msr_prose

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@kalamsnehi @lafzbaz Loves the langs of love because "ishq hua nahi magar fir bhi har kissa ishq se talukh rkhta hai"..

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  • msr_prose 13w

    तेरे इश्क़ में फ़ना होने के बेसब्री से इंतज़ार में हूं,
    जिस दार पे हो रहे है सर क़लम आशिकों के,
    आज मैं भी उस क़तार में हूं।
    बस थोड़ी सी उल्फ़त हो रही है मुझे इस
    दरिया में डूबने से,
    क्योंकि मेरी कश्ती सहिलो पर थमी हुई है,
    और मैं मुसाफ़िर मझधार में हूं।
    ©msr_prose

  • msr_prose 14w

    Father's Day

    मंज़र चाहे जो भी हो, कितना ही जटिल क्यों न हो,
    हर परिस्थिति में तूने मुझे ढलना सीखा दिया।
    मां ने तो फ़खत मेरी उंगली थामी थी,
    मगर तूने मुझे अपने कदमों पे चलना सीखा दिया।

    इस रंगीन सी दुनिया में अपने दुख को दफ़न कर,
    आंसूओं को पत्थर बना अपने आलिंगन पर मल दिया।
    मैं घूमता था अल्हड़ सा, अधनंगा सा इस जहां में,
    अपनी चमड़ी को चादर बना मेरा लिबास बदल दिया।

    पुख़्ता सी इन राहों पर और चलती दमकती इन सांसों पर,
    ज़िन्दगी की ये बदलती तस्वीर महज़ एक कसौटी है।
    इस जहां की हरकतों को मैंने बहुत आज़मा के देखा,
    मगर नतीज़ा ये पाया कि, तेरे आसमां तले मेरी ज़मीं छोटी है।

    हर पल के लिए अहम तो तूने मुझे बनाया है,
    तेरी वालिदगी को चमन बनाना ख़ुद में ही एक सूफ़ी है।
    और कितना साझा करूं इन चंद पुच्छेले अल्फाजों में,
    तेरी बंदगी को बयां करना समझदारी नहीं, बेवक़ूफ़ी है।
    ©msr_prose

  • msr_prose 14w

    तेरे इश्क़ में...

    तेरी गलियों में घूमता रहता हूं आंखो का पानी बिछाते-बिछाते।
    ज़माना बीत गया और सदी आ गई, तुझे ग़ज़ल में तब्दील कर गाते-गाते।

    तेरी तस्वीरो का वजूद है मेरी ज़िन्दगी से कहीं ज्यादा,
    कभी उनको देख के निकलता है दिन, तो कभी गुजरती हैं राते।

    तुझे याद है जिस तस्वीर में लगती है, तू सबसे ज्यादा ऐठी हुई,
    पूरी रात लग गई मुझे पेच-ओ-ख़म में, कि उस नींद से तुझे उठाते-उठाते।

    अचानक छूट गई मेरे हाथ से और बिखर गई फर्श पर वो हसीं यादें,
    फ़िर तो मेरी पूरी रात गुज़र गई गिरता पानी पोंछते पोंछते, और उन तस्वीरों को सजाते-सजाते।

    मेरी वफ़ा का इतिहास छिपा हुआ है तेरे इन कूंचों में,
    इन्हीं में तबाह जो हुआ था मैं, तेरे इश्क़ में धूम मचाते-मचाते।

    लगा ही लिया मौत ने मुझे एक दिन गले, बर्शर-ए-दरिया।
    निकल ही गई तेरी सादगी को जाया करते करते मेरी सांसे, तेरे कठोरपन को बचाते-बचाते।
    ©msr_prose

  • msr_prose 14w

    अफ़लातून

    एक जमाने में मैं सिर्फ उसे उसके नाम से जानता था,,
    मगर कुछ वक़्त पलटने के बाद, अब मैं उसे उसकी रूह से पहचानता था।।
    बस बात इतनी सी थी कि अब बयां नहीं की जा सकती,,
    वो ज़ईफ़ यादें अब जवां नहीं की जा सकती।।
    हां... थोड़ा सब्र करो तो बता सकता हूं,,
    क्या मैं तुम्हारा थोड़ा वक़्त लेके तुम्हें भी उसकी यादों से सता सकता हूं।।
    उसके साथ मुझे खुशनुमा सा प्रतीत हो रहा था,,
    मैं बेखबर था इस बात से कि वहां से मेरा सोने जैसा अतीत शुरू हो रहा था।।
    उसकी कुछ यादें अभी भी तितली बनकर मेरे दिल के गुलसितां में घूमती हैं,,
    अहसास करता हूं जब-जब उसका मेरी पलकें उन अश्कों को चूमती हैं।।
    धीरे-धीरे मैं भी उसको जान रहा था,,
    मेरा दिल उसे मुझसे भी ज़्यादा अपना एक अहम हिस्सा मान रहा था।।
    अब ये दौर उस उरूज़ पर पहुंच गया था ,,
    जिस मंजिल को पाने निकला था अब वो रास्ता वहां नहीं था।।
    पता नहीं कि ये गीत था कि ख्वाब वो तराना हो रहा था,,
    मेरा नसीब तो हैरतअंगेज था ही , और मैं महाराणा हो रहा था।।
    अब तो मैं उसके सामने पूरा बेपर्दा बन गया था,,
    पता नहीं चला कि कब वो मेरा ख़ुदा बन गया था।।


    और आज तो देखो....
    कुदरत ने कैसा खेल रचा दिया,,
    मेरे महबूब को ही मेरा मुखालिफ बना दिया।।
    एक ख्याल आता है मन में कि---
    तूं इन हसीं ख़्वाबों नींद कैसे सो सकता है,,
    तूं अपने ख़ुदा के खिलाफ कैसे हो सकता है।।
    थोड़ा तो गुरूर मुझे भी हो रहा था,,
    मैं अपने ख़ुदा के सामने हारने को मजबूर हो रहा था।।
    पता नहीं उसे आईं या नहीं मगर मुझे तो बेवजह आ रही थी,,
    उससे हारने में तो मुझे बेशुमार वफ़ा आ रही थी।।

    अब तो उसे भी महसूस हो गया होगा कि उसका मेरे बिना गुज़ारा न होगा,,
    उसने हराया होगा बहुतों को मगर, हम जैसा कोई हारा न होगा।।
    बस अब यहीं एक अदब सा किस्सा था,,
    अटूट , अजर और संवरती जिंदगी का एक अहम हिस्सा था।।
    बस अब यहां से तो एक ऐसा राग प्रकट हुआ कि वो मेरे कानों की धून बन गया,,
    अब वो मेरे लिए केवल हमसफ़र ही नहीं था,
    '" अफ़लातून '" बन गया।।
    ©msr_prose

  • msr_prose 14w

    सुशांत....!

    ये आसमां भी कितना नाजुक हो गया है,
    इमरोज़ एक चमकदार सितारा तोड़ देता है।
    कभी बहा देता है कायनात को सैलाब-ए-केदारनाथ में,
    तो कभी दिल को छिछोरे ख्यालों से जोड़ देता है।

    कोई पोंछे तो, पोंछे कैसे इन अश्कों को,
    पलकों के मकम्मले शॉल पर ये कैसे जम गए हैं।
    राबता रहता था ख़ुद से जिन सांसो के दर्मियां,
    ग़म-ओ-हसीं के ताकतवर लम्हें, न जाने
    किस इंतज़ार में थम गए हैं।

    ये कैसा अचम्भित दौर है,
    हर एक पल विक्रांत हो गया।
    जिस तूफ़ान को देख लगा लेते थे,
    अंदाज़ा अपने मनोरंजन का
    वो सख्स भी आज शांत हो गया।
    ©msr_prose

  • msr_prose 15w

    दर्द की धुन

    पाश-पाश हुआ हूं तुझे रिझाने में मैं,
    मेरे ख़्वाबों के दस्तूर को ज़रा बुन के देखो।

    ये इमारतें बड़ा सताती है मुझे अपना अदब दिखा,
    इसकी दीवारों में तब्दील हुए पत्थरों को चुन के देखो।

    इश्क़ मरता रहता है इमरोज़ इन गलियों में,
    हैरत न हो चलते चलते यहां धब्बे फखत खून के देखो।

    यूहीं निकलता रहेगा ये कारवां बेहिसाब यहां,
    इसमें शामिल उन तमाम आहटों को गौरतलब हो सुन के देखो।

    दिल में कैद पड़े हैं इश्क़-ए-अल्फ़ाज़ कुछ यूं कि,आज उन्हें सुनो
    नहीं सिर्फ़ तसव्वुर करो, इन हवाओं में इस मिट्ठे दर्द की धुन को देखो।
    ©msr_prose

  • msr_prose 16w

    हर घड़ी....

    हर घड़ी तेरे इंतज़ार में, मैं पागल इस कद्र हुआ,
    इज्तिराब-ए-महफ़िल में शराब को भी न छुआ
    इन संगीन राहों और ऊंचे अगरोचो में,
    ढूंढा मैंने युंकि पग भर गए मोचों में।
    अब लगता है कि तुझसे रूबरू होने का
    कोई और समूचा नहीं है,
    तन्हा किया ख़ुद को मैंने इतना कि,
    छिप के रोने का कोई कूचा नहीं है।
    मेरे नसीब में तो तू नहीं, बस इतना सा रहम कर दे,
    झूठा ही सही मगर एक रात ख़्वाब में आ, वफ़ा-ए-वहम कर दे।
    ©msr_prose

  • msr_prose 16w

    Life is....

    Once, l went to my village and talked to a old man that what is life ,...

    Very well answered by him that
    " Those who try to find out the speciality in each and every thing keeping a sweet smile on his/her face.
    The life is boon for them...."

    And "Those who mingle with this illogical world they just face obstacles on their ways.
    The life proves to be impediment for them.."
    ©msr_prose

  • msr_prose 16w

    अधूरी सी....

    रहगुज़र उसकी, उसके होठों से बयां हो गई।
    निशानी मेरे दीवानगी की मुस्कराहट में खो गई।

    यूंही सस्ता नहीं मेरा इश्क़ कि, हर लम्हा जलील हो,
    वफ़ा से बहुत बैर है, दुआ करो तो दलील हो।

    उभरी हुए सांस को भी, कैद करले इस बदतरज़ सीने में
    महबूब बन जाए मुखालिफ तो मज़ा आता है जीने में।

    हां, पता चला मुझे भी कि महोब्बत दो क़िस्म की होती है,
    एक मुकम्मल हो तो, दूसरी अधूरी सी हो रोती है।

    बस फ़िर क्या हुआ कि मुझे भी महोब्बत कह गई,
    मैं मुक्कमल तो ताउम्र रही, मगर अधूरी रह गई।
    ©msr_prose

  • msr_prose 16w

    Chemistry

    Well,
    your love is like chemistry for me.
    First I was a noble element but suddenly I lost an electron and reacted with you. I unable to react with any of the element but our compound was stable. I considered as the first element of 19th group of periodic table and you too kept with me in that group.
    Our properties were really exceptional in the world of gases because your electron stroke in my heart as nucleus. You came in my heart and filled my orbitals.
    ©msr_prose