morningray

SACHI SHUKLA ✨ #scribbler ���� #Upcoming Doctor . #Kindly DON'T Follow to Unfollow .

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  • morningray 6w

    #My Version Of Celebration .

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    Celebration

    If I can make one saddened face smile...
    It's a celebration for me .
    If I can soothe one wrenching heart....
    It's a celebration for me .
    If I can save a dying soul and heal a wounded ....
    It's a celebration for me .

    Moments in life that we live as humans
    Are like pearls in the garland of Memories
    Today if I am the ONE chosen to Do
    It's a celebration for me .


    Life itself is a celebration my friend....
    Condition is to Change your Defination
    Swear to give more than your desire
    And you will cherish the celebration...
    Irrespective of any day or occasion....
    Till Eternity .
    ©morningray

  • morningray 6w

    क्या फ़ायदा ऐसे रास्तों पे चलकर मंज़िल ढूंढने का ....
    जहा सिर्फ धुंध हो और
    चलते - थकते तुम ...
    बेनिशान ।।

    ©morningray

  • morningray 6w

    #To Me From Me On My Birthday ��☺️

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    Take The
    Love
    Gain
    Loss and
    Pain
    With Stoic bliss and jovial Sane .

    -SACHI SHUKLA ✨

    ©morningray

  • morningray 8w

    #lil Bit of self motivation is a must . ��

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    DREAM

    DREAM !
    Yes it will make you fall .
    Sometimes it's the hardest to crawl .

    DREAM !
    Coz it will take thousand ways .
    To stand high on the end of your maze .

    DREAM !
    In this journey every cell will get considerable change .
    You will my friend ; learn how to cut to the chase .

    DREAM !
    Believe that you are born to win and celebrate .
    Yes To Celebrate :
    Each and Every peaks and valleys that sun and moon differentiate .

    DREAM !
    It will start with one and go on for several years and days .

    But you keep going ;
    In the search of destination called life ;
    On an unpaved path called failures ;
    Voiding all the Haze .

    ©morningray

  • morningray 8w

    तेरी मेरी लड़ाई मे
    मांग हमेशा एक ही रही ।
    सिर्फ मांगा तो तेरा वक्त मांगा
    फिर भी "बेवफा" बदनाम ही रही ।।

    ©morningray

  • morningray 8w

    यूं ही

    मै कोशिश हर बार करती हूं ।
    कि तुमपे ऐतबार बिना हिसाब-किताब करती हूं ।

    तुम हर बार बदलते हो ।
    जाने कैसे झूठ को सच जैसा कहते हो ।

    मै फिर से खुद को समझाती हूं ।
    कि चलो अब से मै भी समझदार बन जाती हूं ।

    तुम फिर से आकर मुझ पे मुस्कुरा कर वार करते हो ।
    तुम अपनी कलम से
    मेरी समझदारी का कत्ल ए आम हज़ार करते हो ।।

    फिर से मै कोशिश हर बार करती हूं ।
    कि हद को भुला खुद को खुद से बेज़ार करती हूं ।।

    ©morningray

  • morningray 8w

    वक्त २

    कलयुग से कही पहले
    सतयुग के युग में
    राम और कृष्णा के
    लिलाओ के दृश्य अद्भुद में
    तब भी था मै
    उस दुग्ध से संचित भूमि से
    रक्त में लतपथ रण भूमि पे ।

    क्षणभंगुर यात्रा तुम्हारी देखता रहा
    यात्रा मेरी तो सदा ही प्रारब्ध है ।।

    अगर होता पता मुझे की मै बीतता हूं ।
    नए युगों के आगाज़ का रचयिता हूं ।।

    राम के रामायण
    कृष्णा के महाभारत का
    एकमात्र स्वयं साक्षी और स्वयं ही प्रणिता हूं ।
    तो शायद इन नेत्रों को बहका लेता
    नई पीढ़ीयो को बात ये समझा देता ।।

    कि चहकती इठलाती पृथ्वी को
    यू लड़ कर मरू छेत्र बनाया तुमने प्रकृति को
    मनुष्य तुम्हे क्या मिला
    घृणा से सीच हृदय रूपी धरती को ??

    ©morningray

  • morningray 8w

    वक्त

    वक्त को क्या पता कि वो बीतता है
    बीतता वो कभी खुद से भी जल्दी
    तो कभी वो सुई काटो सी चुबती हर वक्त ही ।।

    वक्त को क्या पता कि अभी
    हा अभी ही हमे लगता था कि लड़कपाना है
    और अब वक्त ने धुन नई तान नई
    ज़िन्दगी में राग नई
    उलझनें नई पिरो दी ।।

    ये कहकर कही हमे अकेला पाकर
    कि "मै" बदल गया
    वो बचपन जो किसी वक्त था तेरा
    वो तेरे हाथों से फिसल गया ।।

    सुनकर ये सच ;
    एक सिसक उस बाल्यावस्था के अवशेष की ;
    बेरहम वक्त के बढ़ते सालों ने सुनी ।।

    खैर....
    जिम्मेदारियों ने अंगड़ाइयां लेना सीखा ।
    तभी
    जीवन रूपी रंगमंच पे वक्त ने चंद बाते सिखलायी ।
    अरे ये है वक्त वक्त की बात
    कल जो तेरा था
    बालपन वो अब किसी और का हुआ ।

    अनंत ये लीला है मेरी
    चलती ही जायेगी ।।
    तू रहगीर है मेरा
    यू विचलित तेरी हस्ती
    पथ मे तेरे बाधाए हसती ही जयेगी ।।

    वक्त को पता भी नहीं था
    कि वो बीतता रहा
    धीरे धीरे बिना शोर के सरकता रहा
    इन हाथों में कब कहा ठहरा वो
    अपनी निरंतर गति से बस
    वक्त बेवक्त
    मृगतृष्णा का सीना चीरता रहा ।।

    ©morningray

  • morningray 8w

    तू सिखाती गई
    सिखाती गई ।

    पलके गम छिपाती गई
    छिपाती गई ।

    रात दिन बदलते गए
    बदलते गए ।

    पहेली सुलझाते कदम चलते गए
    बस चलते गए ।।

    ©morningray

  • morningray 10w

    रिश्ते निभाने की कशमकश में
    ज़िन्दगी को कही पीछे छोड़ आये ।

    उन्हें फिर भी खुशी ना मिली
    जिनके लिए हर खुशी से हम मुंह मोड़ आये ।।

    ये दस्तूर ही कुछ ऐसा है ज़माने का
    जो नजरअंदाज करे
    उसी के सारे अंदाज़ पे जा लूटा आए ।

    कहना क्या अब सुनना क्या
    इतना ही पता कि गिरफ्त में वक्त के जो
    वो हर लम्हा हम यादों के पिंजरे में जोड़ लाए ।।

    ©morningray