neha__choudhary

Mind talk or you can say, 'Self talking' , works like an exercise for the soul.

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  • neha__choudhary 7h

    22-09-2020

    1. पतित-पावन वा श्री श्री 108 जगतगुरू एक को ही कहा जाता है। 
    2. शिव के आगे त्रिमूर्ति जरूर चाहिए। यह भी लिखना है डीटी सावरन्टी आपका जन्म सिद्ध अधिकार है। सो भी अभी कल्प के संगम युगे।
    3. इस समय एक भी पावन है नहीं। सब एक-दो में लड़ते, गालियाँ देते रहते हैं। बाप के लिए भी कह देते हैं - कच्छ-मच्छ अवतार। अवतार किसको कहा जाता है यह भी समझते नहीं।
    4. गृहस्थ व्यवहार में रह पवित्र बनना-यह बहादुरी का काम है। महावीर अर्थात् वीरता दिखाई। यह भी वीरता है जो काम संन्यासी नहीं कर सकते, वह तुम कर सकते हो। 
    5. तकदीर में ऊंच पद नहीं है, तो टीचर भी क्या करेंगे। ऐसे तो नहीं आशीर्वाद से ऊंच बना देंगे। अपने को देखना है हम कैसी सर्विस करते हैं। 
    6. सतयुग में खुशी से एक शरीर छोड़ दूसरा लेते हैं। यहाँ तो रोने लग पड़ते हैं, सतयुग की बातें ही भूल गये हैं। वहाँ तो शरीर ऐसे छोड़ते हैं, जैसे सर्प का मिसाल है ना।
    7. अन्त में कर्मातीत अवस्था को नम्बरवार सब पहुँच जायेंगे। कितना फायदा है। 
    8. बड़ी लड़ाई छिड़ेगी तो बॉम्बस चल पड़ेंगे। देरी नहीं लगेगी। सयाने बच्चे समझते हैं, बेसमझ जो हैं, कुछ नहीं समझते हैं।
    9. बाप कहते हैं अपनी पत (इज्जत) मत गंवाओ। पढ़ाई में लग जाने का पुरूषार्थ करो। 
    10. कोई बदमाश अन्दर घुस आये, हाथ लगाये तो डन्डा लगाकर भगा देना चाहिए। डरपोक थोड़ेही बनना है। शिव शक्ति पाण्डव सेना गाई हुई है ना।

  • neha__choudhary 1d

    21-09-2020

    1. अब जो कुछ श्रीमत कहती है, उसमें ग़फलत न करो।
    2.  दिल में संकल्प आता है गुस्सा करें, अब बुद्धि तो मिली है-अगर गुस्सा करेंगे तो पाप बन जायेगा। 
    3. आत्मा एक शरीर छोड़ दूसरा लेती है। गॉड फादर के पास तो कोई जा न सके। तो अब तुम बच्चों को अविनाशी बाप की अविनाशी याद चाहिए।
    4. प्यार से समझाने से हाथ आ सकते हैं परन्तु उस प्यार में भी योगबल भरा होगा तो उस प्यार की ताकत से कोई को भी समझाने से समझेंगे, यह तो जैसे ईश्वर समझाते हैं। 
    5. मन्सा में आने से वह शक्ल में भी आ जाता है। कर्मेन्द्रियों से कर लिया तो रजिस्टर खराब हो जायेगा। 
    6. तुम्हारा एम ऑब्जेक्ट तो यह खड़ा है, बैज तो तुम्हारे पास है, जैसे अपना पोतामेल देखते हो तो बैज को भी देखो, अपनी चाल-चलन को भी देखो। कभी भी क्रिमिनल ऑखें न हों।
    7. सब कोई इकट्ठे थोड़ेही आयेंगे। आयेंगे फिर नम्बरवार, ड्रामा में कोई बिगर समय एक्टर थोड़ेही स्टेज पर आ जायेंगे। 
    8. एक बाप ही कहते हैं मनुष्य सृष्टि रूपी झाड़ का बीज मैं हूँ। बीज में झाड़ समाया हुआ नहीं है लेकिन झाड़ का ज्ञान समाया हुआ है। 
    9. वह एक्टर्स करके 2-4 घण्टे का पार्ट बजाते हैं। यह तो आत्मा को नैचुरल पार्ट मिला हुआ है तो बच्चों को कितनी खुशी होनी चाहिए। 
    10. कोई बच्चे खुद ही अगर क्रोधी हैं तो दूसरे में भी प्रवेशता हो जाती है। ताली दो हाथ की बजती है। वहाँ ऐसे नहीं होता। 
    11. यहाँ तुम बच्चों को शिक्षा मिलती है - कोई क्रोध करे तो तुम उन पर फूल चढ़ाओ। प्यार से समझाओ। 
    12. सारे सृष्टि के मनुष्यों की चाल-चलन का, सब धर्मों का तुम्हें ज्ञान है। उनको कहा जायेगा - अन्तर्यामी। 
    13. जब भारत सुखधाम होगा तब बाकी सब शान्तिधाम में होंगे। बच्चों को खुशी होनी चाहिए-अब हमारे सुख के दिन आते हैं।
    14.  84 जन्म, 84 फीचर्स, 84 एक्टिविटी-यह बना-बनाया खेल है। 
    15. बाप कहते हैं बच्चे याद की यात्रा में रहो, दैवीगुण भी धारण करो तो बन्धन कटते जायेंगे। पाप का घड़ा खत्म हो जायेगा।

  • neha__choudhary 2d

    20-09-2020

    1. अपवित्रता आत्मघात है। पवित्रता जीयदान है। 
    2. यह संगमयुग होली जीवन का युग है। तो रंग में रंग गये अर्थात् अविनाशी रंग लग गया। जो मिटाने की आवश्यकता नहीं।
    3. बाप, समान बनाने की होली खेलने आते हैं। कितने भिन्न-भिन्न रंग बाप द्वारा हर आत्मा पर अविनाशी चढ़ जाते हैं। 
    4. वह होली मनाते हैं, जैसे गुण हैं वैसा रूप बन जाते हैं। उसी समय कोई उन्हों का फोटो निकाले तो कैसा लगेगा। वह होली मनाकर क्या बन जाते और आप होली मनाते हो तो फरिश्ता सो देवता बन जाते हो।
    5. होली की विशेषता है जलाना, फिर मनाना और फिर मंगल मिलन करना। 
    6. प्रजा के प्रति महादानी व अन्त में भक्त आत्माओं के प्रति महादानी बनो। आपस में एक दूसरे के प्रति ब्राह्मण महादानी नहीं। वह तो आपस में सहयोगी साथी हो। 
    7. जो ज्यादा मूँझते हैं- क्या हुआ, क्यों हुआ, कैसे हुआ वह मौज में नहीं रह सकते। आप त्रिकालदर्शी बन गये तो फिर क्या, क्यों, कैसे यह संकल्प उठ ही नहीं सकते क्योंकि तीनों कालों को जानते हो।
    8. होली का अर्थ भी है होली, पास्ट इज़ पास्ट। ऐसे बिन्दी लगाने आती है ना! यह भी होली का अर्थ है। 
    9. महादानी अर्थात् मिले हुए खज़ाने बिना स्वार्थ के सर्व आत्माओं प्रति देने वाले - नि:स्वार्थी। 
    10. स्व के स्वार्थ से परे आत्मा ही महादानी बन सकती है। दूसरों की खुशी में स्वयं खुशी का अनुभव करना भी महादानी बनना है।
    11. जिसको खुशी देंगे वह बार-बार आपको धन्यवाद देगा। दु:खी आत्माओं को खुशी का दान दे दिया तो आपके गुण गायेंगे। 
    12. मास्टर दाता बन परिस्थितियों को परिवर्तन करने का, कमजोर को शक्तिशाली बनाने का, वायुमण्डल वा वृत्ति को अपनी शक्तियों द्वारा परिवर्तन करने का, सदा स्वयं को कल्याण अर्थ जिम्मेवार आत्मा समझ हर बात में सहयोग वा शक्ति के महादान वा वरदान देने का संकल्प करो।

  • neha__choudhary 3d

    19-09-2020

    1. मीठे-मीठे रूहानी बच्चे जानते हैं कि हम सत्य तीर्थवासी हैं। सच्चा पण्डा और हम उनके बच्चे जो हैं वह भी सच्चे तीर्थ पर जा रहे हैं। 
    2. इसमें न ठण्डी, न गर्मी की बात है। न धक्के खाने की बात है। यह तो है याद की यात्रा। उन यात्राओं में सन्यासी भी जाते हैं। सच्ची-सच्ची यात्रा करने वाले जो होते हैं वह पवित्र रहते हैं।
    3. मन्सा संकल्प भल आयें, मुख्य है ही विकार की बात। 
    4. यहाँ हम बाप को याद करते हैं और बाप की रचना के आदि-मध्य-अन्त को जानते हैं। बाकी और बातों में कुछ रखा नहीं है।
    5. बहुत गिरते होंगे माया के तूफानों में, इसलिए ब्राह्मणों की माला नहीं बन सकती है। ह
    6. अपने को आत्मा समझ और बाप को याद करो तो इस योग अग्नि से विकर्म विनाश होंगे। यह ओना रखो। बाकी प्रश्न तो ढेर के ढेर मनुष्य पूछेंगे।
    7. सिवाए एक बात के और कोई बातों मे जाने से कोई फायदा ही नहीं। यहाँ तो यह जानने का है कि नास्तिक से आस्तिक, निधनके से धन के कैसे बनें, जो धनी से वर्सा पायें - यह पूछो। 
    8. बाबा बच्चों को युक्तियाँ बतलाते हैं कि कैसे युक्ति से जवाब देना चाहिए। एक बाप का ही परिचय देना है, जिससे मनुष्य आस्तिक बनें। 
    9. पहले जब तक बाप को नहीं जाना है तब तक कोई प्रश्न पूछना ही फालतू है। ऐसे बहुत आते हैं, समझते कुछ भी नहीं। 
    10. पूरा परिचय मिले तो समझें यह तो ठीक कहते हैं, हम आत्माओं का बाप परमपिता परमात्मा है, वह पढ़ाते हैं। 
    11. संगमयुग क्लीयर कर दिखाना है, यह है पुरुषोत्तम संगमयुग। उस तरफ देवतायें, इस तरफ असुर। 
    12. हम आत्माओं में बाबा ने ज्ञान भरा था, बाद में प्रालब्ध पाई, ज्ञान खत्म हो गया। अब फिर बाबा ज्ञान भर रहे हैं। 
    13. वो लोग जो डॉक्टर ऑफ फिलॉसॉफी आदि बनते हैं, वह किताब पढ़ते हैं। भगवान तो नॉलेजफुल है।
    14. हर एक अपनी दिल से पूछे-मैं बाप को कितना समय याद करता हूँ? बाबा कहते हैं - बच्चे, जितना हो सके तुम मुझे याद करो। अन्दर में बहुत हर्षित रहो। 

  • neha__choudhary 3d

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  • neha__choudhary 4d

    18-09-2020

    1. यह है सतयुग नई दुनिया, उनमें एक धर्म होता है तो पवित्रता-शान्ति-सुख है। उनको कहा ही जाता है हेविन। यह तो सब मानेंगे। नई दुनिया में सुख है, दु:ख हो नहीं सकता। 
    2.  कहते हैं सिर्फ अपने स्वधर्म में टिको तो विकर्म विनाश हो जायेंगे। स्वधर्म में टिकेंगे तो शान्ति हो जायेगी। तुम हो ही एवर शान्त बाप के बच्चे।
    3. भगवान को भी मोक्ष नहीं तो बच्चे फिर मोक्ष को कैसे पा सकते हैं। यह बातें सारा दिन विचार सागर मंथन करने की हैं। 
    4. लौकिक बाप को भी सपूत और कपूत बच्चे होते हैं ना। बेहद के बाप को भी होते हैं। सपूत जाकर राजा बनेंगे, कपूत जाकर झाड़ू लगायेंगे।
    5. वहाँ है ही शान्ति, 16 कला सम्पूर्ण हैं ना। चन्द्रमा भी जब सम्पूर्ण होता है तो कितना शोभता है, उनको फुल मून कहा जाता है। त्रेता में 3/4 कहेंगे, खण्डित हो गया ना। दो कला कम हो गई। 
    6. यह किसको भी पता नहीं है - हेविन कैसे रचते हैं। श्रीकृष्ण तो रच न सकें। उनको कहा जाता है देवता।
    7.  कहते हैं अन्दर में जाँच करो हमने कोई विकर्म तो नहीं किया? किसको दु:ख तो नहीं दिया? 
    8. तुम बच्चे हो विश्व में शान्ति स्थापन करने वाले। अगर घर में ही अशान्ति करने वाले होंगे तो शान्ति फिर कैसे करेंगे।
    9. कोई आदत पड़ जाती है तो पक्की हो जाती है। यह समझ नहीं रहती कि हम तो बेहद के बाप के बच्चे हैं, हमको तो विश्व में शान्ति स्थापन करनी है। 
    10. यह है ही गन्दी दुनिया वेश्यालय, इनसे तो ऩफरत आती है। विश्व में शान्ति होगी तो नई दुनिया में। संगम पर हो नहीं सकती। यहाँ शान्त बनने का पुरूषार्थ करते हैं।
    11. पूरा पुरूषार्थ नहीं करते तो फिर सज़ा खानी पड़ेगी। मेरे साथ तो धर्मराज है ना। जब हिसाब-किताब चुक्तु होने का समय आयेगा तो खूब मार खायेंगे। कर्म का भोग जरूर है। बीमार होते हैं, वह भी कर्मभोग है ना। 
    12. स्वर्ग में तो सभी नहीं आयेंगे। न त्रेता में सब आ सकते हैं। झाड़ आहिस्ते-आहिस्ते वृद्धि को पाता रहता है। मनुष्य सृष्टि रूपी झाड़ है।
    13. ब्राह्मणों का युग बहुत छोटा होता है। पीछे हैं देवतायें। यह वर्णों वाला चित्र भी काम का है। 

  • neha__choudhary 5d

    17-09-2020

    1. संगमयुग पर आते हैं तो जरूर वह भी पुरूषोत्तम युग हुआ।
    2. कहते भी हैं ना-फलाना स्वर्गवासी हुआ परन्तु स्वर्ग क्या चीज़ है, यह समझते नहीं। आपेही सिद्ध करते हैं स्वर्ग गया, इसका मतलब नर्क में था।
    3. पिछाड़ी में जब आग लगेगी तो यह सब खत्म हो जायेंगे। तुम्हारी प्रीत बुद्धि है, नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार। जितना प्रीत बुद्धि होगी उतना ऊंच पद पायेंगे। 
    4. सवेरे उठकर बहुत प्यार से बाप को याद करना है। भल प्रेम के आंसू भी आयें क्योंकि बहुत समय के बाद बाप आकर मिले हैं। 
    5. तुम बच्चे समझते हो भारत फूलों का बगीचा था, अब जंगल है। जंगल में जानवर, बिच्छू आदि रहते हैं। सतयुग में कोई ख़ौफनाक जानवर आदि होते नहीं। 
    6. बाप ही आकर आदि सनातन देवी-देवता धर्म की स्थापना करते हैं, तो सब अपने-अपने मनुष्य चोले में आते हैं। 
    7. बाप कहते हैं तुम्हारा कल्याण है ही एक बात में - बाप को याद करो, मनमनाभव। बस, बाप का बच्चा बना, बच्चे को वर्सा अन्डरस्टुड है। 
    8. समझते हैं स्टूडेन्ट का नया ब्लड है, यह बहुत मदद करेंगे इसलिए गवर्मेन्ट बहुत मेहनत करती है उन्हों पर। और फिर पत्थर आदि भी वही मारते हैं। हंगामा मचाने में पहले-पहले स्टूडेन्ट ही आगे रहते हैं। 
    9. कई बच्चे रूहानी बर्थ डे मनाते हैं। ईश्वरीय बर्थ डे ही मनाना चाहिए। वह जिस्मानी बर्थ डे कैन्सिल कर देना चाहिए।
    10. आजकल तो मैरेज डे भी मनाते हैं, शादी को जैसे कि अच्छा शुभ कार्य समझते हैं। जहन्नुम में जाने का भी दिन मनाते हैं। वन्डर है ना। 
    11. बाप की याद में मरा तो दूसरा जन्म भी ऐसा मिलेगा। नहीं तो अन्तकाल जो स्त्री सिमरे........ यह भी ग्रन्थ में है। यहाँ फिर कहते हैं अन्त समय गंगा का तट हो। 
    12. गायन भी है-किनकी दबी रही धूल में........ आग भी जोर से लगती है। तुम बच्चे जानते हो यह सब होना है इसलिए बैग-बैगेज तुम भविष्य के लिए तैयार कर रहे हो।

  • neha__choudhary 1w

    16-09-2020

    1. बाप एक है परन्तु यथार्थ रीति नहीं जानते। जब तक सम्मुख आकर समझें नहीं तब तक समझें भी कैसे? 
    2. तुमको शिवकुमार व शिवकुमारी नहीं कहेंगे। यह अक्षर रांग हो जाता। कुमार हो तो कुमारी भी हो। शिव की सब आत्मायें हैं। कुमार-कुमारी तब कहा जाता जब मनुष्य के बच्चे बनते हैं। 
    3. मूलवतन में सब आत्मायें ही रहती हैं, जिनको सालिग्राम कहा जाता है। यहाँ आते हैं तो फिर कुमार और कुमारियाँ बनते हैं जिस्मानी। 
    4. कृष्ण तो स्वर्ग में अपने माँ-बाप का बच्चा होगा। स्वर्गवासी बाप का बच्चा होगा, वो वैकुण्ठ का प्रिन्स है। 
    5. क्राइस्ट का जन्म कोई छोटे बच्चे के रूप में नहीं होता है। क्राइस्ट की आत्मा ने तो कोई में जाकर प्रवेश किया है। विष से पैदा हो न सके। 
    6. अभी तुम जानते हो बाप आया हुआ है, दु:ख हरने की युक्ति बता रहे हैं। आत्मा शरीर के साथ ही एवर-हेल्दी वेल्दी बनती है। 
    7. मूलवतन में तो हेल्दी-वेल्दी नहीं कहेंगे। वहाँ कोई सृष्टि थोड़ेही है। वहाँ तो है ही शान्ति। 
    8. अब तुम स्वर्ग में अगर जाना चाहते हो तो पुरूषार्थ करो, लड़ाई में तो सब धर्म वाले हैं, सिक्ख भी हैं, वो तो सिक्ख धर्म में ही जायेंगे। 
    9. अब शिवबाबा कहते हैं मामेकम् याद करने से तुम मेरे पास आ जायेंगे मुक्तिधाम। फिर जो ज्ञान सिखाया जाता है वह पढ़ेंगे तो स्वर्ग की राजाई मिल जायेगी। 
    10. यहाँ कितना मतभेद है। पानी पर, जमीन पर झगड़ा। पानी बन्द कर देते हैं, तो पत्थर मारने लग पड़ते हैं।
    11. पतित-पावन बाप कहते हैं मुझे याद करो तो विकर्म विनाश होंगे। यह पैगाम सबके कानों पर जाना चाहिए।
    12. बाबा जो कहे, बीमारी आदि है डॉक्टर आदि को भी बुलाते हैं, दवाई आदि से सम्भाल तो सबकी होती है।
    13. तुमको 21 जन्मों के लिए स्वर्ग की स्कालरशिप मिलती है। डिनायस्टी में जाना यही बड़ी स्कालरशिप है। 

  • neha__choudhary 1w

    15-09-2020

    IMPORTANT LINE FROM VARDAAN

    *जब विनाशकाल भूलता है तब अलबेलेपन की नींद आती है।*

    1. तुम कल्प पहले भी ब्राह्मण थे और देवता बने थे, जो बने थे वही फिर बनेंगे। 
    2. आत्मा मानती है हम पूज्य थे फिर हम ही पुजारी बने हैं। पूज्य से पुजारी फिर पूज्य बनते हैं। 
    3. अभी भारतवासी जो आदि सनातन देवी-देवता धर्म वाले थे, उन्हों को अपने धर्म का कुछ भी पता नहीं है। 
    4.  सनातन देवी-देवता धर्म वाले जो कनवर्ट हो गये हैं, उनको अपने धर्म में जरूर आना पड़ेगा।
    5. ब्राह्मण हैं पहले नम्बर में चोटी वाले। आदम बीबी, एडम ईव को मानते भी हैं। 
    6. बाबा ने समझाया है अपने को आत्मा समझ मामेकम् याद करो, बस, और कुछ बात ही नहीं करना चाहिए। जिनका अभ्यास नहीं, उनको तो बात करनी भी नहीं चाहिए। नहीं तो बी.के. का नाम बदनाम कर देते हैं।
    7. तुम जानते हो इस दुनिया में धनी बिगर सब निधनके हैं। पुकारते हैं तुम मात-पिता.... अच्छा उनका अर्थ क्या?
    8.  इस समय तो सब पतित हैं। पावन दुनिया तो एक स्वर्ग ही है, यहाँ कोई भी सतोप्रधान हो न सके। 
    9. बाप यह नॉलेज देते हैं आत्माओं को। बाकी तो सब मनुष्य, मनुष्यों को ही देते हैं। शास्त्र भी मनुष्यों ने लिखे हैं, मनुष्यों ने पढ़े हैं। 

  • neha__choudhary 1w

    14-09-2020

    1. बाप कहते हैं मैं जो हूँ, जैसा हूँ, ऐसा कोई नहीं जानते हैं
    2. आत्मायें जहाँ रहती हैं वह है ब्रह्म महतत्व, जहाँ सूर्य चांद नहीं होते हैं। न मूलवतन, न सूक्ष्मवतन में। 
    3. 15. मरना तो है, यह सब खत्म होना है। आप हमको फिर नई दुनिया में देना। बाप आते ही हैं सबको ले जाने। काल है ना। 
    4. यह है बेहद का घर, माण्डवा अथवा स्टेज़, इनको कर्मक्षेत्र भी कहा जाता है। कर्म तो जरूर करना होता है
    5. सब मनुष्यों के लिए यह कर्मक्षेत्र है। सबको कर्म करना ही है, पार्ट बजाना ही है। पार्ट हर एक आत्मा को पहले से मिला हुआ है।
    6. सत् तो एक बाप ही है, जिसके लिए कहा जाता है संग तारे.... कुसंग बोरे.....। कुसंग कलियुगी मनुष्यों का। सत् का संग तो एक ही है।
    7. तुम्हारा गुरूद्वारा है - मुक्ति और जीवनमुक्ति धाम, सतगुरू द्वार। सतगुरू का नाम क्या है? अकाल मूर्त। 
    8.अकाल-मूर्त हैं ना। जिसको काल भी खा नहीं सकता। आत्मा है ही बिन्दी, उनको काल कैसे खायेगा। वह आत्मा तो शरीर छोड़कर भाग जाती है।
    9. बाप बच्चों को बैठ समझाते हैं, अच्छी मत मिलती है तो वह लेनी चाहिए ना। तुम्हारा भी कोई दोष नहीं है। यह भी ड्रामा था। राम राज्य, रावण राज्य का खेल बना हुआ है। 
    10. खेल में कोई हार जाते हैं तो उनका दोष थोड़ेही है। जीत और हार होती है, इसमें लड़ाई की बात नहीं।
    11. यह भी कहेंगे ड्रामा, अबलाओं पर भी अत्याचार होने का ड्रामा में पार्ट है। ऐसा पार्ट क्यों बजाया, यह प्रश्न ही नहीं उठता। 
    12. कोई कहते हैं हमने गुनाह क्या किया जो ऐसा पार्ट रखा है। अब गुनाह की तो बात नहीं। यह तो पार्ट है। अबलायें कोई तो निमित्त बनेंगी, जिन पर सितम होंगे। ऐसे तो फिर सब कहेंगे हमको यह पार्ट क्यों?
    13. ड्रामा में आपदायें, खिटपिट आदि कितनी है। अबलाओं पर अत्याचार लिखा हुआ है। रक्त की नदियाँ भी बहेंगी। कहाँ भी सेफ्टी नहीं रहेगी। 
    14. अभी तो सुबह को क्लास आदि में जाते हो, सेन्टर्स पर। वह भी समय आयेगा जो तुम बाहर निकल भी नहीं सकेंगे। दिन-प्रतिदिन जमाना बिगड़ता जाता है और बिगड़ना है।