misssrivastava

काव्य��

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Reposts
  • misssrivastava 12w

    तुम कुछ नये से प्रतीत हो रहे हो,
    पर मै अभी भी 'पुरानी' सी हूं..

    तुम हो चुके हो परिपक्व एकदम,
    मै अभी भी बिल्कुल 'बचकानी' सी हूं..

    तुमने खो दिया हैअपना अल्हड़पन
    मै अभी भी 'नादानी' सी हूं..

    खो चुकी है कांति तुम्हारे जीवन की
    मै अभी भी 'नूरानी' सी हूं..

    प्रवाह न्यून हो चुकी है तुम्हारे रुधिर की,
    मै अभी भी बहती 'रवानी' सी हूं...

    तुम फंस चुके हो देह के माया जाल में
    मै अभी भी सारे बंधनों से
    मुक्त पूर्णतया 'रूहानी' सी हूं..

    जैसा लिखा था मैंने कोरे कागद पर
    मै अभी भी 'हमारे प्रेम कहानी' सी हूं..
    ©misssrivastava

  • misssrivastava 17w

    एहसान

    आज फिर एक लड़की ने एक दरिंदे पर एहसान किया है,
    चुप रहकर अपनी इज्जत को कुर्बान किया है...
    ©misssrivastava

  • misssrivastava 18w

    Be a boy

    The sadness inside the heart and the smile on the face, this is the identity of being a boy. Among millions of problems who never breaks he is the boy who never bows.he carries the responsibilities of the family on his shoulders, not knowing how many times he slips to climb the stairs of success.he wants to cry but this humble society does not let him cry because "he is boy".
    If the boys cry then they are weak if don't cry then
    They are stone heart. In this journey of life, we do not know how many times he played with his heart.
    He is tried at every turn of life,from son to father he performs the duty well.He brings his tears out of happiness.somtimes his heart wants to sleeps forever from this tired life.
    "Is is so easy be a boy"
    ©misssrivastava

  • misssrivastava 18w

    लड़का भी

    चाहे दिलो के अंदर कितनी उदासी हो,
    फिर भी चेहरे पर मुस्कान लाता है..
    मां के हाथ से खाने वाला,
    अब खाना खुद बनाता है..
    जब तक पापा की डांट ना पड़े
    तब तक सोने वाला,
    अब जल्दी काम पर जाता है..
    बहन के साथ लड़ने वाला,
    राखी को तरस जाता है...
    पूरे शहर मोहल्ले में हुड़दंग मचाने वाला,
    आफिस तक सिमट जाता है...
    त्योहारों पर सबसे ज्यादा उत्साहित रहने वाला,
    मुश्किल से घर पर एक फोन कर पाता है..
    अपने अल्हड़पन और नादानियों को छोड़,
    अब वो समझदार हो जाता है..
    एक बेटा, एक भाई,एक पति और फिर एक पिता , इन सब का फ़र्ज़ वो बखूबी निभाता है..
    सबकी ख्वाहिशों को पूरा करके,
    अपनी जरूरतों को कुर्बान कर जाता है..
    अपना घर परिवार और शहर छोड़,
    वो सबके लिए खुशियां कमाने जाता है..
    बेटी ही नहीं होती है विदा,
    "बेटा भी पराया हो जाता है"..
    ©misssrivastava

  • misssrivastava 18w

    Why

    If she bleeds on her first night then she is pure.
    But if she bleeds on her periods why is she impure?
    ©misssrivastava

  • misssrivastava 18w

    पाजेब

    आज जब मेंहदी सज रही थी मुझे,
    तभी पांव में मेहंदी सजने की बारी आई,

    और तब मैंने वो 'पाजेब' देखा,
    जो तुमने मुझे तोहफे में दिया था,

    जिसे तुमने अपने हाथो से बांधा था
    मेरे पांव में, उस 'पाजेब' को देख मै
    तुम्हारी यादों में खो चुकी थी,

    कि तभी आवाज़ पड़ी मेरे कानो में,
    "ज़रा ये पाजेब खोलना,इसके बाद
    तुम्हारी हल्दी कि रस्म है"..

    मै अतीत की यादों से तो बाहर आ गई,
    पर पता नहीं क्यों मै वो 'पाजेब' उतार
    नहीं पाई..?
    ©misssrivastava

  • misssrivastava 18w

    'इश्क़'

    जिस दिन तुम्हारे साथ कुल्हड़ भर 'इश्क' पिया था,
    उस दिन हर घूंट के साथ महसूस 'इश्क़' किया था..
    ©misssrivastava

  • misssrivastava 18w

    तुम्हारा जवाब

    कितनी मोहब्बत है तुमसे..?

    चलो इस बार अपने हर्फ में
    नहीं उलझाऊंगी,बस इतना समझ
    लो जितना जाहिर है उससे कहीं ज्यादा.
    ©misssrivastava

  • misssrivastava 18w

    उस रात

    मुस्कुरा दिया था तुमने जब मेरी बचकानी हरकतों पर
    बस वही मैंने अपना दिल हारा था...

    खुशनुमा था पूरा माहौल,और मै तो एकदम आनंदित
    उस रात मिला मुझे खुशियों का पिटारा था..

    यूं इतनी आसानी से मेरा दिल किसी पर आता नहीं,
    ना जाने उस दिन क्यों दिल हज़ार बार वारा था...

    दूर थे हम दोनों,लेकिन फिर भी लग रहा था ऐसा
    बैठे है हम दोनों एक दूसरे का हाथ थामकर
    और वहां गंगा का किनारा था..

    थोड़ा हिचकिचा रहे थे तुम,ज़रा शर्मा रही थी मै,
    झुका के मेरी नज़रों ने तुम्हे हल्का सा निहारा था..

    वो रात बेहद खूबसूरत थी,चांद भी हमें देख
    मुस्कुरा रहा था, आज आसमां भी लग
    रहा कोई हसीन नज़ारा था...

    खूब बाते हो रही थी हमारी,
    और बातो ही बातों मर मैंने दिया तुम्हे
    एक खूबसूरत इशारा था...

    और फिर तुमने कहा की अभी जाना होगा,
    कह तो दिया था मैंने "ठीक है" पर उस दिन तुम्हारा मुझसे
    दूर जाना मुझे कहां गवारा था..

    अभी रिश्ते बन रहे थे हमारे,पर लग रहा
    था मानो जैसे जन्मों से रिश्ता हमारा था...
    ©misssrivastava

  • misssrivastava 18w

    एक सवाल

    क्या आपकी यह सोच आपको एक असली मर्द बनाता है?
    औरत वासना है?
    औरत एक वस्तु है?
    औरत एक गुड़िया है?
    औरत सिर्फ एक कठपुतली है?
    उसका कोई दिल नहीं है, उसे तो भावनाएँ नहीं होनी चाहिए। उसका यहां कोई अधिकार नहीं है।
    उसे कभी भी अपनी आवाज नहीं उठानी चाहिए। उसकी न कोई पहचान है और न ही सपने। मेरी इच्छा उसकी आज्ञा है। उसे मेरी हर सनक और मांग पूरी करनी चहिए, ऐसा करने में नाकाम रहने या उसे पार करने की हिम्मत न करने पर, वह उसका भुगतान दोगुना कर देगा। मैं एक असली मर्द हूँ , वह एक औरत है, इसलिए उसका कोई आस्तित्व नहीं है..
    ©misssrivastava