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  • mamtapoet 7h

    बेटियां

    हर किसी के घर नहीं जन्म लेती बेटियां,
    जिनके सौ भाग्य अच्छे हो,
    वही खिलती हैं ये दुर्लभ कलियाँ।
    बेटे को सब कहते घर का चिराग,
    बुढ़ापे का सहारा,
    वही बेटा जब छोड़े माँ बाप को बेसहारा,
    हिम्मत, संबल, अभिमान बन,
    साथ निभाती हैं बेटियां।
    जिस आंगन में जन्म लिया,
    वही आंगन कभी उसका न रहा,
    समझ नहीं आता क्यों हमेशा पराया धन,
    ही कह लाती हैं बेटियां।
    एक घर नहीं दो घर की रौनक होती हैं बेटियां,
    एक घर की आन तो दूजे का मान,
    होती हैं बेटियां।
    जौहरी बन परख कर लो इनकी,
    मुरझाने लगी हैं ये कैसर की क्यारी याँ।।
    ©mamtapoet

  • mamtapoet 15h

    पहला प्यार

    कहते है जिसे पहली नजर का प्यार,
    इस तीर से घायल हम भी एक बार हुए थे।
    कॉलेज में नया नया एडमिशन मेरा हुआ था,
    गेट के बाहर ही जनाब, वो मित्र के साथ खड़े मिले थे।
    उनका मित्र था मेरी सहेली का मित्र,
    कहीं से देख लिया था उसने मेरा बनाया हुआ चित्र।
    एक दूजे के दीदार की आदत दोनों को हो चली थी,
    बिन बोले ये प्रेम की गाड़ी थोड़ा आगे बढ़ी थी।
    तृतीय आने पर बधाई उसने मुझे दी थी,
    पहली बार हमारी तब बात हुई थी।
    धीरे धीरे बातें बढ़ने लगी थी,
    कॉलेज गेट ही वो प्यारी जगह थी।
    एक दिन पता चला वो पढ़ने के लिए दूसरे शहर गया है,
    तब पहली बार लगा कुछ तो इस दिल को चुभा है।
    फोन नंबर हमने एक दूजे के तब लिए थे,
    फोन पर भी सिर्फ आँसू ही गिरे थे।
    प्यार का समंदर कुछ ज्यादा ही उपर उठने लगा था,
    एक दिन खूब रो धो कर हमने ही उससे अलविदा कहा था,
    प्यार था तो बड़ा प्यारा पर ये हमको न पूरा मिला था।
    मीठी याद बनाकर इस किसस्से को भुला दिया,
    आज फिर हमने खुद को रुला दिया।।
    ©mamtapoet

  • mamtapoet 18h

    #prayasss55

    Preety pandey ji का बहुत आभार उन्होंने मुझे संचालन को आगे बढ़ाने के लिए मेरा चयन किया है, आज का विषय है "पहली नजर का प्यार"। ये वो अनुभूति हैं जिससे शायद ही कोई शख्स होगा जिसने इसे महसूस न किया होगा।
    अपने सुंदर और रोचक अहसासों से हमे भी अवगत कराये और अधिक से अधिक लेखकों से आग्रह हैं कि वो अपनी रचनाएँ प्रस्तुत करे।

    ©mamtapoet

  • mamtapoet 1d

    पति

    एक पत्नी की कलम से पति को परिभाषित करने की मेरी छोटी सी कोशिश_ _ _

    मेरे नाम के साथ नाम तेरा जुड़ना अच्छा लगता हैं,
    रिश्तें में त्याग समर पन हो तो अच्छा लगता हैं।
    राह में चलते चलते, तेरा मुड़ मुड़ के मुझे देखना अच्छा लगता हैं,
    पूजा, यज्ञ हवन में तेरे वामांग में बैठना अच्छा लगता हैं।
    श्रृंगार मेरा तेरे लिए, तेरा मुझको निहारना अच्छा लगता हैं,
    मैं ध्यान रखूं तेरे कुटुंब का, और मेरी परवाह करे तू, अच्छा लगता हैं।
    सपने मैं जो देखू, उनमे रंग तेरा भरना अच्छा लगता हैं,
    पंख मेरे हो, परवाज तेरा हो, अच्छा लगता हैं।
    तुम हो पति मेरे, इसलिए तुम्हारी पत्नी बन कर,
    हर धर्म निभाना अच्छा लगता हैं।।
    ©mamtapoet

  • mamtapoet 1d

    तुम

    बड़ी बदमाश नजरें हैं तेरी
    इन्हें शरीफ न समझा कर,
    जब भी मुड़ के देखती हैं,
    धड़कने दिल की बढ़ा देती हैं,
    सुन ,जरा इन्हें काबू में रखा कर।

    लड़कियों की मुस्कान के तो सभी कायल हैं,
    पर हम तो तेरी मंद हँसी से घायल हैं,
    मुस्कुरा कर न जाने कितने सोये अहसास जगा देती हैं,
    सुन, जुबां का काम हैं जुबा से काम लिया कर।

    शौक नहीं तुझे शेरों शायरी का,
    मुझसे मिलके तुझे भी ये भाने लगे हैं,
    मेरी खातिर अब तू भी ये आदत रखने लगा है,
    मुझे रिझाने के लिए तू भी शायरो में शामिल होने लगा हैं।
    सुन, आदत तूने बदली, क्या यही कम नहीं है।
    ©mamtapoet

  • mamtapoet 3d

    उम्मीद

    दुःख के भँवर में फंसी हूँ, निराशा के बादलों से घिरी हूँ,
    फिर भी बड़ी ही उम्मीद के साथ, उम्मीद का दामन थामे बैठी हूँ।

    अपनो के होते हुए भी अकेले पन से घिरी हूँ,
    कंधे पे तू हाथ रख दे, आस में खड़ी हूँ।

    बुझती जीवन जोत को कोई उम्मीद का तेल पूर दे,
    रोशन वो दिया हो जाए , भवसागर से भी तर जाये।
    ©mamtapoet

  • mamtapoet 4d

    काश के चित्र की जैसे जीवन सँवारना भी आसान होता।
    ©mamtapoet

  • mamtapoet 5d

    धर्म पत्नी

    माता पिता ने धर्म गुरुओं समक्ष तेरे हाथ में मेरा हाथ दिया,
    रीति रिवाज निभाए, विवाह का उसे नाम दिया।

    एक आंगन छोड़ दूजे आंगन में प्रवेश किया,
    अपनो को छोड़ने का गम था, पर तेरी खातिर स हर्ष, स्वीकार किया।

    फेरे हुए,मांग सिंदूर भरा, गले मंगलसूत्र धरा,
    सहमतें हुए अपने घर में पांव धरा।

    सुख दुःख दोनों के एक हुए,
    दो पंछियो के रैन बसेरे एक हुए।

    परछाई बन अब हरपल साथ रहना है,
    धर्मपत्नी हूँ, हर वादा निभाना है।

    भोला तू बन जाना, मैं बन जाऊंगी गौरी,
    इस रिश्तें का नाम रोशन करेगी तेरी मेरी जोड़ी।

    और नये नये इस फुलवारी में फूल खिलाने हैं,
    क्या परिभाषा दू मैं इस रिश्तें की,
    ये या तो जग जाने या तेरा मेरा मन जाने हैं।
    ©mamtapoet

  • mamtapoet 5d

    अंजान

    अंजान राहों में एक अंजान से मुलाक़ात हुई,
    अपना सा लगने लगा वो , उस पल में ऐसी क्या बात हुई,
    बिन बातों के उस अंजान की आँखों ने क्या क्या कह डाला,
    इशारे नैनों से ही होने लगे, अजी क्या बात हुई।
    ना कुछ लब ने कहा, न कुछ सुना,
    और घंटो बात हुई।
    जाते जाते मोबाइल नंबर लिखकर उसने,
    मेरे हाथ में थमा दिये,
    मैंने भी ले लिए चुपचाप, न नुकूर वाली न कोई बात हुई।
    अफसाने शुरू हुए फिर बातों के,
    सिलसिले शुरू हुए मुलाकातो के।
    आज वो प्यार बन गया मेरा,
    एक अंजान से ऐसे मेरी मुलाक़ात हुई।।
    ©mamtapoet

  • mamtapoet 1w

    सफर

    एक रुलाई के साथ जीवन सफर की शुरुआत हुई,
    कितने अपने मिले, राह में बिछड़े, सुख दुःख से मुलाक़ात हुई।
    सफ़र में नए नए हमराह मिले, भले बुरे की पहचान हुई,
    अंजाना, अंदेखा सफ़र, ए बेखबर,
    जरा संभल संभल के गुजर।
    कुछ मीठी यादें किसी को दे,
    किसी के सफ़र का तू भी बन रहगुजर।
    कल की फिकर में आज तू न रो,
    क्या खबर कल इस सफर की शाम हो न हो।