meenuagg

instagram.com/agrawal_diary

jo kh nhi pate, likh kr byaan kr dete h...

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Reposts
  • meenuagg 6h

    नाकाम कोशिश...����

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    जाने कैसी कैसी 'ख़्वाहिश' करता हूँ,

    जो 'याद' ही नहीं,

    उसे 'भूलने' की 'आजमाइश' करता हूँ...❣️
    ©meenuagg

  • meenuagg 1d

    दीवार- सदस्य
    मीनार- जर्जर , बर्बाद

    Try kiya kuch alg likhne ka ... Don't know likh payi ya ni..,��

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    घर की एक 'दीवार' को दरख़्त पार कर गया,


    खोखला किया ऐसे, घर को 'मीनार' कर गया...!!
    ©meenuagg

  • meenuagg 2d

    जब भी महसूस करती हूँ तुझे, खो सी जाती हूँ,��
    अपनी धड़कनों से खेलना मुझे पसंद है...❣️

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    चाहते नही हम इश्क़ 'क़बूल' करना,

    रह रहकर 'बेचैन' होना मुझे पसंद है...!!
    ©meenuagg

  • meenuagg 3d

    किसी और के लिए खुद तबाह हो जाते है,
    जाने कैसे लोग इश्क़ की किश्तें चुकाते हैं...!!����

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    ये जो मोहब्बत में खुद को 'तबाह' करते हैं,

    क्या कभी खुद के साथ भी 'वफ़ा' करते हैं...??
    ©meenuagg

  • meenuagg 4d

    Sbse bdi jarurat insan ki...Roti hi h... Or jinko ye nasib nhi... Unki halat byaan krna namumkin sa h...������

    भूख लगी है ज़ोर से, पर जान नही जाती,
    ये ज़िन्दगी भी सताने से, बाज़ नही आती...

    हड्डी निकल गयी है, खाल भी रूखी है,
    आँखें भी बाहर निकली, दे दो रोटी, चाहे रूखी सूखी है...

    बस कुछ निवाले दे दो, पानी से भी खा लेंगे,
    रोटी को तरस रहे हैं, बदले में दुआ ही देंगे...

    फ़ोटो जो आप खींच रहे हो, इससे रोटी मिलेगी क्या?
    हम सब भूखे है बहुत, सरकार पेट भरेगी क्या...??

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    ~रोटी~

    भूख लगी है ज़ोर से, पर जान नही जाती,

    ये ज़िन्दगी भी सताने से, बाज़ नही आती...
    (Read caption )
    ©meenuagg

  • meenuagg 5d

    वो चोट जो कभी दिखती नही,��
    उसकी दवा बाज़ारों में भी बिकती नही...��

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    क्यों रह रह कर सिगरेट जैसे 'सुलगना',
    दिलों का तो काम है...
    'मिलना' और 'बिछड़ना'...!!
    ©meenuagg

  • meenuagg 1w

    #lockdown #india ... Majduron ki majburi hdh se jyada h....

    इस दुनिया का छोटा सा किरदार हूँ,
    हाँ मैं मजदूर, फिलहाल बेरोजगार हूँ...

    छिन गयी है मेरी रोज़ी रोटी,
    जेब में ना चंद सिक्के हैं,
    नंगे पाँव दौड़ पड़ा सड़कों पर,
    कई दिन से भूखे मैं और बच्चे हैं...
    मैं मजबूर ग़रीब, पलायन को तैयार हूं...

    सरकार ने कुछ सोच कर फैसला लिया,
    पर इसमें हम दिहाड़ी मजदूर कहाँ जाए,
    क्या फर्क पड़ेगा किसी को,
    बिमारी से मरे, या भूखे मर जाए,
    तपती धूप में सावन की बूंद का तलबगार हूँ...

    अन्न की चिंता में भटक रहा,
    परिवार मेरा मरघट बन रहा,
    गाँव जाऊं तो मिले कुछ दाना पानी,
    पर वाहनों का भी संकट मिल रहा,
    क्या अपनी इस परिस्थिति का मैं जिम्मेदार हूँ...?

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    ~मज़दूर~

    इस दुनिया का छोटा सा किरदार हूँ,
    हाँ मैं मजदूर, फिलहाल बेरोजगार हूँ...
    (Read caption)
    ©meenuagg

  • meenuagg 1w

    सुनो जाना! जब मैं ना रहूँ... तुम मेरी ये आख़िरी ख़्वाहिश जरूर पूरी करना...
    मेरी कब्र को उसी जगह बनाना, जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद है...
    हाँ! उसी दरख़्त के नीचे... जहाँ घण्टों हम बातें करते थे और हल्की सी भी हवा चलने पे ...उसके वो सुर्ख़ गुलाबी नीले फूल बिखर जाते थे हमारे चारों ओर... और साथ में बिखेरते थे अपनी ख़ुश्बू...!!

    पता है...मुझे आज तक नही पता, उन फूलों का नाम क्या है पर बहुत सुकून मिलता है मुझे वहां...
    मैं मरने के बाद भी हर पल तुम्हे महसूस करना चाहती हूं...

    जब भी मेरी कब्र पे वो फूल गिरेंगे... मेरी रूह उनकी ख़ुश्बू से महक जाएगी...
    शायद! मेरे मरने के बाद.. ये फूल ही है जो मुझे तुमसे जोड़े रखेंगे...!!

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    दरख़्त

    जब भी मेरी कब्र पे वो फूल गिरेंगे...

    मेरी रूह उनकी ख़ुश्बू से महक जाएगी...
    (Read caption )
    ©meenuagg

  • meenuagg 2w

    रिश्तों में नमक बनाये रखे...����

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    गर 'मुक़म्मल' हुआ रिश्ता अपना,

    तो सिर्फ़ 'मिठास' रह जाएगी,

    इश्क़ में थोड़ा 'नमक' भी... जरूरी है सनम...!!
    ©meenuagg

  • meenuagg 2w

    वैसे दर्द मरहम से कम नही...����

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    अगर 'इश्क़' जादू है... तो

    'दर्द' को सुकून कहा जाए...!!
    ©meenuagg