monikakapur

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author of Melange-the potpourri of emotions, a painter, a mom

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  • monikakapur 1d

    Wear your scars with aplomb
    They recite poems of your strength
    Moon looks perfect with its imperfections
    All real without any pretense

    ©monikakapur

  • monikakapur 2d

    हज़ारों शिकवे-शिकायतें,
    दुआ का वक़्त ही नहीं
    फिर कहते हैं ज़िंदगी आसान ही नहीं
    ©monikakapur

  • monikakapur 3d

    इजाज़त हो तो

    इजाज़त हो तो इन सुनसान गलियों को तेरी यादें से भर दूँ
    इन खामोशियों की हरेक दास्ताँ नाम तेरे कर दूँ



    ©monikakapur

  • monikakapur 4d

    At the Centre of your being,
    In your heart ,
    Resides a resplendent sun,
    since always,
    Love thyself,
    Dwell there for some time,
    Feel a bliss of the morning
    Light and warmth will follow you



    ©monikakapur

  • monikakapur 5d

    हम चाय सोचते हैं, बस
    मौसम खुद ही हसीन हो जाता है
    ©monikakapur

  • monikakapur 1w

    I love red
    It’s , my favorite colour
    The colour of feminism
    The colour of valour
    Red the Colour of revolt , of renunciation,
    The Colour of fire ,the Colour of liberation
    The Colour of energy that gushes inside us
    The power of the red mouth that burst open in spurts
    ©monikakapur

  • monikakapur 1w

    ये वक्त गुजर ही जाएगा
    ये वक्त गुजर ही जाएगा

    माना काँटों का वसंत है अब
    पर पुष्प कहाँ, कब रुकता है
    काँटों के मध्य, बिना भय के
    वो धीमे धीमे खिलता है
    ना विचलित है पतझड़ से जो
    वो सुमन मधु दे जाएगा
    ये वक्त गुजर ही जाएगा
    ये वक्त गुजर ही जाएगा

    गलियों में फैला सन्नाटा
    निस्तब्ध करे है जो मन को
    वहाँ फ़िर से रौनक़ आएगी
    स्वागत करती अपनेपन को
    जो कर दे हर्षित कानों को
    कोई मधुर गीत वो गाएगा
    ये वक्त गुजर ही जाएगा
    ये वक्त गुजर ही जाएगा

    है रात ज़रा लम्बी तो क्या
    परिवर्तित उसको होना है
    सूरज की रश्मि में धूल धूल
    इस तम को रंजित होना है
    फ़िर भय की रात मिटा कर के
    एक निर्मल सूरज आएगा
    ये वक्त गुजर ही जाएगा
    ये वक्त गुज़र ही जाएगा

    ©monikakapur

  • monikakapur 1w

    Her pillow
    Her reservoir
    Of stories
    ©monikakapur

  • monikakapur 1w

    वक़्त

    मैं रुक भी जाता मगर
    रुकना कहाँ मेरी फ़ितरत में था
    मैं बुरे वक़्त में ज़रा तेज़ी से गुज़र जाता मगर
    मर्ज़ी से चलना कहाँ मेरी क़िस्मत में था

    ©monikakapur

  • monikakapur 1w

    मेहंदी

    मेहंदी

    हौसलों के पत्थरों पर,
    पसीने से सींची जाती है
    ये मेहंदी मेहनत की
    रंग ज़रूर लाती है ।

    इसकी ख़ुशबू से महकता जीवन
    इसके रंग से खिलता तन मन
    हो डगर चाहे कठिन
    ये बिखरती जाती है
    ये मेहंदी मेहनत की
    रंग ज़रूर लाती है

    बिना इसके है फीकी सफलता
    ना ख़ुशी ना ही संतोष मिलता
    अपनी ठंडक दे कर
    दिल शीतल किए जाती है
    ये मेहंदी मेहनत की
    रंग ज़रूर लाती है
    ©monikakapur