moh_hitt

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बेशर्म गुस्ताख़।।

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  • moh_hitt 3d

    खुदा ऐसी खुदाई दे , मेरे कलम में ऐसी सियाही दे,
    कि "आहट" लिखूं अल्फाज़ो में मै अपने
    और "गूंज" तुम सभी को सुनाई दे।।।

    ©moh_hitt

  • moh_hitt 3d

    न कभी बाते हुई हमारी न ही मिले कभी
    और शायद तुमने कभी ठीक से मुझे देखा भी नहीं होगा,
    पर बावजूद इसके तुमसे बिछड़ने का दर्द उतना ही होगा
    जितना तुम्हारा मेरे साथ होने के बाद बिछड़ने पर होता।।।

    ©moh_hitt

  • moh_hitt 1w

    जिससे बात हो रही थी बरसो से ,

    कल वो बेग़ैरत हमे wrong number बता गई।।

    ©moh_hitt

  • moh_hitt 1w

    जितने संभाल पाओ , दोस्त उतने ही बनाओ।।।।

    ©moh_hitt

  • moh_hitt 1w

    कभी याद आए तो इत्तिला कर देना

    हम भी अपने आप को ढूंढ रहे हैं।।

    ©moh_hitt

  • moh_hitt 2w

    तलब तो उस बंज़र ज़मीन को भी है हरे घास की

    पर मसला ये है कि वो खुद को दोबारा कुरेदना नही चाहता।।

    ©moh_hitt

  • moh_hitt 2w

    आपको पता है प्रेम अंधा क्यों होता है?

    क्योंकि आपकी “मां" ने आपका चेहरा देखने से पहले ही आपसे प्रेम करना शुरू कर दिया था।।।

    ©moh_hitt

  • moh_hitt 2w

    क्या ख़ाक किसी से इश्क़ कर पाएगा वो

    जिसकी खुद से ही रंजिशें तमाम रहती हो।।।

    ©moh_hitt

  • moh_hitt 2w

    इधर भी फ़रेबी और बेशर्म लोग भरे हुए है।।।

    ©moh_hitt

  • moh_hitt 2w

    यहाँ से भी अब चला जाऊंगा, लोग शायरी, कविता लिखने से ज्यादा मीम पोस्ट करते है इधर।।

    ©moh_hitt