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  • munsibshayar 81w

    रोग

    थोड़ी-सी दवा के जरिए
    क़ोई इश्क़ मिला डालो
    ये वो रोग है जिसकी दवा
    हाक़िम कहाँ जाने?

  • munsibshayar 81w

    रोग

    थोड़ी से दवा के जरिए कोई इश्क़ मिला डालो,,,,,
    ये वो रोग है जिसकी दवा हाक़िम कहाँ जाने?
    ©munsibshayar(साहेब)

  • munsibshayar 81w

    Nigahen

    क़यामत है ज़ालिम की नीची निग़ाहें
    ख़ुदा जाने क्या हो ग़र नज़रें उठाले,,,,

    करें क्या जो कोई वो आएं यकायक
    निग़ाहों को रोकें या दिल को सम्भालें,,,,,
    ©munsibshayar(नुसरत साहब)

  • munsibshayar 82w

    फाई'दा

    हाँ मेरी आवाज़ में
    थोड़ा-सा कर्कसा-पन है
    ये तेरी याद में रोने
    का फाई 'दा हुआ है

    हाँ मेरी आँख में
    थोड़ा-सा सूना-पन है
    ये तेरे आने के इन्तिज़ार
    का फाई'दा हुआ है
    ©munsibshayar

  • munsibshayar 82w

    Nsha

    ना इस शाम में नशा
    ना मैंने शराब पी है

    ये उनके इश्क़ के जरिए
    मैं बहका-बहका लगता हूँ
    ©munsibshayar

  • munsibshayar 83w

    ग़र्दिशों के मारे हुए न
    दुश्मनों के सताए हुए हैं,,,,

    जितने भी जख़्म हैं
    मेरे दिल पर
    दोस्तों के लगाए हुए हैं

    नुसरत साहब
    ©munsibshayar

  • munsibshayar 83w

    वाह!

    वाह! मेरे वक़्त का बर्बाद हो जाना
    वाह! तेरा ईद का चाँद हो जाना

    वाह! मेरी चाहतों का यूँ ही दबाना
    वाह! मेरा इश्क़ में फ़ना भी हो जाना
    ©munsibshayar

  • munsibshayar 83w

    वाह!

    वाह! तेरे दोज़ख़ की चार दीवारें
    वाह! मेरी ज़न्नत का नूर-ए-आलम

    वाह! तेरे हुस्न का छलकता पैमाना
    वाह! मेरे इश्क़ की बंजर-सी जमीनें

    वाह! तेरे ज़िगर में चाहत का नज़ारा
    वाह! मेरा दर्द से तड़प के मर जाना
    ©munsibshayar

  • munsibshayar 83w

    दीवार

    वाह! तेरे दोज़ख़ की चार दीवारें
    वाह! मेरे ज़न्नत का नूर-ए-आलम
    ©munsibshayar

  • munsibshayar 84w

    हमनफ़स

    ऐ-मेरे हमनफ़स दो लफ़्ज़ मेरे चुरा ले
    अपने आगे नाम के तू बे_वफ़ा लगा ले
    ©munsibshayar