mayank_333

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Mere alfazon me tum khud ko paoge yaadon ka जागीरदार Instagram- mayank_mikee

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  • mayank_333 3w

    जब काफी समय बाद तुमसे मुलाक़ात हुई तो तुमसे कुछ ऐसा सुनने को मिला कि सब भूल जाओ, मै किसी और की हो चुकी हूं
    तो मै जवाब देता हूं

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    कैसे भूल जाऊं?

    तेरी यादों में मेरी सांस आज भी बसती है
    तेरी तस्वीरें देख मुझे सारी खुशी मिलती है
    तुझको ना जकडू तो ये रातें अधूरी लगती है
    तुझको ना सोचूं तो हर बात बेफिजुली लगती है
    ये रंगीन शामें, ये वादी, ये खुशियों की बहारें
    तेरे आगे ये माचिस की खाली डिबिया लगती है
    मेरे दिल की धड़कन तेरी चारदीवारी में बसती है
    तेरी भावनाओ में ही मेरी कलम की जवानी झलकती है
    मै तुझ से कोई मोहब्बत वापस नहीं मांगता
    बस तुझ संग बीती यादें मुझे मेरी जागीर सी लगती है
    ©mayank_333

  • mayank_333 4w

    आखिरी प्रार्थना

    तेरी दुआओं से जुड़कर बना हुआ हूं मै, कल आंधी में समा जाऊंगा, निशान जितने भी छोड़े है जीवन में मैंने, कल सबके आंसुओं से बहा जाऊंगा

    मिला जब जीवन और होश का साथ उसका एक साक्षी हूं मै, कल मै भी एक पक्षी हो जाऊंगा,गुज़ारा जीवन जिन संग, धूल में मिल कल मै भी उनकी भक्ति हो जाऊंगा

    तेरे निराले रूप का आज वर्णन गान करता हूं मै, कल किसी कोने में लुप्त हो जाऊंगा, इश्क़ के जीवन से सारी चाहतों को, कल मै भी अकेला छोड़ चला जाऊंगा

    मेरे प्रियजनों के अश्रु देख ना पाऊंगा मैं, ना जाने किस अज्ञात दिशा में बह जाऊंगा, संभाल लेना तू मेरे प्रियजनों को, मै लौट फिर अगले जन्म उन तक पहुंच जाऊंगा
    ©mayank_333

  • mayank_333 4w

    रिश्तों की नींव

    जीवन में जब बड़ा झटका लगता है, रिश्तों की नींव का पता लगता है, हर रंग तब फीका लगता है, इंसान खुद में कितना उलझता है, तमाम हालातें होती है

    कभी प्यार कि कगार पे, कभी अपनो की जुदाई से, कभी अहम - वहम की लड़ाई से, इंसान रिश्तों की आग में कितना झुलसता है, सब्र का इम्तिहान शुरू होता है

    उठ खड़ा हुआ तो आसमानों की उचाइयों तक पहुंचता है, टूट गया हौसला तो इंसान धरातल में बिखरता रह जाता है, कई हालातों, ज़ज़बातों का मुंह खुलता है

    वक्त समय पर पलटता है, कभी नसीब का साथी बन, कभी दया की छाया बन ये ढेरों खुशियां उड़ेलता है, रिश्तों की नींव बनने का सिलसिला फिर शुरू होता है..
    ©mayank_333

  • mayank_333 5w

    शे'र

    जब सब तुम्हे एक जैसे लगते है
    मै क्यूं तुम्हे सितारों सा महसूस करवाऊं?
    मैं भी रहता हूं ज़मीन पर
    मै क्यूं तुम्हे अपना खुदा बनाऊं?
    ©mayank_333

  • mayank_333 5w

    @mittal_saab
    #five_words
    Five words challenge
    बारिश,होंठ,साड़ी,आंखें,काजल

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    मिलन

    ये बारिश यादें ताज़ा करती है, आंखों को नम ये करती है
    फिर दर्द हवा में बहते है, आंखों से बयान ये होते है
    तुम मुझसे मिलने आती हो संग बारिश भी लाती हो
    मै बाहें खोल खड़ा होता हूं, होठों में दर्द दबाता हूं
    आंखें बंद जब करता हूं बारिश से जब मै मिलता हूं
    मै तेरा स्मरण जब करता हूं, तुझे महसूस मै करता हूं
    बाहों में जब तू आती है, होंठों पे नरमी दे जाती है
    नम आंखों को मेरी, अपनी साड़ी से पोछ तू जाती है
    अपने काजल का टीका लगा, तू धूमिल हो जाती है
    यह देख गगन शरमाते है, यह देख पवन लहराते है
    यह देख दिशाएं कहती है, यह देख मोहब्बत होती है
    ये बारिश यादें ताज़ा करती है, आंखों को नम ये करती है
    ©mayank_333

  • mayank_333 6w

    ए हमसफर तेरी खोज में अमर हो चुका हूं मै
    तुझको खोजते हुए खुद को खो चुका हूं मै

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    तुम्हे ढूंढता मै

    पल पल के कण कण में मैंने तुम्हे ढूंढा है
    कई धोखे खाने के बाद भी मैंने तुम्ही को ढूंढा है
    बड़ी शिकायतें होती है लोगों को दिल लगाने से
    मैंने उस दिल्लगी में सिर्फ तुम्ही को ढूंढा है
    यूं नफरत कर लेते है लोग मोहब्बत से बड़ी जल्द ही
    मैंने उस नफरत में भी तुम्ही को ढूंढा है
    तुम्हारी खोज में ना जाने कहां कहां भटका हूं मै
    मैंने भटकते भटकते तुम्ही को ढूंढा है
    तुम जब आओगी तो ना जाने किस हाल में होऊंगा मै
    मैंने हर हाल में सिर्फ तुम्ही को ढूंढा है
    ©mayank_333

  • mayank_333 7w

    घटते है सुख दुख की छाओं में ज़िन्दगी के दिन
    कभी सुबह में गुस्से की तपिश बन जल जाए दिन
    कभी शाम के सुकून में गुजर जाए दिन
    कभी काम की थकान में चूर कर जाए दिन
    कभी मेहनत का फल दिखा जाए दिन
    कभी जीवन पर बोझ बन जाए दिन
    कभी चोट बन तन मन दुखा जाए दिन
    कभी वक्त की औषधि बन राहत दिला जाए दिन
    फिर वो एक शामत की रात आती है
    कई आने वाले दिनों पे शामत बन छाती है

    कभी अपनो से मेल मिलाप करा जाए दिन
    कभी अपनो को गैर बना जाए दिन
    कभी तरक्की का सूरज बन जाए दिन
    कभी चांद सी खूबसूरती दिखा जाए दिन
    कभी सुनहरी यादों की बारात सजा जाए दिन
    कभी संकट के बादल बन मंडरा जाए दिन
    कभी अंधकार बन जीवन में छा जाए दिन
    कभी आशा की किरण बन जीवन जगमगाए दिन
    फिर वो एक शामत की रात आती है
    कई आने वाले दिनों पे शामत बन छाती है

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    शे'र

    एक एक इट जोड़, हर ज़ख्म सह इंसान मेहनत करता है
    उस मेहनत का फल देख इंसान खुशियों से भरता है
    और टूट जाती है सारी खुशियां एक पल में
    जब खुदा का तीर किसी अपने को ले गुजरता है
    ©mayank_333

  • mayank_333 7w

    टूटता प्यार

    यूं नजदीकियों के झुकाव में कोई इस कदर खो जाता है
    आपके जीवन को फरिश्ता बनाने वाला इंसान
    आपको कागज सा हल्का लग जाता है
    यूं उड़ जाता है वो कुछ चंद लफ़्ज़ों की फिज़ाओं में
    कल तक हमसाया सा बनकर रहने वाला
    मोहब्बत का नाम बदनाम कर जाता है
    और आशिक़ यूं मलाल करते रह जाता है
    ©mayank_333

  • mayank_333 7w

    आखिरी खत

    ओ मेरी दुलारी तू आज भी मुझे उतनी ही प्यारी है
    तुझे से जुड़ी तमाम यादें, बसती मेरी दुनिया उसमे सारी है
    तेरी जुदाई मुझे खा रही है, ये कलम मेरी आपबीती सुना रही है

    क्या करूं उन तस्वीरों का जिनमें तुम मेरे लिए मुस्कुराती थी
    क्या करूं उन राजों का जो तुम सिर्फ मेरे संग बाटती थी
    क्या करूं उन मंजिलों का जो हमने साथ देखी थी

    कैसे बताऊं दिल को की उसका एक हिस्सा अब जा चुका है
    कैसे मनाऊं मन को की उसे बहलाने वाली अब जा चुकी है
    कैसे जोडूं अब खुद को जो तेरी यादों में टूट चुका है

    तेरा हिस्सा अपने जीवन से कभी निकाल ना सकूंगा
    तेरी याद में जी रहा हूं शायद उन्ही यादों में मर भी जाऊंगा
    तेरे दीदार का मैं अगले जन्म में फिर से इंतजार करूंगा
    ©mayank_333

  • mayank_333 8w

    तुम जो

    तुम जो आधी आंखें बंद और होंठ दबा के मुस्कुराती होना
    वो मासूमियत की झलक तुम्हारे रोम - रोम मे टपकती है

    तुझ संग चंद बातें तो आज भी खूबसूरत एहसास लगती है
    तेरी जुदाई में मुझे आज भी बरकत झलकती है

    तुम जो गुस्सा हो कर कहती हो कि मुझे बात नहीं करनी बस
    कसम से उस गुस्से में तुम्हारी खुशबू और भी महकती है

    तुम जो मुझे अपनी हर कविता में ढूंढती, सजाती हो
    तुम्हारी बेचैनियां तुम्हारे अल्फाजों में बसती है

    तुम जो टेढ़े मेढे मुंह बनाकर मुझे चिढ़ाती थी ना
    तुम्हारी नज़ाकतें मुझे अब भी स्पर्श करती है
    ©mayank_333