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  • loveneetm 27m

    माँ अश्रू को बना शब्द,
    मैं कागज रहा भिगाए,
    तेरे बिन हर वाक्य माँ,
    मैं लिखकर रहा मिटाएँ।
    ©loveneetm

  • loveneetm 34m

    स्मृतियाँ(वर्गम)

    कैसे वर्णन करूँ जगत,
    खोकर मन की आस,
    गांव शहर नगर ढूंढा,
    घर ना आए रास।

    चली गई बिन कहे,
    छोड गई माँ साथ,
    जीवन बिन मात के,
    झूठा लागे दिन रात।

    टूटा हृदय उस घडी,
    ठोकर जब लगा अगाध,
    डोर खींच प्राण की ,
    ढूंढे तन केवल श्वास।

    तब भी मांगी थी दुआ,
    थोडा रख मन की आस,
    दुआ काम ना आई तब,
    धर्म सुने ना कोई बात,
    ना रहा मात का साथ।

    पल भर में सब बदला,
    फिर भी ना बदले रीत,
    बेटा ढूंढे माँ हर घडी,
    भीतर रख माँ की प्रीत,
    मन हारा काल की जीत।

    याद कर सब स्मृतियाँ,
    रखू माँ हृदय संभाल,
    लेकिन मन टूट चुका,
    विकट हुआ मन हाल।
    ©loveneetm

  • loveneetm 2h

    #4ank #vargam गुरू पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं आप सभी को।

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    गुरू(वर्गम)

    कौन बताएँ सही गलत,
    खबर हृदय ले कौन,
    गुरू बिना ज्ञान नही,
    घर मैं बैठा मौन।

    चालक गुरू बुद्धि का,
    छांटे है खर पतवार,
    जीवन रूपी है डगर,
    झूठा है जग संसार।

    टूटे ना विश्वास हृदय,
    ठोकर खाकर दिन रात,
    डगर गुरू की राखिए,
    ढूंढे शिष्य का साथ।

    तुम और मैं हम बने,
    थोडी भी यह हो सोच,
    दिन रात सफल हो जाएगा,
    धन्य हो धरा तब रोज,
    ना रखना मन कोई बोझ।

    पर्वत जैसे है सद गुरू,
    फिर क्या राजा और रंक,
    बाबा मईया सब है गुरू,
    भाग्य में भर दे रंग,
    मन चाहे गुरू का संग।

    याद रखना सीख सदा,
    राह गुरु सदा दिखाएं,
    लाखों जीवन जीकर भी,
    वो शिष्य ऋणी कहलाए।

    शिष्य आज नमन करो,
    षड्यंत्र हृदय ना राख,
    सही गलत भेद जान,
    हर अवगुण करदे खाक।
    ©loveneetm

  • loveneetm 3h

    नोटबंदी

    नेताजी ने शोर मचाया,
    कर के नोटबंदी,
    चोरों का तो पता नही,
    पर घर घर छाई मंदी।

    घर खर्चो से बचा बचाकर,
    महिला रही बचाए,
    उन पैसों को लेकर महिला,
    चक्कर बैंक लगाएं।

    व्यापारी नौकरशाहों का,
    हुआ बहुत नुकसान,
    शादी मुंडन क्रिया कर्म,
    सब में आया व्यवधान।

    गरीबों की हालत ना समझे,
    बच ना पाई जान,
    नए नोट पाने के खातिर,
    जनता हुए परेशान।

    संशोधन से पहले नेता जी,
    खोजो समाधान,
    सही तरीके से लागूकर,
    करो देश कल्याण।
    ©loveneetm

  • loveneetm 8h

    आप सभी लेखिकाओ को विनम्र प्रणाम और आप सभी अपना मार्गदर्शन हम पर बनाएं रखे।आप सबकी रचनाएँ ज्ञानवर्धक और सिखने योग्य है।छोटा सा प्रयास किया लिखने का।नमन आप सबको।

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    हाइकु(लेखिका)

    1
    अंकिता काव्य,
    विषय अनुकूल,
    काव्य का फूल।

    2
    अनिता दीदी,
    छंद काव्य की ग्रंथ,
    विनम्र मन।

    3
    राखी बहन,
    अनमोल लेखन,
    सरल भाव।

    4
    जिग्ना जी लेख,
    भावपूर्ण संदेश,
    ज्ञानी विवेक।

    5
    अर्चना दीदी,
    प्रेम पूर्ण संवाद,
    काव्य अगाध।

    6
    दीप्ती जी ज्ञान,
    अविरल महान,
    सरल रूप।

    7
    पूनम दीदी,
    अनुभवी लेखिका,
    भाव सहज।

    8
    दीपा जी ज्ञान,
    लेखन का उत्थान,
    कलम मान।

    9
    अनुपम जी,
    सरल है स्वभाव,
    काव्य भाव।

    10
    निमिषा दीदी,
    कलम की आवाज,
    काव्य की ताज।
    ©loveneetm

  • loveneetm 12h

    रिक्त सीढियाँ

    मैं रिक्त सीढियाँ हर घर की,
    हर जगह हुई सुनसान,
    स्वचालित सीढी ले रही,
    मेरा ही स्थान।

    दोनों में तुलना देखकर,
    हृदय लगे है ठेस,
    एक सूना विरान लगे,
    दूजे पर जन की रेस।

    पर मेरी तुलना कर पाना,
    नही सरल आसान,
    आपातकालीन स्थितियों में,
    मेरा ही आता ध्यान।

    मैं केवल कोई मार्ग नही,
    सेहत की भी हूँ खान,
    कदम बढाएँ जो बढे,
    उसका रखती हूँ ध्यान।

    आधुनिकीकरण की उलझन में,
    तन को ना कर लाचार,
    आलस्य देह हो जाए तो,
    जीवन हो बेकार।
    ©loveneetm

  • loveneetm 13h

    मन दुखी है लक्ष्मण झूला बंद हो गया।ऋषिकेश मेरे हृदय के अत्यंत निकट है।

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    लक्ष्मण झूला

    बंद हुआ एक युग पथ है,
    अवधि हुई समाप्त,
    रह रह आए याद है,
    वो पल जब तुम थे साथ।

    ऋषिकेश मेरे हृदय निकट,
    तू एक रेशम की डोर,
    हे लक्ष्मण झूला तूने,
    जोडा दो पथ का छोर।

    आज तेरी आयु पूरी,
    हृदयगति हुई मंद,
    नयन बहावे सब जन है,
    जिसने जाना तेरा अंत।

    तू भी वृद्ध हुआ सखा,
    झुक गई तेरी पीठ,
    जिस पर तूने वहन किया,
    हर पीढी की रीत।

    तेरी तुलना कर पाना,
    नही शब्द का काम,
    स्मृतियों में तू सदा रहे,
    अमर रहे तेरा नाम।
    ©loveneetm

  • loveneetm 1d

    अनिद्रा

    रात का अंतिम पहर,
    भौर का आगाज,
    ब्रह्म मुहूर्त का आगमन,
    नित्य दिवस का काज।

    यही सोचकर रात भर,
    मैं जागू सारी रात,
    स्वपन निकट ना अब रहे,
    ना भाए उसको साथ।

    वाक्य केवल गढ़ रहा,
    बिना किए विचार,
    ना संगी ना प्रेमिका,
    किस संग करूँ विहार।

    इस कारण इस पहर में,
    ना आए तन को नींद,
    मन आलस्य से युक्त है,
    फिर भी जागे हर दिन।
    ©loveneetm

  • loveneetm 1d

    मैं अपने दुख को सजाऊँ कैसे,
    बिना भाव के गाऊँ कैसे,
    गजल लिखूँ तो मैं कैसे लिखूँ,
    राज को साज बनाऊँ कैसे।
    ©loveneetm

  • loveneetm 1d

    शब्दों की चाल को,
    किसी ने नज्म तो,
    किसी ने शायरी समझी,
    पर जिस भाव से,
    उसको लिखा लिखने वाले ने,
    उसको कोई समझा ही नही।
    ©loveneetm