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Reposts
  • manthanprateek 1d

    Thank you @poetryworldorg for giving me opportunity in "Axile of thoughts" and then selecting me for Top-50 poet of 2019 in an anthology "A New Year".

    #manthanprateek

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    ©manthanprateek

  • manthanprateek 1w

    Collaboration with @isent_writer

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    उसके नाम पर पर्दा अक्सर रखता हूं,
    क्यों कोई मासूम मेरे लिए बदनाम हो जाये।
    ©manthanprateek

  • manthanprateek 3w

    ज़िन्दगी नही कीर्तिमान बनाना है,
    जीना ऐसे हैं कि इतिहास बन जाना है।
    ©manthanprateek

  • manthanprateek 5w

    कौन हूँ मैं,
    कागज के पन्नो में लिखी न जाने कितने ऐसे बाते हैं जिसका महत्व काफी बड़ा है लेकिन फ़िर भी मैं इतना अहम क्यों हूँ.... मेरी आवश्कयता क्यों हैं, क्यों सर्विपरि हूँ मैं आखिर क्यों सब धर्म ग्रंथों से भी ऊपर मेरा दर्ज़ा हैं?
    कौन हूँ मैं?


    2 साल 11 महीने 18 दिन का परिणाम हूँ मैं,
    395 अनुच्छेद
    8 अनुसूचियां
    22 भाग में विभाजित निर्माण हूँ मैं।
    299 सदस्यो की लगन
    11 सत्र संग 165 दिनों की बहस

    अखंड भारत का कल्याण हूँ मैं
    भारतीय संविधान हूँ मैं।


    मूल प्रारूप से मैं भी बदला हूँ
    104 संशोधन मुझमे भी हुए हैं
    570 अनुच्छेद
    12 अनुसूचियां
    25 भाग में विभाजित

    समस्त भारत की एकता का प्रमाण हूँ मैं
    भारतीय संविधान हूँ मैं ।

    मूल कर्तव्यों का निर्वहन मुझमें हैं
    लोकतंत्र का गणतंत्र मुझमें हैं
    मौलिक अधिकार मुझमें है
    महान भारत का सार मुझमें है

    स्वतंत्र भारत का अभिमान हूँ मैं
    भारतीय संविधान हूँ मैं ।




    #manthanprateek
    #republicday

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    कौन हूँ मैं,
    कागज के पन्नो में लिखी न जाने कितने ऐसे बाते हैं जिसका महत्व काफी बड़ा है लेकिन फ़िर भी मैं इतना अहम क्यों हूँ.... मेरी आवश्कयता क्यों हैं, क्यों सर्विपरि हूँ मैं आखिर क्यों सब धर्म ग्रंथों से भी ऊपर मेरा दर्ज़ा हैं?
    कौन हूँ मैं?

    (Read in Caption)

    ©manthanprateek

  • manthanprateek 5w

    रिवाजों की बेड़ियो को खोल अपने हाथ से तुम्हें पायल पहनाना चाहता हूँ,


    उलझती लटो से झांकती झुमको में तुम्हें मुस्कुराते हुए देखना चाहता हूँ,


    ©manthanprateek

  • manthanprateek 9w

    ज़िस्म की भूख है
    हवस का बुखार हुआ हैं,

    रूह की बात कर यहां
    ईमान का व्यापार हुआ है,

    तुम पर्दे, शर्म और हया की बातें करते हो
    अजी छोड़ो मियां...

    इश्क़ के नाम पर
    जिस्मफरोशी सरे बाजार हुआ हैं
    ©manthanprateek

  • manthanprateek 9w

    पहले की तरह मैं अपनी सीमाओं को नही लांघता
    अब मैं तुझे किसी भी मंदिर में नही मांगता
    ©manthanprateek

  • manthanprateek 10w

    दुनिया में बवाल मचा है रंग पर...
    पर...
    बस तू... इतना सुन ले

    तू सांवली सी और ये चाय सावला
    मुझे दोनों ही बेहद पसंद है
    ©manthanprateek

  • manthanprateek 11w

    अब तक जितनी भी मिली
    उन्हें कॉफ़ी की ख्वाइश थी

    कोई साथ चाय पीने वाली मिलें
    तब कोई बात बनेगी
    ©manthanprateek

  • manthanprateek 38w

    तेरी नर्म हथेलियों से मज़बूत पकड़ चाहिये
    ©manthanprateek