

    पथ में आने वाले तूफ़ानों से
    उसका कोई ख़ास मतलब न था,
    शायद ही थी वो इससे अनजान के
    एक दिन यही वजह होगा उसके रोने का।

    आसानी से पूरे होते गए
    वो मामूली से ख्वाब सारे,
    लगता था उसे कि वो है
    'मल्लिका' अपने राज्य की।

    फिर एक दिन हुआ ये
    छाया घनघोर काला बादल,
    सन-सन चली हवा
    चीलों ने भी छेड़े अपने राग।

    भनक तो उसको भी लगी
    लगता है कुछ होगी अनहोनी,
    पर थी उसकी जो मति मारी
    वो हो गयी फिर से अपने मे ही मस्तमग्न।

    काले दिन से रात न जाने कब हो गयी
    होश में आई वो जब
    देखा, आसमान भी
    ख़ूब रोया था।

    कहने को तो वो सब हार गई थी
    जिंदगी भी उसकी त्रास गयी थी,
    नये सवेरे की उजियारे के लिए
    फिर भी उसकी आंखे चमक गयी।

    भूल अपनी सुधारने के लिए
    फिर से वो लग गयी थी,
    देने को उसका साथ हमेशा
    परमेश्वर सदा खड़े रहे।

    बदले हुए दुनियां के कण-कण से
    वाक़िफ़ भी काफी हो गयी थी,
    नंगे पाँव चलने से छाले तो पड़ने थे
    जिसका दर्द तो बाद में उठने ही थे।

    काँटों ने भी जमकर लिये ख़ूब मज़े
    कुछ तो इतने चुभे के,
    भूल से भी न भूले गए
    अपनी छाप ही छोड़ गए।

    रह रह कर जब 'जी' की लहरें
    दिखाने लगती है अपनी कहरें,
    न जाने क्यों फिर से
    लगते है काटें चुभने।

    पहनकर एक अनूठा और नयाब 'नक़ाब'
    भूलकर काँटों का हाल
    छोड़कर अपने दर्द को बेहाल
    जोड़ने लगती है वो 'फिर से' अपने भविष्य के तार।

    फुदक-फुदक कर जब वो मचलती है आज
    समंदर भी उफान ख़ूब भरता होगा,
    सुनकर उसके अनकहे हाल
    अम्बर भी ख़ूब रोता होगा।

    -'क्षत्राणी' अनुश्रुति।

    Date-16 September 2019,
    Monday
    ©AnushrutiSingh.

    Read More

    पहनकर एक अनूठा और नयाब 'नक़ाब'
    भूलकर काँटों का हाल
    छोड़कर अपने दर्द को बेहाल
    जोड़ने लगती है वो 'फिर से' अपने भविष्य के तार।
    ©kshatrani_words

  • kshatrani_words 5d

    "Spiritual resilient fervid
    Positivity is her choice
    She is Celebrating something very good - her individuality
    May this spirit in her continue to eternity".

    Sweet तो इतनी है जैसे rasgulle की चासनी,
    पंगा लिया न तो बन जाएंगी पिशाचनी��। (kidding didi)
    Emotional blackmail करना हर बात में तो जैसे है उनके लिए लाज़मी,
    जैसे बच्चे करते है cute वाली हरकतें वैसे वो करती हैं आज भी।
    जान-पहचान कर उन्हें लगता है कि जैसे वो है एकदम majestic
    और आवाज़ सुनकर लगता है कि जैसे वो तो है एकदम fantastic
    लक्ष्य तो उनका है बस देश की रक्षा करना
    पर share कर दो उनसे अपना किस्सा,
    समझकर तुम्हे अपना कर देंगी हल हर किस्सा।
    प्यारी तो इतनी है , जैसे होती है परियाँ
    नाज़ुक तो इतनी जैसे छुईमुई के पौधे की पत्तियां।
    बाहर से तो वो है बहुत strong
    भगवान जी जल्दी से बना दे अंदर से भी strong along.
    Royal Enfield से साथ मे है घूमने का सपना
    बस जल्दी से भगवान जी पूरा कर दे लक्ष्य अपना।
    वो है मेरी sweetiepie और मैं हूँ उनकी senorita
    बस इतना ही कहना है कि I love you when you call me señorita.
    Lucky हूँ बहुत मैं जो उनको पाया
    बड़ी बहन की तरह हमेशा दुलारा और समझाया।
    मुश्किलों में अपने मैंने उनको ही पाया
    पास न होते हुए भी हमेशा साथ निभाया।
    हमे मीले हुए तो years होने को आया
    But वो इतनी dear है लगता है मानो बरसो से है वो भायी।
    Birthday है आज उनका सोचा क्यों न उनको special feel करवायें
    इतना कुछ जो छुपा कर रखा था आज खुलकर बतलायें।

    जन्मदिन है आपका दीदी , दिन बन जाये इतना ख़ास
    दुआ करते है ऐसा रहे 365 दिन हर साल
    ख़ुशियों की हो ऐसी बरसात
    दुख का सूखा बन जाये हरियाली की बारात
    जितनी भी ख्वाहिशें है सारी पूरी हो चाहे क्यों न हो वो राज़
    ऐसी कामना करते है हम भगवान से आज।
    साथ हमारा ऐसे ही बना रहे
    दूर है तो क्या हुआ बस बना रहे।
    भगवान जी हमेशा खुश रखे आपको
    और बन जाओ आप उनकी दूत और दूर कर दो सारे पाप को।

    -आपकी señorita��



    On this special day, I hope that you get all that your heart desires. Happiness, peace of mind, prosperity and good health. May you get all these together with special gifts! Happy Birthday sweetipie����. Humesa khus rhna di @kshatrani_kalam ����❤️��
    Aur ये रही apki dairy milk������������������ baki milne ke baad��.

    @100urav_indori

    Read More

    .

  • kshatrani_words 2w

    ��Nothing happens accordingly, sometimes. Want something else, do something else, hope for something else but at the end of the day get something else��

    Read More

    Exhausted from all
    Needed a God's call,
    Instead of sending death angel,
    Sent a heavenly messenger.

    Known to her,
    Though unaware before
    That they will become much close
    And will make her life bed of rose.

    Attention and care she get
    Was all new and unexpected to her to set.
    Feeling delighted and thankful to her almighty - the best,
    For giving a gift that was precious and obsessed.

    Regardless of all these
    Somewhere something was hitting her mind and seized
    Resulted in the end of bee in her bonnet
    Made her exhausted again, to be honest.

    It's all her fault,
    She know that after all,
    Her overprotective
    And over thinking,
    Though a right thinking .
    Her mushy nature
    And becoming close sooner
    Though not in her hand, all humour.
    Caused them tear apart
    Like that off aerolite from constellation of star.

    In spite of all that
    She wants to begin the chapter chat
    From that very end to the infinity zone
    As per her own wish she wants to ink and own.
    Nothing seems like that,
    Miracle will happen again and chat?
    Though, she have a strong hope-
    "Everything will be same and better again"!
    God knows 'cause it's all in his hand again.
    Hope she will get her happiest place again for infinity age.

    ©kshatrani_words

  • kshatrani_words 5w

    माथे पे तेरे चाँद का टीका लगाएंगे
    आंखों में तेरे ख़्वाब के तारे सजायेंगे,
    होठों पे तेरे प्यार के नगमे खिलाएंगे,
    तू देखना वतन तुझे कैसा सजायेंगे
    तू देखना वतन तुझे कैसा सजायेंगे,
    तू देखना वतन तुझे कैसा सजायेंगे, सजायेंगे।


    क़दमों पे तेरे सात गगन हम झुकायेंगे,
    कांधे पे तेरे जीत का परचम सजायेंगे,
    गालों पर तेरे शौर्य की लाली रचाएंगे,
    तू देखना वतन तुझे कैसा सजायेंगे,
    तू देखना वतन तुझे कैसा सजायेंगे,
    तू देखना वतन तुझे कैसा सजायेंगे, सजायेंगे।


    आज तक जो न हुआ है अब करके दिखाएंगे,
    आंखों पर तेरी दूर का चश्मा लगाएंगे,
    सारी हदों के पार जाकर तुझे दिखाएंगे,
    तू देखना वतन तुझे कैसा सजायेंगे,
    तू देखना वतन तुझे कैसा सजायेंगे,
    तू देखना वतन तुझे कैसा सजायेंगे, सजायेंगे।


    मिट्टी का तेरी मिटके भी कर्जा चुकाएंगे,
    मस्तक ये तेरा गर्व से ऊँचा उठाएंगे,
    आगे हैं आगे ही हम तुझे ऐसा बढ़ाएंगे,
    तू देखना वतन तुझे कैसा सजायेंगे,
    तू देखना वतन तुझे कैसा सजायेंगे,
    तू देखना वतन तुझे कैसा सजायेंगे, सजायेंगे।

    जय हिंद , जय भारत।

    ©aalok_srivastav
    Singer-Javed ali.

    आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं������, और आशा है कि हम अपना वतन मिलकर स्वर्ग से भी सुंदर बनाएंगे��������
    और रक्षाबंधन की भी हार्दिक शुभकामनाएं����

    @100rav_indori @kshatrani_kalam @a_aakash @raaj_kalam_ka @v_smita_v @innocent_soul @shreyasinghkalhans_ @anita_sudhir @deepajoshidhawan @writerstolli #osr #100rb #writerstolli #independenceday

    Read More

    सुजलां सुफलां माल्यज शीतलाम
    शस्यश्यामलाम मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम।
    ©kshatrani_words

  • kshatrani_words 5w

    A divine prayer to the divine and my beloved Lord��.

    Oh! My dear supreme God,
    When I was broken
    You kept affixing me.
    When I was just lost
    You bestowed me to live.
    When I was just sinking down
    You send a rescuer.
    When nobody was there with me
    You were always, every time.
    When nobody wanted to listen me
    You listened me without blaming and uttering a word.
    When I was just exhausted
    You gave me the direction to reach the fuel.
    When I did something wrong
    You forgiven me.
    When I hurt someone
    You made me realize that I did wrong.
    When I thought that I am worthless
    You made me deemed that I am an example for someone.
    When I introspected that I am of no use for someone
    You made me discerned that I leaved sparkles wherever I go.
    When I needed a suggestion, support and help
    You send an angle every time in different-different morph.

    My dear beloved God!
    I just only want to say that
    Whatever I am
    Whoever I am
    Wherever I am
    Just because of your
    divine unending blessings.

    Please be with me my lord!
    In my good and bad
    In worst and best.
    Gift me resipiscence and
    Drive me to follow the truth.
    Protect me from evils and
    Direct me to reach at my goals.
    Guard me whenever I need and
    Stand with me forever.
    Show me what is right and wrong.
    May my love, trust, faith, belief and
    Everything for you live for eternity.
    And at last but not least.
    Make me your angel
    for those desired beautiful souls at least.

    ©Anushruti_singh
    Date-11 August 2019,Sunday

    Read More

    My dear beloved God!
    I just only want to say that
    Whatever I am
    Whoever I am
    Wherever I am
    Just because of your
    divine unending blessings.
    ©kshatrani_words

  • kshatrani_words 6w

    Give me power and strength, dear God.��

    Read More

    Dear Supreme God,

    Calm my heart.
    Give me the power and strength art.
    Give me the courage
    To do what is right rage.

    Show me the way
    To overcome from dilemma and trauma, say.
    Furnish me with the fuel
    When I am totally exhausted fool.

    Ignite the fire within my soul
    When I am empty whole.
    Show me how to rise in this dark age
    And meet this challenge of time page.

    With your divine blessings
    I shall stand, I shall survive and learn lessons.
    Let me know that my peace
    Depends on you alone increase.

    Let me remind that why I am here
    To become angle of my Loving God for these beautiful peoples there.

    May your spirit keep me balance,
    Neither I feel happy nor sad only gallant.
    May you make me that strongest introvert.
    May you be my source of inspiration and alert.
    May I just spread my hand in front of you only.
    May I stand on you with firm bravely.

    -'क्षत्राणी' अनुश्रुति सिंह।

  • kshatrani_words 7w

    �� @panchdoot #panchdoot #hindiwrites #100rb @100urav_indori bhaiya @kshatrani_kalam didi @a_aakash bhai @deepajoshidhawan mam #osr @raaj_kalam_ka didi ��

    We all should have to rise a wolf, ignite a flame within ourselves otherwise ये कारवां ऐसे ही चलता रहेगा। We should have to 'stand' for every girls, for every women, for every victims. And yes most importantly we should have to be our own bodyguard.

    ओरी सखी! ज़रा सम्भल कर चलना,
    आज़कल यहाँ ईमान बिक रहा है।
    हैवानों का झुंड भी खुले आम घूम रहा है,
    ओरी सखी! ज़रा सम्भल कर चलना,
    यहाँ ईमान भी बिक रहा है।

    खुद की हिफाज़त भी तुझे खुद से ही करना है,
    उन 'हैवानों' का क्या है
    आज उसमें जगा है, तो कल किसी और में जगेगा।
    फिर करेगी तू मुक़दमा,
    उंगलियां उठेंगी तुझ पर लाख,
    बाप पर होगा बेवज़ह केस,
    मार देंगे उन्हें जेल में ही बदलकर भेष,
    चचा पर निकालेंगे अनावश्यक रोष,
    मरने पर कर देंगे मज़बूर,
    और फिर भी न लिए वापस मुकदमे का केस,
    तो करके खुद कह देंगे 'इत्तेफ़ाक' से हो गया हादसा,
    और इत्तेफ़ाक़ से मदद के लिए भी उस समय न कोई होगा पेश,
    ओरी! सखी ज़रा सम्भल कर चलना।

    Read More

    सुन री सखी! न कर तू 'अधिकारियों और सरकार' से सवाल के
    कैसे इतनी आसानी से बेच दिया ईमान अपना आलाकमानों ने?
    शपथ भी झूठी खाई थी क्या!
    वो वकील भी कैसे मान गया वक़ालत करने के लिए?
    पैसों के लिए कुछ भी करना लाज़मी है क्या!
    समाज निकाला क्यों नहीं घोषित हुआ?
    इससे भी घिनौना अपराध कुछ और है क्या!
    'अबकी बार 300 पार' का नारा दिया,
    अबकी बार बलात्कारियों पर प्रहार ये नारा दिया क्या?
    'अबकी बार कांग्रेस मुक्त भारत' का नारा दिया,
    अबकी बार अपराध मुक्त भारत का नारा दिया क्या?
    ओरी सखी! जरा सम्भल कर चलना।

    सुन री सखी! न कर तू 'मूक बने लोगों' से सवाल के
    अब भी हर बार की तरह
    इस तूफान के बाद सन्नाटा छाया रहेगा क्या?
    निर्भया भी हुई, आशिफ़ा भी हुई और ट्विंकल भी हुई
    नाम बदले, शहर बदले
    न जाने कितनी और लाखों पीड़िता हुई
    कारण था सिर्फ हमारा सन्नाटा,
    हम बदले क्या, वो बदले क्या, आप बदले क्या?
    जेल गये, जेल से छूट भी गए
    ये खेल अब भी नही हुआ खत्म क्यों?
    यूँ न्यूज़ में देखकर, हाथों मे चूड़ियाँ पहनकर,
    घर पर बैठकर कब तक खुद की राय देते रहोगे?
    कभी बाहर निकलकर आवाज़ निकाली क्या?
    मोमबतियां हाथ मे लेकर शांति की प्रार्थना करने से
    किसी की हैवानियत बुझी क्या?
    ओरी सखी! ज़रा सम्भल कर चलना।

    ओरी सखी! सुन तू अब
    छोड़ तू अब ये सब,
    तू बन खुद की ढाल अब,
    कर ले तू अब खुद को माहिर सब में,
    तू बन जा खुद में मिसाल अब,
    कर दे हौसलों में उछाल अब,
    तू बन अब आवाज़ सबकी,
    तू बन ऐसी धारी दार तलवार
    कट जाए सारे अभिशाप,
    तू बन वो तूफां
    जो उड़ा ले जाये सारे भेडियों को अब।
    ओरी सखी! ज़रा सम्भल कर चलना
    आजकल यहाँ ईमान भी बिक रहा है।
    -'क्षत्राणी' अनुश्रुति सिंह।

  • kshatrani_words 7w

    �� #panchdoot @panchdoot @hindiwrites #hindiwrites #100rb @100urav_indori @kshatrani_kalam @a_aakash ��


    Apno ke liye aur spno ke liye bda jeete phirte ho
    Kbhi dusron ke liye jee kr to dekho.
    अहा! गुस्ताख़ी के लिए माफ़ी हूजूर��‍♀️��
    क्योंकि आप जीयेंगे और मरेंगे, अये! वतन सिर्फ अपने लिए ।
    बात तो सही है ज़नाब , इतना पढ़ा लिखा और इतना संघर्ष किया, दूसरों के लिए थोड़ी ही।
    ख़ैर छोड़िये, अपनी मुफ़्त की मिली हुई जिंदगी का जश्न मनाईये।


    लेकिन हाँ, मैं आवाज़ बनना चाहती हूँ।
    किसी भी कोने में कोई चीख़ रहा हो
    उसके लिए मदद का हाथ बढ़ाना चाहती हूँ,
    बन्द कमरे में कोई रो रहा हो
    उसका हमदर्द बनना चाहती हूँ,
    कमज़ोरों की मर गयी आस
    की पुकार बनना चाहती हूँ,
    हाँ, मैं आवाज़ बनना चाहती हूँ।

    भूख से तड़प रहे लोंगों को
    हर दिन भर-पेट भोजन देना चाहती हूँ,
    वो जो हर दुकानों पर 'छोटू' है
    उसको पढ़ाना चाहती हूँ,
    मंदिरों, स्टेशनों, कभी घर के सामने
    जो हाथ में कटोरा लिए घूमते है
    उनके लिए उनका जीवन का नज़रिया बदलना चाहती हूँ,
    हाँ, मैं आवाज़ बनना चाहती हूँ।

    वो जो मथुरा हो या हो कोई भी जगह
    अपने बच्चों के इंतज़ार में
    वृद्धाश्रम या सड़क पर सदियाँ गुज़ार देते हैं
    उनके लिए उनकी बेटी-बेटा बनना चाहती हूँ,
    अंधों के लिए उनकी आँख, लँगड़ो के लिए उनका पैर
    कानों के लिए उनका कान और
    बूढ़ों के लिए उनका बुढ़ापे का सहारा बनना चाहती हूँ,
    हाँ, मैं आवाज़ बनना चाहती हूँ।

    किसी के साथ ज़ोर जबरजस्ती करने पर
    उनके लिए तलवार बनना चाहती हूँ,
    यूँ गली-मोहल्लों में आवारा घूम रहे अपने 'बड़े भाईयों'
    (जो अपनी नालायकी का जवाब देते हुए बहनों पर टिप्पणी करते है)
    को अच्छे से सबक सिखाना चाहती हूँ,
    और उन लड़कियों के लिए 24/7 बॉडीगॉर्ड बनना चाहती हूँ
    हाँ, मैं आवाज़ बनना चाहती हूँ।

    अपनी नौकरी का रुतबा दिखाने वालों के लिए
    उनकी असलियत दिखाने वाला 'आईना' बनना चाहती हूँ,
    यूँ सहमे-सहमे से रहने वाले कामगारों के लिए
    उनकी हिम्मत बनना चाहती हूँ,
    जिन की आवाजें किसी ने दबा दी है
    उनके लिए उनकी आवाज़ को बुलंद करना चाहती हूँ,
    हाँ, मैं आवाज़ बनना चाहती हूँ।

    Read More

    देश की सीमा पर जाकर
    अपने देश की रक्षा करना चाहती हूँ,
    जाति-धर्म, रंग-भेष पर लड़ने और लड़ाने वालों को
    इन सबका मतलब समझाना चाहती हूं,
    मतलब की राजनीति और लोगों को मूर्ख बनाने वालों को
    चाणक्य की राजनीति और
    अशोक जैसा महान बनना सिखाना चाहती हूँ,
    हाँ, मैं आवाज़ बनना चाहती हूँ।

    पर,
    उससे पहले एक सवाल पूछना चाहती हूँ खुद से!
    कैसे बनूं मैं भगत सिंह, रानी लक्ष्मीबाई
    मदर टरेसा या लक्ष्मी सहगल?
    न जाने कैसे उन सब मे था इतना हिम्मत?
    कि अकेले ही कर दिया तख्त पलट।
    लगता है कि जैसे पहले
    इसके लिए पैरों पर खड़ा होना है जरूरी!
    क्योंकि हाँ, मुझे लोगों का आवाज़ बनना है।

    बन्द चार दिवारी में रह कर
    एक दिन खुले आसमाँ में उड़ना है,
    क्योंकि मुझे लोगों का आवाज़ बनना है।
    अब सिर्फ पढ़कर
    अपना और परिवार का 'सपना' नहीं पूरा करना है
    उन सभी लोगों के लिए जीना और मरना है,
    हाँ, मैं आवाज़ बनना चाहती हूँ।

    इस देश की बेटी होने का फर्ज़
    और धरती माँ का कर्ज चुकाना कहती हूँ,
    हर मुश्किलों से डट कर सामना करना चाहती हूँ,
    पर्यायवरण अमूल्य है
    लोगों को इसका मतलब बताना चाहती हूँ,
    पापियों, लुटोरों-चोरों से मुक्त
    एक स्वर्ग 'फिर' से बसाना चाहती हूँ,
    हर नर में 'राम' और हर नारी में 'सीता' हो
    ऐसा लोगों से विनती करना चाहती हूँ,
    और 'हनुमान जी' जैसा देश का हर बच्चा सेवक और रक्षक हो
    ऐसी ज्वाला उनमे भड़काना चाहती हूँ,
    हाँ, मैं आवाज़ बनना चाहती हूँ।
    -'क्षत्राणी' अनुश्रुति सिंह।
    ©kshatrani_words

  • kshatrani_words 8w

    When we say 'I don't care',
    Actually that's the point
    when we care most.
    Why!
    ©kshatrani_words

    Wordings- @innocent_soul ❤️��

    Read More

    When we say 'I don't care',
    Actually that's the point
    when we care most.
    Why!
    ©kshatrani_words

  • kshatrani_words 8w

    Then she decided to burn that hope though,
    Whether she will succeed or not, let's know!��

    Read More

    There was always a hope in her eyes
    may be one day or someday
    everything shall be better, at least.
    But every single time she felt broken,
    Her heart's melodious voice leads
    her 'hope' to be mistaken.
    And she ends up to 'if only'.
    ©kshatrani_words